अध्याय 8 — ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल ( aldehyde, ketone and carboxylic acid )

★ अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

1. कार्बोनिल यौगिक (Carbonyl Compounds)

वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बन और ऑक्सीजन के बीच द्विबंध C=O उपस्थित होता है, कार्बोनिल यौगिक कहलाते हैं।

मुख्य समूह: >C=O

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2. ऐल्डिहाइड (Aldehyde)

वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बोनिल समूह के कार्बन से कम-से-कम एक हाइड्रोजन जुड़ा होता है, ऐल्डिहाइड कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: R–CHO

उदाहरण: CH₃CHO

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3. कीटोन (Ketone)

वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बोनिल समूह का कार्बन दो कार्बनिक समूहों से जुड़ा होता है, कीटोन कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: R–CO–R′

उदाहरण: CH₃COCH₃

—

4. कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid)

वे कार्बनिक यौगिक जिनमें –COOH समूह उपस्थित होता है, कार्बोक्सिलिक अम्ल कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: R–COOH

उदाहरण: CH₃COOH

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5. कार्बोक्सिल समूह (Carboxyl Group)

कार्बोनिल समूह और हाइड्रॉक्सिल समूह के संयुक्त रूप –COOH को कार्बोक्सिल समूह कहते हैं।

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6. फॉर्मिल समूह (Formyl Group)

ऐल्डिहाइड का क्रियात्मक समूह –CHO फॉर्मिल समूह कहलाता है।

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7. कार्बोनिल समूह (Carbonyl Group)

कार्बन और ऑक्सीजन के बीच उपस्थित द्विबंधित समूह >C=O कार्बोनिल समूह कहलाता है।

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8. न्यूक्लियोफिलिक योग अभिक्रिया (Nucleophilic Addition Reaction)

कार्बोनिल यौगिक के कार्बोनिल कार्बन पर न्यूक्लियोफाइल के जुड़ने की अभिक्रिया को न्यूक्लियोफिलिक योग अभिक्रिया कहते हैं।

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9. ऑक्सीकरण (Oxidation)

ऐल्डिहाइड के ऑक्सीकरण से सामान्यतः संबंधित कार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है।

R–CHO + [O] → R–COOH

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10. अपचयन (Reduction)

ऐल्डिहाइड या कीटोन में कार्बोनिल समूह का अपचयन करने पर क्रमशः प्राथमिक या द्वितीयक ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।

R–CHO → R–CH₂OH

R–CO–R′ → R–CHOH–R′

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11. ऐल्डोल संघनन (Aldol Condensation)

वे ऐल्डिहाइड या कीटोन जिनमें α-हाइड्रोजन उपस्थित हो, तनु क्षार की उपस्थिति में आपस में अभिक्रिया करके β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या β-हाइड्रॉक्सी कीटोन बनाते हैं; आगे जल निकलने पर असंतृप्त यौगिक बन सकता है। इस प्रक्रिया को ऐल्डोल संघनन कहते हैं।

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12. कैनिज़ारो अभिक्रिया (Cannizzaro Reaction)

वे ऐल्डिहाइड जिनमें α-हाइड्रोजन नहीं होता, सांद्र क्षार की उपस्थिति में एक साथ ऑक्सीकरण और अपचयन की अभिक्रिया देते हैं। इसे कैनिज़ारो अभिक्रिया कहते हैं।

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13. टॉलेंस अभिकर्मक (Tollens’ Reagent)

अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट से प्राप्त डायमीन सिल्वर(I) आयन का विलयन टॉलेंस अभिकर्मक कहलाता है।

यह ऐल्डिहाइड की पहचान में उपयोगी है।

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14. फेलिंग विलयन (Fehling’s Solution)

क्षारीय माध्यम में कॉपर(II) आयनों वाला अभिकर्मक फेलिंग विलयन कहलाता है। यह कुछ ऐल्डिहाइडों की पहचान के लिए प्रयोग किया जाता है।

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15. आयोडोफॉर्म परीक्षण (Iodoform Test)

ऐसा परीक्षण जिसमें उपयुक्त मिथाइल कीटोन या उससे संबंधित यौगिक आयोडीन तथा क्षार के साथ पीले रंग का आयोडोफॉर्म अवक्षेप देते हैं, आयोडोफॉर्म परीक्षण कहलाता है।

CHCl₃? नहीं — आयोडोफॉर्म का सही सूत्र CHI₃ है।

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16. α-हाइड्रोजन (Alpha Hydrogen)

कार्बोनिल समूह के ठीक बगल वाले α-कार्बन से जुड़ा हाइड्रोजन α-हाइड्रोजन कहलाता है।

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17. अम्लीय प्रकृति (Acidic Nature)

कार्बोक्सिलिक अम्ल H⁺ आयन देने की क्षमता रखते हैं, इसलिए वे अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित करते हैं।

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18. एस्टरीकरण (Esterification)

कार्बोक्सिलिक अम्ल की ऐल्कोहॉल के साथ अम्लीय माध्यम में अभिक्रिया से एस्टर बनने की प्रक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं।

