अध्याय 9 — किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र (Ray Optics and Optical Instruments)
★ भाग 1 — पूरे अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. किरण प्रकाशिकी (Ray Optics)
प्रकाश के संचरण का वह अध्ययन जिसमें प्रकाश को सीधी रेखा में चलने वाली किरणों के रूप में माना जाता है, किरण प्रकाशिकी कहलाता है।
2. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
जब प्रकाश किसी परावर्तक सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटता है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
3. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है और उसकी चाल बदलने के कारण उसकी दिशा बदलती है, तो इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
4. आपतित किरण (Incident Ray)
किसी सतह पर गिरने वाली प्रकाश किरण को आपतित किरण कहते हैं।
5. परावर्तित किरण (Reflected Ray)
परावर्तक सतह से टकराकर वापस लौटने वाली प्रकाश किरण को परावर्तित किरण कहते हैं।
6. अपवर्तित किरण (Refracted Ray)
एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करने के बाद आगे बढ़ने वाली प्रकाश किरण को अपवर्तित किरण कहते हैं।
7. अभिलम्ब (Normal)
आपतन बिंदु पर सतह के लंबवत खींची गई काल्पनिक रेखा को अभिलम्ब कहते हैं।
8. आपतन कोण (Angle of Incidence)
आपतित किरण और अभिलम्ब के बीच बनने वाले कोण को आपतन कोण कहते हैं।
9. परावर्तन कोण (Angle of Reflection)
परावर्तित किरण और अभिलम्ब के बीच बनने वाले कोण को परावर्तन कोण कहते हैं।
10. अपवर्तन कोण (Angle of Refraction)
अपवर्तित किरण और अभिलम्ब के बीच बनने वाले कोण को अपवर्तन कोण कहते हैं।
11. अपवर्तनांक (Refractive Index)
निर्वात में प्रकाश की चाल और किसी माध्यम में प्रकाश की चाल के अनुपात को उस माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।
μ = c/v
12. निरपेक्ष अपवर्तनांक (Absolute Refractive Index)
निर्वात में प्रकाश की चाल और किसी माध्यम में प्रकाश की चाल के अनुपात को उस माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं।
13. आपेक्षिक अपवर्तनांक (Relative Refractive Index)
एक माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम के अपवर्तनांक को आपेक्षिक अपवर्तनांक कहते हैं।
μ₂₁ = μ₂/μ₁
14. प्रकाशीय सघन माध्यम (Optically Denser Medium)
जिस माध्यम में प्रकाश की चाल दूसरे माध्यम की तुलना में कम होती है, वह प्रकाशीय रूप से अधिक सघन माध्यम कहलाता है।
15. प्रकाशीय विरल माध्यम (Optically Rarer Medium)
जिस माध्यम में प्रकाश की चाल दूसरे माध्यम की तुलना में अधिक होती है, वह प्रकाशीय रूप से अधिक विरल माध्यम कहलाता है।
16. गोलीय दर्पण (Spherical Mirror)
गोले की सतह के किसी भाग से बने परावर्तक दर्पण को गोलीय दर्पण कहते हैं।
17. अवतल दर्पण (Concave Mirror)
जिस गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह अंदर की ओर मुड़ी होती है, उसे अवतल दर्पण कहते हैं।
18. उत्तल दर्पण (Convex Mirror)
जिस गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी होती है, उसे उत्तल दर्पण कहते हैं।
19. ध्रुव (Pole)
गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह के मध्य बिंदु को ध्रुव कहते हैं।
20. वक्रता केंद्र (Centre of Curvature)
उस गोले के केंद्र को, जिसका भाग गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह है, वक्रता केंद्र कहते हैं।
21. वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature)
दर्पण के ध्रुव और वक्रता केंद्र के बीच की दूरी को वक्रता त्रिज्या कहते हैं।
22. मुख्य अक्ष (Principal Axis)
गोलीय दर्पण के ध्रुव और वक्रता केंद्र से होकर जाने वाली सीधी रेखा को मुख्य अक्ष कहते हैं।
23. मुख्य फोकस (Principal Focus)
मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं, वह मुख्य फोकस कहलाता है।
24. फोकस दूरी (Focal Length)
दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते हैं।
f = R/2
25. वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image)
जब प्रकाश किरणें वास्तव में किसी बिंदु पर मिलकर प्रतिबिंब बनाती हैं, तो उसे वास्तविक प्रतिबिंब कहते हैं। इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।
26. आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image)
जब प्रकाश किरणें वास्तव में नहीं मिलतीं, लेकिन पीछे की ओर बढ़ाने पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं, तो आभासी प्रतिबिंब बनता है।
27. आवर्धन (Magnification)
प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई के अनुपात को आवर्धन कहते हैं।
m = hᵢ/hₒ
28. लेंस (Lens)
दो अपवर्तक सतहों से घिरे पारदर्शी पदार्थ को लेंस कहते हैं।
