अध्याय 1 : विलयन
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Class 12th Chemistry Chapter 1 Solutions 2027
विलयन की मूल परिभाषाएँ
विलयन (Solution): दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है।
विलेय (Solute): वह पदार्थ जो विलायक में घुलता है, विलेय कहलाता है।
विलायक (Solvent): वह पदार्थ जिसमें विलेय घुलता है, विलायक कहलाता है।
द्विघटकीय विलयन (Binary Solution): ऐसा विलयन जिसमें दो घटक होते हैं, द्विघटकीय विलयन कहलाता है।
सांद्रता (Concentration): किसी निश्चित मात्रा के विलयन या विलायक में उपस्थित विलेय की मात्रा को सांद्रता कहते हैं।
मोलरता (Molarity): एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या को मोलरता कहते हैं।
M = विलेय के मोल / विलयन का आयतन (लीटर)
मोललता (Molality): एक किलोग्राम विलायक में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या को मोललता कहते हैं।
m = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान (kg)
मोल-अंश (Mole Fraction): किसी घटक के मोलों की संख्या और सभी घटकों के कुल मोलों की संख्या के अनुपात को मोल-अंश कहते हैं।
x₁ = n₁/(n₁+n₂)
x₂ = n₂/(n₁+n₂)
और
x₁ + x₂ = 1
विलयनों के प्रकार -
विलयन को विलेय और विलायक की भौतिक अवस्थाओं के आधार पर विभिन्न प्रकारों में बाँटा जा सकता है।
उदाहरण:
(i) गैस में गैस — वायु
(ii) गैस में द्रव — कार्बोनेटेड पेय
(iii) द्रव में द्रव — जल में एथेनॉल
(iv) ठोस में द्रव — जल में नमक
(v) ठोस में ठोस — पीतल
★ मुख्य बिंदु
* विलयन समांगी मिश्रण होता है।
* अधिक मात्रा में उपस्थित घटक सामान्यतः विलायक होता है।
* कम मात्रा में उपस्थित घटक सामान्यतः विलेय होता है।
विलयन की सांद्रता व्यक्त करने की विधियाँ
विलयन की सांद्रता को कई प्रकार से व्यक्त किया जाता है।
(i) द्रव्यमान प्रतिशत
द्रव्यमान प्रतिशत =
(विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 100
उदाहरण:
(i) 10 g नमक को 90 g जल में घोलने पर विलयन का कुल द्रव्यमान = 100 g होगा।
(ii) 20 g चीनी और 80 g जल से बने विलयन में चीनी का द्रव्यमान प्रतिशत 20% होगा।
(iii) 5 g विलेय और 95 g विलायक से बने विलयन में विलेय का द्रव्यमान प्रतिशत 5% होगा।
आसान तरीके से समझो
द्रव्यमान प्रतिशत यह बताता है कि 100 g पूरे विलयन में विलेय कितने ग्राम है।
★ मुख्य बिंदु
द्रव्यमान प्रतिशत में विलयन के कुल द्रव्यमान को आधार बनाया जाता है।
न्यूमेरिकल 1
20 g नमक को 180 g जल में घोला गया। नमक का द्रव्यमान प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
विलयन का द्रव्यमान = 20 + 180 = 200 g
द्रव्यमान प्रतिशत = (20/200) × 100
= 10%
उत्तर: 10%
न्यूमेरिकल 2
15 g चीनी और 85 g जल से बने विलयन में चीनी का द्रव्यमान प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
कुल द्रव्यमान = 15 + 85 = 100 g
द्रव्यमान प्रतिशत = 15%
उत्तर: 15%
न्यूमेरिकल 3
250 g विलयन में 25 g विलेय है। द्रव्यमान प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
= (25/250) × 100
= 10%
उत्तर: 10%
न्यूमेरिकल 4
500 g विलयन में विलेय का द्रव्यमान प्रतिशत 8% है। विलेय का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
विलेय का द्रव्यमान = (8/100) × 500
= 40 g
उत्तर: 40 g
4. आयतन प्रतिशत
आयतन प्रतिशत =
(विलेय का आयतन / विलयन का आयतन) × 100
उदाहरण:
(i) 20 mL एथेनॉल को 80 mL जल में मिलाने पर यदि कुल विलयन का आयतन 100 mL हो, तो आयतन प्रतिशत 20% होगा।
(ii) 10 mL किसी द्रव को 90 mL विलयन में मिलाने पर आयतन प्रतिशत 10% होगा।
(iii) 25 mL विलेय वाले 100 mL विलयन में आयतन प्रतिशत 25% होगा।
आसान तरीके से समझो
यहाँ द्रव्यमान नहीं, बल्कि आयतन की तुलना की जाती है।
★ मुख्य बिंदु
