अध्याय 2 : वैद्युत रसायन

Chemistry Chapter 02 – Electrochemistry (विद्युत रसायन) Class 12 के Notes, MCQ, PYQ और Important Questions यहाँ उपलब्ध हैं।

शुरुआत में याद रखने योग्य महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

इस अध्याय को पढ़ते समय नीचे दी गई परिभाषाएँ बार-बार काम आएँगी। इन्हें पहले समझ लेने से आगे के सूत्र और संख्यात्मक प्रश्न काफी आसान हो जाते हैं।

1. वैद्युत रसायन

रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसमें रासायनिक ऊर्जा और विद्युत ऊर्जा के पारस्परिक परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है, वैद्युत रसायन कहलाती है।

2. विद्युत अपघट्य

वह पदार्थ जो जलीय विलयन या पिघली हुई अवस्था में आयनों में टूटकर विद्युत धारा का संचालन करता है, विद्युत अपघट्य कहलाता है।

उदाहरण: HCl, NaCl, KOH आदि।

3. प्रबल विद्युत अपघट्य

जो पदार्थ विलयन में लगभग पूर्ण रूप से आयनों में विभाजित हो जाता है, प्रबल विद्युत अपघट्य कहलाता है।

उदाहरण: HCl, HNO₃, NaOH, NaCl।

4. दुर्बल विद्युत अपघट्य

जो पदार्थ विलयन में केवल कुछ मात्रा में आयनों में विभाजित होता है, दुर्बल विद्युत अपघट्य कहलाता है।

उदाहरण: CH₃COOH, NH₄OH।

5. विद्युत अपघट्य विलयन की चालकता

विद्युत अपघट्य विलयन की विद्युत धारा प्रवाहित करने की क्षमता को उसकी चालकता कहते हैं।

6. प्रतिरोध

किसी चालक द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह का किया गया विरोध प्रतिरोध कहलाता है।

R = V/I

इकाई: ओम (Ω)

7. चालकता

प्रतिरोध के व्युत्क्रम को चालकता कहते हैं।

G = 1/R

इकाई: सीमेंस (S)

8. विशिष्ट चालकता

1 मीटर लंबाई और 1 वर्ग मीटर अनुप्रस्थ काट वाले चालक के चालकत्व को विशिष्ट चालकता कहते हैं।

इसे κ (कप्पा) से दर्शाते हैं।

इकाई: S m⁻¹

9. मोलर चालकता

वह चालकता जो किसी विद्युत अपघट्य के एक मोल को विलयन में उपस्थित आयनों द्वारा उत्पन्न होती है, मोलर चालकता कहलाती है।

इसे Λₘ से दर्शाते हैं।

इकाई: S m² mol⁻¹

10. इलेक्ट्रोड

वह चालक जिसके माध्यम से विद्युत धारा विद्युत अपघट्य विलयन में प्रवेश करती है या उससे बाहर निकलती है, इलेक्ट्रोड कहलाता है।

11. एनोड

वह इलेक्ट्रोड जहाँ ऑक्सीकरण होता है, एनोड कहलाता है।

12. कैथोड

वह इलेक्ट्रोड जहाँ अपचयन होता है, कैथोड कहलाता है।

★ याद रखें:

एनोड → ऑक्सीकरण
कैथोड → अपचयन

13. गैल्वेनिक सेल

वह विद्युत-रासायनिक सेल जिसमें स्वतः होने वाली रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है, गैल्वेनिक सेल कहलाता है।

14. इलेक्ट्रोलाइटिक सेल

वह सेल जिसमें बाहरी विद्युत ऊर्जा देकर अस्वतः होने वाली रासायनिक अभिक्रिया कराई जाती है, इलेक्ट्रोलाइटिक सेल कहलाता है।

15. सेल का EMF

जब सेल से कोई धारा नहीं बह रही हो, तब उसके दोनों इलेक्ट्रोडों के बीच अधिकतम विभवान्तर को सेल का विद्युत वाहक बल (EMF) कहते हैं।

Eसेल = Eकैथोड − Eएनोड

16. मानक इलेक्ट्रोड विभव

जब आयनों की सांद्रता 1 mol L⁻¹, गैस का दाब 1 bar और तापमान 298 K हो, तब किसी इलेक्ट्रोड का विभव मानक इलेक्ट्रोड विभव कहलाता है।

इसे E° से दर्शाते हैं।

17. नर्न्स्ट समीकरण

वह समीकरण जो किसी विद्युत-रासायनिक सेल के विभव और आयनों की सांद्रता के बीच संबंध बताता है, नर्न्स्ट समीकरण कहलाता है।

18. फैराडे स्थिरांक

एक मोल इलेक्ट्रॉनों के आवेश को फैराडे स्थिरांक कहते हैं।

F ≈ 96500 C mol⁻¹

19. संक्षारण

धातु का अपने वातावरण के साथ रासायनिक या वैद्युत-रासायनिक अभिक्रिया द्वारा धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है।

उदाहरण: लोहे पर जंग लगना।

1. वैद्युत रासायनिक सेल

वैद्युत रासायनिक सेल वह व्यवस्था है जिसमें रासायनिक अभिक्रिया और विद्युत ऊर्जा के बीच परिवर्तन होता है।

इसके दो प्रमुख प्रकार हैं—

(i) गैल्वेनिक सेल
(ii) इलेक्ट्रोलाइटिक सेल

गैल्वेनिक सेल

गैल्वेनिक सेल में स्वतः होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया से विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है।

उदाहरण के लिए डेनियल सेल में—

Zn → Zn²⁺ + 2e⁻

यहाँ Zn का ऑक्सीकरण होता है।

कैथोड पर—

Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu

यहाँ Cu²⁺ का अपचयन होता है।

समग्र अभिक्रिया—

Zn + Cu²⁺ → Zn²⁺ + Cu

सेल संकेत

Zn | Zn²⁺ || Cu²⁺ | Cu

एकल रेखा एक अवस्था की सीमा तथा दोहरी रेखा नमक सेतु को दर्शाती है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) Zn–Cu सेल एक गैल्वेनिक सेल का उदाहरण है।