29. उत्तल लेंस (Convex Lens)
जो लेंस बीच में मोटा और किनारों पर पतला होता है, उसे उत्तल लेंस कहते हैं। यह सामान्यतः प्रकाश किरणों को अभिसरित करता है।
30. अवतल लेंस (Concave Lens)
जो लेंस बीच में पतला और किनारों पर मोटा होता है, उसे अवतल लेंस कहते हैं। यह सामान्यतः प्रकाश किरणों को अपसारित करता है।
31. प्रकाशिक केंद्र (Optical Centre)
पतले लेंस का वह बिंदु जिससे होकर जाने वाली किरण लगभग बिना विचलन के निकलती है, प्रकाशिक केंद्र कहलाता है।
32. लेंस की क्षमता (Power of Lens)
लेंस की अभिसारी या अपसारी क्षमता को उसकी शक्ति कहते हैं।
P = 1/f
33. डायॉप्टर (Dioptre)
लेंस की शक्ति का SI मात्रक डायॉप्टर है। एक मीटर फोकस दूरी वाले लेंस की शक्ति एक डायॉप्टर होती है।
34. लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker’s Formula)
लेंस की फोकस दूरी, पदार्थ के अपवर्तनांक तथा दोनों सतहों की वक्रता त्रिज्याओं के बीच संबंध बताने वाले सूत्र को लेंस निर्माता सूत्र कहते हैं।
35. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection)
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तब प्रकाश पूरी तरह सघन माध्यम में लौट आता है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
36. क्रांतिक कोण (Critical Angle)
सघन माध्यम में वह आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90° हो जाता है, क्रांतिक कोण कहलाता है।
37. प्रकाशिक तंतु (Optical Fibre)
ऐसा पतला पारदर्शी तंतु जिसमें प्रकाश पूर्ण आंतरिक परावर्तन द्वारा आगे बढ़ता है, प्रकाशिक तंतु कहलाता है।
38. प्रिज्म (Prism)
दो समतल अपवर्तक पृष्ठों से घिरे पारदर्शी माध्यम को प्रिज्म कहते हैं।
39. प्रिज्म कोण (Angle of Prism)
प्रिज्म के दोनों अपवर्तक पृष्ठों के बीच बने कोण को प्रिज्म कोण कहते हैं।
40. विचलन कोण (Angle of Deviation)
प्रकाश की आपतित दिशा और निर्गत दिशा के बीच बने कोण को विचलन कोण कहते हैं।
41. न्यूनतम विचलन (Minimum Deviation)
प्रिज्म से गुजरते समय विचलन कोण के न्यूनतम मान को न्यूनतम विचलन कहते हैं।
42. वर्ण-विक्षेपण (Dispersion)
श्वेत प्रकाश का अपने विभिन्न रंगों में विभाजित होना वर्ण-विक्षेपण कहलाता है।
43. समंजन (Accommodation)
आँख के लेंस द्वारा अपनी फोकस दूरी बदलकर पास और दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने की क्षमता को समंजन कहते हैं।
44. निकट बिंदु (Near Point)
सामान्य आँख के लिए वह न्यूनतम दूरी जिस पर वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है, निकट बिंदु कहलाता है। इसका मान लगभग 25 cm है।
45. दूर बिंदु (Far Point)
सामान्य आँख के लिए वह अधिकतम दूरी जिस पर वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है, दूर बिंदु कहलाता है। सामान्य आँख का दूर बिंदु अनंत पर माना जाता है।
46. निकट दृष्टि दोष (Myopia)
जिस दृष्टि दोष में दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं, उसे निकट दृष्टि दोष कहते हैं। इसका सुधार अवतल लेंस से किया जाता है।
47. दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)
जिस दृष्टि दोष में पास की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं, उसे दूर दृष्टि दोष कहते हैं। इसका सुधार उत्तल लेंस से किया जाता है।
48. सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope)
कम फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस से छोटी वस्तु को बड़ा देखने वाले यंत्र को सरल सूक्ष्मदर्शी कहते हैं।
49. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope)
दो उत्तल लेंसों की सहायता से छोटी वस्तु का अधिक आवर्धित प्रतिबिंब बनाने वाले यंत्र को संयुक्त सूक्ष्मदर्शी कहते हैं।
50. खगोलीय दूरदर्शक (Astronomical Telescope)
दूर स्थित खगोलीय पिंडों को देखने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रकाशिक यंत्र को खगोलीय दूरदर्शक कहते हैं।
★ भाग 2 — प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
★ परिभाषा
जब प्रकाश किसी परावर्तक सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटता है, तो इसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
★ परावर्तन के नियम
पहला नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
दूसरा नियम: आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होते हैं।
i = r
★ मुख्य बिंदु
– कोण हमेशा अभिलंब से मापा जाता है, सतह से नहीं।
– चिकनी सतह पर नियमित परावर्तन होता है।
– खुरदरी सतह पर विसरित परावर्तन होता है।
– परावर्तन में प्रकाश उसी माध्यम में वापस लौटता है।
★ तीन उदाहरण
1. दर्पण में चेहरा दिखाई देना।
2. शांत पानी में आसपास की वस्तुओं का प्रतिबिंब दिखाई देना।
3. चमकीली धातु से प्रकाश का वापस लौटना।