आयतन प्रतिशत विशेष रूप से द्रव-द्रव विलयनों के लिए उपयोगी है।
न्यूमेरिकल 1
20 mL एथेनॉल से 100 mL विलयन बनाया गया। आयतन प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
= (20/100) × 100
= 20%
उत्तर: 20%
न्यूमेरिकल 2
50 mL विलेय से 250 mL विलयन बनाया गया। आयतन प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
= (50/250) × 100
= 20%
उत्तर: 20%
न्यूमेरिकल 3
500 mL विलयन में 25 mL विलेय है। आयतन प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
= (25/500) × 100
= 5%
उत्तर: 5%
न्यूमेरिकल 4
200 mL विलयन में विलेय का आयतन प्रतिशत 15% है। विलेय का आयतन ज्ञात कीजिए।
= (15/100) × 200
= 30 mL
उत्तर: 30 mL
—
5. द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत
द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत =
(विलेय का द्रव्यमान / विलयन का आयतन) × 100
उदाहरण:
(i) 5 g NaCl को 100 mL विलयन में उपस्थित करने पर 5% (m/V) विलयन होगा।
(ii) 10 g विलेय को 200 mL विलयन में रखने पर 5% (m/V) होगा।
(iii) 2 g विलेय को 50 mL विलयन में रखने पर 4% (m/V) होगा।
आसान तरीके से समझो
इसमें ऊपर द्रव्यमान और नीचे विलयन का आयतन लिया जाता है।
—
6. पार्ट्स पर मिलियन (ppm)
बहुत कम सांद्रता वाले विलयनों को व्यक्त करने के लिए ppm का उपयोग किया जाता है।
ppm =
(विलेय के भाग / विलयन के कुल भाग) × 10⁶
जल में बहुत कम मात्रा में उपस्थित अशुद्धियों को ppm में व्यक्त किया जाता है।
उदाहरण:
(i) पीने के जल में कुछ अशुद्धियों की मात्रा ppm में बताई जा सकती है।
(ii) वायु में किसी गैस की बहुत कम मात्रा ppm में व्यक्त की जा सकती है।
(iii) जल प्रदूषण की कम सांद्रता को ppm में व्यक्त किया जा सकता है।
आसान तरीके से समझो
ppm का अर्थ है — दस लाख भागों में कितने भाग विलेय मौजूद हैं।
न्यूमेरिकल 1
यदि 1 g विलेय 10⁶ g विलयन में उपस्थित है, तो ppm ज्ञात कीजिए।
ppm = (1/10⁶) × 10⁶
= 1 ppm
उत्तर: 1 ppm
न्यूमेरिकल 2
2 mg विलेय 1 kg विलयन में उपस्थित है। ppm ज्ञात कीजिए।
1 kg = 10⁶ mg
ppm = 2 ppm
उत्तर: 2 ppm
न्यूमेरिकल 3
5 mg विलेय 2 kg विलयन में है।
ppm = 5/2
= 2.5 ppm
उत्तर: 2.5 ppm
न्यूमेरिकल 4
10 ppm का अर्थ बताइए।
इसका अर्थ है कि दस लाख भाग विलयन में 10 भाग विलेय उपस्थित हैं।
उत्तर: 10 भाग प्रति 10⁶ भाग।
7. मोल-अंश
किसी घटक का मोल-अंश:
xᵢ = घटक के मोल / सभी घटकों के कुल मोल
द्विघटकीय विलयन के लिए:
x₁ = n₁/(n₁+n₂)
x₂ = n₂/(n₁+n₂)
और
x₁ + x₂ = 1
उदाहरण:
(i) यदि विलयन में A के 2 mol और B के 3 mol हैं, तो xA = 2/5 और xB = 3/5 होगा।
(ii) यदि किसी घटक के 1 mol और दूसरे के 9 mol हैं, तो पहले घटक का मोल-अंश 0.1 होगा।
(iii) यदि x₁ = 0.4 है, तो x₂ = 0.6 होगा।
आसान तरीके से समझो
किसी पदार्थ के मोल को पूरे मिश्रण के कुल मोल से भाग देने पर उसका मोल-अंश मिलता है।
न्यूमेरिकल 1
2 mol A और 3 mol B के विलयन में A का मोल-अंश ज्ञात कीजिए।
कुल मोल = 5
xA = 2/5 = 0.4
उत्तर: 0.4
न्यूमेरिकल 2
1 mol A और 4 mol B के विलयन में B का मोल-अंश ज्ञात कीजिए।
xB = 4/5 = 0.8
उत्तर: 0.8
न्यूमेरिकल 3
यदि xA = 0.25 है, तो xB ज्ञात कीजिए।
xA + xB = 1
xB = 1 − 0.25
= 0.75
उत्तर: 0.75
न्यूमेरिकल 4
3 mol जल और 2 mol एथेनॉल के विलयन में जल का मोल-अंश ज्ञात कीजिए।
xजल = 3/(3+2)
= 3/5
= 0.6
उत्तर: 0.6
8. मोलरता
एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या को मोलरता कहते हैं।
M = विलेय के मोल / विलयन का आयतन (L)
यदि विलेय का द्रव्यमान w ग्राम और मोलर द्रव्यमान Mᵣ है:
विलेय के मोल = w/Mᵣ
अतः
M = w/(Mᵣ × V)
जहाँ V लीटर में है।
आसान तरीके से समझो
मोलरता में हमेशा विलयन का आयतन लिया जाता है।
★ मुख्य बिंदु
तापमान बदलने पर विलयन का आयतन बदल सकता है, इसलिए मोलरता तापमान पर निर्भर करती है।
