अध्याय 7 : प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current)

★ अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

1. प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current)

वह विद्युत धारा जिसका परिमाण और दिशा समय के साथ आवर्ती रूप से बदलते रहते हैं, प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है।

2. प्रत्यावर्ती वोल्टता (Alternating Voltage)

वह वोल्टता जिसका परिमाण और ध्रुवता समय के साथ आवर्ती रूप से बदलते हैं, प्रत्यावर्ती वोल्टता कहलाती है।

3. आयाम / शिखर मान (Peak Value)

प्रत्यावर्ती धारा या वोल्टता का किसी एक चक्र में प्राप्त अधिकतम मान उसका शिखर मान कहलाता है।

4. तात्कालिक मान (Instantaneous Value)

किसी विशेष समय पर प्रत्यावर्ती धारा या वोल्टता के मान को उसका तात्कालिक मान कहते हैं।

5. आवर्तकाल (Time Period)

प्रत्यावर्ती धारा को एक पूर्ण चक्र पूरा करने में लगने वाला समय आवर्तकाल कहलाता है।

6. आवृत्ति (Frequency)

एक सेकंड में पूर्ण किए गए चक्रों की संख्या आवृत्ति कहलाती है।

7. कोणीय आवृत्ति (Angular Frequency)

प्रत्यावर्ती राशि के परिवर्तन की कोणीय दर को कोणीय आवृत्ति कहते हैं।

8. वर्ग-माध्य-मूल मान (RMS Value)

प्रत्यावर्ती धारा का वह प्रभावी मान जो समान प्रतिरोध में उतनी ही ऊष्मा उत्पन्न करे जितनी समान समय में समान मान की दिष्ट धारा उत्पन्न करती है, RMS मान कहलाता है।

9. प्रेरणिक प्रतिघात (Inductive Reactance)

प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह का प्रेरक द्वारा किया गया विरोध प्रेरणिक प्रतिघात कहलाता है।

10. धारितीय प्रतिघात (Capacitive Reactance)

प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह का संधारित्र द्वारा किया गया विरोध धारितीय प्रतिघात कहलाता है।

11. प्रतिबाधा (Impedance)

LCR परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा के प्रवाह का कुल विरोध प्रतिबाधा कहलाता है।

12. फेज अंतर (Phase Difference)

दो प्रत्यावर्ती राशियों के समान अवस्था में न होने पर उनके बीच के कोणीय अंतर को फेज अंतर कहते हैं।

13. फेजर (Phasor)

प्रत्यावर्ती राशि के आयाम और फेज को दर्शाने वाला घूमता हुआ सदिश फेजर कहलाता है।

14. अनुनाद (Resonance)

LCR श्रेणी परिपथ में जब प्रेरणिक प्रतिघात और धारितीय प्रतिघात बराबर हो जाते हैं, तो परिपथ अनुनाद की अवस्था में होता है।

15. शक्ति गुणांक (Power Factor)

AC परिपथ में वास्तविक शक्ति और आभासी शक्ति के अनुपात को शक्ति गुणांक कहते हैं।

16. वाटहीन धारा (Wattless Current)

ऐसी प्रत्यावर्ती धारा जिसके कारण औसत वास्तविक शक्ति का उपभोग नहीं होता, वाटहीन धारा कहलाती है।

17. ट्रांसफॉर्मर (Transformer)

वह विद्युत यंत्र जो पारस्परिक प्रेरण के सिद्धांत से प्रत्यावर्ती वोल्टता को बढ़ाता या घटाता है, ट्रांसफॉर्मर कहलाता है।

18. स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर (Step-up Transformer)

जो ट्रांसफॉर्मर आउटपुट वोल्टता को बढ़ाता है, स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर कहलाता है।

19. स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर (Step-down Transformer)

जो ट्रांसफॉर्मर आउटपुट वोल्टता को घटाता है, स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर कहलाता है।

1. प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current)

परिभाषा

वह धारा जिसका परिमाण और दिशा समय के साथ नियमित रूप से बदलते रहते हैं तथा कुछ समय बाद वही परिवर्तन दोहराया जाता है, प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है।

प्रत्यावर्ती धारा को सामान्यतः इस प्रकार लिखा जाता है—

i = I₀ sin ωt

जहाँ
I₀ = धारा का अधिकतम मान
ω = कोणीय आवृत्ति
t = समय

सूत्र की समझ

यदि t = 0,

i = 0

जब ωt = 90°,

i = I₀

जब ωt = 180°,

i = 0

जब ωt = 270°,

i = −I₀

इससे पता चलता है कि धारा की दिशा भी बदलती रहती है।

मुख्य बिंदु

i. AC का मान समय के साथ बदलता है।
ii. आधे चक्र के बाद धारा की दिशा बदल जाती है।
iii. एक पूरा चक्र पूरा होने के बाद परिवर्तन फिर दोहराया जाता है।