★ भाग 3 — गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)
गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं—
1. अवतल दर्पण (Concave Mirror)
2. उत्तल दर्पण (Convex Mirror)
★ अवतल दर्पण
जिस दर्पण की परावर्तक सतह अंदर की ओर होती है, उसे अवतल दर्पण कहते हैं।
उपयोग: शेविंग दर्पण, दंत चिकित्सक का दर्पण, सर्चलाइट तथा टॉर्च।
★ उत्तल दर्पण
जिस दर्पण की परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी होती है, उसे उत्तल दर्पण कहते हैं।
उपयोग: वाहनों के पीछे देखने वाले दर्पण और सुरक्षा दर्पण।
★ मुख्य सूत्र
R = 2f
अर्थात्
f = R/2
जहाँ R = वक्रता त्रिज्या और f = फोकस दूरी।
★ दर्पण में प्रतिबिंब की विशेषताएँ
अवतल दर्पण:
– वस्तु की स्थिति बदलने पर प्रतिबिंब का आकार और प्रकृति बदल सकती है।
– वस्तु फोकस के बाहर हो तो सामान्यतः वास्तविक प्रतिबिंब बन सकता है।
– वस्तु फोकस और ध्रुव के बीच हो तो आभासी, सीधा तथा बड़ा प्रतिबिंब बनता है।
उत्तल दर्पण:
– प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा होता है।
– दृष्टि का क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक होता है।
★ दर्पण सूत्र (Mirror Formula)
1/f = 1/v + 1/u
जहाँ—
u = वस्तु दूरी
v = प्रतिबिंब दूरी
f = फोकस दूरी
★ दर्पण का आवर्धन
m = hᵢ/hₒ
गोलीय दर्पण के लिए—
m = −v/u
★ संकेत परिपाटी
– सभी दूरियाँ ध्रुव से मापी जाती हैं।
– आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरी ऋणात्मक तथा विपरीत दिशा में धनात्मक ली जाती है।
– मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक तथा नीचे की ऊँचाई ऋणात्मक ली जाती है।
★ दर्पण सूत्र पर चार हल किए हुए प्रश्न
प्रश्न 1
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 15 cm है। वक्रता त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
हल:
R = 2f
R = 2 × 15
R = 30 cm
उत्तर: 30 cm
प्रश्न 2
एक अवतल दर्पण के लिए u = −30 cm और f = −15 cm है। प्रतिबिंब दूरी ज्ञात कीजिए।
हल:
1/f = 1/v + 1/u
−1/15 = 1/v − 1/30
1/v = −1/15 + 1/30
1/v = −1/30
v = −30 cm
उत्तर: v = −30 cm
प्रश्न 3
किसी दर्पण में वस्तु की ऊँचाई 4 cm और प्रतिबिंब की ऊँचाई −8 cm है। आवर्धन ज्ञात कीजिए।
m = hᵢ/hₒ
m = −8/4
m = −2
उत्तर: m = −2
प्रश्न 4
किसी दर्पण की वक्रता त्रिज्या 50 cm है। फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
f = R/2
f = 50/2
f = 25 cm
उत्तर: 25 cm
★ भाग 4 — प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
★ परिभाषा
जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो उसकी चाल बदलने के कारण उसकी दिशा बदल सकती है। इसे प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
★ अपवर्तन के नियम
पहला नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
दूसरा नियम: निश्चित दो माध्यमों के लिए—
n₁ sin i = n₂ sin r
इसे स्नेल का नियम कहते हैं।
★ अपवर्तनांक
μ = c/v
जहाँ—
c = निर्वात में प्रकाश की चाल
v = माध्यम में प्रकाश की चाल
★ मुख्य बातें
– विरल से सघन माध्यम में जाने पर प्रकाश अभिलंब की ओर मुड़ता है।
– सघन से विरल माध्यम में जाने पर प्रकाश अभिलंब से दूर मुड़ता है।
– आपतन कोण शून्य होने पर प्रकाश की दिशा नहीं बदलती।
– माध्यम बदलने पर आवृत्ति नहीं बदलती, लेकिन चाल और तरंगदैर्ध्य बदल सकते हैं।
★ तीन उदाहरण
1. पानी में पड़ी पेंसिल का टेढ़ा दिखाई देना।
2. पानी में सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखाई देना।
3. तालाब की गहराई वास्तविक गहराई से कम दिखाई देना।
★ अपवर्तनांक पर चार संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1
किसी माध्यम में प्रकाश की चाल 2 × 10⁸ m/s है। अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
μ = c/v
μ = 3 × 10⁸ / 2 × 10⁸
μ = 1.5
उत्तर: 1.5
प्रश्न 2
किसी माध्यम का अपवर्तनांक 1.5 है। उसमें प्रकाश की चाल ज्ञात कीजिए।
v = c/μ
v = 3 × 10⁸/1.5
v = 2 × 10⁸ m/s
उत्तर: 2 × 10⁸ m/s
प्रश्न 3
किसी माध्यम का अपवर्तनांक 1.25 है। प्रकाश की चाल ज्ञात कीजिए।
v = 3 × 10⁸/1.25
v = 2.4 × 10⁸ m/s
उत्तर: 2.4 × 10⁸ m/s
प्रश्न 4
यदि वायु से माध्यम में जाते समय आपतन कोण 30° और अपवर्तन कोण लगभग 19.5° है, तो अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
μ = sin i/sin r
μ = sin 30°/sin 19.5°
μ ≈ 0.5/0.333
μ ≈ 1.50
उत्तर: लगभग 1.50
★ भाग 5 — स्पष्ट गहराई (Apparent Depth)
★ परिभाषा
जब पानी या किसी पारदर्शी सघन माध्यम में रखी वस्तु को वायु से देखा जाता है, तो वह सामान्यतः अपनी वास्तविक गहराई से कम गहराई पर दिखाई देती है। दिखाई देने वाली गहराई को स्पष्ट गहराई कहते हैं।
छोटे कोणों के लिए—
μ = वास्तविक गहराई / स्पष्ट गहराई
★ मुख्य बातें
