अध्याय 2 : स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता
भाग 1 : अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. वैद्युत विभव
किसी विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर एकांक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का वैद्युत विभव कहते हैं।
2. विभवान्तर
दो बिंदुओं के बीच एकांक धनात्मक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में आवश्यक कार्य से संबंधित विभव के अंतर को विभवान्तर कहते हैं।
3. वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
विद्युत क्षेत्र में किसी आवेश की स्थिति के कारण उसमें संचित ऊर्जा को वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
4. वैद्युत द्विध्रुव
समान परिमाण के दो विपरीत आवेश जब बहुत कम दूरी पर रखे जाते हैं, तो ऐसी व्यवस्था को वैद्युत द्विध्रुव कहते हैं।
5. द्विध्रुव आघूर्ण
किसी एक आवेश के परिमाण और दोनों आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।
6. समविभव पृष्ठ
ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विभव का मान समान हो, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
7. चालक
ऐसा पदार्थ जिसमें मुक्त आवेश आसानी से गति कर सकते हैं, चालक कहलाता है।
8. परावैद्युत
ऐसा विद्युतरोधी पदार्थ जिसे संधारित्र की प्लेटों के बीच रखने पर उसकी धारिता बढ़ती है, परावैद्युत कहलाता है।
9. ध्रुवण
बाहरी विद्युत क्षेत्र के प्रभाव से परावैद्युत के अणुओं में धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों के वितरण में थोड़ा परिवर्तन होना ध्रुवण कहलाता है।
10. संधारित्र
दो चालकों की ऐसी व्यवस्था जो विद्युत आवेश तथा विद्युत ऊर्जा को संचित कर सकती है, संधारित्र कहलाती है।
11. संधारित्र की धारिता
संधारित्र द्वारा संचित आवेश और उसके बीच के विभवान्तर के अनुपात को संधारित्र की धारिता कहते हैं।
12. परावैद्युतांक
किसी माध्यम की विद्युतशीलता और निर्वात की विद्युतशीलता के अनुपात को उस माध्यम का परावैद्युतांक कहते हैं।
13. ऊर्जा घनत्व
विद्युत क्षेत्र के प्रति इकाई आयतन में संचित ऊर्जा को ऊर्जा घनत्व कहते हैं।
भाग 2 : वैद्युत विभव
परिभाषा
किसी बिंदु पर एकांक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का वैद्युत विभव कहते हैं।
सूत्र
V = W/q
जहाँ,
V = वैद्युत विभव
W = किया गया कार्य
q = परीक्षण आवेश
SI मात्रक : वोल्ट (V)
—
व्युत्पत्ति
यदि q आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में W कार्य किया जाता है, तो
V = W/q
इसलिए,
वैद्युत विभव = किया गया कार्य / आवेश
—
तीन सरल उदाहरण
उदाहरण 1: यदि किसी आवेश को किसी स्थान तक लाने में अधिक कार्य करना पड़े, तो उस स्थान का विभव अधिक हो सकता है।
उदाहरण 2: किसी धनात्मक आवेश के पास जाने पर सामान्यतः विभव का मान बढ़ता है।
उदाहरण 3: विद्युत परिपथों में पृथ्वी को अक्सर शून्य विभव के संदर्भ के रूप में लिया जाता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
प्रश्न: 4 C आवेश को किसी बिंदु तक लाने में 20 J कार्य किया गया। विभव ज्ञात कीजिए।
दिया है:
W = 20 J
q = 4 C
सूत्र:
V = W/q
मान रखने पर:
V = 20/4
हल:
V = 5 V
अतः उत्तर:
V = 5 V
—
Numerical 2
प्रश्न: 6 C आवेश को लाने में 30 J कार्य किया गया। विभव कितना होगा?
दिया है:
W = 30 J
q = 6 C
सूत्र:
V = W/q
हल:
V = 30/6
V = 5 V
अतः उत्तर:
V = 5 V
—
Numerical 3
प्रश्न: किसी बिंदु का विभव 12 V है और वहाँ 2 C आवेश रखा है। उसकी स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
दिया है:
V = 12 V
q = 2 C
सूत्र:
U = qV
हल:
U = 2 × 12
U = 24 J
अतः उत्तर:
U = 24 J
—
Numerical 4
प्रश्न: 50 J कार्य करके 10 C आवेश किसी बिंदु तक लाया जाता है। विभव ज्ञात कीजिए।
दिया है:
W = 50 J
q = 10 C
सूत्र:
V = W/q
हल:
V = 50/10
V = 5 V
अतः उत्तर:
V = 5 V
—
मुख्य बिंदु
– विभव एक अदिश राशि है।
– विभव का SI मात्रक वोल्ट है।
– 1 वोल्ट = 1 जूल/कूलॉम
भाग 3 : बिंदु आवेश के कारण वैद्युत विभव
परिभाषा
किसी बिंदु आवेश Q से r दूरी पर स्थित बिंदु पर उस आवेश के कारण उत्पन्न विभव को बिंदु आवेश का विभव कहते हैं।
सूत्र
V = kQ/r
जहाँ,
k = 1/(4πε₀)
इसलिए,
V = Q/(4πε₀r)
—
व्युत्पत्ति
बिंदु आवेश Q के कारण r दूरी पर विद्युत क्षेत्र,
E = kQ/r²
विभव,
V = -∫ E dr
अनंत से r तक समाकलन करने पर,
V = kQ/r
अर्थात्,
V = Q/(4πε₀r)
यहाँ अनंत पर विभव को शून्य माना गया है।
—
तीन सरल उदाहरण
