अध्याय 10 — जैव अणु (Biomolecules)

★ भाग 1 — पूरे अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

1. जैव अणु (Biomolecules)

जीवित कोशिकाओं में पाए जाने वाले तथा जीवन की विभिन्न जैविक क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कार्बनिक यौगिकों को जैव अणु कहते हैं।

2. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)

वे कार्बनिक यौगिक जो सामान्यतः कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बने होते हैं तथा जिनमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात प्रायः जल के समान होता है, कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं।

3. मोनोसैकेराइड (Monosaccharides)

कार्बोहाइड्रेट की वे सबसे सरल इकाइयाँ जिनका जल-अपघटन करने पर इससे सरल कार्बोहाइड्रेट प्राप्त नहीं होता, मोनोसैकेराइड कहलाती हैं।

4. ओलिगोसैकेराइड (Oligosaccharides)

वे कार्बोहाइड्रेट जो जल-अपघटन पर सीमित संख्या में, सामान्यतः 2 से 10 तक, मोनोसैकेराइड इकाइयाँ देते हैं, ओलिगोसैकेराइड कहलाते हैं।

5. डाइसैकेराइड (Disaccharides)

वे कार्बोहाइड्रेट जो जल-अपघटन पर दो मोनोसैकेराइड अणु देते हैं, डाइसैकेराइड कहलाते हैं।

6. पॉलीसैकेराइड (Polysaccharides)

वे जटिल कार्बोहाइड्रेट जो जल-अपघटन पर बहुत-सी मोनोसैकेराइड इकाइयाँ देते हैं, पॉलीसैकेराइड कहलाते हैं।

7. एल्डोज (Aldose)

वे मोनोसैकेराइड जिनमें खुले-श्रृंखला रूप में ऐल्डिहाइड समूह (–CHO) उपस्थित होता है, एल्डोज कहलाते हैं।

8. कीटोज (Ketose)

वे मोनोसैकेराइड जिनमें खुले-श्रृंखला रूप में कीटोन समूह (>C=O) उपस्थित होता है, कीटोज कहलाते हैं।

9. अपचायक शर्करा (Reducing Sugar)

वे शर्कराएँ जिनमें मुक्त ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह के कारण अपचायक गुण होता है, अपचायक शर्करा कहलाती हैं।

10. अनपचायक शर्करा (Non-reducing Sugar)

वे शर्कराएँ जिनमें मुक्त अपचायक समूह उपलब्ध नहीं होता और जो सामान्य परिस्थितियों में अपचायक परीक्षण नहीं देतीं, अनपचायक शर्करा कहलाती हैं।

11. प्रोटीन (Proteins)

अमीनो अम्लों से बने उच्च आणविक द्रव्यमान वाले प्राकृतिक बहुलकों को प्रोटीन कहते हैं। ये जीवों की संरचना और जैविक क्रियाओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

12. अमीनो अम्ल (Amino Acids)

वे कार्बनिक यौगिक जिनमें एक अमीनो समूह (–NH₂) तथा एक कार्बोक्सिल समूह (–COOH) उपस्थित होता है, अमीनो अम्ल कहलाते हैं।

13. α-अमीनो अम्ल (α-Amino Acids)

वे अमीनो अम्ल जिनमें अमीनो समूह कार्बोक्सिल समूह के ठीक अगले अर्थात् α-कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है, α-अमीनो अम्ल कहलाते हैं।

14. पेप्टाइड बंध (Peptide Bond)

एक अमीनो अम्ल के –COOH समूह और दूसरे अमीनो अम्ल के –NH₂ समूह के बीच जल के एक अणु के निकलने से बनने वाला –CO–NH– बंध पेप्टाइड बंध कहलाता है।

15. डाइपेप्टाइड (Dipeptide)

दो अमीनो अम्लों के पेप्टाइड बंध द्वारा जुड़ने से बने यौगिक को डाइपेप्टाइड कहते हैं।

16. पॉलीपेप्टाइड (Polypeptide)

अनेक अमीनो अम्लों के पेप्टाइड बंध द्वारा जुड़ने से बनी लंबी श्रृंखला को पॉलीपेप्टाइड कहते हैं।

17. प्रोटीन की प्राथमिक संरचना (Primary Structure)

प्रोटीन में अमीनो अम्लों के एक निश्चित क्रम में जुड़े होने को उसकी प्राथमिक संरचना कहते हैं।

18. प्रोटीन की द्वितीयक संरचना (Secondary Structure)

पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के स्थानीय रूप से मुड़ने या व्यवस्थित होने से बनने वाली संरचना को प्रोटीन की द्वितीयक संरचना कहते हैं।

19. प्रोटीन की तृतीयक संरचना (Tertiary Structure)

एक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के विभिन्न भागों के आपस में मुड़कर त्रिविमीय रूप ग्रहण करने को तृतीयक संरचना कहते हैं।

20. प्रोटीन की चतुष्क संरचना (Quaternary Structure)

दो या अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं के एक साथ व्यवस्थित होकर कार्यशील प्रोटीन बनाने को चतुष्क संरचना कहते हैं।

21. विकृतीकरण (Denaturation)

प्रोटीन की प्राकृतिक द्वितीयक, तृतीयक या चतुष्क संरचना के नष्ट होने से उसकी जैविक क्रियाशीलता समाप्त या बहुत कम हो जाने की प्रक्रिया को विकृतीकरण कहते हैं।

22. एंजाइम (Enzymes)

जीवित कोशिकाओं द्वारा निर्मित ऐसे जैव-उत्प्रेरक जो शरीर में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं की गति बढ़ाते हैं, एंजाइम कहलाते हैं।

23. हार्मोन (Hormones)

अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा बहुत कम मात्रा में स्रावित ऐसे रासायनिक संदेशवाहक जो शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं, हार्मोन कहलाते हैं।

24. विटामिन (Vitamins)

शरीर के सामान्य विकास और विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए कम मात्रा में आवश्यक कार्बनिक यौगिकों को विटामिन कहते हैं।