विशेषताएँ

i. इसका औसत मान पूरे चक्र के लिए शून्य होता है।
ii. इसका RMS मान शून्य नहीं होता।
iii. घरों में मिलने वाली विद्युत आपूर्ति प्रत्यावर्ती प्रकृति की होती है।

उदाहरण

i. घरेलू विद्युत आपूर्ति।
ii. AC जनित्र से प्राप्त विद्युत।
iii. विद्युत वितरण प्रणाली।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: I₀ = 10 A है। t = 0 पर धारा का मान क्या होगा?

i = I₀ sin 0°
= 0 A

प्रश्न 2: I₀ = 8 A और ωt = 90° है।

i = 8 sin 90°
= 8 A

प्रश्न 3: I₀ = 6 A और ωt = 270° है।

i = 6 sin 270°
= −6 A

प्रश्न 4: I₀ = 5 A और ωt = 30° है।

i = 5 × 1/2
= 2.5 A

2. आवर्तकाल और आवृत्ति (Time Period and Frequency)

परिभाषा

एक पूर्ण चक्र पूरा करने में लगने वाले समय को आवर्तकाल T कहते हैं और एक सेकंड में पूरे किए गए चक्रों की संख्या को आवृत्ति f कहते हैं।

सूत्र

f = 1/T

और

T = 1/f

कोणीय आवृत्ति—

ω = 2πf

अतः

ω = 2π/T

मुख्य बिंदु

i. आवृत्ति की SI इकाई हर्ट्ज (Hz) है।
ii. आवर्तकाल की SI इकाई सेकंड है।
iii. आवृत्ति बढ़ने पर आवर्तकाल घटता है।

उदाहरण

i. 50 Hz AC की आवृत्ति 50 Hz है।
ii. 100 Hz की धारा 1 सेकंड में 100 चक्र पूरा करती है।
iii. अधिक आवृत्ति का अर्थ अधिक तेजी से परिवर्तन है।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: f = 50 Hz है। T ज्ञात कीजिए।

T = 1/50
= 0.02 s

प्रश्न 2: T = 0.01 s है।

f = 1/0.01
= 100 Hz

प्रश्न 3: f = 60 Hz है। कोणीय आवृत्ति ज्ञात करें।

ω = 2πf
= 2π × 60
= 120π rad/s

प्रश्न 4: f = 25 Hz है।

ω = 2π × 25
= 50π rad/s

3. प्रत्यावर्ती धारा का औसत मान (Average Value)

परिभाषा

किसी निश्चित समयांतराल में प्रत्यावर्ती धारा के तात्कालिक मानों के औसत को उसका औसत मान कहते हैं।

पूरे चक्र के लिए—

Iavg = 0

क्योंकि धनात्मक और ऋणात्मक आधे चक्र एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं।

आधे चक्र के लिए—

Iavg = 2I₀/π

इसी प्रकार,

Vavg = 2V₀/π

मुख्य बिंदु

i. पूरे चक्र में औसत AC शून्य होता है।
ii. आधे चक्र में औसत मान शून्य नहीं होता।
iii. औसत मान की तुलना में RMS मान व्यावहारिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण है।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: I₀ = 10 A है। आधे चक्र का औसत मान ज्ञात करें।

Iavg = 2 × 10/π
≈ 6.37 A

प्रश्न 2: I₀ = 20 A

Iavg = 40/π
≈ 12.74 A

प्रश्न 3: V₀ = 100 V

Vavg = 200/π
≈ 63.7 V

प्रश्न 4: I₀ = 5 A

Iavg = 10/π
≈ 3.18 A

4. प्रत्यावर्ती धारा का RMS मान (RMS Value)

परिभाषा

प्रत्यावर्ती धारा का वह मान जो किसी प्रतिरोध में समान समय में उतनी ही ऊष्मा उत्पन्न करे जितनी उसी प्रतिरोध में समान मान की दिष्ट धारा उत्पन्न करती है, RMS मान कहलाता है।

साइनाकार AC के लिए—

Irms = I₀/√2

इसी प्रकार,

Vrms = V₀/√2

अतः

I₀ = √2 Irms

V₀ = √2 Vrms

RMS मान क्यों जरूरी है?