उदाहरण 1: धनात्मक आवेश के कारण विभव धनात्मक होता है।
उदाहरण 2: ऋणात्मक आवेश के कारण विभव ऋणात्मक होता है।
उदाहरण 3: समान आवेश के लिए दूरी बढ़ाने पर विभव का परिमाण कम होता जाता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
प्रश्न: 2 μC आवेश से 3 m दूरी पर विभव ज्ञात कीजिए।
दिया है:
Q = 2 μC = 2 × 10⁻⁶ C
r = 3 m
k = 9 × 10⁹ N m²/C²
सूत्र:
V = kQ/r
मान रखने पर:
V = (9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶)/3
हल:
V = 18 × 10³/3
V = 6 × 10³ V
अतः उत्तर:
V = 6000 V
—
Numerical 2
प्रश्न: 5 μC आवेश से 5 m दूरी पर विभव ज्ञात कीजिए।
दिया है:
Q = 5 × 10⁻⁶ C
r = 5 m
सूत्र:
V = kQ/r
हल:
V = (9 × 10⁹ × 5 × 10⁻⁶)/5
V = 9 × 10³ V
अतः उत्तर:
V = 9000 V
—
Numerical 3
प्रश्न: 3 μC आवेश से 2 m दूरी पर विभव ज्ञात कीजिए।
दिया है:
Q = 3 × 10⁻⁶ C
r = 2 m
सूत्र:
V = kQ/r
हल:
V = (9 × 10⁹ × 3 × 10⁻⁶)/2
V = 13.5 × 10³ V
अतः उत्तर:
V = 13500 V
—
Numerical 4
प्रश्न: किसी बिंदु पर 1800 V विभव है और आवेश से दूरी 5 m है। आवेश ज्ञात कीजिए।
दिया है:
V = 1800 V
r = 5 m
सूत्र:
Q = Vr/k
हल:
Q = (1800 × 5)/(9 × 10⁹)
Q = 10⁻⁶ C
अतः
उत्तर: Q = 1 μC
भाग 4 : अनेक आवेशों के कारण विभव
परिभाषा
किसी बिंदु पर कई आवेशों के कारण उत्पन्न कुल विभव, प्रत्येक आवेश द्वारा उत्पन्न विभवों के बीजीय योग के बराबर होता है।
सूत्र
V = V₁ + V₂ + V₃ + …
अथवा,
V = k(Q₁/r₁ + Q₂/r₂ + Q₃/r₃ + …)
—
व्युत्पत्ति
प्रत्येक आवेश के कारण विभव अलग-अलग निकालते हैं।
V₁ = kQ₁/r₁
V₂ = kQ₂/r₂
V₃ = kQ₃/r₃
इसलिए कुल विभव,
V = V₁ + V₂ + V₃ + …
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: दो धनात्मक आवेश हों तो उनके विभव सामान्यतः जुड़ते हैं।
उदाहरण 2: समान दूरी पर +Q और −Q हों तो उनके विभव एक-दूसरे को रद्द कर सकते हैं।
उदाहरण 3: विभव अदिश राशि है, इसलिए यहाँ सदिश की तरह दिशा जोड़ने की आवश्यकता नहीं होती।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
प्रश्न: किसी बिंदु से 1 m दूरी पर +2 μC और 2 m दूरी पर +3 μC आवेश है। कुल विभव ज्ञात कीजिए।
दिया है:
Q₁ = 2 μC
r₁ = 1 m
Q₂ = 3 μC
r₂ = 2 m
सूत्र:
V = k(Q₁/r₁ + Q₂/r₂)
मान रखने पर:
V = 9 × 10⁹ [2 × 10⁻⁶/1 + 3 × 10⁻⁶/2]
हल:
V = 9 × 10⁹ [2 × 10⁻⁶ + 1.5 × 10⁻⁶]
V = 9 × 10⁹ × 3.5 × 10⁻⁶
V = 31.5 × 10³ V
अतः उत्तर:
V = 31500 V
—
Numerical 2
प्रश्न: +4 μC और −4 μC आवेश किसी बिंदु से समान दूरी पर हैं। कुल विभव क्या होगा?
हल:
दोनों आवेशों से उत्पन्न विभवों का परिमाण समान है, लेकिन चिन्ह विपरीत हैं।
V = V₁ + V₂
V = V₁ − V₁
V = 0
अतः उत्तर:
कुल विभव = 0 V
—
Numerical 3
प्रश्न: दो +1 μC आवेश किसी बिंदु से 1 m दूरी पर हैं। कुल विभव ज्ञात कीजिए।
सूत्र:
V = k(Q₁/r₁ + Q₂/r₂)
हल:
V = 9 × 10⁹ (1 × 10⁻⁶ + 1 × 10⁻⁶)
V = 9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶
V = 18 × 10³ V
अतः उत्तर:
V = 18000 V
—
Numerical 4
प्रश्न: किसी बिंदु पर तीन आवेशों के कारण विभव क्रमशः 20 V, 30 V और −10 V है। कुल विभव ज्ञात कीजिए।
सूत्र:
V = V₁ + V₂ + V₃
हल:
V = 20 + 30 − 10
V = 40 V
अतः
उत्तर: V = 40 V
भाग 5 : वैद्युत द्विध्रुव
परिभाषा
समान परिमाण के दो विपरीत आवेश जब बहुत कम दूरी पर रखे जाते हैं, तो उन्हें वैद्युत द्विध्रुव कहते हैं।
सूत्र
यदि दोनों आवेशों के बीच दूरी d है,
p = qd
यदि दूरी 2a है,
p = 2qa
जहाँ p द्विध्रुव आघूर्ण है।
SI मात्रक : C m
—
व्युत्पत्ति
मान लेते हैं कि द्विध्रुव में +q और −q आवेश हैं तथा उनके बीच दूरी d है।
द्विध्रुव आघूर्ण,
p = q × d
अतः,
p = qd
यदि d = 2a,
p = 2qa
द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा −q से +q की ओर होती है।
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: यदि आवेशों के बीच दूरी बढ़े और आवेश समान रहे, तो द्विध्रुव आघूर्ण बढ़ेगा।
उदाहरण 2: समान दूरी वाले बड़े आवेशों से अधिक द्विध्रुव आघूर्ण प्राप्त होगा।
उदाहरण 3: द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा ऋणात्मक आवेश से धनात्मक आवेश की ओर होती है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
प्रश्न: q = 2 μC और d = 0.5 m है। द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
दिया है:
q = 2 × 10⁻⁶ C
d = 0.5 m
सूत्र:
p = qd
हल:
p = 2 × 10⁻⁶ × 0.5
p = 1 × 10⁻⁶ C m
अतः उत्तर:
p = 1 × 10⁻⁶ C m
—
Numerical 2