(ii) Zn इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण होता है।

(iii) Cu इलेक्ट्रोड पर अपचयन होता है।

आसान तरीके से समझो

जिंक इलेक्ट्रॉन छोड़ना पसंद करता है। ये इलेक्ट्रॉन बाहरी तार से होकर कॉपर इलेक्ट्रोड तक पहुँचते हैं। इसी इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से विद्युत धारा प्राप्त होती है।

★ मुख्य बिंदु

★ एनोड पर हमेशा ऑक्सीकरण होता है।
★ कैथोड पर हमेशा अपचयन होता है।
★ गैल्वेनिक सेल में रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
★ इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ में एनोड से कैथोड की ओर जाते हैं।

2. इलेक्ट्रोड विभव

जब किसी धातु की पट्टी को उसके आयनों के विलयन में डुबोया जाता है, तो धातु और विलयन के बीच विभवांतर उत्पन्न हो सकता है। इसे इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं।

उदाहरण:

Zn | Zn²⁺

जिंक कुछ इलेक्ट्रॉन छोड़कर Zn²⁺ बना सकता है।

Zn → Zn²⁺ + 2e⁻

इसके कारण धातु और विलयन के बीच विद्युत विभव विकसित होता है।

ऑक्सीकरण विभव और अपचयन विभव

ऑक्सीकरण की प्रवृत्ति को ऑक्सीकरण विभव तथा अपचयन की प्रवृत्ति को अपचयन विभव से व्यक्त किया जाता है।

मानक सारणी में सामान्यतः मानक अपचयन विभव दिए जाते हैं।

तीन छोटे उदाहरण

(i) Zn²⁺ + 2e⁻ → Zn

(ii) Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu

(iii) Ag⁺ + e⁻ → Ag

आसान तरीके से समझो

जिस आयन में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होगी, उसका अपचयन विभव अधिक धनात्मक होगा।

★ मुख्य बिंदु

★ मानक इलेक्ट्रोड विभव की तुलना मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के सापेक्ष की जाती है।
★ E° का अधिक धनात्मक मान अपचयन की अधिक प्रवृत्ति बताता है।

3. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड

मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड को SHE कहते हैं। इसे मानक इलेक्ट्रोड विभव मापने के लिए संदर्भ इलेक्ट्रोड के रूप में प्रयोग किया जाता है।

इसके लिए—

H⁺ की सांद्रता = 1 mol L⁻¹
H₂ का दाब = 1 bar
तापमान = 298 K

मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का मानक विभव—

E° = 0.00 V

तीन छोटे उदाहरण

(i) Cu²⁺/Cu का E° मान SHE के सापेक्ष मापा जाता है।

(ii) Zn²⁺/Zn का E° भी SHE के सापेक्ष निर्धारित किया जाता है।

(iii) SHE का मानक विभव 0 V माना गया है।

आसान तरीके से समझो

जैसे लंबाई मापने के लिए किसी निश्चित पैमाने की जरूरत होती है, वैसे ही इलेक्ट्रोड विभवों की तुलना करने के लिए SHE को आधार माना जाता है।

★ मुख्य बिंदु

★ SHE का E° = 0.00 V
★ H₂ गैस का दाब 1 bar और H⁺ की सांद्रता 1 mol L⁻¹ मानते हैं।

4. सेल का विद्युत वाहक बल

सेल का EMF दो इलेक्ट्रोडों के विभवों का अंतर होता है।

E°सेल = E°कैथोड − E°एनोड

यहाँ दोनों विभव अपचयन विभव के रूप में लिए जाते हैं।

व्युत्पत्ति

गैल्वेनिक सेल में—

कैथोड पर अपचयन होता है।

एनोड पर ऑक्सीकरण होता है।

इसलिए—

E°सेल = E°अपचयन − E°ऑक्सीकरण

यदि दोनों मान मानक अपचयन विभव के रूप में दिए हों, तो—

E°सेल = E°कैथोड − E°एनोड

उदाहरण

Zn | Zn²⁺ || Cu²⁺ | Cu

मान लें—

E°Cu²⁺/Cu = +0.34 V

E°Zn²⁺/Zn = −0.76 V

तब—

E°सेल = 0.34 − (−0.76)

E°सेल = 1.10 V

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: E°कैथोड = +0.50 V और E°एनोड = −0.20 V। E°सेल ज्ञात कीजिए।

E°सेल = 0.50 − (−0.20)

= 0.70 V

उत्तर: 0.70 V

प्रश्न 2: E°कैथोड = +0.80 V और E°एनोड = +0.30 V।

E°सेल = 0.80 − 0.30

= 0.50 V

उत्तर: 0.50 V

प्रश्न 3: Zn–Cu सेल में E°Cu = +0.34 V और E°Zn = −0.76 V।

E°सेल = 0.34 + 0.76

= 1.10 V

उत्तर: 1.10 V

प्रश्न 4: यदि E°सेल = 1.50 V तथा E°कैथोड = 0.80 V है, तो E°एनोड ज्ञात करें।

1.50 = 0.80 − E°एनोड

E°एनोड = −0.70 V

उत्तर: −0.70 V

★ मुख्य बिंदु

★ E°सेल धनात्मक होने पर अभिक्रिया के स्वतः होने की संभावना होती है।
★ सूत्र में कैथोड का अपचयन विभव पहले लिया जाता है।

5. गैल्वेनिक सेल में नमक सेतु

नमक सेतु एक ऐसी व्यवस्था है जो दोनों अर्ध-सेलों के विलयनों के बीच आयनों का आवागमन कराती है और परिपथ को विद्युत रूप से पूर्ण बनाए रखती है।

सामान्यतः KCl या KNO₃ जैसे विद्युत अपघट्य का प्रयोग किया जाता है।

नमक सेतु के मुख्य कार्य

(i) दोनों अर्ध-सेलों के विलयनों में विद्युत उदासीनता बनाए रखना।

(ii) परिपथ को पूर्ण करना।

(iii) दोनों विलयनों को सीधे मिश्रित होने से रोकना।

(iv) द्रव संधि विभव को कम करना।

तीन छोटे उदाहरण

(i) KNO₃ नमक सेतु में प्रयोग किया जा सकता है।

(ii) नमक सेतु के कारण आयनों का आवागमन होता है।

(iii) इसके बिना गैल्वेनिक सेल शीघ्र ही काम करना बंद कर देगा।

आसान तरीके से समझो

जब सेल चलता है तो दोनों विलयनों में धनात्मक और ऋणात्मक आवेश का संतुलन बिगड़ने लगता है। नमक सेतु के आयन इस असंतुलन को ठीक करते रहते हैं।