न्यूमेरिकल 1
0.5 mol NaCl को 1 L विलयन में घोला गया। मोलरता ज्ञात कीजिए।
M = 0.5/1
= 0.5 M
उत्तर: 0.5 M
न्यूमेरिकल 2
5.85 g NaCl (मोलर द्रव्यमान = 58.5 g mol⁻¹) को 500 mL विलयन में घोला गया।
मोल = 5.85/58.5 = 0.1 mol
V = 0.5 L
M = 0.1/0.5
= 0.2 M
उत्तर: 0.2 M
न्यूमेरिकल 3
9.8 g H₂SO₄ को 500 mL विलयन में घोला गया। H₂SO₄ का मोलर द्रव्यमान 98 g mol⁻¹ है।
मोल = 9.8/98 = 0.1 mol
M = 0.1/0.5
= 0.2 M
उत्तर: 0.2 M
न्यूमेरिकल 4
2 M विलयन के 250 mL में विलेय के कितने मोल होंगे?
मोल = M × V
= 2 × 0.25
= 0.5 mol
उत्तर: 0.5 mol
9. मोललता
एक किलोग्राम विलायक में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या को मोललता कहते हैं।
m = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान (kg)
आसान तरीके से समझो
मोलरता में विलयन का आयतन आता है, जबकि मोललता में विलायक का द्रव्यमान आता है।
★ मुख्य बिंदु
मोललता तापमान पर निर्भर नहीं करती क्योंकि द्रव्यमान तापमान के साथ नहीं बदलता।
न्यूमेरिकल 1
1 mol विलेय को 2 kg विलायक में घोला गया। मोललता ज्ञात कीजिए।
m = 1/2
= 0.5 m
उत्तर: 0.5 m
न्यूमेरिकल 2
0.2 mol विलेय को 500 g जल में घोला गया।
500 g = 0.5 kg
m = 0.2/0.5
= 0.4 m
उत्तर: 0.4 m
न्यूमेरिकल 3
18 g ग्लूकोज (180 g mol⁻¹) को 500 g जल में घोला गया।
मोल = 18/180 = 0.1 mol
जल = 0.5 kg
m = 0.1/0.5
= 0.2 m
उत्तर: 0.2 m
न्यूमेरिकल 4
1 kg जल में 0.5 mol विलेय घोला गया। मोललता ज्ञात कीजिए।
m = 0.5/1
= 0.5 m
उत्तर: 0.5 m
10. वाष्प दाब
किसी द्रव की सतह से उसके वाष्प बनने की प्रवृत्ति के कारण वाष्प द्वारा लगाया गया दाब वाष्प दाब कहलाता है।
तापमान बढ़ने पर सामान्यतः वाष्प दाब बढ़ता है।
उदाहरण:
(i) जल का वाष्प दाब तापमान बढ़ाने पर बढ़ता है।
(ii) अधिक वाष्पशील द्रव का वाष्प दाब अधिक होता है।
(iii) किसी अवाष्पशील विलेय को द्रव में मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब घटता है।
आसान तरीके से समझो
जिस द्रव के अणु आसानी से सतह से बाहर निकलते हैं, उसका वाष्प दाब अधिक होता है।
★ मुख्य बिंदु
तापमान ↑ → वाष्प दाब ↑
11. राउल्ट का नियम
आदर्श विलयन में किसी वाष्पशील घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके मोल-अंश और शुद्ध घटक के वाष्प दाब के गुणनफल के बराबर होता है।
p₁ = x₁p₁°
और
p₂ = x₂p₂°
द्विघटकीय विलयन का कुल वाष्प दाब:
P = p₁ + p₂
अर्थात
P = x₁p₁° + x₂p₂°
अवाष्पशील विलेय के लिए
यदि विलेय अवाष्पशील है, तो केवल विलायक वाष्प बनाता है।
p₁ = x₁p₁°
आसान तरीके से समझो
विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक के अणुओं की सतह पर उपलब्धता कम हो जाती है। इसलिए विलायक का वाष्प दाब घट जाता है।
न्यूमेरिकल 1
किसी विलायक का शुद्ध वाष्प दाब 100 mm Hg है और उसका मोल-अंश 0.8 है। विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कीजिए।
p = x p°
= 0.8 × 100
= 80 mm Hg
उत्तर: 80 mm Hg
न्यूमेरिकल 2
शुद्ध विलायक का वाष्प दाब 200 mm Hg है और विलायक का मोल-अंश 0.75 है।
p = 0.75 × 200
= 150 mm Hg
उत्तर: 150 mm Hg
न्यूमेरिकल 3
शुद्ध विलायक का वाष्प दाब 400 mm Hg है और विलायक का मोल-अंश 0.9 है।
p = 0.9 × 400
= 360 mm Hg
उत्तर: 360 mm Hg
न्यूमेरिकल 4
यदि x₁ = 0.6 और p₁° = 500 mm Hg है, तो p₁ ज्ञात कीजिए।
p₁ = 0.6 × 500
= 300 mm Hg
उत्तर: 300 mm Hg
12. वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन
अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक के वाष्प दाब में कमी आती है।
वाष्प दाब में कमी:
Δp = p₁° − p₁
सापेक्ष अवनमन:
Δp/p₁°
राउल्ट के नियम के अनुसार:
(p₁° − p₁)/p₁° = x₂
अर्थात
Δp/p₁° = x₂
आसान तरीके से समझो
वाष्प दाब जितना कम हुआ है, उसकी तुलना शुद्ध विलायक के वाष्प दाब से करने पर सापेक्ष अवनमन मिलता है।