R–COOH + R′–OH ⇌ R–COOR′ + H₂O

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19. डिकार्बोक्सिलीकरण (Decarboxylation)

कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण से कार्बन डाइऑक्साइड का निकलना डिकार्बोक्सिलीकरण कहलाता है।

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20. हैलोफॉर्म अभिक्रिया (Haloform Reaction)

मिथाइल कीटोन या उससे संबंधित यौगिकों की हैलोजन तथा क्षार के साथ अभिक्रिया से हैलोफॉर्म बनने की प्रक्रिया को हैलोफॉर्म अभिक्रिया कहते हैं।

★ 1. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन का नामकरण ( Nomenclature of Aldehydes and Ketones )

परिभाषा

ऐल्डिहाइड के नाम में मुख्य शृंखला के अंत में –al तथा कीटोन के नाम में –one प्रत्यय लगाया जाता है।

ऐल्डिहाइड

HCHO → मेथेनल (Methanal)

CH₃CHO → एथेनल (Ethanal)

CH₃CH₂CHO → प्रोपेनल (Propanal)

कीटोन

CH₃COCH₃ → प्रोपेनोन (Propanone)

CH₃COCH₂CH₃ → ब्यूटेन-2-ओन (Butan-2-one)

मुख्य बिंदु

– ऐल्डिहाइड में –CHO समूह होता है।
– कीटोन में >C=O समूह शृंखला के बीच में होता है।
– ऐल्डिहाइड का प्रत्यय –al।
– कीटोन का प्रत्यय –one।

उदाहरण

i. HCHO → मेथेनल
ii. CH₃CHO → एथेनल
iii. CH₃COCH₃ → प्रोपेनोन

★ 2. कार्बोक्सिलिक अम्ल का नामकरण (Nomenclature of Carboxylic Acids)

परिभाषा

कार्बोक्सिलिक अम्लों के IUPAC नाम में मुख्य शृंखला के अंत में –oic acid लगाया जाता है।

उदाहरण

HCOOH → मेथेनोइक अम्ल

CH₃COOH → एथेनोइक अम्ल

CH₃CH₂COOH → प्रोपेनोइक अम्ल

CH₃CH₂CH₂COOH → ब्यूटेनोइक अम्ल

तीन महत्वपूर्ण उदाहरण

i. HCOOH → Methanoic acid
ii. CH₃COOH → Ethanoic acid
iii. CH₃CH₂COOH → Propanoic acid

★ 3. कार्बोनिल समूह की प्रकृति (Nature of Carbonyl Group)

कार्बोनिल समूह में C=O बंध ध्रुवीय होता है।

ऑक्सीजन अधिक विद्युतऋणात्मक होने के कारण उस पर आंशिक ऋण आवेश और कार्बन पर आंशिक धन आवेश आता है।

इसलिए कार्बोनिल कार्बन पर न्यूक्लियोफाइल का आक्रमण आसानी से हो सकता है।

मुख्य बिंदु

– C=O बंध ध्रुवीय है।
– कार्बोनिल कार्बन इलेक्ट्रॉन की कमी वाला होता है।
– न्यूक्लियोफाइल कार्बोनिल कार्बन पर आक्रमण करता है।
– इसी कारण ऐल्डिहाइड और कीटोन में न्यूक्लियोफिलिक योग अभिक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं।

उदाहरण

 i. CH₃CHO
 ii. CH₃COCH₃
 iii. C₆H₅CHO

★ 4. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन की तैयारी (Preparation of Aldehydes and Ketones)

(क) प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण

प्राथमिक ऐल्कोहॉल के नियंत्रित ऑक्सीकरण से ऐल्डिहाइड प्राप्त किया जा सकता है।

R–CH₂OH + [O] → R–CHO + H₂O

उदाहरण

CH₃CH₂OH + [O] → CH₃CHO + H₂O

—

(ख) द्वितीयक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण

द्वितीयक ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण से कीटोन बनता है।

R–CHOH–R′ + [O] → R–CO–R′ + H₂O

उदाहरण

CH₃CHOHCH₃ + [O] → CH₃COCH₃ + H₂O

चार महत्वपूर्ण उदाहरण

i. CH₃CH₂OH → CH₃CHO

ii. CH₃CHOHCH₃ → CH₃COCH₃

iii. CH₃CH₂CH₂OH → CH₃CH₂CHO

iv. CH₃CH₂CHOHCH₃ → CH₃CH₂COCH₃

★ 5. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन के भौतिक गुण (Physical Properties)

मुख्य बिंदु

– छोटे ऐल्डिहाइड और कीटोन सामान्यतः रंगहीन पदार्थ होते हैं।
– कार्बोनिल समूह के कारण इनमें ध्रुवीयता होती है।
– छोटे सदस्य जल में कुछ मात्रा में घुलनशील होते हैं।
– अणुभार बढ़ने पर जल में विलेयता सामान्यतः घटती है।
– ऐल्डिहाइड और कीटोन में स्वयं के बीच O–H वाला हाइड्रोजन बंध नहीं बनता।