घरों में विद्युत आपूर्ति का बताया गया वोल्टेज RMS मान होता है, शिखर मान नहीं।

मुख्य बिंदु

i. RMS मान हमेशा शिखर मान से कम होता है।
ii. साइनाकार AC के लिए Irms ≈ 0.707 I₀ होता है।
iii. वास्तविक विद्युत शक्ति की गणना में RMS मान बहुत उपयोगी है।

उदाहरण

i. 220 V घरेलू AC का 220 V मान RMS होता है।
ii. AC अमीटर सामान्यतः प्रभावी धारा बताता है।
iii. हीटर में ऊष्मीय प्रभाव RMS धारा से संबंधित होता है।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: I₀ = 10 A है। RMS धारा ज्ञात करें।

Irms = 10/√2
≈ 7.07 A

प्रश्न 2: V₀ = 311 V है।

Vrms = 311/√2
≈ 220 V

प्रश्न 3: Irms = 5 A है। I₀ ज्ञात करें।

I₀ = √2 × 5
≈ 7.07 A

प्रश्न 4: Vrms = 100 V है।

V₀ = √2 × 100
≈ 141.4 V

5. शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ (Pure Resistive Circuit)

परिभाषा

ऐसा AC परिपथ जिसमें केवल प्रतिरोध R उपस्थित हो और प्रेरकत्व तथा धारिता का प्रभाव न हो, शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ कहलाता है।

यदि

v = V₀ sin ωt

तो

i = I₀ sin ωt

जहाँ

I₀ = V₀/R

फेज संबंध

शुद्ध प्रतिरोध में धारा और वोल्टता एक ही फेज में होती हैं।

अर्थात् फेज अंतर:

φ = 0°

शक्ति

P = Vrms Irms

क्योंकि cos 0° = 1,

P = Vrms Irms = Irms²R

मुख्य बिंदु

i. V और I समान फेज में हैं।
ii. शक्ति गुणांक 1 होता है।
iii. प्रतिरोध वास्तविक शक्ति का उपभोग करता है।

उदाहरण

i. विद्युत हीटर।
ii. विद्युत बल्ब का प्रतिरोधी भाग।
iii. प्रतिरोधक।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: V = 220 V और R = 110 Ω।

I = V/R
= 220/110
= 2 A

प्रश्न 2: V = 100 V और R = 20 Ω।

I = 100/20
= 5 A

प्रश्न 3: I = 2 A और R = 50 Ω।

P = I²R
= 4 × 50
= 200 W

प्रश्न 4: V = 220 V और I = 2 A।

P = VI
= 220 × 2
= 440 W

6. शुद्ध प्रेरक परिपथ (Pure Inductive Circuit)

परिभाषा

ऐसा AC परिपथ जिसमें केवल आदर्श प्रेरक L उपस्थित हो, शुद्ध प्रेरक परिपथ कहलाता है।

प्रेरणिक प्रतिघात:

Xᴸ = ωL

और

I = V/Xᴸ

फेज संबंध

शुद्ध प्रेरक परिपथ में धारा, वोल्टता से 90° पीछे रहती है।

मुख्य बिंदु

i. Xᴸ आवृत्ति के साथ बढ़ता है।
ii. DC के लिए ω = 0 होने पर आदर्श प्रेरणिक प्रतिघात शून्य होता है।
iii. आदर्श प्रेरक में औसत वास्तविक शक्ति शून्य होती है।

विशेषता

प्रेरक ऊर्जा को अपने चुंबकीय क्षेत्र में संचित करता है और फिर स्रोत को वापस देता है।

उदाहरण

i. प्रेरक कुंडली।
ii. चोक कुंडली।
iii. आदर्श इंडक्टर।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: L = 2 H और f = 50 Hz। Xᴸ ज्ञात करें।

Xᴸ = 2πfL
= 2π × 50 × 2
= 200π Ω ≈ 628.3 Ω

प्रश्न 2: L = 0.5 H, f = 100 Hz।

Xᴸ = 2π × 100 × 0.5
= 100π Ω ≈ 314.2 Ω

प्रश्न 3: V = 220 V और Xᴸ = 110 Ω।

I = V/Xᴸ
= 220/110
= 2 A

प्रश्न 4: L = 1 H, f = 50 Hz, V = 314 V।

Xᴸ = 2π × 50 × 1
≈ 314 Ω

I = 314/314
= 1 A

7. शुद्ध धारितीय परिपथ (Pure Capacitive Circuit)

परिभाषा

ऐसा AC परिपथ जिसमें केवल आदर्श संधारित्र C उपस्थित हो, शुद्ध धारितीय परिपथ कहलाता है।