25. वसा-विलेय विटामिन (Fat-soluble Vitamins)

वे विटामिन जो वसा में घुलते हैं और शरीर में अपेक्षाकृत अधिक समय तक संचित हो सकते हैं, वसा-विलेय विटामिन कहलाते हैं।

उदाहरण: A, D, E और K

26. जल-विलेय विटामिन (Water-soluble Vitamins)

वे विटामिन जो जल में घुलते हैं और सामान्यतः शरीर में बहुत अधिक मात्रा में संचित नहीं होते, जल-विलेय विटामिन कहलाते हैं।

उदाहरण: B समूह और C

27. न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic Acids)

वे जटिल जैव अणु जो आनुवंशिक सूचना के संचयन और उसके स्थानांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, न्यूक्लिक अम्ल कहलाते हैं।

मुख्यतः दो प्रकार—

– DNA
– RNA

28. न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide)

नाइट्रोजनी क्षारक, पेन्टोज शर्करा और फॉस्फोरिक अम्ल से बने इकाई अणु को न्यूक्लियोटाइड कहते हैं।

29. न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside)

नाइट्रोजनी क्षारक और पेन्टोज शर्करा से बने यौगिक को न्यूक्लियोसाइड कहते हैं।

30. DNA

DNA का पूरा नाम डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल है। यह अधिकांश जीवों में आनुवंशिक सूचना के संचयन और उसके स्थानांतरण का प्रमुख जैव अणु है।

31. RNA

RNA का पूरा नाम राइबोन्यूक्लिक अम्ल है। यह प्रोटीन संश्लेषण तथा आनुवंशिक सूचना के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

★ भाग 2 — कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)

★ परिभाषा

कार्बोहाइड्रेट ऐसे जैविक यौगिक हैं जो मुख्यतः कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बने होते हैं। ये जीवों में ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में से एक हैं और कुछ कार्बोहाइड्रेट संरचनात्मक कार्य भी करते हैं।

★ मुख्य वर्गीकरण

कार्बोहाइड्रेट को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है—

1. मोनोसैकेराइड
2. ओलिगोसैकेराइड
3. पॉलीसैकेराइड

★ मुख्य बिंदु

– ग्लूकोज एक मोनोसैकेराइड है।
– फ्रक्टोज एक मोनोसैकेराइड और कीटोज है।
– सुक्रोज एक डाइसैकेराइड है।
– स्टार्च, सेलुलोज और ग्लाइकोजन पॉलीसैकेराइड हैं।
– कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा तथा संरचना दोनों में महत्वपूर्ण हैं।

★ तीन उदाहरण

1. ग्लूकोज — त्वरित ऊर्जा का प्रमुख स्रोत।
2. स्टार्च — पौधों में भोजन का संचय।
3. सेलुलोज — पौधों की कोशिका भित्ति का प्रमुख घटक।

★ चार महत्वपूर्ण बातें

1. ऊर्जा का कार्य: ग्लूकोज कोशिकीय श्वसन में ऊर्जा प्रदान करता है।

2. संचय का कार्य: पौधे स्टार्च तथा जन्तु ग्लाइकोजन के रूप में कार्बोहाइड्रेट संचित करते हैं।

3. संरचनात्मक कार्य: सेलुलोज पौधों की कोशिका भित्ति में पाया जाता है।

4. जैविक महत्व: कार्बोहाइड्रेट अनेक जैविक अणुओं के निर्माण में भी योगदान देते हैं।

★ भाग 3 — मोनोसैकेराइड (Monosaccharides)

★ परिभाषा

वे सरल कार्बोहाइड्रेट जिनका जल-अपघटन करके इससे छोटे कार्बोहाइड्रेट प्राप्त नहीं किए जा सकते, मोनोसैकेराइड कहलाते हैं।

★ प्रमुख उदाहरण

– ग्लूकोज
– फ्रक्टोज
– राइबोज
– डीऑक्सीराइबोज

★ एल्डोज और कीटोज

ग्लूकोज → एल्डोज

फ्रक्टोज → कीटोज

क्योंकि ग्लूकोज के खुले-श्रृंखला रूप में –CHO समूह और फ्रक्टोज में >C=O समूह होता है।

★ ग्लूकोज का सूत्र

C₆H₁₂O₆

★ फ्रक्टोज का सूत्र

C₆H₁₂O₆

दोनों का आणविक सूत्र समान है, लेकिन संरचना अलग है।

★ मुख्य बिंदु

– मोनोसैकेराइड जल-अपघटित होकर छोटे शर्करा अणु नहीं देते।
– ग्लूकोज और फ्रक्टोज दोनों C₆H₁₂O₆ हैं।
– ग्लूकोज एल्डोज तथा फ्रक्टोज कीटोज है।
– राइबोज RNA में और डीऑक्सीराइबोज DNA में पाया जाता है।

★ तीन उदाहरण

1. ग्लूकोज
2. फ्रक्टोज
3. राइबोज

★ भाग 4 — ग्लूकोज (Glucose)

★ परिभाषा

ग्लूकोज एक छः-कार्बन वाला मोनोसैकेराइड है जो एल्डोज वर्ग का सदस्य है और जीवों में ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में कार्य करता है।

★ आणविक सूत्र

C₆H₁₂O₆

★ ग्लूकोज की खुली श्रृंखला

CHO–(CHOH)₄–CH₂OH

★ ग्लूकोज के महत्वपूर्ण रासायनिक गुण

1. ऑक्सीकरण

ग्लूकोज का ऑक्सीकरण करने पर ग्लूकोनिक अम्ल बन सकता है।

C₆H₁₂O₆ + [O] → C₆H₁₂O₇

2. अपचयन

ग्लूकोज के अपचयन से सोर्बिटोल बनता है।

C₆H₁₂O₆ + H₂ → C₆H₁₄O₆

3. एसीटिलीकरण

ग्लूकोज के –OH समूह एसीटिलीकरण अभिक्रिया में भाग ले सकते हैं।

4. पेन्टाऐसीटेट निर्माण

ग्लूकोज में पाँच –OH समूहों की उपस्थिति के कारण यह पाँच एसीटिल समूह ग्रहण करके पेन्टाऐसीटेट बना सकता है।

