रस अलंकार और छन्द
(क) रस
(1) वीर रस
लक्षण:- किसी कठिन कार्य या युद्ध को करने के लिए जो हृदय में उत्साह जाग्रत होता हैं उसे वीर रस कहते है।के
उदाहरण:–
1. रक्त बहा, पर हाथ न काँपे,
घावों ने साहस सिखाया।
देश खड़ा था मेरी साँसों पर,
इसलिए झुकना भूल गया।
2. जीत की चाह नहीं थी मन में,
कर्तव्य ही मेरी जीत बना।
अगर मिटना भी पड़े रण में,
तो यह जीवन तभी सार्थक बना।
(2) करुण रस
लक्षण:- जब किसी कहानी को सुनकर अथवा किसी दृश्य को देख कर हमारे हृदय में जो करुण का भाव जाग्रत होता हैं उसे करुण रस कहते है।
उदाहरण:–
1. खिलौना हाथ में लिए बच्चा
पूछता रहा—“पापा कब आएँगे?”
माँ ने आँचल से आँसू पोंछे,
और झूठ को ही सच्चाई बना दिया।
2. अस्पताल के गलियारे में
एक चप्पल अकेली पड़ी थी,
शायद मालिक तो चला गया,
पर उसका इंतज़ार यहीं रह गया।
(3) हास्य रस
लक्षण:- किसी नाटक, कहानी को सुनकर जब हमारे हृदय में हास्य या आनन्द का भाव जाग्रत होता हैं उसे हास्य रस कहते है।
उदाहरण:-
1. बचपन में जो मैथ का सवाल नहीं बना,
वो आज भी बना हुआ है,
बस फर्क इतना है—
अब कैलकुलेटर भी डरने लगा है।
2.डाइट पर जाने की कसम खाकर
मैंने फ्रिज से विदाई ली,
रात दो बजे वही फ्रिज बोला—
“बस पानी पीने आए थे न?
(ख) अलंकार
(1) अनुप्रास अलंकार
लक्षण:- जब एक ही शब्द की बार बार आवृत्ति होती वहां अनुप्रास अलंकार होता हैं।
उदाहरण:-
1. थके कदम ठंडी रात में टकराए,
फिर भी हौसलों ने हार नहीं थामी।
2. हँसी की हल्की सी हलचल हुई,
हृदय का हुल्लास हवा में घुल गया।
(2) यमक अलंकार
लक्षण:- जहां एक शब्द एक से ज्यादा बार प्रयोग हो और उसका अर्थ हर बार अलग अलग हो उसे यमक अलंकार कहते हैं।
उदाहरण:-
1. माँ बोली—हार मत मानना,
मैंने देखा, मेज़ पर रखी हार भी टूट गई थी।
2. वह हर बात दिल पर लेता है,
इसलिए ज़िंदगी उससे बहुत कुछ लेती रहती है।
(3) श्लेष अलंकार
लक्षण:- जहां किसी शब्द को एक बार प्रयुक्त होने पर उसका अर्थ एक बार से अधिक हो उसे श्लेष अलंकार कहते हैं।
उदाहरण:-
1.आज कलम बहुत शक्तिशाली है,
वह काग़ज़ पर भी चलती है और सरकारों पर भी।
(कलम = लेखन का साधन / विचारों की ताक़त)
2. माँ की गोद सबसे सुरक्षित जगह है,
वहीं बचपन भी पलता है और संस्कार भी।
(गोद = शारीरिक आश्रय / भावनात्मक संरक्षण)
(ग) छन्द
(1) चौपाई
लक्षण:- सम मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते है और प्रत्येक चरण में 16 मात्रा होती हैं चौपाई छन्द कहलाती हैं।
उदाहरण:-
1. समय न रुकता पल भर भी,
राजा–रंक सभी पर भारी।
जो इसका सम्मान करे,
वह जीवन में ऊँचा भरे।
2. धन से बड़ा है मानव धर्म,
करुणा से ही सुंदर कर्म।
जो दुखियों के काम आए,
वही सच्चा मानव कहलाए।
(2) दोहा
लक्षण:- यह अर्द्धसम मात्रिक छन्द है इसमें चार चरण होता हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 13–13 मात्राएं तथा दूसरे और चौथे चरण में 11–11 मात्राएं होती हैं।
उदाहरण:-
1.माँ की चुप सी छाँह में, मिल जाता संसार,
शब्द नहीं जो कह सकें, उसका सच्चा प्यार।
2.मेहनत की हर साँस में, छुपा हुआ है भाग्य,
जो थक कर भी चल पड़े, वही लिखे सौभाग्य।
(3) सोरठा
लक्षण:- यह अर्द्ध सम मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होता हैं। इससे पहले और तीसरे चरण में 11–11 मात्राएं तथा दूसरे और चौथे चरण में 13–13 मात्राएं होती हैं।
उदाहरण:-
1. माँ पर सोरठा
ममता जिसकी छाँह में,
थकन सभी हर जाए।
माँ के आँचल तले,
हर दुख छोटा पड़ जाए।
2. परिश्रम पर सोरठा
मेहनत जिनकी साँस में,
हार न छू पाए।
गिरकर जो उठते रहे,
वही शिखर तक जाए।

Homophones with Sentences | 23 Important Homophones for Board Exams

Top 20 Viral Synonyms and Antonyms for Board Exam | English Vocabulary MCQ

हिन्दी साहित्य गद्य MCQ प्रश्न उत्तर | हिन्दी गद्य का इतिहास 41 Objective Questions PDF

Class 12 English Poems Central Idea in Hindi | My Mother at Sixty Six, Keeping Quiet, A Roadside Stand

UP Board Class 12 Hindi Padhyansh – महत्वपूर्ण पद्यांश व्याख्या व समाधान