न्यूमेरिकल 1
शुद्ध विलायक का वाष्प दाब 100 mm Hg और विलयन का 90 mm Hg है।
Δp = 100 − 90 = 10 mm Hg
सापेक्ष अवनमन = 10/100 = 0.1
उत्तर: 0.1
न्यूमेरिकल 2
शुद्ध वाष्प दाब 200 mm Hg और विलयन का वाष्प दाब 180 mm Hg है।
Δp/p° = (200−180)/200
= 20/200
= 0.1
उत्तर: 0.1
न्यूमेरिकल 3
यदि विलेय का मोल-अंश 0.02 है, तो सापेक्ष वाष्प दाब अवनमन ज्ञात कीजिए।
Δp/p° = x₂
= 0.02
उत्तर: 0.02
न्यूमेरिकल 4
यदि शुद्ध विलायक का वाष्प दाब 500 mm Hg और सापेक्ष अवनमन 0.04 है, तो विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कीजिए।
Δp = 0.04 × 500 = 20 mm Hg
p = 500 − 20
= 480 mm Hg
उत्तर: 480 mm Hg
13. आदर्श विलयन
ऐसा विलयन जो सभी सांद्रताओं और तापमानों पर राउल्ट के नियम का पालन करता है, आदर्श विलयन कहलाता है।
आदर्श विलयन के लिए:
ΔHmix = 0
ΔVmix = 0
अर्थात मिश्रण के समय न तो ऊष्मा का अवशोषण/उत्सर्जन होता है और न ही आयतन में परिवर्तन होता है।
उदाहरण:
बेंजीन + टॉलूइन को लगभग आदर्श विलयन का उदाहरण माना जाता है।
आसान तरीके से समझो
आदर्श विलयन में A-A, B-B और A-B अणुओं के बीच आकर्षण लगभग समान होता है।
★ मुख्य बिंदु
* राउल्ट के नियम का पालन।
* ΔHmix = 0
* ΔVmix = 0
14. अनादर्श विलयन
जो विलयन राउल्ट के नियम से विचलन दिखाते हैं, अनादर्श विलयन कहलाते हैं।
इनमें दो प्रकार के विचलन होते हैं:
1. धनात्मक विचलन
2. ऋणात्मक विचलन
धनात्मक विचलन
जब वास्तविक वाष्प दाब राउल्ट के नियम से प्राप्त वाष्प दाब से अधिक होता है, तो धनात्मक विचलन कहलाता है।
A-B आकर्षण < A-A या B-B आकर्षण
उदाहरण:
एथेनॉल + एसीटोन
ऋणात्मक विचलन
जब वास्तविक वाष्प दाब राउल्ट के नियम से प्राप्त वाष्प दाब से कम होता है, तो ऋणात्मक विचलन कहलाता है।
A-B आकर्षण > A-A या B-B आकर्षण
उदाहरण:
क्लोरोफॉर्म + एसीटोन
आसान तरीके से समझो
यदि अलग-अलग अणुओं के बीच आकर्षण कमजोर हो गया, तो अणु आसानी से बाहर निकलेंगे और वाष्प दाब बढ़ेगा — धनात्मक विचलन।
यदि आकर्षण बहुत मजबूत हो गया, तो अणु आसानी से बाहर नहीं निकलेंगे और वाष्प दाब घटेगा — ऋणात्मक विचलन।
15. एज़ियोट्रोप
ऐसे स्थिर क्वथनांकी मिश्रण जिनमें द्रव और वाष्प अवस्था की संरचना समान होती है, एज़ियोट्रोप कहलाते हैं।
एज़ियोट्रोप दो प्रकार के होते हैं:
न्यूनतम क्वथनांक एज़ियोट्रोप: धनात्मक विचलन से बनता है।
उदाहरण: एथेनॉल + जल
अधिकतम क्वथनांक एज़ियोट्रोप: ऋणात्मक विचलन से बनता है।
उदाहरण: HNO₃ + जल
★ मुख्य बिंदु
एज़ियोट्रोप को साधारण भिन्नात्मक आसवन द्वारा पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता।
16. हेनरी का नियम
किसी द्रव में गैस की विलेयता से संबंधित हेनरी का नियम:
p = KH x
जहाँ:
p = गैस का आंशिक दाब
x = विलयन में गैस का मोल-अंश
KH = हेनरी नियतांक
मुख्य संबंध
तापमान स्थिर होने पर:
x ∝ p
अर्थात गैस का दाब बढ़ाने पर द्रव में गैस की विलेयता बढ़ती है।
K_H का मान अधिक होने पर गैस की विलेयता कम होती है।
उदाहरण
(i) सोडा बोतल में CO₂ को अधिक दाब पर घोला जाता है।
(ii) बोतल खोलने पर दाब घटता है और CO₂ बाहर निकलने लगती है।
(iii) गहरे समुद्र में उच्च दाब के कारण गैसों की विलेयता अधिक हो सकती है।
आसान तरीके से समझो
दाब बढ़ाओ → गैस अधिक घुलेगी।
K_H बढ़ेगा → गैस की विलेयता घटेगी।
न्यूमेरिकल 1
यदि K_H = 100 atm और x = 0.02 है, तो गैस का आंशिक दाब ज्ञात कीजिए।
p = K_H × x
= 100 × 0.02
= 2 atm
उत्तर: 2 atm
न्यूमेरिकल 2
K_H = 200 atm और x = 0.01 है।
p = 200 × 0.01
= 2 atm
उत्तर: 2 atm
न्यूमेरिकल 3
p = 5 atm और K_H = 250 atm है। x ज्ञात कीजिए।
x = p/K_H
= 5/250
= 0.02
उत्तर: 0.02
न्यूमेरिकल 4
यदि KH = 500 atm और x = 0.004 है।
p = 500 × 0.004
= 2 atm
उत्तर: 2 atm
17. सहसंयोजी गुणधर्म (Colligative Properties)