धारितीय प्रतिघात:

Xc = 1/(ωC)

अतः

I = V/Xc

फेज संबंध

शुद्ध धारितीय परिपथ में धारा वोल्टता से 90° आगे रहती है।

मुख्य बिंदु

i. आवृत्ति बढ़ने पर Xc घटता है।
ii. धारिता बढ़ने पर Xc घटता है।
iii. आदर्श संधारित्र औसत वास्तविक शक्ति का उपभोग नहीं करता।

उदाहरण

i. AC संधारित्र परिपथ।
ii. फिल्टर परिपथ में संधारित्र।
iii. AC संकेतों में धारितीय प्रभाव।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: C = 100 μF, f = 50 Hz। Xc ज्ञात करें।

Xc = 1/(2πfC)

= 1/(2π × 50 × 100 × 10⁻⁶)

≈ 31.83 Ω

प्रश्न 2: C = 10 μF, f = 50 Hz।

Xc ≈ 318.3 Ω

प्रश्न 3: V = 100 V और Xc = 50 Ω।

I = 100/50
= 2 A

प्रश्न 4: C = 50 μF और f = 100 Hz।

Xc = 1/(2π × 100 × 50 × 10⁻⁶)

≈ 31.83 Ω

8. LCR श्रेणी परिपथ (Series LCR Circuit)

परिभाषा

जब प्रतिरोध R, प्रेरक L और संधारित्र C को श्रेणीक्रम में प्रत्यावर्ती स्रोत से जोड़ा जाता है, तो इसे श्रेणी LCR परिपथ कहते हैं।

प्रतिघात

प्रेरणिक प्रतिघात:

Xᴸ = ωL

धारितीय प्रतिघात:

Xc = 1/(ωC)

कुल प्रतिबाधा:

Z = √[R² + (Xᴸ − Xc)²]

धारा

I = V/Z

फेज कोण

tan φ = (Xᴸ − Xc)/R

शक्ति गुणांक

cos φ = R/Z

मुख्य बिंदु

i. Z हमेशा R से कम नहीं होती; बल्कि Z ≥ R होती है।
ii. Xᴸ > Xc होने पर परिपथ प्रेरणिक प्रकृति का होता है।
iii. Xc > Xᴸ होने पर परिपथ धारितीय प्रकृति का होता है।

उदाहरण

i. रेडियो तथा संचार परिपथ।
ii. चयनात्मक AC परिपथ।
iii. अनुनाद आधारित विद्युत परिपथ।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: R = 6 Ω, Xᴸ = 10 Ω और Xc = 2 Ω

Z = √[6² + (10 − 2)²]

= √(36 + 64)

= 10 Ω

प्रश्न 2: R = 8 Ω, Xᴸ = 6 Ω, Xc = 6 Ω

Z = √[8² + 0²]

= 8 Ω

प्रश्न 3: V = 100 V और Z = 20 Ω

I = 100/20
= 5 A

प्रश्न 4: R = 12 Ω, Xᴸ = 20 Ω और Xc = 16 Ω

Z = √[12² + 4²]

= √160

≈ 12.65 Ω

9. LCR परिपथ में अनुनाद (Resonance)

परिभाषा

श्रेणी LCR परिपथ में जिस आवृत्ति पर प्रेरणिक प्रतिघात और धारितीय प्रतिघात बराबर हो जाते हैं, उस अवस्था को अनुनाद कहते हैं।

अनुनाद पर:

Xᴸ = Xc

अर्थात्

ωL = 1/(ωC)

इससे,

ω₀ = 1/√LC

और

f₀ = 1/(2π√LC)

इसे अनुनादी आवृत्ति कहते हैं।

अनुनाद पर

Xᴸ − Xc = 0

इसलिए

Z = R

और

I = V/R

शक्ति गुणांक

cos φ = 1

मुख्य बिंदु

i. धारा अधिकतम होती है।
ii. प्रतिबाधा न्यूनतम होती है।
iii. शक्ति गुणांक 1 होता है।
iv. प्रेरक और संधारित्र के प्रभाव एक-दूसरे को संतुलित करते हैं।

सीमाएँ / विशेष स्थिति

यह संबंध आदर्श श्रेणी LCR परिपथ के लिए है। वास्तविक परिपथ में प्रतिरोध और अन्य हानियाँ भी होती हैं।

उदाहरण

i. रेडियो ट्यूनिंग।
ii. आवृत्ति चयन परिपथ।
iii. संचार उपकरणों में चयनात्मक परिपथ।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: L = 1 H और C = 1 μF। अनुनादी आवृत्ति ज्ञात करें।

f₀ = 1/(2π√LC)