★ मुख्य बिंदु

★ नमक सेतु इलेक्ट्रॉनों को अपने अंदर से प्रवाहित नहीं करता।
★ यह आयनों के आवागमन द्वारा विद्युत उदासीनता बनाए रखता है।

6. विद्युत-रासायनिक सेल में धारा और इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह

गैल्वेनिक सेल में इलेक्ट्रॉन बाहरी तार के माध्यम से एनोड से कैथोड की ओर जाते हैं।

उदाहरण—

Zn | Zn²⁺ || Cu²⁺ | Cu

एनोड:

Zn → Zn²⁺ + 2e⁻

कैथोड:

Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu

याद रखने का आसान तरीका

एनोड = इलेक्ट्रॉन निकलते हैं
कैथोड = इलेक्ट्रॉन पहुँचते हैं

चार छोटे संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: Zn अभिक्रिया में कितने इलेक्ट्रॉन निकलते हैं?

Zn → Zn²⁺ + 2e⁻

उत्तर: 2 इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 2: Al → Al³⁺ + ?e⁻

उत्तर: 3 इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 3: Fe → Fe²⁺ + ?e⁻

उत्तर: 2 इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 4: यदि किसी अभिक्रिया में 3 mol Zn ऑक्सीकरण करता है, तो कितने mol इलेक्ट्रॉन निकलेंगे?

1 mol Zn → 2 mol e⁻

3 mol Zn → 6 mol e⁻

उत्तर: 6 mol इलेक्ट्रॉन

★ मुख्य बिंदु

★ इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ में एनोड से कैथोड जाते हैं।
★ परंपरागत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों की दिशा के विपरीत होती है।

7. विद्युत अपघट्य विलयनों में चालकता

धातु में विद्युत धारा इलेक्ट्रॉनों के कारण प्रवाहित होती है, जबकि विद्युत अपघट्य विलयन में धारा का वहन धनायनों और ऋणायनों द्वारा होता है।

धनायन → कैथोड की ओर

ऋणायन → एनोड की ओर

प्रबल और दुर्बल विद्युत अपघट्य

प्रबल विद्युत अपघट्य में अधिक आयन उपलब्ध होते हैं, इसलिए सामान्यतः उसकी चालकता अधिक होती है।

दुर्बल विद्युत अपघट्य में आयनीकरण कम होता है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) HCl एक प्रबल विद्युत अपघट्य है।

(ii) CH₃COOH एक दुर्बल विद्युत अपघट्य है।

(iii) NaCl का जलीय विलयन आयनों के कारण विद्युत का संचालन करता है।

★ मुख्य बिंदु

★ विलयन में धारा का प्रवाह आयनों के कारण होता है।
★ धनायन कैथोड की ओर और ऋणायन एनोड की ओर जाते हैं।

8. प्रतिरोध और चालकता

ओम के नियम के अनुसार—

V = IR

इसलिए—

R = V/I

और चालकता—

G = 1/R

अतः—

G = I/V

जहाँ—

R = प्रतिरोध
G = चालकता

इकाइयाँ

R की इकाई = Ω

G की इकाई = S

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: V = 10 V और I = 2 A है। R ज्ञात करें।

R = V/I

= 10/2

= 5 Ω

प्रश्न 2: R = 20 Ω है। चालकता ज्ञात करें।

G = 1/R

= 1/20

= 0.05 S

प्रश्न 3: V = 12 V और R = 4 Ω है। धारा ज्ञात करें।

I = V/R

= 12/4

= 3 A

प्रश्न 4: G = 0.25 S है। R ज्ञात करें।

R = 1/G

= 1/0.25

= 4 Ω

आसान तरीके से समझो

प्रतिरोध जितना अधिक होगा, धारा का प्रवाह उतना कठिन होगा। चालकता प्रतिरोध के उलट व्यवहार करती है।

★ मुख्य बिंदु

★ G = 1/R
★ प्रतिरोध बढ़ने पर चालकता घटती है।

9. प्रतिरोध और सेल की ज्यामिति

किसी चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाई और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।

R ∝ l

और

R ∝ 1/A

दोनों को मिलाने पर—

R ∝ l/A

अतः—

R = ρl/A

जहाँ ρ विशिष्ट प्रतिरोध है।

इससे—

ρ = RA/l

और चालकता—

κ = 1/ρ

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: R = 4 Ω, l = 2 m और A = 0.5 m² है। ρ ज्ञात करें।

ρ = RA/l

= (4 × 0.5)/2

= 1 Ω m

उत्तर: 1 Ω m

प्रश्न 2: ρ = 2 Ω m, l = 4 m, A = 2 m²।

R = ρl/A

= 2 × 4/2

= 4 Ω

प्रश्न 3: R = 10 Ω और l/A = 2 m⁻¹ है।

ρ = R/(l/A)

= 10/2

= 5 Ω m

प्रश्न 4: ρ = 0.5 Ω m है। चालकता ज्ञात करें।

κ = 1/ρ

= 1/0.5

= 2 S m⁻¹

★ मुख्य बिंदु

★ R = ρl/A
★ κ = 1/ρ
★ ρ अधिक होने पर चालकता कम होती है।

10. विशिष्ट चालकता

विशिष्ट चालकता को κ से दर्शाते हैं।

यदि किसी चालक की लंबाई l और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A हो, तो—

R = ρl/A

चूँकि—

κ = 1/ρ

इसलिए—

R = l/(κA)

अतः—

κ = l/(RA)

यदि सेल का सेल स्थिरांक l/A दिया हो, तो—

κ = Cell constant × G

और क्योंकि—

G = 1/R

इसलिए—

κ = l/(RA)

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: सेल स्थिरांक = 100 m⁻¹ और चालकता = 0.01 S है।

κ = 100 × 0.01

= 1 S m⁻¹

प्रश्न 2: l = 0.02 m, A = 0.01 m², R = 5 Ω।

κ = l/(RA)

= 0.02/(5 × 0.01)