उदाहरण

i. मेथेनल
ii. एथेनल
iii. प्रोपेनोन

★ 6. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन की न्यूक्लियोफिलिक योग अभिक्रिया (Nucleophilic Addition)

परिभाषा

कार्बोनिल यौगिक के कार्बोनिल कार्बन पर न्यूक्लियोफाइल के जुड़ने से होने वाली अभिक्रिया को न्यूक्लियोफिलिक योग अभिक्रिया कहते हैं।

सामान्य रूप

R₂C=O + Nu⁻ → R₂C(O⁻)–Nu

बाद में H⁺ मिलने पर:

R₂C(O⁻)–Nu + H⁺ → R₂C(OH)–Nu

मुख्य बिंदु

– अभिक्रिया कार्बोनिल कार्बन पर होती है।
– न्यूक्लियोफाइल इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करता है।
– C=O बंध की ध्रुवीयता इस अभिक्रिया में महत्वपूर्ण है।

★ 7. HCN का योग (Addition of HCN)

ऐल्डिहाइड और कुछ कीटोन HCN के साथ अभिक्रिया करके सायनोहाइड्रिन बनाते हैं।

R–CHO + HCN → R–CH(OH)–CN

उदाहरण

CH₃CHO + HCN → CH₃CH(OH)CN

चार उदाहरण

i. HCHO + HCN → HOCH₂CN

ii. CH₃CHO + HCN → CH₃CH(OH)CN

iii. C₂H₅CHO + HCN → C₂H₅CH(OH)CN

iv. CH₃COCH₃ + HCN → संबंधित सायनोहाइड्रिन

★ 8. NaHSO₃ का योग (Addition of Sodium Bisulphite)

कुछ ऐल्डिहाइड और कीटोन सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट से योग अभिक्रिया देते हैं।

सामान्य रूप

R₂C=O + NaHSO₃ → कार्बोनिल यौगिक का बाइसल्फाइट योग उत्पाद

मुख्य बात

यह अभिक्रिया कुछ कार्बोनिल यौगिकों के पृथक्करण और पहचान में उपयोगी होती है।

उदाहरण

i. CH₃CHO + NaHSO₃ → योग उत्पाद

ii. C₂H₅CHO + NaHSO₃ → योग उत्पाद

iii. CH₃COCH₃ + NaHSO₃ → योग उत्पाद

iv. उपयुक्त ऐल्डिहाइड + NaHSO₃ → बाइसल्फाइट योग उत्पाद

★ 9. ऑक्साइम निर्माण (Oxime Formation)

ऐल्डिहाइड या कीटोन की हाइड्रॉक्सिलअमीन (NH₂OH) से अभिक्रिया करने पर ऑक्साइम बनता है।

सामान्य अभिक्रिया

R₂C=O + NH₂OH → R₂C=NOH + H₂O

उदाहरण

CH₃CHO + NH₂OH → CH₃CH=NOH + H₂O

चार उदाहरण

i. HCHO + NH₂OH → H₂C=NOH + H₂O

ii. CH₃CHO + NH₂OH → CH₃CH=NOH + H₂O

iii. CH₃COCH₃ + NH₂OH → संबंधित ऑक्साइम

iv. C₆H₅CHO + NH₂OH → बेंज़ाल्डिहाइड ऑक्साइम

★ 10. ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण (Oxidation of Aldehydes)

ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण करने पर संबंधित कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त होता है।

सामान्य अभिक्रिया

R–CHO + [O] → R–COOH

उदाहरण

CH₃CHO + [O] → CH₃COOH

चार उदाहरण

i. HCHO + [O] → HCOOH

ii. CH₃CHO + [O] → CH₃COOH

iii. C₂H₅CHO + [O] → C₂H₅COOH

iv. C₆H₅CHO + [O] → C₆H₅COOH

याद रखें

Aldehyde → Oxidation → Carboxylic acid

★ 11. टॉलेंस परीक्षण (Tollens’ Test)

परिभाषा

ऐल्डिहाइड टॉलेंस अभिकर्मक को अपचयित करके धात्विक चाँदी देता है, जिससे परखनली की दीवार पर चमकीली चाँदी की परत बन सकती है।

मुख्य बात

ऐल्डिहाइड → सिल्वर मिरर टेस्ट

कीटोन सामान्यतः यह परीक्षण नहीं देते।

परीक्षा में लिखें

ऐल्डिहाइड टॉलेंस अभिकर्मक को अपचयित करके सिल्वर आयन को धात्विक चाँदी में बदल देता है।

उदाहरण

i. मेथेनल → सिल्वर मिरर

ii. एथेनल → सिल्वर मिरर

iii. प्रोपेनल → सिल्वर मिरर

iv. बेंज़ाल्डिहाइड → सिल्वर मिरर

★ 12. फेलिंग परीक्षण (Fehling’s Test)

कुछ ऐल्डिहाइड फेलिंग विलयन के साथ अभिक्रिया करके लाल/ईंट-लाल Cu₂O का अवक्षेप देते हैं।