– वस्तु अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर दिखाई देती है।
– यह घटना अपवर्तन के कारण होती है।
– यह सूत्र लगभग लंबवत देखने की स्थिति में उपयोग किया जाता है।
★ तीन उदाहरण
1. पानी में रखा सिक्का ऊपर दिखाई देना।
2. तालाब की तली उथली दिखाई देना।
3. पानी के अंदर रखी वस्तु की गहराई कम दिखाई देना।
★ चार संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1
वास्तविक गहराई 12 cm और अपवर्तनांक 1.5 है। स्पष्ट गहराई ज्ञात कीजिए।
स्पष्ट गहराई = वास्तविक गहराई/μ
= 12/1.5
= 8 cm
उत्तर: 8 cm
प्रश्न 2
वास्तविक गहराई 20 cm और अपवर्तनांक 4/3 है।
स्पष्ट गहराई = 20 ÷ (4/3)
= 20 × 3/4
= 15 cm
उत्तर: 15 cm
प्रश्न 3
वास्तविक गहराई 30 cm और अपवर्तनांक 1.5 है।
स्पष्ट गहराई = 30/1.5
= 20 cm
उत्तर: 20 cm
प्रश्न 4
वास्तविक गहराई 24 cm और स्पष्ट गहराई 16 cm है। अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
μ = 24/16
μ = 1.5
उत्तर: 1.5
★ भाग 6 — पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection)
★ परिभाषा
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश अपवर्तित होकर बाहर जाने के बजाय पूरी तरह उसी सघन माध्यम में परावर्तित हो जाता है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
★ आवश्यक शर्तें
1. प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए।
2. आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
i > C
★ क्रांतिक कोण का सूत्र
जब प्रकाश सघन माध्यम से वायु में जा रहा हो—
sin C = 1/μ
या
μ = 1/sin C
★ मुख्य उपयोग
– प्रकाशिक तंतु में प्रकाश का संचरण।
– हीरे की चमक।
– कुछ प्रिज्मों में प्रकाश की दिशा बदलना।
– चिकित्सा में एंडोस्कोपी।
★ तीन उदाहरण
1. हीरे का चमकना।
2. प्रकाशिक तंतु में प्रकाश का आगे बढ़ना।
3. प्रिज्म के अंदर प्रकाश का पूर्ण परावर्तन।
★ चार संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1
किसी माध्यम का अपवर्तनांक 2 है। क्रांतिक कोण ज्ञात कीजिए।
sin C = 1/2
C = 30°
उत्तर: 30°
प्रश्न 2
किसी माध्यम का क्रांतिक कोण 30° है। अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
μ = 1/sin 30°
μ = 1/0.5
μ = 2
उत्तर: 2
प्रश्न 3
किसी माध्यम का अपवर्तनांक 1.5 है। क्रांतिक कोण ज्ञात कीजिए।
sin C = 1/1.5
sin C = 0.667
C ≈ 41.8°
उत्तर: लगभग 41.8°
प्रश्न 4
यदि आपतन कोण क्रांतिक कोण के बराबर हो, तो अपवर्तन कोण कितना होगा?
क्रांतिक कोण की परिभाषा के अनुसार—
r = 90°
उत्तर: 90°
★ भाग 7 — प्रकाशिक तंतु (Optical Fibre)
★ परिभाषा
प्रकाशिक तंतु एक पतला पारदर्शी तंतु है जिसमें प्रकाश पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण लंबी दूरी तक संचरित होता है।
इसके मुख्य भाग हैं—
1. कोर (Core)
2. क्लैडिंग (Cladding)
कोर का अपवर्तनांक क्लैडिंग के अपवर्तनांक से अधिक होता है।
n₁ > n₂
★ कार्य करने का सिद्धांत
प्रकाश कोर में प्रवेश करने के बाद कोर और क्लैडिंग की सीमा पर बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन करता है। इसी कारण प्रकाश तंतु के भीतर आगे बढ़ता रहता है।
★ उपयोग
– इंटरनेट और दूरसंचार।
– चिकित्सा में एंडोस्कोपी।
– लंबी दूरी तक सूचना भेजना।
★ मुख्य विशेषताएँ
– हल्के और लचीले होते हैं।
– अधिक सूचना भेजने में उपयोगी होते हैं।
– विद्युतचुंबकीय हस्तक्षेप का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है।
★ भाग 8 — गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन (Refraction at a Spherical Surface)
★ परिभाषा
जब प्रकाश दो माध्यमों को अलग करने वाले गोलीय पृष्ठ से अपवर्तित होता है, तो उसे गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन कहते हैं।
★ सूत्र
n₂/v − n₁/u = (n₂ − n₁)/R
जहाँ—
n₁ = पहले माध्यम का अपवर्तनांक
n₂ = दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक
u = वस्तु दूरी
v = प्रतिबिंब दूरी
R = वक्रता त्रिज्या
★ मुख्य बातें
– सभी दूरियाँ उचित संकेत परिपाटी के अनुसार ली जाती हैं।
– यह संबंध गोलीय अपवर्तक पृष्ठ के लिए उपयोगी है।
– समतल पृष्ठ को R बहुत बड़ा होने की स्थिति के रूप में समझा जा सकता है।
★ तीन उदाहरण
1. वायु से काँच में प्रकाश का प्रवेश।
2. पानी से काँच में प्रकाश का प्रवेश।
3. गोलीय काँच की सतह पर प्रकाश का अपवर्तन।
★ चार अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
यदि n₁ = 1, n₂ = 1.5 और R = 20 cm है, तो (n₂ − n₁)/R ज्ञात कीजिए।
= (1.5 − 1)/20
= 0.5/20
= 0.025 cm⁻¹
उत्तर: 0.025 cm⁻¹
प्रश्न 2
यदि n₁ = n₂ हो, तो सूत्र का दाहिना पक्ष क्या होगा?
(n₂ − n₁)/R = 0
उत्तर: शून्य।
प्रश्न 3
यदि गोलीय पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या बहुत बड़ी हो, तो पृष्ठ किसके समान माना जा सकता है?