q = 4 μC और d = 0.2 m
p = qd
p = 4 × 10⁻⁶ × 0.2
p = 8 × 10⁻⁷ C m
उत्तर: 8 × 10⁻⁷ C m
—
Numerical 3
p = 6 × 10⁻⁶ C m और d = 3 m है। q ज्ञात कीजिए।
सूत्र:
q = p/d
हल:
q = (6 × 10⁻⁶)/3
q = 2 × 10⁻⁶ C
उत्तर: q = 2 μC
—
Numerical 4
q = 5 μC और d = 4 cm है।
दिया है:
q = 5 × 10⁻⁶ C
d = 4 × 10⁻² m
सूत्र:
p = qd
हल:
p = 5 × 10⁻⁶ × 4 × 10⁻²
p = 20 × 10⁻⁸ C m
p = 2 × 10⁻⁷ C m
उत्तर: p = 2 × 10⁻⁷ C m
भाग 6 : द्विध्रुव के कारण विभव
परिभाषा
द्विध्रुव से किसी दूरस्थ बिंदु पर उसके कारण उत्पन्न वैद्युत विभव को द्विध्रुव का विभव कहते हैं।
सूत्र
दूरस्थ बिंदु के लिए,
V = kp cosθ/r²
अर्थात्,
V = p cosθ/(4πε₀r²)
—
व्युत्पत्ति
द्विध्रुव के दोनों आवेशों के कारण उत्पन्न विभवों को बीजीय रूप से जोड़ा जाता है।
दूरस्थ बिंदु के लिए सरल रूप प्राप्त होता है:
V = kp cosθ/r²
अर्थात्,
V = p cosθ/(4πε₀r²)
यह सूत्र उस स्थिति के लिए है जहाँ बिंदु द्विध्रुव की लंबाई की तुलना में काफी दूर हो।
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: अक्षीय स्थिति में θ = 0° होता है, इसलिए cos 0° = 1।
उदाहरण 2: विषुवतीय स्थिति में θ = 90° होता है, इसलिए cos 90° = 0 और विभव शून्य हो जाता है।
उदाहरण 3: दूरी बढ़ाने पर द्विध्रुव का विभव 1/r² के अनुसार घटता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
p = 2 × 10⁻⁶ C m, r = 1 m और θ = 0°
सूत्र:
V = kp cosθ/r²
हल:
V = 9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶ × 1/1²
V = 18 × 10³ V
उत्तर: V = 18000 V
—
Numerical 2
यदि θ = 90° है, तो
V = kp cos90°/r²
cos90° = 0
उत्तर: V = 0
—
Numerical 3
p = 4 × 10⁻⁶ C m, r = 2 m और θ = 0°
V = 9 × 10⁹ × 4 × 10⁻⁶/2²
V = 36 × 10³/4
उत्तर: V = 9000 V
—
Numerical 4
p = 3 × 10⁻⁶ C m, r = 3 m और θ = 60°
cos60° = 1/2
V = 9 × 10⁹ × 3 × 10⁻⁶ × 1/2 / 9
V = 1500 V
उत्तर: V = 1500 V
भाग 7 : विभवान्तर
परिभाषा
दो बिंदुओं के बीच विभवान्तर उन दोनों बिंदुओं के विभवों के अंतर को कहते हैं।
सूत्र
Vᴮ − Vᴬ = −∫ E · dl
समान विद्युत क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा में दूरी d के लिए,
ΔV = −Ed
—
व्युत्पत्ति
विद्युत क्षेत्र E में q आवेश पर बल,
F = qE
क्षेत्र की दिशा में d दूरी तय करने पर विद्युत क्षेत्र द्वारा किया गया कार्य,
W = qEd
विभव परिवर्तन,
ΔV = −W/q
अतः,
ΔV = −Ed
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: विद्युत क्षेत्र की दिशा में जाने पर विभव घटता है।
उदाहरण 2: विद्युत क्षेत्र के विपरीत जाने पर विभव बढ़ता है।
उदाहरण 3: समान विभव वाले दो बिंदुओं के बीच विभवान्तर शून्य होता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
E = 100 N/C और d = 2 m
सूत्र:
ΔV = −Ed
हल:
ΔV = −100 × 2
ΔV = −200 V
उत्तर: ΔV = −200 V
—
Numerical 2
E = 500 N/C और d = 0.4 m
ΔV = −Ed
ΔV = −500 × 0.4
उत्तर: ΔV = −200 V
—
Numerical 3
E = 200 N/C और क्षेत्र के विपरीत दिशा में d = 3 m
क्षेत्र के विपरीत जाने पर विभव बढ़ेगा।
ΔV = Ed
ΔV = 200 × 3
उत्तर: ΔV = +600 V
—
Numerical 4
विभव परिवर्तन 100 V और दूरी 0.5 m है।
सूत्र:
E = |ΔV|/d
हल:
E = 100/0.5
उत्तर: E = 200 N/C
भाग 8 : समविभव पृष्ठ
परिभाषा
ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत विभव समान रहता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
सूत्र
ΔV = 0
इसलिए,
W = qΔV
W = 0
—
व्युत्पत्ति
समविभव पृष्ठ पर,
V_A = V_B
इसलिए,
ΔV = V_B − V_A
ΔV = 0
अतः,
W = qΔV = 0
इसलिए समविभव पृष्ठ पर आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में विद्युत क्षेत्र द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: बिंदु आवेश के चारों ओर समान त्रिज्या वाले गोलाकार पृष्ठ समविभव पृष्ठ हो सकते हैं।
उदाहरण 2: स्थिर वैद्युत अवस्था में चालक की पूरी सतह समान विभव पर होती है।
उदाहरण 3: समविभव पृष्ठ पर आवेश को चलाने में विद्युत क्षेत्र द्वारा कार्य शून्य होता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
दो बिंदुओं के विभव क्रमशः 20 V और 20 V हैं।
ΔV = 20 − 20
उत्तर: ΔV = 0 V
—
Numerical 2
q = 5 C और ΔV = 0
W = qΔV
W = 5 × 0
उत्तर: W = 0 J
—
Numerical 3
q = 2 μC को समान विभव वाले पृष्ठ पर ले जाया गया।
ΔV = 0
W = qΔV
उत्तर: W = 0 J
—
Numerical 4
समविभव पृष्ठ के एक बिंदु पर विभव 50 V है। उसी पृष्ठ के दूसरे बिंदु पर विभव कितना होगा?