वे गुण जो विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, विलेय के कणों की प्रकृति पर नहीं, सहसंयोजी गुणधर्म कहलाते हैं।
मुख्य चार सहसंयोजी गुणधर्म हैं:
(i) वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन
(ii) क्वथनांक में उन्नयन
(iii) हिमांक में अवनमन
(iv) परासरण दाब
18. क्वथनांक में उन्नयन
अवाष्पशील विलेय को विलायक में मिलाने पर विलयन का क्वथनांक शुद्ध विलायक की तुलना में बढ़ जाता है।
यदि:
ΔTᵦ = Tᵦ − Tᵦ°
तो
ΔTᵦ = Kᵦ m
जहाँ:
Kᵦ = मोलल उन्नयन स्थिरांक
m = मोललता
यदि विलेय का द्रव्यमान w₂, विलायक का द्रव्यमान w₁ और विलेय का मोलर द्रव्यमान M₂ है:
m = (w₂/M₂)/(w₁/1000)
अतः
ΔTᵦ = Kᵦ × (1000w₂)/(M₂w₁)
इससे:
M₂ = (Kᵦ × 1000w₂)/(ΔTᵦ × w₁)
तीन उदाहरण
(i) नमक मिलाने पर जल का क्वथनांक बढ़ता है।
(ii) किसी अवाष्पशील पदार्थ को जल में मिलाने पर जल को उबालने के लिए अधिक तापमान चाहिए।
(iii) मोललता बढ़ाने पर क्वथनांक में उन्नयन बढ़ता है।
आसान तरीके से समझो
विलेय मिलाने से विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है। इसलिए वाष्प दाब को बाहरी दाब के बराबर करने के लिए अधिक तापमान चाहिए। इसलिए क्वथनांक बढ़ जाता है।
न्यूमेरिकल 1
यदि Kᵦ = 0.52 K kg mol⁻¹ और m = 2 mol kg⁻¹ है, तो ΔTᵦ ज्ञात कीजिए।
ΔTᵦ = Kᵦm
= 0.52 × 2
= 1.04 K
उत्तर: 1.04 K
न्यूमेरिकल 2
Kᵦ = 0.52 K kg mol⁻¹ और m = 0.5 है।
ΔTᵦ = 0.52 × 0.5
= 0.26 K
उत्तर: 0.26 K
न्यूमेरिकल 3
यदि ΔTᵦ = 1.04 K और Kᵦ = 0.52 K kg mol⁻¹ है, तो m ज्ञात कीजिए।
m = ΔTᵦ/Kᵦ
= 1.04/0.52
= 2 mol kg⁻¹
उत्तर: 2 mol kg⁻¹
न्यूमेरिकल 4
यदि Kᵦ = 0.52 K kg mol⁻¹, w₂ = 18 g, w₁ = 1000 g और M₂ = 90 g mol⁻¹ है, तो ΔTᵦ ज्ञात कीजिए।
ΔTᵦ = Kᵦ × 1000w₂/(M₂w₁)
= 0.52 × (1000×18)/(90×1000)
= 0.52 × 0.2
= 0.104 K
उत्तर: 0.104 K
19. हिमांक में अवनमन
अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन का हिमांक शुद्ध विलायक की तुलना में कम हो जाता है।
यदि:
ΔT𝒇 = T𝒇° − T𝒇
तो
ΔT𝒇 = K𝒇m
जहाँ K𝒇 = मोलल अवनमन स्थिरांक।
विलेय का मोलर द्रव्यमान:
M₂ = (K𝒇 × 1000w₂)/(ΔT𝒇 × w₁)
तीन उदाहरण
(i) बर्फ पर नमक डालने से हिमांक कम होता है।
(ii) शीतलन मिश्रण में हिमांक के अवनमन का उपयोग किया जाता है।
(iii) विलेय की मात्रा बढ़ाने पर हिमांक में अवनमन बढ़ता है।
आसान तरीके से समझो
विलेय मिलाने के बाद विलायक को ठोस अवस्था में बदलने के लिए पहले की तुलना में कम तापमान चाहिए।
न्यूमेरिकल 1
K𝒇 = 1.86 K kg mol⁻¹ और m = 2 है।
ΔT𝒇 = 1.86 × 2
= 3.72 K
उत्तर: 3.72 K
न्यूमेरिकल 2
K𝒇 = 1.86 और m = 0.5 है।
ΔT𝒇 = 1.86 × 0.5
= 0.93 K
उत्तर: 0.93 K
न्यूमेरिकल 3
यदि ΔT𝒇 = 1.86 K और K𝒇 = 1.86 K kg mol⁻¹ है।
m = 1.86/1.86
= 1 mol kg⁻¹
उत्तर: 1 mol kg⁻¹
न्यूमेरिकल 4
यदि K𝒇 = 1.86 K kg mol⁻¹, w₂ = 18 g, w₁ = 1000 g और M₂ = 90 g mol⁻¹ है:
ΔT𝒇 = 1.86 × (1000×18)/(90×1000)
= 1.86 × 0.2
= 0.372 K
उत्तर: 0.372 K
20. परासरण
अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलायक का शुद्ध विलायक से विलयन की ओर स्वतः प्रवाह परासरण कहलाता है।
अर्धपारगम्य झिल्ली
ऐसी झिल्ली जो विलायक के अणुओं को गुजरने देती है लेकिन विलेय कणों को नहीं, अर्धपारगम्य झिल्ली कहलाती है।
उदाहरण
(i) कोशिका झिल्ली
(ii) कृत्रिम अर्धपारगम्य झिल्ली
(iii) कुछ झिल्लियाँ जल को पार जाने देती हैं लेकिन बड़े विलेय कणों को रोकती हैं।
आसान तरीके से समझो
परासरण में मुख्य रूप से विलायक चलता है, विलेय नहीं।
21. परासरण दाब
वह न्यूनतम बाहरी दाब जो परासरण को रोकने के लिए विलयन पर लगाया जाता है, परासरण दाब कहलाता है।
इसे π से दर्शाते हैं।
तनु विलयन के लिए:
π = CRT
जहाँ:
C = मोलर सांद्रता
R = गैस नियतांक
T = परम तापमान
यदि विलेय का द्रव्यमान w और मोलर द्रव्यमान M है:
C = w/(MV)
अतः
π = wRT/(MV)
इससे:
M = wRT/(πV)