उत्तर: लगभग समतल पृष्ठ।
प्रश्न 4
किसी माध्यम का अपवर्तनांक 1.5 है। उसमें प्रकाश की चाल ज्ञात कीजिए।
v = c/μ
v = 3 × 10⁸/1.5
v = 2 × 10⁸ m/s
उत्तर: 2 × 10⁸ m/s
★ भाग 9 — लेंस (Lens)
★ उत्तल लेंस (Convex Lens)
जो लेंस बीच में मोटा और किनारों पर पतला होता है, उसे उत्तल लेंस कहते हैं। यह सामान्यतः समानांतर प्रकाश किरणों को अभिसरित करता है।
★ अवतल लेंस (Concave Lens)
जो लेंस बीच में पतला और किनारों पर मोटा होता है, उसे अवतल लेंस कहते हैं। यह सामान्यतः प्रकाश किरणों को अपसारित करता है।
★ लेंस के मुख्य भाग
– प्रकाशिक केंद्र (O)
– मुख्य अक्ष
– मुख्य फोकस (F)
– फोकस दूरी (f)
★ लेंस सूत्र (Lens Formula)
1/f = 1/v − 1/u
जहाँ—
u = वस्तु दूरी
v = प्रतिबिंब दूरी
f = फोकस दूरी
★ लेंस का आवर्धन
m = hᵢ/hₒ
पतले लेंस के लिए—
m = v/u
★ संकेत परिपाटी
– दूरियाँ प्रकाश की आपतित दिशा में धनात्मक और विपरीत दिशा में ऋणात्मक मानी जाती हैं।
– मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक होती है।
– मुख्य अक्ष के नीचे की ऊँचाई ऋणात्मक होती है।
– उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक और अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।
★ तीन उपयोग
1. कैमरा।
2. आवर्धक काँच।
3. चश्मा तथा प्रकाशिक यंत्र।
★ लेंस सूत्र पर चार हल किए हुए प्रश्न
प्रश्न 1
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 20 cm और वस्तु दूरी −30 cm है। प्रतिबिंब दूरी ज्ञात कीजिए।
1/f = 1/v − 1/u
1/20 = 1/v + 1/30
1/v = 1/20 − 1/30
1/v = 1/60
v = 60 cm
उत्तर: 60 cm
प्रश्न 2
f = 15 cm और u = −30 cm है। v ज्ञात कीजिए।
1/15 = 1/v + 1/30
1/v = 1/15 − 1/30
1/v = 1/30
v = 30 cm
उत्तर: 30 cm
प्रश्न 3
वस्तु की ऊँचाई 5 cm और प्रतिबिंब की ऊँचाई 10 cm है। आवर्धन ज्ञात कीजिए।
m = hᵢ/hₒ
m = 10/5
m = 2
उत्तर: 2
प्रश्न 4
किसी अवतल लेंस की फोकस दूरी −25 cm है। उसका प्रकार बताइए।
फोकस दूरी ऋणात्मक है।
उत्तर: अवतल लेंस।
★ भाग 10 — लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker’s Formula)
★ सूत्र
वायु में रखे पतले लेंस के लिए—
1/f = (μ − 1)(1/R₁ − 1/R₂)
जहाँ—
μ = लेंस पदार्थ का अपवर्तनांक
R₁ = पहली सतह की वक्रता त्रिज्या
R₂ = दूसरी सतह की वक्रता त्रिज्या
★ यह सूत्र क्या बताता है?
यह सूत्र बताता है कि लेंस की फोकस दूरी उसके पदार्थ के अपवर्तनांक और दोनों सतहों की वक्रता पर निर्भर करती है।
★ मुख्य बिंदु
– पदार्थ का अपवर्तनांक बदलने पर फोकस दूरी बदलती है।
– सतहों की वक्रता बदलने पर लेंस की शक्ति बदलती है।
– सूत्र में R₁ और R₂ के चिन्ह सही रखना आवश्यक है।
★ तीन उदाहरण
1. किसी काँच के लेंस की फोकस दूरी निकालना।
2. अलग-अलग वक्रता वाले लेंसों की तुलना करना।
3. लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक का प्रभाव समझना।
★ चार अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
μ = 1.5, R₁ = 20 cm और R₂ = −20 cm है। फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
1/f = (1.5 − 1)(1/20 − 1/−20)
= 0.5(1/20 + 1/20)
= 0.5 × 2/20
= 1/20
f = 20 cm
उत्तर: 20 cm
प्रश्न 2
यदि μ = 1.5, R₁ = 30 cm और R₂ = −30 cm हो, तो—
1/f = 0.5(1/30 + 1/30)
= 0.5 × 2/30
= 1/30
f = 30 cm
उत्तर: 30 cm
प्रश्न 3
यदि पदार्थ का अपवर्तनांक बढ़ता है और वक्रता त्रिज्याएँ स्थिर रहती हैं, तो लेंस की शक्ति पर क्या प्रभाव होगा?