= 0.4 S m⁻¹

प्रश्न 3: κ = 2 S m⁻¹ और cell constant = 100 m⁻¹। G ज्ञात करें।

G = κ/(cell constant)

= 2/100

= 0.02 S

प्रश्न 4: G = 0.05 S और cell constant = 200 m⁻¹।

κ = 200 × 0.05

= 10 S m⁻¹

★ मुख्य बिंदु

★ κ = l/(RA)
★ κ की SI इकाई S m⁻¹ है।
★ κ का मान विलयन की प्रकृति और सांद्रता पर निर्भर करता है।

11. सेल स्थिरांक

सेल की ज्यामिति से संबंधित राशि l/A को सेल स्थिरांक कहते हैं।

Cell constant = l/A

इसकी इकाई—

m⁻¹

और—

κ = G × Cell constant

तीन छोटे उदाहरण

(i) l बढ़ाने पर cell constant बढ़ता है।

(ii) A बढ़ाने पर cell constant घटता है।

(iii) cell constant का निर्धारण ज्ञात चालकता वाले विलयन से किया जा सकता है।

★ मुख्य बिंदु

★ Cell constant = l/A
★ SI इकाई = m⁻¹

12. मोलर चालकता

किसी विद्युत अपघट्य के एक मोल को ऐसे आयनों के रूप में मानते हुए जो पर्याप्त दूरी तक फैले हों, उस मात्रा से संबंधित चालकता को मोलर चालकता कहते हैं।

इसे Λₘ से दर्शाते हैं।

यदि—

κ = S m⁻¹

और C = mol m⁻³

तो—

Λₘ = κ/C

SI इकाई:

S m² mol⁻¹

यदि सांद्रता mol L⁻¹ में दी हो, तो—

Λₘ = κ × 1000/C

जब κ की इकाई S cm⁻¹ और C mol L⁻¹ हो, तब—

Λₘ = κ × 1000/C

इकाई:

S cm² mol⁻¹

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: κ = 0.1 S m⁻¹ और C = 2 mol m⁻³।

Λₘ = 0.1/2

= 0.05 S m² mol⁻¹

प्रश्न 2: κ = 0.02 S cm⁻¹ और C = 0.1 mol L⁻¹।

Λₘ = 0.02 × 1000/0.1

= 200 S cm² mol⁻¹

प्रश्न 3: Λₘ = 150 S cm² mol⁻¹ और C = 0.2 mol L⁻¹। κ ज्ञात करें।

κ = ΛₘC/1000

= 150 × 0.2/1000

= 0.03 S cm⁻¹

प्रश्न 4: κ = 0.01 S cm⁻¹ और C = 0.05 mol L⁻¹।

Λₘ = 0.01 × 1000/0.05

= 200 S cm² mol⁻¹

आसान तरीके से समझो

विशिष्ट चालकता पूरे विलयन के एक निश्चित आकार से जुड़ी है, जबकि मोलर चालकता यह बताती है कि एक मोल विद्युत अपघट्य से संबंधित चालकता कितनी है।

★ मुख्य बिंदु

★ Λₘ = κ/C
★ mol L⁻¹ में C होने पर Λₘ = κ × 1000/C
★ सांद्रता घटाने पर सामान्यतः मोलर चालकता बढ़ती है।

13. सांद्रता के साथ चालकता में परिवर्तन

विलयन को पतला करने पर विशिष्ट चालकता κ सामान्यतः घटती है, क्योंकि एक निश्चित आयतन में उपस्थित आयनों की संख्या कम हो जाती है।

लेकिन मोलर चालकता Λₘ बढ़ती है, क्योंकि एक मोल विद्युत अपघट्य के आयनों को अधिक बड़ा आयतन उपलब्ध होता है और आयनों की गति/आयनीकरण में वृद्धि होती है।

प्रबल विद्युत अपघट्य

प्रबल विद्युत अपघट्य पहले से लगभग पूर्ण आयनीकृत होते हैं। इसलिए तनुकरण पर Λₘ में वृद्धि अपेक्षाकृत कम होती है।

दुर्बल विद्युत अपघट्य

दुर्बल विद्युत अपघट्य में तनुकरण से आयनीकरण काफी बढ़ सकता है। इसलिए Λₘ में वृद्धि अधिक स्पष्ट होती है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) HCl जैसे प्रबल विद्युत अपघट्य में तनुकरण पर Λₘ बढ़ती है।

(ii) CH₃COOH जैसे दुर्बल विद्युत अपघट्य में तनुकरण पर आयनीकरण बढ़ता है।

(iii) κ और Λₘ का सांद्रता के साथ व्यवहार समान नहीं होता।

★ मुख्य बिंदु

★ तनुकरण पर κ घटती है।
★ तनुकरण पर Λₘ बढ़ती है।
★ दुर्बल विद्युत अपघट्य में Λₘ का परिवर्तन अधिक होता है।

14. कोलरॉश का स्वतंत्र आयन प्रवास का नियम

कोलरॉश के अनुसार, अनंत तनुकरण पर किसी विद्युत अपघट्य की मोलर चालकता उसके धनायन और ऋणायन की स्वतंत्र आयनिक चालकताओं के योग के बराबर होती है।

सूत्र—

Λₘ° = λ°₊ + λ°₋

किसी विद्युत अपघट्य के लिए यदि आयनों की संख्या अलग हो, तो उनके गुणांक भी शामिल किए जाते हैं।

उदाहरण—

NaCl के लिए:

Λₘ°(NaCl) = λ°Na⁺ + λ°Cl⁻

CaCl₂ के लिए:

Λₘ°(CaCl₂) = λ°Ca²⁺ + 2λ°Cl⁻

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: λ°Na⁺ = 50 और λ°Cl⁻ = 76 S cm² mol⁻¹।

Λₘ° = 50 + 76

= 126 S cm² mol⁻¹

प्रश्न 2: λ°K⁺ = 74 और λ°Cl⁻ = 76।

Λₘ° = 150 S cm² mol⁻¹

प्रश्न 3: λ°Ca²⁺ = 120 और λ°Cl⁻ = 76।

Λₘ° = 120 + 2(76)