तीन उदाहरण
(i) रक्त और कोशिका द्रव में परासरण महत्वपूर्ण है।
(ii) पौधों में जल के अवशोषण में परासरण की भूमिका होती है।
(iii) परासरण दाब से बड़े जैविक अणुओं का मोलर द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है।
आसान तरीके से समझो
जिस विलयन की सांद्रता अधिक होती है, सामान्यतः उसका परासरण दाब भी अधिक होता है।
न्यूमेरिकल 1
0.1 M विलयन का तापमान 300 K है। R = 0.0821 L atm K⁻¹ mol⁻¹ लें।
π = CRT
= 0.1 × 0.0821 × 300
= 2.463 atm
उत्तर: 2.463 atm
न्यूमेरिकल 2
C = 0.2 M और T = 300 K।
π = 0.2 × 0.0821 × 300
= 4.926 atm
उत्तर: 4.926 atm
न्यूमेरिकल 3
π = 2.46 atm, C = 0.1 M और T = 300 K है।
R = π/CT
= 2.46/(0.1×300)
≈ 0.082 L atm K⁻¹ mol⁻¹
उत्तर: लगभग 0.082 L atm K⁻¹ mol⁻¹
न्यूमेरिकल 4
किसी विलयन के लिए w = 1.8 g, V = 1 L, T = 300 K, π = 0.4926 atm और R = 0.0821 L atm K⁻¹ mol⁻¹ है।
M = wRT/(πV)
= (1.8×0.0821×300)/(0.4926×1)
≈ 90 g mol⁻¹
उत्तर: 90 g mol⁻¹
22. प्रतिलोम परासरण
यदि किसी विलयन पर उसके परासरण दाब से अधिक बाहरी दाब लगाया जाए, तो विलायक का प्रवाह सामान्य परासरण की विपरीत दिशा में होने लगता है। इसे प्रतिलोम परासरण (Reverse Osmosis) कहते हैं।
इसका प्रमुख उपयोग समुद्री जल से लवण हटाकर शुद्ध जल प्राप्त करने में होता है।
आसान तरीके से समझो
सामान्य परासरण को उल्टा कर देने पर प्रतिलोम परासरण होता है।
★ मुख्य बिंदु
RO प्रणाली में अर्धपारगम्य झिल्ली का उपयोग किया जाता है।
23. असामान्य मोलर द्रव्यमान
जब किसी विलेय के मोलर द्रव्यमान का प्रयोगात्मक मान उसके सामान्य मान से अलग प्राप्त होता है, तो इसे असामान्य मोलर द्रव्यमान कहते हैं।
इसका मुख्य कारण:
* विलेय का आयनीकरण
* विलेय का संघटन
हो सकता है।
इस समस्या को ठीक करने के लिए वैन्ट हॉफ गुणांक (van’t Hoff factor) का उपयोग किया जाता है।
24. वैन्ट हॉफ गुणांक
वैन्ट हॉफ गुणांक:
i = प्रेक्षित सहसंयोजी गुणधर्म / परिकलित सहसंयोजी गुणधर्म
मोलर द्रव्यमान के लिए:
i = सामान्य मोलर द्रव्यमान / प्रेक्षित मोलर द्रव्यमान
अतः:
Mप्रेक्षित = Mसामान्य/i
संशोधित समीकरण:
ΔTᵦ = iKᵦm
ΔT𝒇 = iK𝒇m
π = iCRT
आसान तरीके से समझो
यदि विलेय घुलने के बाद अधिक कण बना देता है, तो सहसंयोजी गुणधर्म बढ़ जाते हैं और i का मान 1 से अधिक हो सकता है।
यदि कण आपस में जुड़ जाते हैं, तो कणों की संख्या कम हो जाती है और i का मान 1 से कम हो सकता है।
25. आयनीकरण के कारण वैन्ट हॉफ गुणांक
मान लीजिए एक अणु आयनीकरण करके n कण बनाता है।
यदि आयनीकरण की मात्रा α है:
i = 1 + (n−1)α
उदाहरण:
NaCl → Na⁺ + Cl⁻
यहाँ n = 2
इसलिए:
i = 1 + α
CaCl₂ → Ca²⁺ + 2Cl⁻
यहाँ n = 3
इसलिए:
i = 1 + 2α
न्यूमेरिकल 1
NaCl का आयनीकरण 80% है। i ज्ञात कीजिए।
α = 0.8
i = 1 + α
= 1.8
उत्तर: 1.8
न्यूमेरिकल 2
CaCl₂ का आयनीकरण 50% है।
i = 1 + 2α
= 1 + 2(0.5)
= 2
उत्तर: 2
न्यूमेरिकल 3
यदि किसी पदार्थ के लिए n = 3 और α = 0.2 है।
i = 1 + (3−1)(0.2)
= 1 + 0.4
= 1.4
उत्तर: 1.4
न्यूमेरिकल 4
यदि i = 1.6 और पदार्थ दो आयन देता है, तो α ज्ञात कीजिए।
i = 1 + α
1.6 = 1 + α
α = 0.6
अर्थात आयनीकरण = 60%
उत्तर: 60%
26. संघटन के कारण वैन्ट हॉफ गुणांक
जब विलेय के अणु आपस में जुड़कर बड़े कण बनाते हैं, तो संघटन होता है।
यदि n अणु मिलकर एक अणु बनाते हैं:
nA ⇌ Aₙ
तो:
i = 1 − α(n−1)/n
उदाहरण:
2CH₃COOH ⇌ (CH₃COOH)₂
यहाँ दो अणु मिलकर एक द्विमेर बनाते हैं।
इस स्थिति में i का मान 1 से कम होता है।
आसान तरीके से समझो
पहले यदि 2 कण थे और वे मिलकर 1 कण बन गए, तो कुल कणों की संख्या कम हो गई। इसलिए i < 1 होता है।
न्यूमेरिकल 1
दो अणुओं के संघटन की मात्रा 20% है।
α = 0.2
i = 1 − α(2−1)/2
= 1 − 0.1
= 0.9
उत्तर: 0.9
न्यूमेरिकल 2
यदि n = 2 और α = 0.5:
i = 1 − 0.5/2
= 0.75
उत्तर: 0.75
न्यूमेरिकल 3