लेंस मेकर सूत्र के अनुसार 1/f का मान बढ़ेगा।
उत्तर: लेंस की शक्ति बढ़ेगी।
प्रश्न 4
यदि लेंस और उसके आसपास के माध्यम का अपवर्तनांक समान हो, तो लेंस की शक्ति पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर: लेंस की अभिसारी या अपसारी क्षमता शून्य हो जाएगी।
★ भाग 11 — लेंस की क्षमता (Power of Lens)
★ परिभाषा
लेंस की प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसारित करने की क्षमता को उसकी शक्ति कहते हैं।
★ सूत्र
P = 1/f
यहाँ f मीटर में होना चाहिए।
★ मात्रक
डायॉप्टर (D)
1 D = 1 m⁻¹
★ मुख्य बातें
– उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक होती है।
– अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है।
– फोकस दूरी कम होने पर शक्ति का परिमाण बढ़ता है।
★ चार संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1
f = 50 cm वाले उत्तल लेंस की शक्ति ज्ञात कीजिए।
f = 0.50 m
P = 1/0.50
P = +2 D
उत्तर: +2 D
प्रश्न 2
f = −25 cm वाले अवतल लेंस की शक्ति ज्ञात कीजिए।
f = −0.25 m
P = 1/−0.25
P = −4 D
उत्तर: −4 D
प्रश्न 3
किसी लेंस की शक्ति +5 D है। फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
f = 1/P
f = 1/5
f = 0.2 m
f = 20 cm
उत्तर: 20 cm
प्रश्न 4
किसी लेंस की शक्ति −2 D है। फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
f = 1/−2
f = −0.5 m
f = −50 cm
उत्तर: −50 cm
★ भाग 12 — संपर्क में रखे लेंसों का संयोजन (Combination of Lenses in Contact)
जब दो या अधिक पतले लेंस एक ही मुख्य अक्ष पर एक-दूसरे के संपर्क में रखे जाते हैं, तो उनकी संयुक्त शक्ति उनके अलग-अलग शक्तियों के बीजीय योग के बराबर होती है।
★ सूत्र
P = P₁ + P₂
अनेक लेंसों के लिए—
P = P₁ + P₂ + P₃ + …
दो लेंसों के लिए—
1/F = 1/f₁ + 1/f₂
★ तीन उपयोग
1. चश्मे के प्रकाशिक तंत्र में।
2. कैमरे के लेंस समूह में।
3. प्रकाशिक यंत्रों में अधिक उपयुक्त फोकस दूरी प्राप्त करने में।
★ चार संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1
दो लेंसों की शक्तियाँ +2 D और +3 D हैं।
P = 2 + 3
P = +5 D
उत्तर: +5 D
प्रश्न 2
दो लेंसों की शक्तियाँ +4 D और −2 D हैं।
P = 4 − 2
P = +2 D
उत्तर: +2 D
प्रश्न 3
दो लेंसों की शक्तियाँ −3 D और −2 D हैं।
P = −3 − 2
P = −5 D
उत्तर: −5 D
प्रश्न 4
दो लेंसों की संयुक्त शक्ति +5 D है। संयुक्त फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
F = 1/P
F = 1/5
F = 0.2 m
F = 20 cm
उत्तर: 20 cm
★ भाग 13 — प्रिज्म से अपवर्तन (Refraction Through a Prism)
★ परिभाषा
प्रिज्म दो समतल अपवर्तक पृष्ठों से घिरा पारदर्शी माध्यम होता है। इसमें प्रकाश के प्रवेश और निर्गमन के समय अपवर्तन होता है, जिससे किरण की दिशा बदल जाती है।
★ मुख्य सूत्र
δ = i + e − A
जहाँ—
δ = विचलन कोण
i = आपतन कोण
e = निर्गमन कोण
A = प्रिज्म कोण
★ न्यूनतम विचलन की स्थिति
न्यूनतम विचलन पर—
i = e
r₁ = r₂ = A/2
प्रिज्म का अपवर्तनांक—
μ = sin[(A + δₘ)/2] / sin(A/2)
छोटे कोण वाले प्रिज्म के लिए लगभग—
δ = (μ − 1)A
★ तीन उदाहरण
1. प्रिज्म से प्रकाश का विचलन।
2. प्रिज्म द्वारा वर्णक्रम बनना।
3. प्रकाश की दिशा बदलने के लिए प्रिज्म का उपयोग।
★ चार संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1
A = 60°, i = 50° और e = 40° है। विचलन कोण ज्ञात कीजिए।
δ = i + e − A
δ = 50° + 40° − 60°
δ = 30°
उत्तर: 30°
प्रश्न 2
छोटे कोण वाले प्रिज्म के लिए μ = 1.5 और A = 4° है।
δ = (μ − 1)A
δ = (1.5 − 1) × 4°
δ = 2°
उत्तर: लगभग 2°
प्रश्न 3
A = 60° और δₘ = 40° है। अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
μ = sin[(60° + 40°)/2] / sin(60°/2)
μ = sin 50° / sin 30°
μ ≈ 0.766/0.5
μ ≈ 1.53
उत्तर: लगभग 1.53
प्रश्न 4
न्यूनतम विचलन की स्थिति में आपतन कोण 45° है। निर्गमन कोण ज्ञात कीजिए।
न्यूनतम विचलन पर i = e
अतः e = 45°
उत्तर: 45°
★ भाग 14 — वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light)
★ परिभाषा
श्वेत प्रकाश का विभिन्न रंगों में विभाजित होना वर्ण-विक्षेपण कहलाता है।
★ रंगों का क्रम
बैंगनी → जामुनी → नीला → हरा → पीला → नारंगी → लाल
★ मुख्य बिंदु
– अलग-अलग रंगों के लिए अपवर्तनांक अलग-अलग होता है।
– बैंगनी प्रकाश का विचलन सबसे अधिक होता है।
– लाल प्रकाश का विचलन सबसे कम होता है।
– प्रिज्म श्वेत प्रकाश को उसके घटक रंगों में विभाजित कर सकता है।
★ तीन उदाहरण
1. प्रिज्म से वर्णक्रम बनना।
2. वर्षा के बाद इंद्रधनुष दिखाई देना।
3. पानी की बूँदों में प्रकाश के रंगों का अलग-अलग दिखाई देना।