★ ग्लूकोज की महत्वपूर्ण विशेषताएँ

– यह एक एल्डोहेक्सोज है।
– इसका आणविक सूत्र C₆H₁₂O₆ है।
– यह अपचायक शर्करा है।
– यह पौधों में प्रकाश-संश्लेषण से बन सकता है।
– कोशिकीय श्वसन में ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है।

★ तीन उदाहरण/महत्व

1. रक्त में ग्लूकोज ऊर्जा का स्रोत है।
2. फल और शहद में ग्लूकोज पाया जा सकता है।
3. कोशिकीय श्वसन में ग्लूकोज का उपयोग होता है।

★ बोर्ड के लिए विशेष बात

ग्लूकोज में एल्डिहाइड समूह की उपस्थिति उसके खुले-श्रृंखला रूप से समझी जाती है, जबकि जलीय विलयन में यह मुख्यतः चक्रीय रूप में पाया जाता है।

★ भाग 5 — फ्रक्टोज (Fructose)

★ परिभाषा

फ्रक्टोज एक छः-कार्बन वाला मोनोसैकेराइड है जो कीटोज वर्ग का सदस्य है और प्राकृतिक रूप से अनेक फलों तथा शहद में पाया जाता है।

★ सूत्र

C₆H₁₂O₆

★ मुख्य बिंदु

– फ्रक्टोज एक कीटोहेक्सोज है।
– इसका आणविक सूत्र ग्लूकोज के समान है।
– यह संरचना में ग्लूकोज से अलग है।
– यह प्राकृतिक रूप से फलों और शहद में पाया जाता है।

★ तीन उदाहरण

1. फल
2. शहद
3. कुछ प्राकृतिक मीठे पदार्थ

★ याद रखने की ट्रिक

Glucose → Aldose

Fructose → Ketose

★ भाग 6 — डाइसैकेराइड (Disaccharides)

★ परिभाषा

वे कार्बोहाइड्रेट जो जल-अपघटन पर दो मोनोसैकेराइड अणु देते हैं, डाइसैकेराइड कहलाते हैं।

★ प्रमुख डाइसैकेराइड

डाइसैकेराइड| जल-अपघटन से प्राप्त शर्कराएँ
सुक्रोज| ग्लूकोज + फ्रक्टोज
माल्टोज| ग्लूकोज + ग्लूकोज
लैक्टोज| ग्लूकोज + गैलेक्टोज

★ सुक्रोज का जल-अपघटन

सुक्रोज + H₂O → ग्लूकोज + फ्रक्टोज

★ माल्टोज का जल-अपघटन

माल्टोज + H₂O → ग्लूकोज + ग्लूकोज

★ लैक्टोज का जल-अपघटन

लैक्टोज + H₂O → ग्लूकोज + गैलेक्टोज

★ मुख्य बिंदु

– सुक्रोज अनपचायक शर्करा है।
– माल्टोज अपचायक शर्करा है।
– लैक्टोज दूध की प्रमुख शर्करा है।
– डाइसैकेराइड दो मोनोसैकेराइड इकाइयों से बनते हैं।

★ तीन उदाहरण

1. सुक्रोज — सामान्य चीनी।
2. लैक्टोज — दूध की शर्करा।
3. माल्टोज — अंकुरित अनाज में पाया जाता है।

★ भाग 7 — ग्लाइकोसिडिक बंध (Glycosidic Bond)

★ परिभाषा

दो मोनोसैकेराइड इकाइयों को आपस में जोड़ने वाला वह बंध जो सामान्यतः एक शर्करा के –OH समूह और दूसरी शर्करा के उपयुक्त –OH समूह के बीच जल के निष्कासन से बनता है, ग्लाइकोसिडिक बंध कहलाता है।

★ उदाहरण

सुक्रोज में ग्लूकोज और फ्रक्टोज इकाइयाँ ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़ी होती हैं।

★ मुख्य बातें

– डाइसैकेराइड के निर्माण में इसका विशेष महत्व है।
– पॉलीसैकेराइड में भी अनेक शर्करा इकाइयाँ इसी प्रकार जुड़ी रहती हैं।
– बंध के प्रकार के कारण शर्करा के अपचायक या अनपचायक गुण प्रभावित हो सकते हैं।

★ तीन उदाहरण

1. सुक्रोज
2. माल्टोज
3. लैक्टोज

★ भाग 8 — पॉलीसैकेराइड (Polysaccharides)

★ परिभाषा

वे जटिल कार्बोहाइड्रेट जो जल-अपघटन पर बहुत-सी मोनोसैकेराइड इकाइयाँ देते हैं, पॉलीसैकेराइड कहलाते हैं।

★ प्रमुख पॉलीसैकेराइड

1. स्टार्च
2. सेलुलोज
3. ग्लाइकोजन

★ स्टार्च

(Starch)

पौधों में भोजन के संचय के लिए पाया जाने वाला प्रमुख पॉलीसैकेराइड स्टार्च है। यह मुख्यतः ग्लूकोज इकाइयों से बना होता है।

★ सेलुलोज

(Cellulose)

सेलुलोज पौधों की कोशिका भित्ति का प्रमुख संरचनात्मक पॉलीसैकेराइड है।

★ ग्लाइकोजन

(Glycogen)

ग्लाइकोजन जन्तुओं में कार्बोहाइड्रेट के संचय का प्रमुख रूप है। इसे कभी-कभी जन्तु स्टार्च भी कहा जाता है।

★ मुख्य तुलना

स्टार्च → पौधों में संचय

ग्लाइकोजन → जन्तुओं में संचय

सेलुलोज → पौधों में संरचना

★ तीन उदाहरण

1. आलू में स्टार्च।
2. लकड़ी और कपास में सेलुलोज।
3. यकृत और मांसपेशियों में ग्लाइकोजन।