= 272 S cm² mol⁻¹

प्रश्न 4: λ°Mg²⁺ = 106 और λ°SO₄²⁻ = 160।

MgSO₄ के लिए—

Λₘ° = 106 + 160

= 266 S cm² mol⁻¹

आसान तरीके से समझो

बहुत अधिक तनु विलयन में धनायन और ऋणायन लगभग स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। इसलिए पूरे विद्युत अपघट्य की चालकता को दोनों आयनों की चालकता जोड़कर प्राप्त किया जा सकता है।

★ मुख्य बिंदु

★ Λₘ° = λ°₊ + λ°₋
★ आयनों की संख्या एक से अधिक होने पर उनके गुणांक लगते हैं।
★ नियम का प्रयोग अनंत तनुकरण पर किया जाता है।

15. कोलरॉश के नियम के उपयोग

कोलरॉश के नियम से—

(i) दुर्बल विद्युत अपघट्यों की Λₘ° ज्ञात की जा सकती है।

(ii) दुर्बल विद्युत अपघट्य के आयनीकरण की मात्रा ज्ञात की जा सकती है।

(iii) अल्प विलेय लवणों की मोलर चालकता ज्ञात की जा सकती है।

(iv) जल की आयनिक चालकता आदि से संबंधित गणनाएँ की जा सकती हैं।

दुर्बल विद्युत अपघट्य की Λₘ° निकालना

उदाहरण के लिए CH₃COOH की Λₘ° सीधे मापना कठिन हो सकता है। इसे प्रबल विद्युत अपघट्यों की Λₘ° से निकाला जा सकता है।

एक सामान्य संबंध—

Λₘ°(CH₃COOH)

= Λₘ°(HCl) + Λₘ°(CH₃COONa) − Λₘ°(NaCl)

चार छोटे संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: HCl = 426, CH₃COONa = 91 और NaCl = 126।

CH₃COOH = 426 + 91 − 126

= 391 S cm² mol⁻¹

प्रश्न 2: यदि तीन मान 400, 90 और 120 हैं—

Λₘ° = 400 + 90 − 120

= 370

प्रश्न 3: HCl = 425, NaCl = 125, CH₃COONa = 90।

Λₘ° = 425 + 90 − 125

= 390

प्रश्न 4: Λₘ°HCl = 430, Λₘ°CH₃COONa = 92, Λₘ°NaCl = 128।

Λₘ°CH₃COOH = 430 + 92 − 128

= 394

16. आयनीकरण की मात्रा और मोलर चालकता

दुर्बल विद्युत अपघट्य के लिए—

α = Λₘ/Λₘ°

जहाँ—

α = आयनीकरण की मात्रा
Λₘ = दी गई सांद्रता पर मोलर चालकता
Λₘ° = अनंत तनुकरण पर मोलर चालकता

प्रतिशत आयनीकरण—

% आयनीकरण = (Λₘ/Λₘ°) × 100

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: Λₘ = 40 और Λₘ° = 400।

α = 40/400 = 0.10

% = 10%

प्रश्न 2: Λₘ = 100 और Λₘ° = 200।

α = 0.5

% = 50%

प्रश्न 3: Λₘ = 150 और Λₘ° = 300।

% आयनीकरण = 50%

प्रश्न 4: Λₘ = 80 और Λₘ° = 400।

% आयनीकरण = 20%

★ मुख्य बिंदु

★ α = Λₘ/Λₘ°
★ प्रतिशत आयनीकरण = α × 100

17. इलेक्ट्रोलिसिस और फैराडे के नियम

विद्युत अपघटन में बाहरी विद्युत ऊर्जा की सहायता से रासायनिक परिवर्तन कराया जाता है।

उदाहरण:

Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu

कैथोड पर Cu²⁺ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके तांबा बनाता है।

फैराडे का प्रथम नियम

जब किसी विद्युत अपघट्य में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित या मुक्त पदार्थ का द्रव्यमान प्रवाहित विद्युत की मात्रा के समानुपाती होता है।

m ∝ Q

और—

Q = It

इसलिए—

m ∝ It

अतः—

m = ZIt

जहाँ Z विद्युत-रासायनिक तुल्यांक है।

फैराडे का द्वितीय नियम

समान मात्रा की विद्युत विभिन्न विद्युत अपघट्यों में प्रवाहित करने पर निक्षेपित पदार्थों के द्रव्यमान उनके रासायनिक तुल्यांकों के समानुपाती होते हैं।

m₁/m₂ = E₁/E₂

फैराडे के नियम का उपयोगी सूत्र

यदि पदार्थ का मोलर द्रव्यमान M और इलेक्ट्रॉनों की संख्या n हो, तो—

m = MIt/(nF)

जहाँ—

F = 96500 C mol⁻¹

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: 2 A धारा 10 s तक प्रवाहित की गई। Q ज्ञात करें।

Q = It

= 2 × 10

= 20 C

प्रश्न 2: 5 A धारा 20 s तक प्रवाहित की गई।

Q = 5 × 20

= 100 C

प्रश्न 3: 96500 C विद्युत कितने mol इलेक्ट्रॉनों के बराबर है?

1 F = 1 mol e⁻

उत्तर: 1 mol इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 4: Cu²⁺ के लिए M = 63.5 g mol⁻¹, I = 2 A, t = 965 s और n = 2।

m = MIt/(nF)

= 63.5 × 2 × 965/(2 × 96500)

= 0.635 g

उत्तर: 0.635 g

★ मुख्य बिंदु

★ Q = It
★ m = ZIt
★ m = MIt/(nF)
★ 1 F ≈ 96500 C

18. विद्युत अपघटन में इलेक्ट्रॉनों की मात्रा

एक फैराडे विद्युत = 96500 C लगभग = 1 mol इलेक्ट्रॉनों का आवेश।

यदि Q कूलॉम विद्युत प्रवाहित हो, तो—

mol e⁻ = Q/F

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: 9650 C में mol e⁻?

= 9650/96500

= 0.1 mol

प्रश्न 2: 193000 C में?

= 2 mol e⁻

प्रश्न 3: 48250 C में?

= 0.5 mol e⁻

प्रश्न 4: 289500 C में?