उत्तर: 50 V
भाग 9 : वैद्युत क्षेत्र और विभव का संबंध
परिभाषा
किसी दिशा में विभव जितनी तेजी से बदलता है, उसी परिवर्तन से उस दिशा में विद्युत क्षेत्र का संबंध निर्धारित होता है।
सूत्र
एक आयामी स्थिति में,
E = −dV/dr
सामान्य रूप में,
⃗E = −∇V
—
व्युत्पत्ति
छोटी दूरी dr के लिए,
dV = −E dr
अतः,
E = −dV/dr
ऋणात्मक चिन्ह बताता है कि विद्युत क्षेत्र की दिशा में विभव घटता है।
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: अधिक विभव से कम विभव की ओर विद्युत क्षेत्र की दिशा होती है।
उदाहरण 2: जहाँ विभव का परिवर्तन अधिक तेजी से होता है, वहाँ विद्युत क्षेत्र का परिमाण अधिक हो सकता है।
उदाहरण 3: यदि किसी क्षेत्र में विभव हर जगह समान है, तो उस क्षेत्र में विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
विभव 100 V से 80 V तक 0.5 m में घटता है।
E = |ΔV|/d
E = 20/0.5
उत्तर: E = 40 N/C
—
Numerical 2
ΔV = −200 V और d = 2 m
E = −ΔV/d
E = −(−200)/2
E = 100 N/C
उत्तर: E = 100 N/C
—
Numerical 3
यदि किसी क्षेत्र में विभव का परिवर्तन शून्य है, तो
dV/dr = 0
E = 0
उत्तर: E = 0 N/C
—
Numerical 4
यदि ΔV = 300 V और दूरी 3 m है,
E = ΔV/d
E = 300/3
उत्तर: E = 100 N/C
भाग 10 : वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
परिभाषा
विद्युत क्षेत्र में किसी आवेश की स्थिति के कारण उसमें संचित ऊर्जा को वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
सूत्र
U = qV
—
व्युत्पत्ति
विभव,
V = W/q
अतः,
W = qV
यही कार्य आवेश की स्थितिज ऊर्जा के रूप में लिया जा सकता है।
इसलिए,
U = qV
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: किसी धनात्मक आवेश को अधिक विभव वाले स्थान पर ले जाने पर उसकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ सकती है।
उदाहरण 2: ऋणात्मक आवेश के लिए ऊर्जा का चिन्ह परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।
उदाहरण 3: विद्युत क्षेत्र में आवेशों की व्यवस्था बदलने पर प्रणाली की स्थितिज ऊर्जा भी बदल सकती है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
q = 2 C और V = 10 V
U = qV
U = 2 × 10
उत्तर: U = 20 J
—
Numerical 2
q = 5 C और V = 20 V
U = 5 × 20
उत्तर: U = 100 J
—
Numerical 3
q = 3 μC और V = 200 V
U = qV
U = 3 × 10⁻⁶ × 200
U = 6 × 10⁻⁴ J
उत्तर: U = 6 × 10⁻⁴ J
—
Numerical 4
U = 40 J और q = 5 C
V = U/q
V = 40/5
उत्तर: V = 8 V
भाग 11 : दो बिंदु आवेशों की स्थितिज ऊर्जा
परिभाषा
दो बिंदु आवेशों को एक निश्चित दूरी पर रखने के कारण विद्युत प्रणाली में जो ऊर्जा संचित होती है, उसे उनकी वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
सूत्र
U = kQ₁Q₂/r
अर्थात्,
U = Q₁Q₂/(4πε₀r)
—
व्युत्पत्ति
पहले आवेश Q₁ के कारण दूसरे आवेश के स्थान पर विभव,
V = kQ₁/r
दूसरे आवेश Q₂ को इस विभव पर रखने पर,
U = Q₂V
अतः,
U = kQ₁Q₂/r
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: दो समान धनात्मक आवेशों की स्थितिज ऊर्जा धनात्मक होती है।
उदाहरण 2: धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों की स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक हो सकती है।
उदाहरण 3: आवेशों के बीच दूरी बढ़ाने पर ऊर्जा के परिमाण में परिवर्तन होता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
Q₁ = 2 μC, Q₂ = 3 μC और r = 2 m
U = kQ₁Q₂/r
U = (9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶ × 3 × 10⁻⁶)/2
U = 27 × 10⁻³ J
उत्तर: U = 0.027 J
—
Numerical 2
Q₁ = 1 μC, Q₂ = 2 μC और r = 1 m
U = 9 × 10⁹ × 1 × 10⁻⁶ × 2 × 10⁻⁶
उत्तर: U = 0.018 J
—
Numerical 3
Q₁ = +2 μC और Q₂ = −3 μC, r = 3 m
U = (9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶ × −3 × 10⁻⁶)/3
उत्तर: U = −0.018 J
—
Numerical 4
यदि Q₁ = 4 μC, Q₂ = 5 μC और r = 2 m है,
U = (9 × 10⁹ × 4 × 10⁻⁶ × 5 × 10⁻⁶)/2
उत्तर: U = 0.09 J
भाग 12 : चालक का वैद्युत व्यवहार
परिभाषा
स्थिर वैद्युत अवस्था में चालक के मुक्त आवेश ऐसी अवस्था में पहुँच जाते हैं जहाँ उनके अंदर कोई परिणामी विद्युत क्षेत्र नहीं रहता।
मुख्य परिणाम
चालक के अंदर,
E = 0
चालक के पूरे अंदर विभव समान रहता है।
चालक की अतिरिक्त आवेशित मात्रा उसकी सतह पर रहती है।
—
व्युत्पत्ति
यदि स्थिर वैद्युत अवस्था में चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र उपस्थित होता, तो मुक्त इलेक्ट्रॉन उस क्षेत्र के कारण गति करते रहते।
लेकिन स्थिर अवस्था में आवेशों की गति नहीं होनी चाहिए।
इसलिए,
E = 0
और जब चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, तो वहाँ विभव का परिवर्तन भी शून्य रहता है।
अतः चालक के अंदर विभव समान रहता है।
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: धातु के चालक के अंदर स्थिर वैद्युत अवस्था में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
उदाहरण 2: आवेशित चालक की बाहरी सतह पर अतिरिक्त आवेश पाया जाता है।
उदाहरण 3: खोखले चालक के अंदर उपयुक्त परिस्थितियों में विद्युत क्षेत्र से सुरक्षा मिल सकती है। इसे वैद्युत परिरक्षण कहते हैं।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
स्थिर वैद्युत अवस्था में चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र कितना होता है?