★ भाग 15 — मानव नेत्र (Human Eye)
★ परिभाषा
मानव नेत्र एक प्राकृतिक प्रकाशिक यंत्र है जो वस्तुओं से आने वाले प्रकाश की सहायता से रेटिना पर प्रतिबिंब बनाता है, जिससे हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं।
★ मुख्य भाग
– कॉर्निया
– परितारिका
– पुतली
– नेत्र लेंस
– रेटिना
– दृष्टि तंत्रिका
★ समंजन
आँख के लेंस द्वारा अपनी फोकस दूरी बदलकर पास तथा दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने की क्षमता को समंजन कहते हैं।
★ महत्वपूर्ण मान
सामान्य आँख का निकट बिंदु = 25 cm
सामान्य आँख का दूर बिंदु = अनंत
★ मुख्य बातें
– रेटिना पर वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है।
– आँख का लेंस अपनी फोकस दूरी बदल सकता है।
– सामान्य आँख निकट और दूर की वस्तुओं को समंजन द्वारा स्पष्ट देखती है।
★ भाग 16 — दृष्टि दोष और उनका निवारण (Defects of Vision and Their Correction)
★ निकट दृष्टि दोष (Myopia)
इस दोष में दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं, जबकि पास की वस्तुएँ अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती हैं।
निवारण
उचित शक्ति के अवतल लेंस से सुधार किया जाता है।
★ दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)
इस दोष में पास की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देने में कठिनाई होती है।
निवारण
उचित शक्ति के उत्तल लेंस से सुधार किया जाता है।
★ जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia)
उम्र बढ़ने के साथ आँख के समंजन की क्षमता कम होने से पास की वस्तुओं को स्पष्ट देखने में कठिनाई हो सकती है। इसे जरा-दूरदृष्टिता कहते हैं।
निवारण
आवश्यकतानुसार उत्तल लेंस या उपयुक्त बहुफोकसी चश्मे का उपयोग किया जा सकता है।
★ तीन मुख्य बातें
1. Myopia → अवतल लेंस।
2. Hypermetropia → उत्तल लेंस।
3. Presbyopia → आवश्यकतानुसार उत्तल या बहुफोकसी लेंस।
★ भाग 17 — सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple Microscope)
★ परिभाषा
कम फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की सहायता से छोटी वस्तु को बड़ा देखने वाले प्रकाशिक यंत्र को सरल सूक्ष्मदर्शी कहते हैं।
★ आवर्धन क्षमता
जब अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बने—
M = D/f
जब अंतिम प्रतिबिंब निकट बिंदु पर बने—
M = 1 + D/f
जहाँ—
D = स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी
f = लेंस की फोकस दूरी
सामान्य आँख के लिए D = 25 cm।
★ मुख्य बातें
– इसमें उत्तल लेंस का उपयोग होता है।
– वस्तु को फोकस दूरी के भीतर रखा जाता है।
– अंतिम प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा होता है।
★ तीन उपयोग
1. छोटे अक्षरों को बड़ा पढ़ना।
2. छोटे नमूनों को देखना।
3. आभूषणों और छोटी वस्तुओं का निरीक्षण।
★ चार संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1
f = 5 cm और D = 25 cm है। अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर हो तो आवर्धन ज्ञात कीजिए।
M = D/f
M = 25/5
M = 5
उत्तर: 5
प्रश्न 2
f = 5 cm है और प्रतिबिंब निकट बिंदु पर बने तो आवर्धन ज्ञात कीजिए।
M = 1 + D/f
M = 1 + 25/5
M = 6
उत्तर: 6
प्रश्न 3
f = 10 cm है। अनंत पर अंतिम प्रतिबिंब के लिए आवर्धन ज्ञात कीजिए।
M = 25/10
M = 2.5
उत्तर: 2.5
प्रश्न 4
आवर्धन 5 है और अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है। फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
M = D/f
f = D/M
f = 25/5
f = 5 cm
उत्तर: 5 cm
★ भाग 18 — संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope)
★ परिभाषा
दो उत्तल लेंसों की सहायता से बहुत छोटी वस्तु का अधिक आवर्धित प्रतिबिंब बनाने वाले प्रकाशिक यंत्र को संयुक्त सूक्ष्मदर्शी कहते हैं।
इसके दो मुख्य भाग हैं—
1. अभिदृश्यक (Objective)
2. नेत्रिका (Eyepiece)
★ आवर्धन क्षमता
सामान्य समंजन के लिए लगभग—
M = (L/fₒ)(D/fₑ)
जहाँ—
L = नली की प्रभावी लंबाई
fₒ = अभिदृश्यक की फोकस दूरी
fₑ = नेत्रिका की फोकस दूरी
D = स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी
★ मुख्य बातें
– अभिदृश्यक की फोकस दूरी बहुत कम होती है।
– नेत्रिका छोटी वस्तु का बड़ा प्रतिबिंब देखने में सहायता करती है।
– इसका उपयोग सूक्ष्म वस्तुओं के अध्ययन में होता है।
★ तीन उपयोग
1. कोशिकाओं का अध्ययन।
2. सूक्ष्म जीवों का निरीक्षण।
3. प्रयोगशाला में छोटे नमूनों को देखना।
★ चार अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
L = 20 cm और fₒ = 1 cm है। L/fₒ ज्ञात कीजिए।