★ भाग 9 — प्रोटीन (Proteins)

★ परिभाषा

प्रोटीन प्राकृतिक उच्च आणविक द्रव्यमान वाले जैव बहुलक हैं जो α-अमीनो अम्लों से बने होते हैं और शरीर की संरचना तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

★ प्रोटीन के मुख्य कार्य

– शरीर की वृद्धि और मरम्मत।
– एंजाइम निर्माण।
– कुछ हार्मोन और जैविक पदार्थों का निर्माण।
– ऊतकों की संरचना।
– शरीर की विभिन्न क्रियाओं में सहायता।

★ तीन उदाहरण

1. केराटिन
2. कोलेजन
3. हीमोग्लोबिन

★ मुख्य बिंदु

– प्रोटीन अमीनो अम्लों के बहुलक हैं।
– अमीनो अम्ल पेप्टाइड बंध से जुड़ते हैं।
– प्रोटीन की संरचना उसके कार्य से जुड़ी होती है।
– ताप, pH आदि में परिवर्तन प्रोटीन की संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।

★ भाग 10 — अमीनो अम्ल (Amino Acids)

★ परिभाषा

अमीनो अम्ल ऐसे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें अमीनो समूह (–NH₂) तथा कार्बोक्सिल समूह (–COOH) दोनों उपस्थित होते हैं।

α-अमीनो अम्ल का सामान्य रूप—

H₂N–CH(R)–COOH

★ उभयधर्मी प्रकृति

(Zwitterion and Amphoteric Nature)

अमीनो अम्ल अम्ल और क्षार दोनों की तरह व्यवहार कर सकते हैं। जलीय विलयन में वे द्विध्रुवीय आयन के रूप में भी पाए जा सकते हैं।

⁺NH₃–CH(R)–COO⁻

★ मुख्य बिंदु

– अमीनो अम्ल प्रोटीन की मूल इकाइयाँ हैं।
– इनमें अमीनो और कार्बोक्सिल दोनों समूह होते हैं।
– ये अम्ल तथा क्षार दोनों से अभिक्रिया कर सकते हैं।
– अलग-अलग अमीनो अम्लों में R समूह अलग होता है।

★ तीन उदाहरण

1. ग्लाइसिन
2. एलानीन
3. वेलिन

★ भाग 11 — पेप्टाइड बंध (Peptide Bond)

★ परिभाषा

एक अमीनो अम्ल के कार्बोक्सिल समूह और दूसरे अमीनो अम्ल के अमीनो समूह के बीच जल के एक अणु के निकलने से बनने वाला –CO–NH– बंध पेप्टाइड बंध कहलाता है।

★ सामान्य अभिक्रिया

H₂N–CH(R)–COOH + H₂N–CH(R′)–COOH

→ H₂N–CH(R)–CO–NH–CH(R′)–COOH + H₂O

★ मुख्य बातें

– दो अमीनो अम्ल → डाइपेप्टाइड।
– अनेक अमीनो अम्ल → पॉलीपेप्टाइड।
– पेप्टाइड बंध प्रोटीन की संरचना का आधार है।
– यह बंध –CO–NH– के रूप में लिखा जाता है।

★ तीन उदाहरण

1. ग्लाइसिन + एलानीन।
2. दो समान अमीनो अम्लों से डाइपेप्टाइड।
3. अनेक अमीनो अम्लों से पॉलीपेप्टाइड।

★ भाग 12 — प्रोटीन की संरचना (Structure of Proteins)

प्रोटीन की संरचना को मुख्यतः चार स्तरों में समझा जाता है।

★ 1. प्राथमिक संरचना (Primary Structure)

अमीनो अम्लों का निश्चित क्रम प्राथमिक संरचना कहलाता है।

मुख्य बात: अमीनो अम्लों का क्रम बदलने पर प्रोटीन का गुण और कार्य भी बदल सकता है।

★ 2. द्वितीयक संरचना (Secondary Structure)

पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के कुछ भागों में नियमित मोड़ या व्यवस्था बनने को द्वितीयक संरचना कहते हैं।

इसके प्रमुख रूप—

– α-हेलिक्स
– β-प्लीटेड शीट

★ 3. तृतीयक संरचना (Tertiary Structure)

एक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के विभिन्न भागों के आपस में मुड़कर विशिष्ट त्रिविमीय आकार बनाने को तृतीयक संरचना कहते हैं।

★ 4. चतुष्क संरचना (Quaternary Structure)

दो या अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं के एक साथ व्यवस्थित होकर कार्यशील प्रोटीन बनाने को चतुष्क संरचना कहते हैं।

★ याद रखने की सरल विधि

Primary → क्रम

Secondary → स्थानीय मोड़

Tertiary → पूरी 3-D आकृति

Quaternary → अनेक श्रृंखलाएँ

★ भाग 13 — विकृतीकरण (Denaturation of Proteins)

★ परिभाषा

ताप, pH या अन्य बाहरी परिस्थितियों के प्रभाव से प्रोटीन की प्राकृतिक संरचना बिगड़ जाने और उसकी जैविक क्रियाशीलता कम या समाप्त हो जाने की प्रक्रिया को विकृतीकरण कहते हैं।

★ उदाहरण

अंडे को गर्म करने पर उसका प्रोटीन जम जाता है। यह विकृतीकरण का सामान्य उदाहरण है।

★ मुख्य बिंदु

– प्रोटीन की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होती है।
– जैविक क्रियाशीलता घट सकती है।
– प्रायः प्राथमिक संरचना मुख्यतः सुरक्षित रहती है, जबकि उच्च स्तर की संरचना प्रभावित होती है।

★ तीन उदाहरण

1. अंडे को उबालना।
2. प्रोटीन पर अत्यधिक ताप का प्रभाव।
3. अत्यधिक pH परिवर्तन से प्रोटीन की संरचना बिगड़ना।

★ भाग 14 — एंजाइम (Enzymes)