उत्तर: E = 0 N/C
—
Numerical 2
यदि चालक के अंदर दो बिंदुओं का विभव 100 V और 100 V है, तो विभवान्तर:
ΔV = 100 − 100
उत्तर: 0 V
—
Numerical 3
एक चालक के अंदर q = 5 C आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाया गया। यदि विभवान्तर शून्य है, तो कार्य:
W = qΔV
W = 5 × 0
उत्तर: W = 0 J
—
Numerical 4
यदि चालक के अंदर विभव हर जगह 50 V है, तो विद्युत क्षेत्र:
E = −dV/dr
dV/dr = 0
उत्तर: E = 0
भाग 13 : परावैद्युत और परावैद्युतांक
परिभाषा
परावैद्युत ऐसा विद्युतरोधी पदार्थ है जो संधारित्र की प्लेटों के बीच रखने पर संधारित्र की धारिता बढ़ाता है।
सूत्र
परावैद्युतांक,
K = ε/ε₀
और,
K = C/C₀
जहाँ,
C₀ = परावैद्युत के बिना धारिता
C = परावैद्युत रखने के बाद धारिता
—
व्युत्पत्ति
यदि किसी संधारित्र की प्रारंभिक धारिता C₀ है और पूर्ण रूप से परावैद्युत भरने पर धारिता C हो जाती है, तो
K = C/C₀
अतः,
C = KC₀
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: काँच एक परावैद्युत पदार्थ की तरह कार्य कर सकता है।
उदाहरण 2: संधारित्र की प्लेटों के बीच उपयुक्त परावैद्युत रखने से उसकी धारिता बढ़ सकती है।
उदाहरण 3: अलग-अलग पदार्थों का परावैद्युतांक अलग होता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
C₀ = 2 μF और K = 4
C = KC₀
C = 4 × 2
उत्तर: C = 8 μF
—
Numerical 2
C₀ = 5 μF और K = 3
C = 3 × 5
उत्तर: C = 15 μF
—
Numerical 3
C = 20 μF और C₀ = 5 μF
K = C/C₀
K = 20/5
उत्तर: K = 4
—
Numerical 4
K = 6 और C₀ = 3 μF
C = KC₀
C = 6 × 3
उत्तर: C = 18 μF
भाग 14 : संधारित्र और उसकी धारिता
परिभाषा
दो चालकों की ऐसी व्यवस्था जो विपरीत आवेशों को अलग-अलग संचित करके विद्युत ऊर्जा संचित कर सकती है, संधारित्र कहलाती है।
सूत्र
C = Q/V
जहाँ,
C = धारिता
Q = संचित आवेश
V = विभवान्तर
SI मात्रक : फैरड (F)
—
व्युत्पत्ति
धारिता की परिभाषा के अनुसार,
C = Q/V
इससे स्पष्ट है कि समान विभवान्तर पर अधिक आवेश संचित करने वाला संधारित्र अधिक धारिता वाला होता है।
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में संधारित्र विद्युत ऊर्जा को थोड़े समय के लिए संचित कर सकते हैं।
उदाहरण 2: कैमरे के फ्लैश जैसे उपकरणों में संधारित्र का उपयोग ऊर्जा संचित करने के लिए किया जाता है।
उदाहरण 3: विद्युत परिपथों में संधारित्र विभवान्तर के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में उपयोगी होते हैं।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
Q = 10 C और V = 5 V
C = Q/V
C = 10/5
उत्तर: C = 2 F
—
Numerical 2
Q = 6 C और V = 3 V
C = 6/3
उत्तर: C = 2 F
—
Numerical 3
C = 4 F और V = 5 V
Q = CV
Q = 4 × 5
उत्तर: Q = 20 C
—
Numerical 4
C = 2 μF और V = 10 V
Q = CV
Q = 2 × 10⁻⁶ × 10
Q = 20 × 10⁻⁶ C
उत्तर: Q = 20 μC
भाग 15 : समांतर प्लेट संधारित्र
परिभाषा
दो बड़ी समानांतर चालक प्लेटों से बना संधारित्र, जिनके बीच की दूरी बहुत कम हो, समांतर प्लेट संधारित्र कहलाता है।
सूत्र
परावैद्युत के बिना,
C = ε₀A/d
जहाँ,
A = प्लेट का क्षेत्रफल
d = प्लेटों के बीच दूरी
—
व्युत्पत्ति
प्लेटों पर आवेश ±Q है।
प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र,
E = Q/(ε₀A)
प्लेटों के बीच विभवान्तर,
V = Ed
अतः,
V = Qd/(ε₀A)
अब,
C = Q/V
इसमें V का मान रखने पर,
C = ε₀A/d
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: प्लेटों का क्षेत्रफल बढ़ाने पर धारिता बढ़ती है।
उदाहरण 2: प्लेटों के बीच दूरी बढ़ाने पर धारिता घटती है।
उदाहरण 3: प्लेटों के बीच परावैद्युत रखने पर धारिता बढ़ती है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
ε₀ = 8.85 × 10⁻¹² F/m
A = 2 m²
d = 1 m
C = ε₀A/d
C = 8.85 × 10⁻¹² × 2
उत्तर: C = 17.7 × 10⁻¹² F
—
Numerical 2
A = 4 m² और d = 2 m
C = ε₀A/d
C = ε₀ × 4/2
C = 2ε₀
उत्तर: C = 1.77 × 10⁻¹¹ F
—
Numerical 3
यदि प्लेटों का क्षेत्रफल दोगुना कर दिया जाए और दूरी समान रहे, तो
C = ε₀A/d
A दोगुना होने पर,
C भी दोगुनी हो जाएगी।
—
Numerical 4
यदि प्लेटों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए और क्षेत्रफल समान रहे, तो
C = ε₀A/d
d दोगुना होने पर,