= 1/[2π√(1 × 10⁻⁶)]

≈ 159.15 Hz

प्रश्न 2: L = 0.1 H, C = 100 μF

LC = 0.1 × 100 × 10⁻⁶
= 10⁻⁵

f₀ = 1/(2π√10⁻⁵)

≈ 50.3 Hz

प्रश्न 3: अनुनाद पर R = 10 Ω और V = 100 V

Z = R = 10 Ω

I = V/R
= 100/10
= 10 A

प्रश्न 4: L = 2 H, C = 2 μF

f₀ = 1/[2π√(4 × 10⁻⁶)]

≈ 79.6 Hz

10. AC परिपथ में शक्ति (Power in AC Circuit)

परिभाषा

प्रत्यावर्ती परिपथ में एक चक्र के दौरान औसतन स्रोत द्वारा दी गई वास्तविक ऊर्जा प्रति इकाई समय को औसत शक्ति कहते हैं।

P = Vrms Irms cos φ

इसे

P = VI cos φ

भी लिखा जाता है।

शक्ति गुणांक

cos φ = R/Z

इसलिए,

P = I²R

मुख्य बिंदु

i. केवल प्रतिरोध वास्तविक शक्ति का उपभोग करता है।
ii. प्रेरक और संधारित्र आदर्श स्थिति में औसत वास्तविक शक्ति का उपभोग नहीं करते।
iii. शक्ति गुणांक जितना अधिक होगा, उतनी ही अधिक वास्तविक शक्ति समान V और I पर मिलेगी।

उदाहरण

i. हीटर।
ii. मोटर।
iii. AC घरेलू उपकरण।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: V = 220 V, I = 5 A, cos φ = 1

P = 220 × 5
= 1100 W

प्रश्न 2: V = 200 V, I = 4 A, cos φ = 0.8

P = 200 × 4 × 0.8
= 640 W

प्रश्न 3: I = 5 A, R = 20 Ω

P = I²R
= 25 × 20
= 500 W

प्रश्न 4: V = 100 V, I = 2 A और cos φ = 0.5

P = 100 × 2 × 0.5
= 100 W

11. वाटहीन धारा (Wattless Current)

परिभाषा

जब AC परिपथ में औसत वास्तविक शक्ति शून्य होती है, तब बहने वाली धारा को वाटहीन धारा कहा जाता है।

आदर्श शुद्ध प्रेरक या शुद्ध संधारित्र में:

φ = 90°

इसलिए,

cos 90° = 0

और

P = VI cos φ = 0

मुख्य बिंदु

i. ऊर्जा का स्थायी उपभोग नहीं होता।
ii. ऊर्जा स्रोत और प्रेरक/संधारित्र के बीच आगे-पीछे स्थानांतरित होती रहती है।
iii. यह आदर्श स्थिति है।

उदाहरण

i. आदर्श प्रेरक परिपथ।
ii. आदर्श संधारित्र परिपथ।
iii. आदर्श LC परिपथ।

12. शक्ति गुणांक (Power Factor)

परिभाषा

AC परिपथ में वास्तविक शक्ति और आभासी शक्ति के अनुपात को शक्ति गुणांक कहते हैं।

Power Factor = cos φ

और

cos φ = R/Z

विशेषताएँ

i. इसका मान 0 से 1 के बीच होता है।
ii. शुद्ध प्रतिरोध में इसका मान 1 होता है।
iii. शुद्ध प्रेरक या संधारित्र में इसका मान 0 होता है।

महत्व

कम शक्ति गुणांक पर समान वास्तविक शक्ति के लिए अधिक धारा की आवश्यकता पड़ती है, जिससे विद्युत लाइनों में ऊर्जा हानि बढ़ सकती है।

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: R = 6 Ω और Z = 10 Ω

cos φ = R/Z
= 6/10
= 0.6

प्रश्न 2: R = 8 Ω और Z = 10 Ω

cos φ = 8/10
= 0.8

प्रश्न 3: V = 200 V, I = 5 A और P = 800 W

cos φ = P/VI

= 800/(200 × 5)

= 0.8

प्रश्न 4: V = 100 V, I = 2 A और cos φ = 0.5

P = VI cos φ
= 100 × 2 × 0.5
= 100 W

13. ट्रांसफॉर्मर (Transformer)

परिभाषा

ट्रांसफॉर्मर वह यंत्र है जो पारस्परिक प्रेरण के सिद्धांत पर प्रत्यावर्ती वोल्टता को बढ़ाने या घटाने का कार्य करता है।