★ परिभाषा

एंजाइम जैव-उत्प्रेरक हैं जो जीवित कोशिकाओं में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को बढ़ाते हैं और अभिक्रिया के बाद स्वयं स्थायी रूप से समाप्त नहीं होते।

★ उदाहरण

एमाइलेज → स्टार्च के अपघटन में सहायता

पेप्सिन → प्रोटीन के पाचन में सहायता

लाइपेज → वसा के पाचन में सहायता

★ एंजाइम की विशेषताएँ

1. बहुत कम मात्रा में भी प्रभावी होते हैं।
2. अत्यधिक विशिष्टता दिखा सकते हैं।
3. तापमान और pH से प्रभावित होते हैं।
4. जैविक अभिक्रियाओं की गति बढ़ाते हैं।

★ एंजाइम की क्रियाशीलता को प्रभावित करने वाले कारक

– तापमान
– pH
– सब्सट्रेट की सांद्रता
– एंजाइम की सांद्रता

★ तीन उदाहरण

1. एमाइलेज
2. पेप्सिन
3. ट्रिप्सिन

★ भाग 15 — हार्मोन (Hormones)

★ परिभाषा

हार्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो शरीर की वृद्धि, उपापचय, प्रजनन और अन्य जैविक क्रियाओं के नियंत्रण में सहायता करते हैं।

★ मुख्य उदाहरण

इंसुलिन: रक्त में ग्लूकोज के स्तर के नियंत्रण में महत्वपूर्ण।

थायरॉक्सिन: शरीर के उपापचय को प्रभावित करता है।

एड्रेनालिन: आपातकालीन परिस्थितियों में शरीर की प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण।

★ मुख्य बातें

– हार्मोन बहुत कम मात्रा में प्रभाव डाल सकते हैं।
– ये शरीर के विभिन्न अंगों के बीच रासायनिक संदेश पहुँचाने में सहायता करते हैं।
– इनका असंतुलन शरीर की सामान्य क्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।

★ भाग 16 — विटामिन (Vitamins)

★ परिभाषा

विटामिन ऐसे कार्बनिक यौगिक हैं जो शरीर के सामान्य विकास और विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए कम मात्रा में आवश्यक होते हैं।

★ वर्गीकरण

1. वसा-विलेय विटामिन

A, D, E, K

2. जल-विलेय विटामिन

B समूह और C

★ भाग 17 — विटामिन और उनके प्रमुख कार्य (Vitamins and Their Functions)

विटामिन| प्रमुख कार्य/महत्व

A| दृष्टि तथा सामान्य वृद्धि में महत्वपूर्ण

B₁| कार्बोहाइड्रेट उपापचय में महत्वपूर्ण

B₂| ऊर्जा उपापचय में सहायक

B₆| अमीनो अम्लों के उपापचय में महत्वपूर्ण

B₁₂| रक्त निर्माण और तंत्रिका तंत्र के लिए महत्वपूर्ण

C| ऊतकों और प्रतिरक्षा संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण

D| कैल्शियम-फॉस्फोरस के संतुलन तथा हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण

E| कोशिकाओं को ऑक्सीकरणीय क्षति से बचाने में सहायक

K| रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण

★ तीन महत्वपूर्ण बातें

1. विटामिन शरीर को सामान्य रूप से स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।
2. अलग-अलग विटामिन के कार्य अलग-अलग होते हैं।
3. विटामिनों की कमी से विशिष्ट कमी-रोग हो सकते हैं।

★ भाग 18 — न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic Acids)

★ परिभाषा

न्यूक्लिक अम्ल जटिल जैव अणु हैं जो आनुवंशिक सूचना के संचयन, संरक्षण और उसके स्थानांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य प्रकार—

1. DNA
2. RNA

★ न्यूक्लिक अम्ल की मूल इकाई

न्यूक्लियोटाइड

★ न्यूक्लियोटाइड के तीन भाग

नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोज शर्करा + फॉस्फेट समूह

★ मुख्य बिंदु

– DNA आनुवंशिक सूचना के संचयन में प्रमुख है।
– RNA प्रोटीन संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
– न्यूक्लियोटाइड न्यूक्लिक अम्लों की मूल इकाइयाँ हैं।

★ भाग 19 — न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड (Nucleoside and Nucleotide)

★ न्यूक्लियोसाइड

नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोज शर्करा

★ न्यूक्लियोटाइड

नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोज शर्करा + फॉस्फेट

★ सबसे महत्वपूर्ण अंतर

न्यूक्लियोसाइड → क्षारक + शर्करा

न्यूक्लियोटाइड → क्षारक + शर्करा + फॉस्फेट

★ तीन उदाहरण

1. एडेनोसिन → न्यूक्लियोसाइड
2. AMP → न्यूक्लियोटाइड
3. ATP → फॉस्फेट युक्त न्यूक्लियोटाइड

★ भाग 20 — DNA (Deoxyribonucleic Acid)

★ परिभाषा

DNA एक न्यूक्लिक अम्ल है जिसमें डीऑक्सीराइबोज शर्करा होती है और जो आनुवंशिक सूचना के संचयन तथा उसके स्थानांतरण में प्रमुख भूमिका निभाता है।

★ DNA में पाई जाने वाली शर्करा

डीऑक्सीराइबोज

★ नाइट्रोजनी क्षारक

– एडेनिन (A)
– ग्वानिन (G)
– साइटोसिन (C)
– थाइमिन (T)

★ मुख्य बिंदु

– DNA में थाइमिन पाया जाता है।
– A का युग्म T के साथ बनता है।
– G का युग्म C के साथ बनता है।
– DNA की संरचना में दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाएँ होती हैं।

★ तीन महत्वपूर्ण कार्य

1. आनुवंशिक सूचना का संचयन।
2. आनुवंशिक सूचना का अगली पीढ़ी तक स्थानांतरण।
3. प्रोटीन संश्लेषण की सूचना उपलब्ध कराना।

★ भाग 21 — RNA (Ribonucleic Acid)