= 3 mol e⁻

★ मुख्य बिंदु

★ 1 mol e⁻ = 1 F = लगभग 96500 C

19. शुष्क सेल

शुष्क सेल एक प्राथमिक सेल है जिसमें रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है।

सामान्य जिंक-कार्बन सेल में—

एनोड = Zn पात्र

कैथोड के रूप में कार्बन छड़ होती है।

विद्युत अपघट्य के रूप में NH₄Cl और ZnCl₂ का पेस्ट प्रयोग किया जाता है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) टॉर्च की सामान्य बैटरी में शुष्क सेल का प्रयोग किया जाता है।

(ii) Zn पात्र एनोड का कार्य करता है।

(iii) यह सामान्यतः पुनः आवेशित करने योग्य सेल नहीं है।

★ मुख्य बिंदु

★ शुष्क सेल प्राथमिक सेल है।
★ इसमें Zn पात्र महत्वपूर्ण भाग है।

20. लेड संचायक सेल

लेड संचायक एक द्वितीयक सेल है, अर्थात इसे बाहरी विद्युत स्रोत से पुनः आवेशित किया जा सकता है।

इसमें—

ऋणात्मक इलेक्ट्रोड = Pb

धनात्मक इलेक्ट्रोड = PbO₂

विद्युत अपघट्य = H₂SO₄

डिस्चार्ज के समय दोनों इलेक्ट्रोडों पर PbSO₄ बनता है।

समग्र अभिक्रिया को सरल रूप में—

Pb + PbO₂ + 2H₂SO₄ → 2PbSO₄ + 2H₂O

तीन छोटे उदाहरण

(i) वाहनों की बैटरी में लेड संचायक का उपयोग होता है।

(ii) इसमें H₂SO₄ विद्युत अपघट्य है।

(iii) इसे पुनः चार्ज किया जा सकता है।

★ मुख्य बिंदु

★ Pb = ऋणात्मक इलेक्ट्रोड
★ PbO₂ = धनात्मक इलेक्ट्रोड
★ H₂SO₄ = विद्युत अपघट्य
★ यह द्वितीयक सेल है।

21. ईंधन सेल

ईंधन सेल वह सेल है जिसमें ईंधन और ऑक्सीकारक की रासायनिक ऊर्जा को लगातार विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।

हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है।

समग्र अभिक्रिया—

2H₂ + O₂ → 2H₂O

इसमें जल मुख्य उत्पाद होता है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल।

(ii) इसका उत्पाद जल हो सकता है।

(iii) यह लगातार ईंधन और ऑक्सीकारक की आपूर्ति मिलने पर कार्य कर सकता है।

चार छोटे संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: 2 mol H₂ से कितने mol H₂O बनेंगे?

2H₂ → 2H₂O

उत्तर: 2 mol H₂O

प्रश्न 2: 1 mol O₂ के लिए कितने mol H₂ चाहिए?

1 O₂ के लिए 2 H₂

उत्तर: 2 mol H₂

प्रश्न 3: 4 mol H₂ से कितना H₂O बनेगा?

4 mol H₂ → 4 mol H₂O

उत्तर: 4 mol

प्रश्न 4: 3 mol O₂ के लिए H₂ की आवश्यकता?

1 mol O₂ → 2 mol H₂

3 mol O₂ → 6 mol H₂

उत्तर: 6 mol

★ मुख्य बिंदु

★ H₂–O₂ ईंधन सेल में जल बनता है।
★ ईंधन सेल में रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में बदलती है।

22. गैल्वेनिक और इलेक्ट्रोलाइटिक सेल में अंतर

आधार| गैल्वेनिक सेल| इलेक्ट्रोलाइटिक सेल
ऊर्जा परिवर्तन| रासायनिक → विद्युत| विद्युत → रासायनिक
अभिक्रिया| स्वतः| अस्वतः
बाहरी विद्युत स्रोत| आवश्यक नहीं| आवश्यक
एनोड| ऋणात्मक| धनात्मक
कैथोड| धनात्मक| ऋणात्मक
ऑक्सीकरण| एनोड पर| एनोड पर
अपचयन| कैथोड पर| कैथोड पर

★ सबसे जरूरी बात:

एनोड और कैथोड की पहचान उनके चिन्ह से नहीं, बल्कि अभिक्रिया से करें।

एनोड → ऑक्सीकरण
कैथोड → अपचयन

23. नर्न्स्ट समीकरण

जब सेल मानक अवस्था में नहीं होता, तब सेल का विभव आयनों की सांद्रता पर निर्भर करता है। इस संबंध को नर्न्स्ट समीकरण से व्यक्त किया जाता है।

सामान्य रूप—

E = E° − (RT/nF) ln Q

298 K पर—

E = E° − (0.0591/n) log Q

जहाँ—

E = गैर-मानक अवस्था का इलेक्ट्रोड/सेल विभव
E° = मानक विभव
n = इलेक्ट्रॉनों की संख्या
Q = अभिक्रिया भागफल

सेल के लिए—

Eसेल = E°सेल − (0.0591/n) log Q

उदाहरण

Zn + Cu²⁺ → Zn²⁺ + Cu

इस अभिक्रिया के लिए—

Q = [Zn²⁺]/[Cu²⁺]

अतः—

Eसेल = E°सेल − (0.0591/2) log([Zn²⁺]/[Cu²⁺])

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: E° = 1.10 V, n = 2 और Q = 1।

log 1 = 0

E = 1.10 V

प्रश्न 2: E° = 1.10 V, n = 2, log Q = 1।

E = 1.10 − 0.0591/2

= 1.07045 V

प्रश्न 3: E° = 0.50 V, n = 1 और log Q = 1।

E = 0.50 − 0.0591

= 0.4409 V

प्रश्न 4: E° = 0.80 V, n = 2 और log Q = −1।

E = 0.80 + 0.02955

= 0.82955 V

आसान तरीके से समझो

मानक अवस्था में E° पर्याप्त है। लेकिन जब सांद्रता बदलती है, तब वास्तविक विभव भी बदलता है। नर्न्स्ट समीकरण इसी बदलाव को बताता है।

★ मुख्य बिंदु

★ 298 K पर 0.0591 का प्रयोग होता है।
★ n = स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या।
★ Q अभिक्रिया भागफल है।
★ Q = 1 होने पर E = E°

24. नर्न्स्ट समीकरण और आयन सांद्रता

नर्न्स्ट समीकरण का प्रयोग किसी सेल के विभव को उसकी आयनों की सांद्रता से जोड़ने के लिए किया जाता है।