मुख्य बिंदु

– यह ऐल्डिहाइड की पहचान में उपयोगी है।
– Cu₂O का ईंट-लाल अवक्षेप महत्वपूर्ण संकेत है।
– सभी कीटोन सामान्यतः यह परीक्षण नहीं देते।

याद रखने का तरीका

Fehling → Brick-red Cu₂O

★ 13. कीटोन का अपचयन (Reduction of Ketones)

कीटोन के अपचयन से द्वितीयक ऐल्कोहॉल बनता है।

R–CO–R′ + 2[H] → R–CHOH–R′

उदाहरण

CH₃COCH₃ + 2[H] → CH₃CHOHCH₃

चार उदाहरण

i. CH₃COCH₃ → प्रोपेन-2-ऑल

ii. CH₃COCH₂CH₃ → ब्यूटेन-2-ऑल

iii. C₆H₅COCH₃ → संबंधित द्वितीयक ऐल्कोहॉल

iv. R–CO–R′ → R–CHOH–R′

★ 14. ऐल्डिहाइड का अपचयन (Reduction of Aldehydes)

ऐल्डिहाइड के अपचयन से प्राथमिक ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।

R–CHO + 2[H] → R–CH₂OH

उदाहरण

CH₃CHO + 2[H] → CH₃CH₂OH

याद रखें

Aldehyde → Reduction → Primary alcohol

Ketone → Reduction → Secondary alcohol

★ 15. क्लेमेन्सन अपचयन (Clemmensen Reduction)

ऐल्डिहाइड या कीटोन के कार्बोनिल समूह को CH₂ समूह में बदलने की प्रक्रिया को क्लेमेन्सन अपचयन कहते हैं।

Zn-Hg / HCl

सामान्य रूप

R–CO–R′ → R–CH₂–R′

उदाहरण

CH₃COCH₃ → CH₃CH₂CH₃

मुख्य बिंदु

– कार्बोनिल समूह हटकर CH₂ में बदलता है।
– Zn-Hg और HCl का प्रयोग किया जाता है।
– यह अम्लीय माध्यम में होने वाला अपचयन है।

★ 16. वोल्फ-किश्नर अपचयन (Wolff–Kishner Reduction)

ऐल्डिहाइड या कीटोन को हाइड्राजोन में बदलकर क्षारीय माध्यम में गर्म करने पर कार्बोनिल समूह CH₂ में बदल जाता है।

NH₂NH₂ / KOH, ऊष्मा

सामान्य रूप

R–CO–R′ → R–CH₂–R′

मुख्य अंतर

Clemmensen → अम्लीय माध्यम

Wolff–Kishner → क्षारीय माध्यम

यह अंतर बोर्ड परीक्षा में बहुत महत्वपूर्ण है।

★ 17. ऐल्डोल संघनन (Aldol Condensation)

परिभाषा

α-हाइड्रोजन वाले ऐल्डिहाइड या कीटोन तनु क्षार की उपस्थिति में आपस में अभिक्रिया करके β-हाइड्रॉक्सी कार्बोनिल यौगिक बनाते हैं। आगे जल निकलने पर α,β-असंतृप्त यौगिक बन सकता है।

उदाहरण

2CH₃CHO → CH₃CH(OH)CH₂CHO

यह 3-hydroxybutanal है।

गर्म करने पर:

CH₃CH(OH)CH₂CHO → CH₃CH=CHCHO + H₂O

मुख्य बिंदु

– α-हाइड्रोजन आवश्यक है।
– तनु NaOH जैसे क्षार की उपस्थिति महत्वपूर्ण है।
– पहले β-हाइड्रॉक्सी यौगिक बनता है।
– आगे जल निकल सकता है।

चार उपयोगी उदाहरण

i. एथेनल → ऐल्डोल

ii. प्रोपेनल → संबंधित संघनन उत्पाद

iii. उपयुक्त α-H वाला कीटोन → ऐल्डोल उत्पाद

iv. α-H युक्त दो समान कार्बोनिल यौगिक → संघनन उत्पाद

★ 18. कैनिज़ारो अभिक्रिया (Cannizzaro Reaction)

परिभाषा

α-हाइड्रोजन रहित ऐल्डिहाइड सांद्र NaOH या KOH की उपस्थिति में एक साथ ऑक्सीकरण और अपचयन करते हैं। इसे कैनिज़ारो अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण

2C₆H₅CHO + NaOH → C₆H₅CH₂OH + C₆H₅COONa

यहाँ:

एक बेंज़ाल्डिहाइड → अपचयित होकर बेंज़िल ऐल्कोहॉल

दूसरा बेंज़ाल्डिहाइड → ऑक्सीकृत होकर सोडियम बेंजोएट

सबसे जरूरी शर्त

α-हाइड्रोजन नहीं होना चाहिए।

चार उदाहरणों की पहचान

i. HCHO → कैनिज़ारो दे सकता है

ii. C₆H₅CHO → कैनिज़ारो दे सकता है

iii. CH₃CHO → सामान्यतः कैनिज़ारो नहीं; इसमें α-H है

iv. α-H रहित ऐल्डिहाइड → कैनिज़ारो संभव

★ 19. आयोडोफॉर्म परीक्षण (Iodoform Test)