यदि n = 3 और α = 0.3:
i = 1 − 0.3(3−1)/3
= 1 − 0.2
= 0.8
उत्तर: 0.8
न्यूमेरिकल 4
यदि n = 2 और i = 0.8 है:
0.8 = 1 − α/2
α/2 = 0.2
α = 0.4
अर्थात संघटन = 40%
उत्तर: 40%
27. मोलरता और मोललता के बीच संबंध
मोलरता और मोललता दोनों ही विलयन की सांद्रता व्यक्त करने की महत्वपूर्ण विधियाँ हैं। मोलरता में विलयन का आयतन लिया जाता है, जबकि मोललता में विलायक का द्रव्यमान लिया जाता है।
यदि विलयन का घनत्व d g mL⁻¹, विलेय का मोलर द्रव्यमान M₂ g mol⁻¹, मोलरता M तथा मोललता m हो, तो मोलरता और मोललता के बीच संबंध निम्न प्रकार है:
m = 1000M / (1000d − MM₂)
इसी प्रकार:
M = 1000dm / (1000 + mM₂)
यह संबंध विशेष रूप से उन प्रश्नों में उपयोगी होता है, जिनमें विलयन का घनत्व दिया गया हो और मोलरता तथा मोललता के बीच परिवर्तन करना हो।
आसान तरीके से समझो
मोलरता विलयन के आयतन पर आधारित होती है, जबकि मोललता विलायक के द्रव्यमान पर आधारित होती है। इसलिए दोनों को सीधे बराबर नहीं किया जा सकता। विलयन के घनत्व की सहायता से इनके बीच संबंध स्थापित किया जाता है।
★ मोलरता → विलयन का आयतन
★ मोललता → विलायक का द्रव्यमान
★ घनत्व का उपयोग करके मोलरता और मोललता के बीच परिवर्तन किया जा सकता है।
28. महत्वपूर्ण स्थिरांक
सहसंयोजी गुणधर्मों से संबंधित प्रश्नों में कुछ नियतांकों के मान बार-बार प्रयोग किए जाते हैं।
जल के लिए क्वथनांक उन्नयन नियतांक:
Kᵦ = 0.52 K kg mol⁻¹
जल के लिए हिमांक अवनमन नियतांक:
K𝒇 = 1.86 K kg mol⁻¹
गैस नियतांक:
R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹
वायुमंडलीय दाब की इकाई के साथ:
R = 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹
आसान तरीके से समझो
Numerical हल करते समय प्रश्न में दी गई इकाइयों के अनुसार R का मान चुनना चाहिए।
यदि दाब atm और आयतन L में दिया गया है, तो:
R = 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹
और यदि ऊर्जा की SI इकाई प्रयोग हो रही है, तो:
R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹
29. चारों सहसंयोजी गुणधर्म एक साथ
विलयन के चार प्रमुख सहसंयोजी गुणधर्म हैं:
1. वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन
अवाष्पशील विलेय को विलायक में मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है।
वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन:
Δp / p° = x₂
जहाँ x₂ विलेय का मोल-अंश है।
2. क्वथनांक में उन्नयन
विलयन का क्वथनांक शुद्ध विलायक की तुलना में बढ़ जाता है।
सूत्र:
ΔTᵦ = Kᵦm
3. हिमांक में अवनमन
विलयन का हिमांक शुद्ध विलायक की तुलना में कम हो जाता है।
सूत्र:
ΔT𝒇 = K𝒇m
4. परासरण दाब
तनु विलयन के लिए परासरण दाब:
π = CRT
जहाँ:
π = परासरण दाब
C = विलयन की मोलर सांद्रता
R = गैस नियतांक
T = परम तापमान
वैन्ट हॉफ गुणांक को शामिल करने पर
यदि विलेय आयनीकरण या संघटन करता है, तो सामान्य सूत्रों में वैन्ट हॉफ गुणांक i को शामिल किया जाता है।
क्वथनांक में उन्नयन:
ΔTᵦ = iKᵦm
हिमांक में अवनमन:
ΔT𝒇 = iK𝒇m
परासरण दाब:
π = iCRT
आसान तरीके से समझो
इन चारों गुणधर्मों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनका संबंध विलयन में उपस्थित विलेय कणों की संख्या से होता है।
30. महत्वपूर्ण तुलना
मोलरता
एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या को मोलरता कहते हैं।
सूत्र:
M = विलेय के मोल / विलयन का आयतन (L)
इकाई:
mol L⁻¹
मोलरता तापमान पर निर्भर करती है, क्योंकि तापमान बदलने पर विलयन का आयतन बदल सकता है।
—
मोललता
एक किलोग्राम विलायक में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या को मोललता कहते हैं।
सूत्र:
m = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान (kg)
इकाई:
mol kg⁻¹
मोललता तापमान पर निर्भर नहीं करती, क्योंकि द्रव्यमान तापमान के परिवर्तन से प्रभावित नहीं होता।