C आधी हो जाएगी।
भाग 16 : परावैद्युत भरने पर संधारित्र
परिभाषा
यदि समांतर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच पूरा स्थान परावैद्युत से भर दिया जाए, तो उसकी धारिता बढ़ जाती है।
सूत्र
C = Kε₀A/d
और,
C = KC₀
—
व्युत्पत्ति
बिना परावैद्युत के,
C₀ = ε₀A/d
परावैद्युत भरने पर,
ε = Kε₀
इसलिए,
C = εA/d
C = Kε₀A/d
अतः,
C = KC₀
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: K = 4 का परावैद्युत लगाने पर धारिता चार गुना हो सकती है।
उदाहरण 2: बैटरी से जुड़े संधारित्र में परावैद्युत डालने पर आवेश बदल सकता है।
उदाहरण 3: बैटरी से अलग संधारित्र में परावैद्युत डालने पर आवेश स्थिर रहता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
C₀ = 2 μF और K = 5
C = KC₀
C = 5 × 2
उत्तर: C = 10 μF
Numerical 2
C₀ = 4 μF और K = 3
C = 3 × 4
उत्तर: C = 12 μF
Numerical 3
C = 20 μF और K = 4
C₀ = C/K
C₀ = 20/4
उत्तर: C₀ = 5 μF
Numerical 4
C₀ = 8 μF और K = 2.5
C = 2.5 × 8
उत्तर: C = 20 μF
भाग 17 : संधारित्रों का श्रेणीक्रम संयोजन
परिभाषा
जब संधारित्रों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि एक के बाद दूसरा संधारित्र क्रम से जुड़ा हो, तो इसे श्रेणीक्रम संयोजन कहते हैं।
सूत्र
1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + 1/C₃ + …
श्रेणीक्रम में सभी संधारित्रों पर आवेश का परिमाण समान होता है।
व्युत्पत्ति
श्रेणीक्रम में, Q समान रहता है।
कुल विभवान्तर,
V = V₁ + V₂ + V₃
चूँकि,
V = Q/C
अतः,
Q/C = Q/C₁ + Q/C₂ + Q/C₃
Q से भाग देने पर,
1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + 1/C₃
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: दो समान संधारित्रों को श्रेणीक्रम में लगाने पर तुल्य धारिता प्रत्येक की धारिता से कम होती है।
उदाहरण 2: श्रेणीक्रम में सभी संधारित्रों पर आवेश का परिमाण समान रहता है।
उदाहरण 3: अलग-अलग धारिता वाले संधारित्रों में विभवान्तर समान नहीं होता।
4 Solved Numerical
Numerical 1
C₁ = 2 μF और C₂ = 2 μF
1/C = 1/2 + 1/2
1/C = 1
उत्तर: C = 1 μF
Numerical 2
C₁ = 3 μF और C₂ = 6 μF
1/C = 1/3 + 1/6
1/C = 1/2
उत्तर: C = 2 μF
Numerical 3
C₁ = 4 μF और C₂ = 4 μF
1/C = 1/4 + 1/4
1/C = 1/2
उत्तर: C = 2 μF
Numerical 4
C₁ = 2 μF, C₂ = 3 μF और C₃ = 6 μF
1/C = 1/2 + 1/3 + 1/6
1/C = 1
उत्तर: C = 1 μF
भाग 18 : संधारित्रों का समानांतर संयोजन
परिभाषा
जब कई संधारित्रों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि सभी के सिरों पर समान विभवान्तर हो, तो इसे समानांतर संयोजन कहते हैं।
सूत्र
C = C₁ + C₂ + C₃ + …
समानांतर संयोजन में सभी संधारित्रों पर विभवान्तर समान होता है।
—
व्युत्पत्ति
समानांतर संयोजन में,
V समान रहता है।
कुल आवेश,
Q = Q₁ + Q₂ + Q₃
चूँकि,
Q = CV
इसलिए,
CV = C₁V + C₂V + C₃V
V से भाग देने पर,
C = C₁ + C₂ + C₃
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: समानांतर में संधारित्र जोड़ने पर कुल धारिता बढ़ती है।
उदाहरण 2: समानांतर संयोजन में सभी संधारित्रों पर समान विभवान्तर होता है।
उदाहरण 3: अधिक कुल धारिता प्राप्त करने के लिए संधारित्रों को समानांतर में जोड़ा जा सकता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
C₁ = 2 μF और C₂ = 3 μF
C = C₁ + C₂
C = 2 + 3
उत्तर: C = 5 μF
—
Numerical 2
C₁ = 4 μF और C₂ = 6 μF
C = 4 + 6
उत्तर: C = 10 μF
—
Numerical 3
C₁ = 2 μF, C₂ = 3 μF और C₃ = 5 μF
C = 2 + 3 + 5
उत्तर: C = 10 μF
—
Numerical 4
यदि तीनों संधारित्रों की धारिता 4 μF है,
C = 4 + 4 + 4
उत्तर: C = 12 μF
भाग 19 : संधारित्र में संचित ऊर्जा
परिभाषा
संधारित्र को आवेशित करने में जो कार्य किया जाता है, वह संधारित्र में विद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है।
सूत्र
U = 1/2 CV²
इसके अन्य रूप,
U = 1/2 QV
U = Q²/(2C)
—
व्युत्पत्ति
संधारित्र को आवेशित करते समय छोटे आवेश dq को लाने में किया गया कार्य,
dW = V dq
संधारित्र के लिए,
V = q/C
इसलिए,
dW = q/C × dq
0 से Q तक समाकलन करने पर,
U = Q²/(2C)
चूँकि,
Q = CV
इसलिए,
U = 1/2 CV²
और,
U = 1/2 QV
अतः संधारित्र की ऊर्जा के तीन रूप हैं:
U = 1/2 CV²
U = 1/2 QV
U = Q²/(2C)
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: चार्ज किया हुआ संधारित्र ऊर्जा को बाद में परिपथ में दे सकता है।
उदाहरण 2: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में संधारित्र थोड़े समय के लिए ऊर्जा संग्रहित कर सकते हैं।
उदाहरण 3: समान धारिता पर विभवान्तर बढ़ाने से संचित ऊर्जा बढ़ती है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
C = 2 F और V = 10 V
सूत्र:
U = 1/2 CV²
हल:
U = 1/2 × 2 × 10²
U = 100 J
उत्तर: U = 100 J
—
Numerical 2
C = 4 F और V = 5 V
U = 1/2 × 4 × 5²
U = 2 × 25
उत्तर: U = 50 J
—
Numerical 3
Q = 4 C और V = 10 V
U = 1/2 QV
U = 1/2 × 4 × 10
उत्तर: U = 20 J
—
Numerical 4
Q = 10 C और C = 5 F
U = Q²/(2C)
U = 10²/(2 × 5)
U = 100/10
उत्तर: U = 10 J
भाग 20 : विद्युत ऊर्जा का घनत्व
परिभाषा
विद्युत क्षेत्र के प्रति इकाई आयतन में संचित ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा घनत्व कहते हैं।
सूत्र
निर्वात में,
u = 1/2 ε₀E²
परावैद्युत माध्यम में,
u = 1/2 εE²
—
व्युत्पत्ति
विद्युत ऊर्जा,
U = 1/2 CV²
समांतर प्लेट संधारित्र के लिए,
C = ε₀A/d
और,
V = Ed
अतः,
U = 1/2 × ε₀A/d × E²d²
U = 1/2 ε₀E² × Ad
प्लेटों के बीच आयतन,
Volume = Ad
इसलिए,
u = U/Volume
u = 1/2 ε₀E²
—
तीन उदाहरण
उदाहरण 1: विद्युत क्षेत्र वाले स्थान में ऊर्जा केवल प्लेटों पर नहीं, बल्कि उनके बीच के क्षेत्र में भी संचित होती है।
उदाहरण 2: विद्युत क्षेत्र बढ़ने पर ऊर्जा घनत्व तेजी से बढ़ता है।
उदाहरण 3: परावैद्युत माध्यम में ऊर्जा घनत्व के लिए ε का उपयोग किया जाता है।
—
4 Solved Numerical
Numerical 1
ε₀ = 8.85 × 10⁻¹² F/m
E = 10³ N/C
u = 1/2 ε₀E²
u = 1/2 × 8.85 × 10⁻¹² × 10⁶
उत्तर: u = 4.425 × 10⁻⁶ J/m³
—
Numerical 2
E = 2 × 10³ N/C
u = 1/2 ε₀E²
u = 1/2 × 8.85 × 10⁻¹² × 4 × 10⁶
उत्तर: u = 1.77 × 10⁻⁵ J/m³
—
Numerical 3
यदि विद्युत क्षेत्र दोगुना कर दिया जाए, तो
u ∝ E²
इसलिए,
नया ऊर्जा घनत्व = 4 गुना
उत्तर: ऊर्जा घनत्व 4 गुना होगा।
—
Numerical 4
यदि विद्युत क्षेत्र तीन गुना हो जाए,
u ∝ E²
इसलिए,
नया ऊर्जा घनत्व = 9 गुना
उत्तर: ऊर्जा घनत्व 9 गुना होगा।
भाग 21 : बैटरी जुड़ी हो और परावैद्युत डाला जाए
स्थिति
यदि संधारित्र बैटरी से जुड़ा हुआ है और प्लेटों के बीच पूरा परावैद्युत भर दिया जाता है, तो बैटरी विभवान्तर को स्थिर रखती है।
मुख्य परिणाम
V = स्थिर
C’ = KC
Q’ = KQ
U’ = KU
—
समझने का तरीका
बैटरी जुड़ी होने के कारण विभवान्तर नहीं बदलता।
परावैद्युत डालने से धारिता K गुना हो जाती है।
C = Q/V
V स्थिर है, इसलिए Q भी K गुना हो जाता है।
ऊर्जा,
U = 1/2 CV²
V स्थिर होने के कारण ऊर्जा भी K गुना हो जाती है।
—
4 Numerical
Numerical 1
C = 2 μF और K = 4
C’ = KC
C’ = 4 × 2
उत्तर: C’ = 8 μF
—
Numerical 2
Q = 3 μC और K = 5
Q’ = KQ
Q’ = 5 × 3
उत्तर: Q’ = 15 μC
—
Numerical 3
प्रारंभिक ऊर्जा U = 2 J और K = 3
U’ = KU
U’ = 3 × 2
उत्तर: U’ = 6 J
—
Numerical 4
यदि प्रारंभिक विभवान्तर 100 V है और K = 5, तो बैटरी जुड़े रहने पर नया विभवान्तर:
उत्तर: V’ = 100 V
क्योंकि बैटरी जुड़ी है।
भाग 22 : बैटरी हटाकर परावैद्युत डालना
स्थिति
यदि संधारित्र को पहले बैटरी से आवेशित करके बैटरी से अलग कर दिया जाए और फिर परावैद्युत डाला जाए, तो संधारित्र का आवेश स्थिर रहता है।
मुख्य परिणाम
Q = स्थिर
C’ = KC
V’ = V/K
U’ = U/K
—
समझने का तरीका
बैटरी हटाने के बाद आवेश बाहर नहीं जा सकता।
इसलिए,
Q = स्थिर
परावैद्युत डालने से,
C’ = KC
और,
V = Q/C
इसलिए नया विभवान्तर K गुना कम हो जाता है।
—
4 Numerical
Numerical 1
V = 100 V और K = 5
V’ = V/K
V’ = 100/5
उत्तर: V’ = 20 V
—
Numerical 2
C = 2 μF और K = 4
C’ = KC
C’ = 4 × 2
उत्तर: C’ = 8 μF
—
Numerical 3
प्रारंभिक ऊर्जा 20 J और K = 5
U’ = U/K
U’ = 20/5
उत्तर: U’ = 4 J
—
Numerical 4
यदि संधारित्र का आवेश 10 μC है और बैटरी हटा दी गई है, तो परावैद्युत डालने के बाद आवेश:
उत्तर: Q’ = 10 μC
क्योंकि बैटरी हटने के बाद आवेश स्थिर रहता है।
भाग 23 : धारिता किन बातों पर निर्भर करती है?