सामान्य रूप—

E = E° − (0.0591/n) log Q

298 K पर यह समीकरण परीक्षा में बहुत उपयोगी है।

सांद्रता सेल

जब समान इलेक्ट्रोडों के साथ समान आयनों के अलग-अलग सांद्रता वाले विलयन लिए जाते हैं, तो इसे सांद्रता सेल कहा जाता है।

★ मुख्य बिंदु

★ नर्न्स्ट समीकरण का प्रयोग गैर-मानक परिस्थितियों में किया जाता है।
★ सांद्रता बदलने पर सेल विभव बदल सकता है।

25. सेल अभिक्रिया Q और नर्न्स्ट समीकरण

किसी सेल की समग्र अभिक्रिया लिखकर Q निर्धारित करना चाहिए।

उदाहरण—

Zn + Cu²⁺ → Zn²⁺ + Cu

ठोस Zn और Cu को Q में शामिल नहीं किया जाता।

इसलिए—

Q = [Zn²⁺]/[Cu²⁺]

और—

Eसेल = E°सेल − (0.0591/2) log([Zn²⁺]/[Cu²⁺])

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: [Zn²⁺] = 1 M और [Cu²⁺] = 1 M।

Q = 1

इसलिए E = E°

प्रश्न 2: [Zn²⁺] = 0.1 M और [Cu²⁺] = 1 M।

Q = 0.1

log Q = −1

अतः E = E° + 0.02955 V

प्रश्न 3: [Zn²⁺] = 1 M और [Cu²⁺] = 0.1 M।

Q = 10

log Q = 1

E = E° − 0.02955 V

प्रश्न 4: [Zn²⁺] = 0.01 M और [Cu²⁺] = 1 M।

Q = 0.01

log Q = −2

E = E° + 0.0591 V

26. विद्युत वाहक बल और गिब्स ऊर्जा

गैल्वेनिक सेल में विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है। सेल के EMF और गिब्स ऊर्जा परिवर्तन के बीच संबंध—

ΔG = −nFE

मानक अवस्था में—

ΔG° = −nFE°

जहाँ—

ΔG = गिब्स ऊर्जा परिवर्तन
n = इलेक्ट्रॉनों की संख्या
F = फैराडे स्थिरांक
E = सेल का विभव

यदि E धनात्मक है—

ΔG ऋणात्मक होगा।

इससे अभिक्रिया के स्वतः होने का संकेत मिलता है।

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: n = 2, F = 96500 C mol⁻¹ और E = 1.10 V।

ΔG = −2 × 96500 × 1.10

= −212300 J mol⁻¹

= −212.3 kJ mol⁻¹

प्रश्न 2: n = 1 और E = 0.50 V।

ΔG = −96500 × 0.50

= −48250 J mol⁻¹

= −48.25 kJ mol⁻¹

प्रश्न 3: n = 2 और E = 0.25 V।

ΔG = −48250 J mol⁻¹

प्रश्न 4: ΔG = −193000 J mol⁻¹ और n = 2।

E = −ΔG/(nF)

= 193000/(2 × 96500)

= 1.00 V

★ मुख्य बिंदु

★ ΔG = −nFE
★ E > 0 ⇒ ΔG < 0
★ ΔG < 0 वाली सेल अभिक्रिया स्वतः होने की दिशा बताती है।

27. संतुलन स्थिरांक और सेल विभव

संतुलन पर—

ΔG° = −RT ln K

और—

ΔG° = −nFE°

इसलिए—

nFE° = RT ln K

अतः—

E° = RT ln K/(nF)

298 K पर—

log K = nE°/0.0591

यह संबंध सेल के मानक विभव और संतुलन स्थिरांक को जोड़ता है।

चार संख्यात्मक उदाहरण

प्रश्न 1: E° = 0.0591 V और n = 1।

log K = 1

K = 10

प्रश्न 2: E° = 0.1182 V और n = 2।

log K = 4

K = 10⁴

प्रश्न 3: E° = 0.1773 V और n = 3।

log K = 9

K = 10⁹

प्रश्न 4: E° = 0.02955 V और n = 1।

log K = 0.5

K = √10 ≈ 3.16

★ मुख्य बिंदु

★ E° जितना अधिक धनात्मक होगा, सामान्यतः K का मान उतना बड़ा होगा।
★ संतुलन पर सेल का EMF शून्य हो जाता है, जबकि E° मानक अवस्था का मान है।

28. संक्षारण

धातु का अपने वातावरण के साथ रासायनिक या वैद्युत-रासायनिक अभिक्रिया द्वारा धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है।

लोहे पर जंग लगना इसका सबसे सामान्य उदाहरण है।

लोहे के कुछ भागों पर ऑक्सीकरण होता है—

Fe → Fe²⁺ + 2e⁻

ऑक्सीजन और जल की उपस्थिति में आगे की अभिक्रियाओं से जलयोजित आयरन(III) ऑक्साइड बनता है, जिसे सामान्यतः जंग कहा जाता है।

संक्षारण को प्रभावित करने वाले कारक

(i) नमी

(ii) ऑक्सीजन

(iii) लवणों की उपस्थिति

(iv) अम्लीय वातावरण

तीन छोटे उदाहरण

(i) लोहे पर जंग लगना।

(ii) ताँबे की सतह पर हरी परत बनना।

(iii) लोहे को नमी से बचाने पर जंग की गति कम की जा सकती है।

संक्षारण से बचाव

(i) पेंट करना

(ii) तेल या ग्रीस लगाना

(iii) गैल्वनीकरण

(iv) मिश्रधातु बनाना

(v) कैथोडिक संरक्षण

★ मुख्य बिंदु

★ संक्षारण एक वैद्युत-रासायनिक प्रक्रिया हो सकता है।
★ नमी और ऑक्सीजन लोहे के संक्षारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

29. विद्युत-रासायनिक श्रेणी

विभिन्न इलेक्ट्रोडों के मानक अपचयन विभवों को क्रम में रखने पर विद्युत-रासायनिक श्रेणी प्राप्त होती है।