परिभाषा

मिथाइल कीटोन तथा कुछ संबंधित यौगिक I₂ और NaOH के साथ अभिक्रिया करके पीले रंग का CHI₃ अवक्षेप देते हैं। इसे आयोडोफॉर्म परीक्षण कहते हैं।

महत्वपूर्ण

आयोडोफॉर्म का सूत्र: CHI₃

उदाहरण

CH₃COCH₃ → CHI₃ + अन्य उत्पाद

मुख्य बिंदु

– पीला अवक्षेप मिलता है।
– अवक्षेप CHI₃ होता है।
– मिथाइल कीटोन इस परीक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
– एथेनॉल भी उपयुक्त परिस्थितियों में आयोडोफॉर्म परीक्षण दे सकता है क्योंकि वह ऑक्सीकृत होकर एथेनल बना सकता है।

★ 20. कार्बोक्सिलिक अम्लों की तैयारी (Preparation of Carboxylic Acids)

ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण

R–CHO + [O] → R–COOH

उदाहरण

CH₃CHO + [O] → CH₃COOH

—

प्राथमिक ऐल्कोहॉल का प्रबल ऑक्सीकरण

R–CH₂OH + [O] → R–COOH

उदाहरण

CH₃CH₂OH + [O] → CH₃COOH

चार उदाहरण

i. CH₃CH₂OH → CH₃COOH

ii. CH₃CH₂CH₂OH → CH₃CH₂COOH

iii. CH₃CHO → CH₃COOH

iv. C₆H₅CHO → C₆H₅COOH

★ 21. कार्बोक्सिलिक अम्लों के भौतिक गुण (Physical Properties)

मुख्य बिंदु

– छोटे कार्बोक्सिलिक अम्ल जल में अच्छी तरह घुल सकते हैं।
– इनमें हाइड्रोजन बंध बनता है।
– इनके क्वथनांक अपेक्षाकृत अधिक होते हैं।
– कार्बन शृंखला बढ़ने पर जल में विलेयता सामान्यतः घटती है।
– निम्न सदस्य तीखी/विशिष्ट गंध वाले हो सकते हैं।

तीन उदाहरण

i. फॉर्मिक अम्ल
ii. एसीटिक अम्ल
iii. प्रोपियोनिक अम्ल

★ 22. कार्बोक्सिलिक अम्ल की अम्लीय प्रकृति (Acidic Nature of Carboxylic Acids)

परिभाषा

कार्बोक्सिलिक अम्ल –COOH समूह से H⁺ आयन दे सकते हैं, इसलिए वे अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित करते हैं।

सामान्य आयनीकरण

R–COOH ⇌ R–COO⁻ + H⁺

अम्लीयता का कारण

H⁺ निकलने के बाद बनने वाला कार्बोक्सिलेट आयन अनुनाद द्वारा स्थिर होता है।

मुख्य बात

Carboxylic acid → H⁺ देता है → Carboxylate ion बनता है → Resonance stability

★ 23. कार्बोक्सिलिक अम्ल की NaOH से अभिक्रिया (Reaction with NaOH)

R–COOH + NaOH → R–COONa + H₂O

उदाहरण

CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O

चार उदाहरण

i. HCOOH + NaOH → HCOONa + H₂O

ii. CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O

iii. C₂H₅COOH + NaOH → C₂H₅COONa + H₂O

iv. C₆H₅COOH + NaOH → C₆H₅COONa + H₂O

★ 24. कार्बोक्सिलिक अम्ल की सक्रिय धातु से अभिक्रिया (Reaction with Active Metals)

कार्बोक्सिलिक अम्ल सक्रिय धातुओं से अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस देते हैं।

सामान्य अभिक्रिया

2R–COOH + 2Na → 2R–COONa + H₂↑

उदाहरण

2CH₃COOH + 2Na → 2CH₃COONa + H₂↑

तीन उदाहरण

i. HCOOH + Na → H₂

ii. CH₃COOH + Na → H₂

iii. C₂H₅COOH + Na → H₂

★ 25. एस्टरीकरण (Esterification)

परिभाषा

कार्बोक्सिलिक अम्ल और ऐल्कोहॉल की सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में अभिक्रिया से एस्टर और जल बनने की प्रक्रिया एस्टरीकरण कहलाती है।

सामान्य अभिक्रिया

R–COOH + R′–OH ⇌ R–COOR′ + H₂O

उदाहरण

CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O

यहाँ एथिल एथेनोएट बनता है।

चार उदाहरण

i. CH₃COOH + CH₃OH ⇌ CH₃COOCH₃ + H₂O

ii. CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O

iii. C₂H₅COOH + CH₃OH ⇌ C₂H₅COOCH₃ + H₂O

iv. C₂H₅COOH + C₂H₅OH ⇌ C₂H₅COOC₂H₅ + H₂O

★ 26. कार्बोक्सिलिक अम्ल की PCl₅ से अभिक्रिया (Reaction with PCl₅)