समांतर प्लेट संधारित्र के लिए,
C = εA/d
इससे तीन मुख्य बातें स्पष्ट होती हैं।
1. प्लेट का क्षेत्रफल
A बढ़ाने पर,
C बढ़ती है।
2. प्लेटों के बीच दूरी
d बढ़ाने पर,
C घटती है।
3. माध्यम
ε बढ़ने पर,
C बढ़ती है।
—
4 छोटे Numerical
Numerical 1
यदि A दोगुना हो जाए:
C’ = 2C
—
Numerical 2
यदि d दोगुना हो जाए:
C’ = C/2
—
Numerical 3
यदि A तीन गुना हो जाए:
C’ = 3C
—
Numerical 4
यदि K = 4 का परावैद्युत पूर्ण रूप से डाला जाए:
C’ = 4C
भाग 24 : बहुत महत्वपूर्ण अंतर
1. विभव और धारिता में अंतर
विभव:
किसी बिंदु पर प्रति इकाई आवेश ऊर्जा/कार्य से संबंधित राशि है।
धारिता:
संधारित्र द्वारा आवेश संचित करने की क्षमता को दर्शाती है।
—
2. श्रेणीक्रम और समानांतर संयोजन
श्रेणीक्रम
Q समान रहता है।
V अलग-अलग हो सकता है।
1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …
समानांतर
V समान रहता है।
Q अलग-अलग हो सकता है।
C = C₁ + C₂ + …
अध्याय के सबसे महत्वपूर्ण सूत्र
वैद्युत विभव
V = W/q
बिंदु आवेश का विभव
V = kQ/r
k = 1/(4πε₀)
अनेक आवेशों का विभव
V = V₁ + V₂ + V₃ + …
द्विध्रुव आघूर्ण
p = qd
द्विध्रुव का विभव
V = kp cosθ/r²
विभवान्तर
ΔV = −Ed
विद्युत क्षेत्र और विभव
E = −dV/dr
स्थितिज ऊर्जा
U = qV
दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा
U = kQ₁Q₂/r
संधारित्र की धारिता
C = Q/V
समांतर प्लेट संधारित्र
C = ε₀A/d
परावैद्युत के साथ
C = Kε₀A/d
श्रेणीक्रम संयोजन
1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + 1/C₃ + …
समानांतर संयोजन
C = C₁ + C₂ + C₃ + …
संधारित्र की ऊर्जा
U = 1/2 CV²
U = 1/2 QV
U = Q²/(2C)
ऊर्जा घनत्व
u = 1/2 ε₀E²
Quick Revision — 1 मिनट में पूरा अध्याय
– विभव का अर्थ है प्रति इकाई आवेश कार्य।
– विभव एक अदिश राशि है।
– बिंदु आवेश का विभव दूरी के साथ घटता है।
– अनेक आवेशों के विभव बीजीय रूप से जोड़े जाते हैं।
– द्विध्रुव में बराबर और विपरीत आवेश होते हैं।
– द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा −q से +q की ओर होती है।
– समविभव पृष्ठ पर विभव समान रहता है।
– समविभव पृष्ठ पर आवेश को चलाने में विद्युत क्षेत्र द्वारा कार्य शून्य होता है।
– विद्युत क्षेत्र की दिशा अधिक विभव से कम विभव की ओर होती है।
– चालक के अंदर स्थिर वैद्युत अवस्था में E = 0 होता है।
– चालक के अंदर विभव समान रहता है।
– परावैद्युत लगाने से संधारित्र की धारिता बढ़ती है।
– समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता C = ε₀A/d होती है।
– श्रेणीक्रम में धारिता घटती है।
– समानांतर में धारिता बढ़ती है।
– संधारित्र ऊर्जा को विद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित करता है।
– बैटरी जुड़ी हो तो परावैद्युत डालने पर V स्थिर रहता है।
– बैटरी हटाई हो तो परावैद्युत डालने पर Q स्थिर रहता है।
Chapter पढ़ने के बाद खुद से ये सवाल जरूर पूछें
1.
वैद्युत विभव की परिभाषा क्या है और इसका SI मात्रक क्या है?
2.
बिंदु आवेश के कारण विभव का सूत्र कैसे प्राप्त किया जाता है?
3.
धनात्मक और ऋणात्मक आवेश के कारण विभव में क्या अंतर होता है?
4.
अनेक आवेशों के कारण कुल विभव कैसे ज्ञात किया जाता है?
5.
वैद्युत द्विध्रुव क्या है?
6.
द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा किस ओर होती है?
7.
द्विध्रुव के विषुवतीय बिंदु पर विभव शून्य क्यों होता है?
8.
समविभव पृष्ठ क्या है?
9.
समविभव पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र द्वारा किया गया कार्य शून्य क्यों होता है?
10.
विद्युत क्षेत्र और विभव के बीच क्या संबंध है?
11.
स्थिर वैद्युत अवस्था में चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य क्यों होता है?
12.
परावैद्युत रखने से संधारित्र की धारिता क्यों बढ़ती है?
13.
संधारित्र की धारिता किन-किन बातों पर निर्भर करती है?
14.
श्रेणीक्रम में जुड़े संधारित्रों में कौन-सी राशि समान रहती है?
15.
समानांतर जुड़े संधारित्रों में कौन-सी राशि समान रहती है?
16.
संधारित्र में संचित ऊर्जा के तीन सूत्र लिखिए।
17.
बैटरी जुड़ी होने और बैटरी हटाने की स्थिति में परावैद्युत डालने पर क्या अंतर पड़ता है?
18.
यदि प्लेटों का क्षेत्रफल दोगुना कर दिया जाए तो धारिता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
19.
यदि प्लेटों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए तो धारिता कितनी हो जाएगी?
20.
संधारित्र में संचित ऊर्जा विभवान्तर पर किस प्रकार निर्भर करती है?
परीक्षा के लिए खास बातें
याद रखें:
1. विभव अदिश राशि है, जबकि विद्युत क्षेत्र सदिश राशि है।
2. विद्युत क्षेत्र की दिशा अधिक विभव से कम विभव की ओर होती है।
3. समविभव पृष्ठ और विद्युत क्षेत्र की दिशाएँ एक-दूसरे के लंबवत होती हैं।
4. स्थिर वैद्युत अवस्था में चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
5. श्रेणीक्रम में संधारित्रों पर आवेश समान रहता है।
6. समानांतर संयोजन में संधारित्रों पर विभवान्तर समान रहता है।
7. संधारित्र की धारिता केवल Q और V के वर्तमान मान पर निर्भर बताकर नहीं छोड़ी जाती; दिए गए भौतिक विन्यास में उसका मान प्लेटों के आकार, दूरी और माध्यम से निर्धारित होता है।
8. बैटरी जुड़ी हो तो विभवान्तर स्थिर रहता है।
9. बैटरी हटाने के बाद संधारित्र का कुल आवेश स्थिर रहता है।
10. संधारित्र की ऊर्जा का सबसे उपयोगी रूप प्रश्न के दिए हुए आँकड़ों के अनुसार चुनना चाहिए:
U = 1/2 CV²
U = 1/2 QV
U = Q²/(2C)
—
अंतिम Quick Formula Box
V = W/q
V = kQ/r
k = 1/(4πε₀)
p = qd
V = kp cosθ/r²
ΔV = −Ed
E = −dV/dr
U = qV
U = kQ₁Q₂/r
C = Q/V
C = ε₀A/d
C = Kε₀A/d
1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + …
C = C₁ + C₂ + …
U = 1/2 CV²
U = 1/2 QV
U = Q²/(2C)
u = 1/2 ε₀E²
एक लाइन में पूरा अध्याय
आवेश से विभव बनता है, विभव के अंतर से ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र का संबंध समझ आता है, जबकि संधारित्र उसी विद्युत व्यवस्था में आवेश और ऊर्जा को संचित करने का काम करता है।