सिद्धांत

यह पारस्परिक विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर काम करता है।

मुख्य भाग

i. प्राथमिक कुंडली
ii. द्वितीयक कुंडली
iii. नरम लोहे का कोर

आदर्श ट्रांसफॉर्मर का सूत्र

Vs/Vp = Ns/Np

जहाँ

Vp = प्राथमिक वोल्टता
Vs = द्वितीयक वोल्टता
Np = प्राथमिक फेरों की संख्या
Ns = द्वितीयक फेरों की संख्या

आदर्श ट्रांसफॉर्मर में:

VpIp = VsIs

अतः

Is/Ip = Np/Ns

स्टेप-अप

यदि

Ns > Np

तो

Vs > Vp

स्टेप-डाउन

यदि

Ns < Np

तो

Vs < Vp

मुख्य बिंदु

i. ट्रांसफॉर्मर केवल बदलती हुई वोल्टता पर कार्य करता है।
ii. यह DC वोल्टता को सामान्य ट्रांसफॉर्मर की तरह रूपांतरित नहीं करता।
iii. आदर्श ट्रांसफॉर्मर में शक्ति लगभग समान रहती है।

ऊर्जा हानियाँ

वास्तविक ट्रांसफॉर्मर में कुछ ऊर्जा हानि होती है:

i. कॉपर हानि
ii. भंवर धारा हानि
iii. हिस्टेरिसिस हानि
iv. फ्लक्स रिसाव

★ चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: Np = 1000, Ns = 2000 और Vp = 220 V।

Vs/Vp = Ns/Np

Vs = 220 × 2000/1000

= 440 V

यह स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर है।

प्रश्न 2: Np = 2000, Ns = 500 और Vp = 220 V।

Vs = 220 × 500/2000

= 55 V

यह स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर है।

प्रश्न 3: Vp = 220 V, Ip = 2 A और Vs = 110 V।

आदर्श दशा में:

VpIp = VsIs

Is = 220 × 2/110

= 4 A

प्रश्न 4: Np = 500, Ns = 1000, Vp = 110 V।

Vs = 110 × 1000/500

= 220 V

★ महत्वपूर्ण व्युत्पत्तियाँ

1. RMS धारा का सूत्र

मान लें:

i = I₀ sin ωt

ऊष्मीय प्रभाव के आधार पर RMS धारा:

Irms² = औसत(i²)

अतः,

Irms² = I₀²/2

इसलिए,

Irms = I₀/√2

इसी प्रकार:

Vrms = V₀/√2

—

2. प्रेरणिक प्रतिघात का सूत्र

प्रेरक के लिए:

v = L di/dt

यदि

i = I₀ sin ωt

तो

di/dt = ωI₀ cos ωt

अतः वोल्टता का अधिकतम मान:

V₀ = ωLI₀

इसलिए,

V₀/I₀ = ωL

अतः

Xᴸ = ωL

—

3. धारितीय प्रतिघात

संधारित्र के लिए:

q = Cv

और

i = dq/dt

यदि AC वोल्टता के कारण धारा बदलती है, तो परिणामस्वरूप:

I₀ = ωCV₀

अतः

V₀/I₀ = 1/(ωC)

इसलिए:

Xc = 1/(ωC)

—

4. LCR परिपथ की प्रतिबाधा

LCR श्रेणी परिपथ में:

Xᴸ = ωL

Xc = 1/(ωC)

कुल शुद्ध प्रतिघाती प्रभाव:

X = Xᴸ − Xc

प्रतिरोध R और प्रतिघात X परस्पर लंबवत प्रभाव रखते हैं।

इसलिए:

Z² = R² + (Xᴸ − Xc)²

अतः:

Z = √[R² + (Xᴸ − Xc)²]

—

5. अनुनादी आवृत्ति

अनुनाद पर:

Xᴸ = Xc

अर्थात्:

ωL = 1/(ωC)

इसलिए:

ω²LC = 1

अतः:

ω₀ = 1/√LC

और क्योंकि

ω = 2πf

इसलिए:

f₀ = 1/(2π√LC)

—

6. ट्रांसफॉर्मर का वोल्टता अनुपात

आदर्श ट्रांसफॉर्मर में समान समय में दोनों कुंडलियों से संबंधित फ्लक्स परिवर्तन के कारण:

Vp ∝ Np

और

Vs ∝ Ns

अतः:

Vs/Vp = Ns/Np

यही ट्रांसफॉर्मर का मुख्य वोल्टता संबंध है।

★ चार विशेष Numerical — बोर्ड स्तर अभ्यास

प्रश्न 1

एक AC स्रोत की RMS वोल्टता 220 V है। उसका शिखर वोल्टेज ज्ञात कीजिए।

हल:

V₀ = √2 Vrms

= √2 × 220

≈ 311 V

—

प्रश्न 2

एक LCR परिपथ में R = 10 Ω, Xᴸ = 15 Ω और Xc = 6 Ω है। प्रतिबाधा ज्ञात कीजिए।

हल:

Z = √[R² + (Xᴸ − Xc)²]

= √[10² + (15 − 6)²]

= √181

≈ 13.45 Ω

—

प्रश्न 3

एक श्रेणी LCR परिपथ में L = 0.2 H और C = 50 μF है। अनुनादी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।

हल:

f₀ = 1/(2π√LC)

LC = 0.2 × 50 × 10⁻⁶

= 10⁻⁵

f₀ = 1/(2π√10⁻⁵)

≈ 50.3 Hz

—

प्रश्न 4

एक आदर्श ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक फेरों की संख्या 2000 तथा द्वितीयक फेरों की संख्या 500 है। प्राथमिक वोल्टता 240 V है। द्वितीयक वोल्टता ज्ञात कीजिए।

हल:

Vs/Vp = Ns/Np

Vs = 240 × 500/2000

= 60 V

★ Quick Revision

प्रत्यावर्ती धारा

i = I₀ sin ωt

आवृत्ति

f = 1/T

कोणीय आवृत्ति

ω = 2πf

आधे चक्र का औसत मान

Iavg = 2I₀/π

RMS धारा

Irms = I₀/√2

RMS वोल्टता

Vrms = V₀/√2

शुद्ध प्रतिरोध

I = V/R

φ = 0°

प्रेरणिक प्रतिघात

Xᴸ = ωL

धारितीय प्रतिघात

Xc = 1/(ωC)

LCR प्रतिबाधा

Z = √[R² + (Xᴸ − Xc)²]

LCR धारा

I = V/Z

फेज कोण

tan φ = (Xᴸ − Xc)/R

शक्ति गुणांक

cos φ = R/Z

AC शक्ति

P = VI cos φ

प्रतिरोधी शक्ति

P = I²R

अनुनाद

Xᴸ = Xc

अनुनादी कोणीय आवृत्ति

ω₀ = 1/√LC

अनुनादी आवृत्ति

f₀ = 1/(2π√LC)

अनुनाद पर

Z = R

I = V/R

cos φ = 1

ट्रांसफॉर्मर

Vs/Vp = Ns/Np

आदर्श ट्रांसफॉर्मर

VpIp = VsIs

★ पूरे अध्याय के सभी महत्वपूर्ण सूत्र — एक जगह

i = I₀ sin ωt

v = V₀ sin ωt

f = 1/T

ω = 2πf

ω = 2π/T

Iavg = 2I₀/π

Vavg = 2V₀/π

Irms = I₀/√2

Vrms = V₀/√2

I₀ = √2 Irms

V₀ = √2 Vrms

Xᴸ = ωL

Xc = 1/(ωC)

Z = √[R² + (Xᴸ − Xc)²]

I = V/Z

tan φ = (Xᴸ − Xc)/R

cos φ = R/Z

P = VI cos φ

P = I²R

Xᴸ = Xc — अनुनाद

ω₀ = 1/√LC

f₀ = 1/(2π√LC)

Z = R — अनुनाद पर

Imax = V/R — अनुनाद पर

Vs/Vp = Ns/Np

Is/Ip = Np/Ns

VpIp = VsIs — आदर्श ट्रांसफॉर्मर

★ बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

परिभाषात्मक प्रश्न

1. प्रत्यावर्ती धारा क्या है?

2. RMS मान से क्या समझते हैं?

3. प्रेरणिक प्रतिघात क्या है?

4. धारितीय प्रतिघात क्या है?

5. प्रतिबाधा क्या है?

6. शक्ति गुणांक क्या है?

7. अनुनाद क्या है?

8. वाटहीन धारा क्या है?

9. ट्रांसफॉर्मर क्या है?

10. फेजर क्या है?