★ परिभाषा

RNA एक न्यूक्लिक अम्ल है जिसमें राइबोज शर्करा होती है और जो विशेष रूप से प्रोटीन संश्लेषण तथा आनुवंशिक सूचना के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

★ RNA में शर्करा

राइबोज

★ नाइट्रोजनी क्षारक

– एडेनिन (A)
– ग्वानिन (G)
– साइटोसिन (C)
– यूरैसिल (U)

★ मुख्य अंतर

DNA → डीऑक्सीराइबोज + थाइमिन

RNA → राइबोज + यूरैसिल

★ RNA के प्रमुख प्रकार

1. mRNA
2. tRNA
3. rRNA

★ तीन मुख्य कार्य

1. mRNA आनुवंशिक संदेश को आगे ले जाता है।
2. tRNA अमीनो अम्लों को प्रोटीन संश्लेषण के स्थान तक पहुँचाने में सहायता करता है।
3. rRNA राइबोसोम का महत्वपूर्ण घटक है।

★ भाग 22 — DNA और RNA में अंतर (Difference between DNA and RNA)

आधार                    | DNA                                              | RNA
शर्करा                    | डीऑक्सीराइबोज                          | राइबोज
विशेष क्षारक         | थाइमिन                                         | यूरैसिल
सामान्य संरचना    | द्वि-श्रृंखलित                                    | सामान्यतः एकल-श्रृंखलित
प्रमुख भूमिका       | आनुवंशिक सूचना का संचयन        | प्रोटीन संश्लेषण में महत्वपूर्ण
स्थायित्व                | अपेक्षाकृत अधिक                           | अपेक्षाकृत कम

★ भाग 23 — कार्बोहाइड्रेट की महत्वपूर्ण तुलना

पदार्थ               | प्रकार                        | मुख्य महत्व

ग्लूकोज           | मोनोसैकेराइड           | ऊर्जा

फ्रक्टोज           | मोनोसैकेराइड          | प्राकृतिक शर्करा

सुक्रोज            | डाइसैकेराइड             | सामान्य चीनी

लैक्टोज            | डाइसैकेराइड            | दूध की शर्करा

माल्टोज           | डाइसैकेराइड             | दो ग्लूकोज इकाइयाँ

स्टार्च               | पॉलीसैकेराइड            | पौधों में संचय

ग्लाइकोजन     | पॉलीसैकेराइड            | जन्तुओं में संचय

सेलुलोज          | पॉलीसैकेराइड            | पौधों की संरचना

★ भाग 24 — अध्याय की सबसे महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ

★ 1. सुक्रोज का जल-अपघटन

सुक्रोज + H₂O → ग्लूकोज + फ्रक्टोज

★ 2. माल्टोज का जल-अपघटन

माल्टोज + H₂O → ग्लूकोज + ग्लूकोज

★ 3. लैक्टोज का जल-अपघटन

लैक्टोज + H₂O → ग्लूकोज + गैलेक्टोज

★ 4. अमीनो अम्लों से पेप्टाइड निर्माण

अमीनो अम्ल + अमीनो अम्ल

→ डाइपेप्टाइड + H₂O

★ 5. ग्लूकोज का ऑक्सीकरण

C₆H₁₂O₆ + [O] → C₆H₁₂O₇

★ 6. ग्लूकोज का अपचयन

C₆H₁₂O₆ + H₂ → C₆H₁₄O₆

★ भाग 25 — अध्याय में याद रखने योग्य “वन-लाइन” तथ्य

★ ग्लूकोज → एल्डोहेक्सोज।

★ फ्रक्टोज → कीटोहेक्सोज।

★ सुक्रोज → ग्लूकोज + फ्रक्टोज।

★ लैक्टोज → ग्लूकोज + गैलेक्टोज।

★ माल्टोज → ग्लूकोज + ग्लूकोज।

★ स्टार्च → पौधों में भोजन का संचय।

★ ग्लाइकोजन → जन्तुओं में कार्बोहाइड्रेट का संचय।

★ सेलुलोज → पौधों की कोशिका भित्ति।

★ प्रोटीन → α-अमीनो अम्लों के बहुलक।

★ –CO–NH– → पेप्टाइड बंध।

★ प्राथमिक संरचना → अमीनो अम्लों का क्रम।

★ विकृतीकरण → प्रोटीन की प्राकृतिक उच्च संरचना का बिगड़ना।

★ एंजाइम → जैव-उत्प्रेरक।

★ A, D, E, K → वसा-विलेय विटामिन।

★ B समूह और C → जल-विलेय विटामिन।

★ DNA → डीऑक्सीराइबोज + थाइमिन।

★ RNA → राइबोज + यूरैसिल।

★ न्यूक्लियोसाइड → शर्करा + क्षारक।

★ न्यूक्लियोटाइड → शर्करा + क्षारक + फॉस्फेट।

★ QUICK REVISION — पूरा अध्याय एक बार में

कार्बोहाइड्रेट

मोनोसैकेराइड → सबसे सरल शर्करा

डाइसैकेराइड → दो मोनोसैकेराइड

पॉलीसैकेराइड → अनेक मोनोसैकेराइड

ग्लूकोज → एल्डोज

फ्रक्टोज → कीटोज

सुक्रोज → ग्लूकोज + फ्रक्टोज

लैक्टोज → ग्लूकोज + गैलेक्टोज

माल्टोज → ग्लूकोज + ग्लूकोज

स्टार्च → पौधों में संचय

ग्लाइकोजन → जन्तुओं में संचय

सेलुलोज → संरचनात्मक कार्य

—

प्रोटीन

अमीनो अम्ल → प्रोटीन की इकाइयाँ

अमीनो अम्लों का जुड़ना → पेप्टाइड बंध

दो अमीनो अम्ल → डाइपेप्टाइड

अनेक अमीनो अम्ल → पॉलीपेप्टाइड

प्रोटीन की संरचना → प्राथमिक → द्वितीयक → तृतीयक → चतुष्क

विकृतीकरण → प्राकृतिक संरचना का बिगड़ना

—

एंजाइम

एंजाइम → जैव-उत्प्रेरक

मुख्य प्रभावकारी कारक → तापमान, pH, सांद्रता

—

विटामिन

वसा-विलेय → A, D, E, K

जल-विलेय → B समूह, C

—

न्यूक्लिक अम्ल

DNA → डीऑक्सीराइबोज + A, G, C, T

RNA → राइबोज + A, G, C, U

न्यूक्लियोसाइड → क्षारक + शर्करा

न्यूक्लियोटाइड → क्षारक + शर्करा + फॉस्फेट

★ पूरे अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्न

1. जैव अणु क्या हैं?