इसका उपयोग—

(i) ऑक्सीकरण-अपचयन की प्रवृत्ति समझने में।

(ii) सेल का EMF ज्ञात करने में।

(iii) किसी रेडॉक्स अभिक्रिया की सम्भावना समझने में।

(iv) ऑक्सीकारक और अपचायक की तुलनात्मक शक्ति समझने में।

★ मुख्य बिंदु

★ अधिक धनात्मक E° → अपचयन की अधिक प्रवृत्ति।
★ अधिक ऋणात्मक E° → ऑक्सीकरण की अधिक प्रवृत्ति।

30. ऑक्सीकारक और अपचायक की पहचान

जिस पदार्थ में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है, वह सामान्यतः अच्छा ऑक्सीकारक होता है।

जिस पदार्थ में इलेक्ट्रॉन छोड़ने की प्रवृत्ति अधिक होती है, वह अच्छा अपचायक होता है।

आसान तरीके से समझो

जो खुद इलेक्ट्रॉन लेता है, वह दूसरे का ऑक्सीकरण कराने में मदद करता है।

जो खुद इलेक्ट्रॉन देता है, वह दूसरे का अपचयन कराने में मदद करता है।

★ मुख्य बिंदु

ऑक्सीकारक → इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है।
अपचायक → इलेक्ट्रॉन देता है।

31. अध्याय के महत्वपूर्ण सूत्र

चालकता से संबंधित सूत्र

R = V/I

G = 1/R

R = ρl/A

ρ = RA/l

κ = 1/ρ

κ = l/(RA)

Cell constant = l/A

κ = G × Cell constant

Λₘ = κ/C

यदि C mol L⁻¹ में हो—

Λₘ = κ × 1000/C

 

कोलरॉश का नियम

Λₘ° = λ°₊ + λ°₋

आयनों की संख्या अधिक होने पर उनके गुणांक लगाए जाते हैं।

उदाहरण—

Λₘ°(CaCl₂) = λ°Ca²⁺ + 2λ°Cl⁻

 

आयनीकरण

α = Λₘ/Λₘ°

% आयनीकरण = (Λₘ/Λₘ°) × 100

 

विद्युत अपघटन

Q = It

m = ZIt

m = MIt/(nF)

F ≈ 96500 C mol⁻¹

mol e⁻ = Q/F

 

सेल का EMF

E°सेल = E°कैथोड − E°एनोड

 

नर्न्स्ट समीकरण

E = E° − (RT/nF) ln Q

298 K पर—

E = E° − (0.0591/n) log Q

गिब्स ऊर्जा

ΔG = −nFE

ΔG° = −nFE°

संतुलन स्थिरांक

ΔG° = −RT ln K

E° = RT ln K/(nF)

298 K पर—

log K = nE°/0.0591

32. परीक्षा से पहले याद रखने वाले सबसे महत्वपूर्ण बिंदु

★ एनोड पर ऑक्सीकरण होता है।

★ कैथोड पर अपचयन होता है।

★ गैल्वेनिक सेल में रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा।

★ इलेक्ट्रोलाइटिक सेल में विद्युत ऊर्जा → रासायनिक ऊर्जा।

★ गैल्वेनिक सेल में एनोड ऋणात्मक और कैथोड धनात्मक होता है।

★ इलेक्ट्रोलाइटिक सेल में एनोड धनात्मक और कैथोड ऋणात्मक होता है।

★ इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह बाहरी परिपथ में एनोड से कैथोड की ओर होता है।

★ κ = G × Cell constant

★ Λₘ = κ × 1000/C

★ तनुकरण पर κ घटती है, जबकि Λₘ बढ़ती है।

★ कोलरॉश का नियम अनंत तनुकरण पर लागू होता है।

★ Q = It

★ 1 F ≈ 96500 C

★ E°सेल = E°कैथोड − E°एनोड

★ 298 K पर नर्न्स्ट समीकरण में 0.0591/n आता है।

★ ΔG = −nFE

★ E° > 0 होने पर ΔG° < 0 होता है।

★ संक्षारण धातु के धीरे-धीरे नष्ट होने की प्रक्रिया है।

33. एक नज़र में पूरा अध्याय


वैद्युत रसायन
↓
विद्युत अपघट्य
↓
गैल्वेनिक और इलेक्ट्रोलाइटिक सेल
↓
इलेक्ट्रोड
↓
इलेक्ट्रोड विभव
↓
मानक इलेक्ट्रोड विभव
↓
SHE
↓
सेल का EMF
↓
नमक सेतु
↓
प्रतिरोध और चालकता
↓
विशिष्ट चालकता
↓
मोलर चालकता
↓
सांद्रता का प्रभाव
↓
कोलरॉश का नियम
↓
विद्युत अपघटन
↓
फैराडे के नियम
↓
शुष्क सेल
↓
लेड संचायक
↓
ईंधन सेल
↓
नर्न्स्ट समीकरण
↓
ΔG और E का संबंध
↓
E° और K का संबंध
↓
संक्षारण

34. छोटे-छोटे सवाल — खुद से पूछकर देखो

1. एनोड पर कौन-सी प्रक्रिया होती है?

2. कैथोड पर कौन-सी प्रक्रिया होती है?

3. गैल्वेनिक सेल में ऊर्जा का कौन-सा परिवर्तन होता है?

4. चालकता और प्रतिरोध में क्या संबंध है?

5. सेल स्थिरांक का सूत्र क्या है?

6. मोलर चालकता का सूत्र क्या है?

7. तनुकरण पर मोलर चालकता क्यों बढ़ती है?

8. कोलरॉश का नियम किस अवस्था में लागू होता है?

9. फैराडे स्थिरांक का लगभग मान कितना है?

10. गैल्वेनिक सेल का EMF कैसे ज्ञात करते हैं?

11. नर्न्स्ट समीकरण में n किसे दर्शाता है?

12. ΔG और E का संबंध क्या है?

13. संक्षारण क्या है?

14. लेड संचायक को द्वितीयक सेल क्यों कहते हैं?

15. हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल में मुख्य उत्पाद क्या बनता है?

★ इस अध्याय को पढ़ते समय सबसे पहले ये चार बातें पक्की कर लें—

ऑक्सीकरण → एनोड
अपचयन → कैथोड
E°सेल = E°कैथोड − E°एनोड
ΔG = −nFE

https://vijaysir24.com/class-12-chemistry-chapter-1-solutions/

Scroll to Top