कार्बोक्सिलिक अम्ल PCl₅ से अभिक्रिया करके ऐसिड क्लोराइड बनाता है।

R–COOH + PCl₅ → R–COCl + POCl₃ + HCl

उदाहरण

CH₃COOH + PCl₅ → CH₃COCl + POCl₃ + HCl

मुख्य बात

–OH समूह की जगह Cl आ जाता है।

★ 27. सोडा-लाइम द्वारा डिकार्बोक्सिलीकरण (Decarboxylation)

कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम लवण को सोडा-लाइम के साथ गर्म करने पर एक कार्बन कम वाला ऐल्केन प्राप्त होता है।

सामान्य अभिक्रिया

R–COONa + NaOH → R–H + Na₂CO₃

सोडा-लाइम = NaOH + CaO

उदाहरण

CH₃COONa + NaOH → CH₄ + Na₂CO₃

चार उदाहरण

i. CH₃COONa → CH₄

ii. C₂H₅COONa → C₂H₆

iii. C₃H₇COONa → C₃H₈

iv. C₆H₅COONa → C₆H₆

याद रखें

Decarboxylation → एक carbon कम

★ 28. कार्बोक्सिलिक अम्ल का अपचयन (Reduction of Carboxylic Acids)

कार्बोक्सिलिक अम्ल का प्रबल अपचयन करने पर प्राथमिक ऐल्कोहॉल प्राप्त किया जा सकता है।

R–COOH → R–CH₂OH

मुख्य बात

कार्बोक्सिलिक अम्ल के अपचयन में सामान्यतः LiAlH₄ जैसे प्रबल अपचायक का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण

CH₃COOH → CH₃CH₂OH

★ 29. कार्बोक्सिलिक अम्ल की अम्लीयता को प्रभावित करने वाले कारक

कार्बोक्सिलिक अम्ल की अम्लीयता मुख्यतः उसके संरचनात्मक समूहों से प्रभावित होती है।

इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह

–I प्रभाव द्वारा अम्लीयता बढ़ा सकते हैं।

इलेक्ट्रॉन देने वाले समूह

+I प्रभाव द्वारा अम्लीयता घटा सकते हैं।

उदाहरण

Cl–CH₂–COOH, CH₃–COOH की तुलना में अधिक अम्लीय होता है।

कारण: Cl का –I प्रभाव कार्बोक्सिलेट आयन को अधिक स्थिर करता है।

★ 30. ऐल्डिहाइड और कीटोन में अंतर (Difference between Aldehydes and Ketones)

आधार                          | ऐल्डिहाइड                              | कीटोन
सामान्य सूत्र                  | R–CHO                                   | R–CO–R′
कार्बोनिल की स्थिति     | शृंखला के अंत में                      | शृंखला के बीच में
टॉलेंस परीक्षण             | सामान्यतः धनात्मक                  | सामान्यतः ऋणात्मक
ऑक्सीकरण                |आसानी से अम्ल देता है               |अपेक्षाकृत कठिन
उदाहरण                     | CH₃CHO                                    | CH₃COCH₃

★ 31. ऐल्डिहाइड और कार्बोक्सिलिक अम्ल में अंतर

आधार              | ऐल्डिहाइड         | कार्बोक्सिलिक अम्ल
समूह                | –CHO                | –COOH
उदाहरण          | CH₃CHO            | CH₃COOH
ऑक्सीकरण    | अम्ल देता है         | आगे सामान्यतः आसानी से ऑक्सीकृत नहीं
अम्लीयता         | सामान्यतः नहीं    | अम्लीय

★ 32. कीटोन और कार्बोक्सिलिक अम्ल में अंतर

कीटोन: R–CO–R′

कार्बोक्सिलिक अम्ल: R–COOH

कीटोन में कार्बोनिल समूह दो कार्बनिक समूहों से जुड़ा होता है, जबकि कार्बोक्सिलिक अम्ल में कार्बोनिल कार्बन के साथ –OH समूह भी जुड़ा होता है।

★ 33. सबसे महत्वपूर्ण अपचयन — एक नजर में

ऐल्डिहाइड

R–CHO + 2[H] → R–CH₂OH

उत्पाद: प्राथमिक ऐल्कोहॉल

कीटोन

R–CO–R′ + 2[H] → R–CHOH–R′

उत्पाद: द्वितीयक ऐल्कोहॉल

कार्बोनिल समूह का पूर्ण अपचयन

R–CO–R′ → R–CH₂–R′

Clemmensen: Zn-Hg/HCl

Wolff–Kishner: NH₂NH₂/KOH

★ 34. बहुत महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ — एक साथ

ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण

R–CHO + [O] → R–COOH

ऐल्डिहाइड का अपचयन

R–CHO + 2[H] → R–CH₂OH

कीटोन का अपचयन

R–CO–R′ + 2[H] → R–CHOH–R′

एस्टरीकरण

R–COOH + R′–OH ⇌ R–COOR′ + H₂O

NaOH से कार्बोक्सिलिक अम्ल

R–COOH + NaOH → R–COONa + H₂O

सक्रिय धातु से

2R–COOH + 2Na → 2R–COONa + H₂↑

डिकार्बोक्सिलीकरण

R–COONa + NaOH → R–H + Na₂CO₃

कैनिज़ारो

2RCHO + NaOH → RCH₂OH + RCOONa

शर्त: α-H नहीं

ऐल्डोल

2CH₃CHO → CH₃CH(OH)CH₂CHO

आगे:

CH₃CH(OH)CH₂CHO → CH₃CH=CHCHO + H₂O

★ 35. Quick Revision — पूरे अध्याय का सार

कार्बोनिल समूह → >C=O

ऐल्डिहाइड → R–CHO

कीटोन → R–CO–R′

कार्बोक्सिलिक अम्ल → R–COOH

Aldehyde oxidation → Acid

Aldehyde reduction → Primary alcohol

Ketone reduction → Secondary alcohol

Aldol → α-H आवश्यक

Cannizzaro → α-H नहीं होना चाहिए

Tollens → Silver mirror

Fehling → Brick-red Cu₂O

Iodoform → पीला CHI₃

Esterification → Acid + Alcohol → Ester + Water

Decarboxylation → एक carbon कम

Clemmensen → Zn-Hg/HCl

Wolff–Kishner → NH₂NH₂/KOH

★ 36. पूरे अध्याय की जरूरी अभिक्रियाएँ एक जगह

1. प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण

R–CH₂OH + [O] → R–CHO + H₂O

2. ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण

R–CHO + [O] → R–COOH

3. ऐल्डिहाइड का अपचयन

R–CHO + 2[H] → R–CH₂OH

4. कीटोन का अपचयन

R–CO–R′ + 2[H] → R–CHOH–R′

5. HCN का योग

R–CHO + HCN → R–CH(OH)CN

6. ऑक्साइम निर्माण

R₂C=O + NH₂OH → R₂C=NOH + H₂O

7. एस्टरीकरण

R–COOH + R′–OH ⇌ R–COOR′ + H₂O

8. NaOH से अम्ल

R–COOH + NaOH → R–COONa + H₂O

9. सक्रिय धातु से अम्ल

2R–COOH + 2Na → 2R–COONa + H₂↑

10. डिकार्बोक्सिलीकरण

R–COONa + NaOH → R–H + Na₂CO₃

11. कैनिज़ारो

2RCHO + NaOH → RCH₂OH + RCOONa

12. ऐल्डोल

2CH₃CHO → CH₃CH(OH)CH₂CHO

13. क्लेमेन्सन

R–CO–R′ → R–CH₂–R′

14. वोल्फ-किश्नर

R–CO–R′ → R–CH₂–R′

★ 37. बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्न

1. ऐल्डिहाइड और कीटोन क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

2. कार्बोनिल समूह की प्रकृति समझाइए।

3. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन की न्यूक्लियोफिलिक योग अभिक्रिया समझाइए।

4. ऐल्डिहाइड के ऑक्सीकरण की अभिक्रिया लिखिए।

5. ऐल्डिहाइड और कीटोन के अपचयन को समझाइए।

6. टॉलेंस परीक्षण क्या है?

7. फेलिंग परीक्षण द्वारा ऐल्डिहाइड की पहचान कैसे करते हैं?

8. ऐल्डोल संघनन को उदाहरण सहित समझाइए।

9. कैनिज़ारो अभिक्रिया क्या है? इसकी आवश्यक शर्त लिखिए।

10. ऐल्डोल और कैनिज़ारो अभिक्रिया में अंतर लिखिए।

11. आयोडोफॉर्म परीक्षण क्या है?

12. कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लीय प्रकृति समझाइए।

13. एस्टरीकरण अभिक्रिया समझाइए।

14. डिकार्बोक्सिलीकरण क्या है?

15. क्लेमेन्सन और वोल्फ-किश्नर अपचयन में अंतर लिखिए।

16. कार्बोक्सिलिक अम्ल के प्रमुख रासायनिक गुण लिखिए।

17. ऐल्डिहाइड और कीटोन में अंतर लिखिए।

18. कार्बोक्सिलिक अम्लों की तैयारी की विधियाँ लिखिए।

19. एस्टरीकरण तथा डिकार्बोक्सिलीकरण की अभिक्रियाएँ लिखिए।

20. α-हाइड्रोजन क्या है? इसका ऐल्डोल एवं कैनिज़ारो अभिक्रिया में क्या महत्व है?

★ 38. स्वयं से पूछें — Self Test

प्रश्न 1

ऐल्डिहाइड का सामान्य सूत्र क्या है?

उत्तर: R–CHO

प्रश्न 2

कीटोन का सामान्य सूत्र क्या है?

उत्तर: R–CO–R′

प्रश्न 3

कार्बोक्सिलिक अम्ल का क्रियात्मक समूह क्या है?

उत्तर: –COOH

प्रश्न 4

कार्बोनिल समूह क्या है?