जीवित कोशिकाओं में पाए जाने वाले और जीवन की जैविक क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कार्बनिक यौगिक जैव अणु कहलाते हैं।

2. कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण कीजिए।

मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड और पॉलीसैकेराइड।

3. ग्लूकोज और फ्रक्टोज में क्या अंतर है?

ग्लूकोज एल्डोज है, जबकि फ्रक्टोज कीटोज है।

4. सुक्रोज के जल-अपघटन से क्या प्राप्त होता है?

ग्लूकोज और फ्रक्टोज।

5. प्रोटीन किससे बने होते हैं?

प्रोटीन α-अमीनो अम्लों से बने प्राकृतिक बहुलक हैं।

6. पेप्टाइड बंध क्या है?

अमीनो अम्लों के –COOH और –NH₂ समूहों के बीच बनने वाला –CO–NH– बंध पेप्टाइड बंध कहलाता है।

7. प्रोटीन की चार संरचनाएँ लिखिए।

प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुष्क।

8. विकृतीकरण क्या है?

प्रोटीन की प्राकृतिक उच्च संरचना के बिगड़ने से उसकी जैविक क्रियाशीलता कम या समाप्त होने की प्रक्रिया विकृतीकरण है।

9. एंजाइम क्या हैं?

एंजाइम जैव-उत्प्रेरक हैं जो जैविक अभिक्रियाओं की गति बढ़ाते हैं।

10. विटामिनों को कितने वर्गों में बाँटा जाता है?

वसा-विलेय और जल-विलेय।

11. DNA और RNA में एक मुख्य अंतर लिखिए।

DNA में डीऑक्सीराइबोज और थाइमिन होते हैं, जबकि RNA में राइबोज और यूरैसिल होते हैं।

12. न्यूक्लियोटाइड क्या है?

नाइट्रोजनी क्षारक, पेन्टोज शर्करा और फॉस्फेट समूह से बना अणु न्यूक्लियोटाइड कहलाता है।

★ बोर्ड परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ

1. ग्लूकोज को कीटोज न लिखें—ग्लूकोज एल्डोज है।

2. फ्रक्टोज को एल्डोज न लिखें—फ्रक्टोज कीटोज है।

3. सुक्रोज के जल-अपघटन में केवल ग्लूकोज न लिखें; ग्लूकोज + फ्रक्टोज लिखें।

4. लैक्टोज के उत्पाद में फ्रक्टोज न लिखें; ग्लूकोज + गैलेक्टोज लिखें।

5. स्टार्च और ग्लाइकोजन के कार्य आपस में न बदलें।

6. पेप्टाइड बंध को केवल “बंध” लिखकर न छोड़ें; –CO–NH– भी लिखें।

7. न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड को एक जैसा न लिखें।

8. DNA में यूरैसिल नहीं, थाइमिन होता है।

9. RNA में थाइमिन के स्थान पर यूरैसिल होता है।

10. A–T और G–C के युग्मों को न मिलाएँ।

11. प्राथमिक संरचना को त्रिविमीय संरचना न लिखें; इसमें अमीनो अम्लों का क्रम महत्वपूर्ण है।

12. विकृतीकरण को प्रोटीन का पूर्ण जल-अपघटन न समझें।

13. विटामिन A, D, E, K को जल-विलेय न लिखें।

14. एंजाइम को केवल “प्रोटीन” लिखकर उसकी जैव-उत्प्रेरक भूमिका न छोड़ें।

15. बोर्ड उत्तर में जहाँ तुलना पूछी जाए, वहाँ दोनों पक्षों को अलग-अलग स्पष्ट लिखें।

★ अब खुद से पूछो

नोट्स बंद करके इन प्रश्नों के उत्तर अपने मन से देने की कोशिश करो—

1. जैव अणु क्या होते हैं?

2. कार्बोहाइड्रेट कितने प्रकार के होते हैं?

3. मोनोसैकेराइड और डाइसैकेराइड में क्या अंतर है?

4. ग्लूकोज को एल्डोज क्यों कहते हैं?

5. फ्रक्टोज को कीटोज क्यों कहते हैं?

6. सुक्रोज के जल-अपघटन से कौन-कौन सी शर्कराएँ मिलती हैं?

7. स्टार्च और ग्लाइकोजन में क्या अंतर है?

8. सेलुलोज का प्रमुख कार्य क्या है?

9. अमीनो अम्ल क्या होते हैं?

10. पेप्टाइड बंध कैसे बनता है?

11. डाइपेप्टाइड और पॉलीपेप्टाइड में क्या अंतर है?

12. प्रोटीन की प्राथमिक संरचना क्या बताती है?

13. α-हेलिक्स किस संरचना से संबंधित है?

14. विकृतीकरण क्या है?

15. एंजाइम को जैव-उत्प्रेरक क्यों कहा जाता है?

16. एंजाइम की क्रियाशीलता किन कारकों से प्रभावित होती है?

17. हार्मोन क्या होते हैं?

18. विटामिनों का वर्गीकरण कीजिए।

19. वसा-विलेय विटामिनों के नाम लिखिए।

20. न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड में अंतर लिखिए।

21. DNA में कौन-सी शर्करा होती है?

22. RNA में कौन-सी शर्करा होती है?

23. DNA में कौन-सा क्षारक RNA से अलग होता है?

24. DNA और RNA के तीन अंतर लिखिए।

★ SELF TEST — बिना नोट्स देखे हल करो

प्रश्न 1

ग्लूकोज किस प्रकार की शर्करा है?