व्युत्पत्ति वाले प्रश्न

1. प्रत्यावर्ती धारा के RMS मान का सूत्र प्राप्त कीजिए।

2. प्रेरणिक प्रतिघात Xᴸ = ωL प्राप्त कीजिए।

3. धारितीय प्रतिघात Xc = 1/(ωC) प्राप्त कीजिए।

4. LCR परिपथ की प्रतिबाधा का सूत्र प्राप्त कीजिए।

5. अनुनादी आवृत्ति का सूत्र प्राप्त कीजिए।

6. ट्रांसफॉर्मर के वोल्टता अनुपात का संबंध प्राप्त कीजिए।

वर्णनात्मक प्रश्न

1. शुद्ध प्रतिरोधी AC परिपथ समझाइए।

2. शुद्ध प्रेरक AC परिपथ समझाइए।

3. शुद्ध धारितीय AC परिपथ समझाइए।

4. श्रेणी LCR परिपथ में अनुनाद समझाइए।

5. AC परिपथ में शक्ति और शक्ति गुणांक समझाइए।

6. ट्रांसफॉर्मर की रचना, सिद्धांत और कार्यविधि समझाइए।

7. स्टेप-अप और स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर में अंतर लिखिए।

★ खुद को जाँचें — Self Test

प्रश्न 1

साइनाकार AC का RMS मान अधिकतम मान का कितना होता है?

उत्तर: I₀/√2

प्रश्न 2

शुद्ध प्रतिरोध में धारा और वोल्टता के बीच फेज अंतर कितना होता है?

उत्तर: 0°

प्रश्न 3

शुद्ध प्रेरक में धारा वोल्टता से कितने कोण पीछे रहती है?

उत्तर: 90°

प्रश्न 4

शुद्ध संधारित्र में धारा वोल्टता से कितने कोण आगे रहती है?

उत्तर: 90°

प्रश्न 5

प्रेरणिक प्रतिघात का सूत्र क्या है?

उत्तर: Xᴸ = ωL

प्रश्न 6

धारितीय प्रतिघात का सूत्र क्या है?

उत्तर: Xc = 1/(ωC)

प्रश्न 7

अनुनाद की मुख्य शर्त क्या है?

उत्तर: Xᴸ = Xc

प्रश्न 8

अनुनाद पर प्रतिबाधा कितनी होती है?

उत्तर: Z = R

प्रश्न 9

अनुनाद पर शक्ति गुणांक कितना होता है?

उत्तर: 1

प्रश्न 10

ट्रांसफॉर्मर किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

उत्तर: पारस्परिक विद्युतचुम्बकीय प्रेरण।

 

★ अध्याय की सामान्य गलतियाँ

1. RMS और peak value को समान मान लेना।
सही संबंध:

I₀ = √2 Irms

2. प्रेरक और संधारित्र का फेज संबंध उल्टा लिखना।

प्रेरक में:

I, V से 90° पीछे

संधारित्र में:

I, V से 90° आगे

3. अनुनाद पर यह भूल जाना कि

Xᴸ = Xc

और इसलिए:

Z = R

4. शक्ति का सूत्र केवल VI लिख देना।

सामान्य AC परिपथ में:

P = VI cos φ

5. ट्रांसफॉर्मर में फेरों का अनुपात उल्टा लिखना।

सही:

Vs/Vp = Ns/Np

6. ट्रांसफॉर्मर को DC पर सामान्य रूप से काम करने वाला मान लेना।

ट्रांसफॉर्मर बदलते चुंबकीय फ्लक्स पर आधारित है, इसलिए सामान्य ट्रांसफॉर्मर में DC स्रोत का प्रयोग नहीं किया जाता।

★ याद रखने की आसान कड़ी

AC → RMS → R, L, C → Reactance → LCR → Impedance → Resonance → Power → Transformer

अगर यह क्रम समझ में आ गया, तो अध्याय 7 के लगभग सभी सूत्र आपस में जुड़े हुए दिखाई देंगे।

★ अंतिम परीक्षा सार

इस अध्याय में सबसे पहले प्रत्यावर्ती धारा के तात्कालिक, औसत और RMS मान को समझना जरूरी है। इसके बाद R, L और C के अलग-अलग AC व्यवहार से प्रेरणिक प्रतिघात, धारितीय प्रतिघात और फेज संबंध समझे जाते हैं। इन्हीं को मिलाकर LCR परिपथ की प्रतिबाधा तथा अनुनाद प्राप्त होता है। अंत में AC शक्ति, शक्ति गुणांक और ट्रांसफॉर्मर का अध्ययन किया जाता है।

सबसे जरूरी सूत्र याद रखें:

Irms = I₀/√2

Xᴸ = ωL

Xc = 1/(ωC)

Z = √[R² + (Xᴸ − Xc)²]

f₀ = 1/(2π√LC)

P = VI cos φ

Vs/Vp = Ns/Np

इन सात संबंधों को अच्छी तरह समझ लेने पर अध्याय के अधिकांश numerical और theory questions को व्यवस्थित तरीके से हल किया जा सकता है।

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