उत्तर: >C=O

प्रश्न 5

ऐल्डिहाइड के ऑक्सीकरण से क्या बनता है?

उत्तर: कार्बोक्सिलिक अम्ल।

प्रश्न 6

ऐल्डिहाइड के अपचयन से क्या बनता है?

उत्तर: प्राथमिक ऐल्कोहॉल।

प्रश्न 7

कीटोन के अपचयन से क्या बनता है?

उत्तर: द्वितीयक ऐल्कोहॉल।

प्रश्न 8

टॉलेंस परीक्षण में क्या दिखाई देता है?

उत्तर: सिल्वर मिरर।

प्रश्न 9

फेलिंग परीक्षण में कौन-सा अवक्षेप महत्वपूर्ण है?

उत्तर: ईंट-लाल Cu₂O।

प्रश्न 10

आयोडोफॉर्म का सूत्र क्या है?

उत्तर: CHI₃

प्रश्न 11

ऐल्डोल संघनन के लिए क्या आवश्यक है?

उत्तर: α-हाइड्रोजन वाला कार्बोनिल यौगिक।

प्रश्न 12

कैनिज़ारो अभिक्रिया के लिए क्या आवश्यक है?

उत्तर: ऐसा ऐल्डिहाइड जिसमें α-हाइड्रोजन न हो।

प्रश्न 13

एस्टरीकरण में कौन-कौन से पदार्थ अभिक्रिया करते हैं?

उत्तर: कार्बोक्सिलिक अम्ल और ऐल्कोहॉल।

प्रश्न 14

डिकार्बोक्सिलीकरण में क्या निकलता है?

उत्तर: CO₂ कार्बोनेट के रूप में हटता है।

प्रश्न 15

Clemmensen reduction में कौन-से अभिकर्मक लगते हैं?

उत्तर: Zn-Hg/HCl

प्रश्न 16

Wolff–Kishner reduction में कौन-से अभिकर्मक लगते हैं?

उत्तर: NH₂NH₂/KOH तथा ऊष्मा।

★ 39. बोर्ड परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ

गलती 1

ऐल्डिहाइड और कीटोन के सूत्र उलट देना।

सही:

Aldehyde → R–CHO

Ketone → R–CO–R′

—

गलती 2

टॉलेंस परीक्षण को कीटोन का सामान्य परीक्षण लिखना।

सही: सामान्यतः ऐल्डिहाइड सिल्वर मिरर देते हैं।

—

गलती 3

आयोडोफॉर्म का सूत्र गलत लिखना।

सही: CHI₃

—

गलती 4

कैनिज़ारो के लिए α-H की आवश्यकता लिख देना।

सही: Cannizzaro के लिए α-H नहीं होना चाहिए।

—

गलती 5

ऐल्डोल में α-H की आवश्यकता भूल जाना।

सही: Aldol condensation के लिए α-H आवश्यक है।

—

गलती 6

Clemmensen और Wolff–Kishner को उलट देना।

याद रखें:

Clemmensen → Zn-Hg/HCl → अम्लीय

Wolff–Kishner → NH₂NH₂/KOH → क्षारीय

—

गलती 7

एस्टरीकरण में एस्टर का सूत्र गलत लिखना।

सही:

R–COOH + R′–OH ⇌ R–COOR′ + H₂O

—

गलती 8

डिकार्बोक्सिलीकरण में carbon की संख्या न देखना।

याद रखें:
सोडियम कार्बोक्सिलेट से बनने वाला ऐल्केन मूल अम्ल की कार्बन शृंखला से एक carbon कम रखता है।

★ 40. इस अध्याय की सबसे जरूरी बातें

★ R–CHO = ऐल्डिहाइड

★ R–CO–R′ = कीटोन

★ R–COOH = कार्बोक्सिलिक अम्ल

★ Aldehyde oxidation → Carboxylic acid

★ Aldehyde reduction → Primary alcohol

★ Ketone reduction → Secondary alcohol

★ Tollens → Silver mirror

★ Fehling → Brick-red Cu₂O

★ Iodoform → CHI₃ का पीला अवक्षेप

★ Aldol → α-H चाहिए

★ Cannizzaro → α-H नहीं चाहिए

★ Esterification → Acid + Alcohol

★ Decarboxylation → एक carbon कम

★ Clemmensen → acidic medium

★ Wolff–Kishner → basic medium

★ 41. अंतिम 1-मिनट रिवीजन

अगर परीक्षा से ठीक पहले केवल कुछ बातें देखनी हों, तो ये जरूर देखो:

CHO → Aldehyde

CO → Ketone

COOH → Carboxylic acid

Aldehyde + [O] → Acid

Aldehyde + [H] → Primary alcohol

Ketone + [H] → Secondary alcohol

Tollens → Silver mirror

Fehling → Brick-red Cu₂O

Iodoform → CHI₃

Aldol → α-H present

Cannizzaro → α-H absent

Acid + Alcohol ⇌ Ester + Water

Sodium carboxylate + Soda-lime → Alkane

Clemmensen → Zn-Hg/HCl

Wolff–Kishner → NH₂NH₂/KOH

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