प्रश्न 2

फ्रक्टोज किस प्रकार की शर्करा है?

प्रश्न 3

सुक्रोज के जल-अपघटन से कौन-सी दो शर्कराएँ प्राप्त होती हैं?

प्रश्न 4

लैक्टोज के जल-अपघटन से कौन-सी शर्कराएँ प्राप्त होती हैं?

प्रश्न 5

पौधों में कार्बोहाइड्रेट के संचय का प्रमुख रूप क्या है?

प्रश्न 6

जन्तुओं में कार्बोहाइड्रेट के संचय का प्रमुख रूप क्या है?

प्रश्न 7

पौधों की कोशिका भित्ति का प्रमुख पॉलीसैकेराइड कौन-सा है?

प्रश्न 8

पेप्टाइड बंध का सामान्य रूप लिखिए।

प्रश्न 9

प्रोटीन की चार संरचनाएँ लिखिए।

प्रश्न 10

विकृतीकरण क्या है?

प्रश्न 11

एंजाइम क्या हैं?

प्रश्न 12

वसा-विलेय विटामिनों के नाम लिखिए।

प्रश्न 13

न्यूक्लियोटाइड के तीन मुख्य घटक कौन-से हैं?

प्रश्न 14

DNA में कौन-सी शर्करा होती है?

प्रश्न 15

RNA में थाइमिन के स्थान पर कौन-सा क्षारक पाया जाता है?

प्रश्न 16

A का पूरक क्षारक DNA में कौन-सा है?

प्रश्न 17

G का पूरक क्षारक कौन-सा है?

प्रश्न 18

न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड में मुख्य अंतर क्या है?

—

★ SELF TEST — उत्तर

1. एल्डोहेक्सोज मोनोसैकेराइड।

2. कीटोहेक्सोज मोनोसैकेराइड।

3. ग्लूकोज और फ्रक्टोज।

4. ग्लूकोज और गैलेक्टोज।

5. स्टार्च।

6. ग्लाइकोजन।

7. सेलुलोज।

8. –CO–NH–

9. प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुष्क।

10. प्रोटीन की प्राकृतिक उच्च संरचना के बिगड़ने की प्रक्रिया।

11. जैव-उत्प्रेरक जो जैविक अभिक्रियाओं की गति बढ़ाते हैं।

12. A, D, E और K।

13. नाइट्रोजनी क्षारक, पेन्टोज शर्करा और फॉस्फेट समूह।

14. डीऑक्सीराइबोज।

15. यूरैसिल।

16. थाइमिन।

17. साइटोसिन।

18. न्यूक्लियोसाइड में शर्करा + क्षारक होते हैं, जबकि न्यूक्लियोटाइड में इनके साथ फॉस्फेट समूह भी होता है।

★ बोर्ड के लिए सबसे जरूरी 15 बातें

★ ग्लूकोज = एल्डोज

★ फ्रक्टोज = कीटोज

★ सुक्रोज = ग्लूकोज + फ्रक्टोज

★ लैक्टोज = ग्लूकोज + गैलेक्टोज

★ माल्टोज = ग्लूकोज + ग्लूकोज

★ स्टार्च = पौधों का संचय

★ ग्लाइकोजन = जन्तुओं का संचय

★ सेलुलोज = पौधों की संरचना

★ प्रोटीन = α-अमीनो अम्लों के बहुलक

★ पेप्टाइड बंध = –CO–NH–

★ एंजाइम = जैव-उत्प्रेरक

★ A, D, E, K = वसा-विलेय

★ DNA = डीऑक्सीराइबोज + थाइमिन

★ RNA = राइबोज + यूरैसिल

★ न्यूक्लियोटाइड = शर्करा + क्षारक + फॉस्फेट

★ अंतिम परीक्षा-पूर्व रिवीजन

इस अध्याय में सबसे पहले जैव अणुओं का वर्गीकरण समझो। इसके बाद कार्बोहाइड्रेट में ग्लूकोज, फ्रक्टोज, सुक्रोज, लैक्टोज, माल्टोज, स्टार्च, सेलुलोज और ग्लाइकोजन को अलग-अलग पहचानना सीखो।

प्रोटीन वाले भाग में अमीनो अम्ल → पेप्टाइड बंध → पॉलीपेप्टाइड → प्रोटीन की चार संरचनाएँ → विकृतीकरण का क्रम याद रखो।

इसके बाद एंजाइम और हार्मोन की परिभाषा तथा कार्य समझो। विटामिन में सबसे पहले A, D, E, K = वसा-विलेय याद करो।

अंत में न्यूक्लिक अम्ल में केवल तीन चीजें बिल्कुल साफ रखो—

DNA → डीऑक्सीराइबोज → थाइमिन

RNA → राइबोज → यूरैसिल

न्यूक्लियोसाइड → शर्करा + क्षारक

न्यूक्लियोटाइड → शर्करा + क्षारक + फॉस्फेट

यही क्रम पूरे अध्याय को तेजी से दोहराने में सबसे अधिक मदद करेगा।

★ एक नजर में पूरा अध्याय

जैव अणु
↓
कार्बोहाइड्रेट
↓
मोनोसैकेराइड → डाइसैकेराइड → पॉलीसैकेराइड
↓
ग्लूकोज → फ्रक्टोज → सुक्रोज → लैक्टोज → माल्टोज → स्टार्च → सेलुलोज → ग्लाइकोजन

प्रोटीन
↓
अमीनो अम्ल
↓
पेप्टाइड बंध
↓
पॉलीपेप्टाइड
↓
प्राथमिक → द्वितीयक → तृतीयक → चतुष्क संरचना
↓
विकृतीकरण

अन्य जैव अणु
↓
एंजाइम → हार्मोन → विटामिन → न्यूक्लिक अम्ल

न्यूक्लिक अम्ल
↓
DNA + RNA

DNA
→ डीऑक्सीराइबोज
→ A, G, C, T

RNA
→ राइबोज
→ A, G, C, U

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