—
मोल-अंश
किसी घटक के मोलों की संख्या और विलयन में उपस्थित सभी घटकों के कुल मोलों की संख्या के अनुपात को मोल-अंश कहते हैं।
सूत्र:
xᵢ = nᵢ / Σn
मोल-अंश की कोई इकाई नहीं होती।
—
ppm
ppm का अर्थ parts per million है। इसका प्रयोग बहुत कम मात्रा में उपस्थित विलेय की सांद्रता व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
सूत्र:
ppm = (विलेय के भाग / विलयन के भाग) × 10⁶
एक नज़र में पूरा सूत्र-संग्रह
1. द्रव्यमान प्रतिशत
द्रव्यमान प्रतिशत = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 100
2. आयतन प्रतिशत
आयतन प्रतिशत = (विलेय का आयतन / विलयन का आयतन) × 100
3. द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत
द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का आयतन) × 100
4. ppm
ppm = (विलेय के भाग / विलयन के भाग) × 10⁶
5. मोल-अंश
x₁ = n₁ / (n₁ + n₂)
x₂ = n₂ / (n₁ + n₂)
x₁ + x₂ = 1
6. मोलरता
M = विलेय के मोल / विलयन का आयतन (L)
7. मोललता
m = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान (kg)
8. राउल्ट का नियम
p₁ = x₁p₁°
9. द्विघटकीय विलयन का कुल वाष्प दाब
P = x₁p₁° + x₂p₂°
10. वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन
Δp / p° = x₂
11. हेनरी का नियम
p = K_Hx
12. क्वथनांक में उन्नयन
ΔTᵦ = Kᵦm
13. हिमांक में अवनमन
ΔT𝒇 = K𝒇m
14. परासरण दाब
π = CRT
15. परासरण दाब से मोलर द्रव्यमान
M₂ = wRT / (πV)
16. वैन्ट हॉफ गुणांक
i = Mसामान्य / Mप्रेक्षित
17. आयनीकरण
i = 1 + (n − 1)α
18. संघटन
i = 1 − α(n − 1) / n
19. असामान्य सहसंयोजी गुणधर्म
ΔTᵦ = iKᵦm
ΔT𝒇 = iK𝒇m
π = iCRT
20. मोलरता और मोललता के बीच संबंध
m = 1000M / (1000d − MM₂)
M = 1000dm / (1000 + mM₂)
31. परीक्षा से पहले याद रखने वाले मुख्य बिंदु
★ मोलरता में विलयन का आयतन लिया जाता है।
★ मोललता में विलायक का द्रव्यमान लिया जाता है।
★ मोलरता तापमान पर निर्भर करती है।
★ मोललता तापमान पर निर्भर नहीं करती।
★ मोल-अंश की कोई इकाई नहीं होती।
★ ppm का उपयोग बहुत कम सांद्रता व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
★ राउल्ट का नियम आदर्श विलयन के लिए महत्वपूर्ण है।
★ अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है।
★ वाष्प दाब कम होने पर क्वथनांक बढ़ जाता है।
★ वाष्प दाब कम होने पर हिमांक घट जाता है।
★ सहसंयोजी गुणधर्म मुख्य रूप से विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं।
★ हेनरी के नियम का सूत्र p = K_Hx है।
★ K_H का मान अधिक होने पर सामान्यतः गैस की विलेयता कम होती है।
★ धनात्मक विचलन में वास्तविक वाष्प दाब अपेक्षित वाष्प दाब से अधिक होता है।
★ ऋणात्मक विचलन में वास्तविक वाष्प दाब अपेक्षित वाष्प दाब से कम होता है।
★ धनात्मक विचलन से न्यूनतम क्वथनांक एज़ियोट्रोप बन सकता है।
★ ऋणात्मक विचलन से अधिकतम क्वथनांक एज़ियोट्रोप बन सकता है।
★ आयनीकरण में कणों की संख्या बढ़ती है, इसलिए सामान्यतः i > 1 होता है।
★ संघटन में कणों की संख्या घटती है, इसलिए सामान्यतः i < 1 होता है।
★ परासरण दाब का सूत्र π = CRT है।
★ वैन्ट हॉफ गुणांक को आयनीकरण और संघटन की स्थिति में ध्यान में रखा जाता है।
★ प्रतिलोम परासरण का उपयोग जल के शुद्धीकरण में किया जाता है।
32. अध्याय का संक्षिप्त क्रम
विलयन
→ विलयन के घटक
→ सांद्रता
→ द्रव्यमान प्रतिशत
→ आयतन प्रतिशत
→ द्रव्यमान/आयतन प्रतिशत
→ ppm
→ मोल-अंश
→ मोलरता
→ मोललता
→ वाष्प दाब
→ राउल्ट का नियम
→ वाष्प दाब में सापेक्ष अवनमन
→ आदर्श विलयन
→ अनादर्श विलयन
→ धनात्मक विचलन
→ ऋणात्मक विचलन
→ एज़ियोट्रोप
→ हेनरी का नियम
→ सहसंयोजी गुणधर्म
→ क्वथनांक में उन्नयन
→ हिमांक में अवनमन
→ परासरण
→ परासरण दाब
→ वैन्ट हॉफ गुणांक
→ आयनीकरण
→ संघटन
→ मोलरता एवं मोललता का संबंध