L/fₒ = 20/1
= 20
उत्तर: 20
प्रश्न 2
D = 25 cm और fₑ = 5 cm है। D/fₑ ज्ञात कीजिए।
D/fₑ = 25/5
= 5
उत्तर: 5
प्रश्न 3
यदि L/fₒ = 20 और D/fₑ = 5 है, तो लगभग आवर्धन ज्ञात कीजिए।
M = (L/fₒ)(D/fₑ)
M = 20 × 5
M = 100
उत्तर: लगभग 100
प्रश्न 4
यदि अभिदृश्यक की फोकस दूरी घटती है और अन्य मान स्थिर रहते हैं, तो L/fₒ पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर: L/fₒ का मान बढ़ेगा।
★ भाग 19 — खगोलीय दूरदर्शक (Astronomical Telescope)
★ परिभाषा
बहुत दूर स्थित खगोलीय पिंडों को देखने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रकाशिक यंत्र को खगोलीय दूरदर्शक कहते हैं।
इसमें दो मुख्य लेंस होते हैं—
1. अभिदृश्यक (Objective)
2. नेत्रिका (Eyepiece)
★ सामान्य समंजन पर आवर्धन
M = fₒ/fₑ
जहाँ—
fₒ = अभिदृश्यक की फोकस दूरी
fₑ = नेत्रिका की फोकस दूरी
★ मुख्य बातें
– अभिदृश्यक की फोकस दूरी बड़ी होती है।
– नेत्रिका की फोकस दूरी अपेक्षाकृत छोटी होती है।
– सामान्य समंजन में अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है।
– यह दूर स्थित खगोलीय पिंडों को देखने में उपयोगी है।
★ तीन उपयोग
1. चंद्रमा का अध्ययन।
2. ग्रहों का निरीक्षण।
3. तारों और अन्य खगोलीय पिंडों का अध्ययन।
★ चार संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1
fₒ = 100 cm और fₑ = 5 cm है। आवर्धन ज्ञात कीजिए।
M = fₒ/fₑ
M = 100/5
M = 20
उत्तर: 20
प्रश्न 2
fₒ = 120 cm और fₑ = 6 cm है।
M = 120/6
M = 20
उत्तर: 20
प्रश्न 3
M = 30 और fₑ = 2 cm है। fₒ ज्ञात कीजिए।
fₒ = M × fₑ
fₒ = 30 × 2
fₒ = 60 cm
उत्तर: 60 cm
प्रश्न 4
fₒ = 80 cm और M = 20 है। fₑ ज्ञात कीजिए।
fₑ = fₒ/M
fₑ = 80/20
fₑ = 4 cm
उत्तर: 4 cm
★ भाग 20 — सभी महत्वपूर्ण सूत्र एक जगह
परावर्तन और दर्पण
परावर्तन का नियम:
i = r
गोलीय दर्पण:
R = 2f
दर्पण सूत्र:
1/f = 1/v + 1/u
दर्पण का आवर्धन:
m = −v/u
अपवर्तन
स्नेल का नियम:
n₁ sin i = n₂ sin r
अपवर्तनांक:
μ = c/v
आपेक्षिक अपवर्तनांक:
μ₂₁ = μ₂/μ₁
स्पष्ट गहराई:
μ = वास्तविक गहराई/स्पष्ट गहराई
पूर्ण आंतरिक परावर्तन
sin C = 1/μ
गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन
n₂/v − n₁/u = (n₂ − n₁)/R
लेंस
लेंस सूत्र:
1/f = 1/v − 1/u
लेंस का आवर्धन:
m = v/u
लेंस निर्माता सूत्र:
1/f = (μ − 1)(1/R₁ − 1/R₂)
लेंस की शक्ति:
P = 1/f
संपर्क में लेंस:
P = P₁ + P₂ + P₃ + …
संयुक्त फोकस दूरी:
1/F = 1/f₁ + 1/f₂
प्रिज्म
विचलन कोण:
δ = i + e − A
न्यूनतम विचलन पर:
i = e
r₁ = r₂ = A/2
अपवर्तनांक:
μ = sin[(A + δₘ)/2] / sin(A/2)
छोटे कोण वाले प्रिज्म के लिए:
δ = (μ − 1)A
प्रकाशिक यंत्र
सरल सूक्ष्मदर्शी:
M = D/f
या
M = 1 + D/f
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी के लिए सामान्य समंजन का लगभग सूत्र:
M = (L/fₒ)(D/fₑ)
खगोलीय दूरदर्शक:
M = fₒ/fₑ
★ QUICK REVISION — पूरा अध्याय एक नजर में
★ प्रकाश का किसी सतह से टकराकर वापस लौटना → परावर्तन।
★ एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय प्रकाश की चाल और दिशा बदलना → अपवर्तन।
★ परावर्तन में i = r होता है।
★ गोलीय दर्पण के लिए R = 2f।
★ दर्पण सूत्र 1/f = 1/v + 1/u है।
★ अपवर्तनांक μ = c/v है।
★ सघन से विरल माध्यम में जाने और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होने पर पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है।
★ क्रांतिक कोण के लिए sin C = 1/μ है, जब दूसरा माध्यम वायु हो।
★ प्रकाशिक तंतु पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर काम करता है।
★ लेंस सूत्र 1/f = 1/v − 1/u है।
★ लेंस की शक्ति P = 1/f है। f मीटर में होना चाहिए।
★ उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक और अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है।
★ संपर्क में रखे लेंसों की कुल शक्ति उनकी शक्तियों के बीजीय योग के बराबर होती है।
★ प्रिज्म में δ = i + e − A होता है।
★ न्यूनतम विचलन की स्थिति में i = e होता है।
★ श्वेत प्रकाश का रंगों में विभाजन वर्ण-विक्षेपण कहलाता है।
★ सामान्य आँख का निकट बिंदु लगभग 25 cm होता है।
★ निकट दृष्टि दोष का सुधार अवतल लेंस से होता है।
★ दूर दृष्टि दोष का सुधार उत्तल लेंस से होता है।
★ सरल सूक्ष्मदर्शी छोटी वस्तु को बड़ा दिखाता है।
★ संयुक्त सूक्ष्मदर्शी अधिक आवर्धन के लिए दो लेंसों का उपयोग करता है।
★ खगोलीय दूरदर्शक दूर स्थित खगोलीय पिंडों को देखने के लिए प्रयोग किया जाता है।
★ बोर्ड परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ
1. कोणों को सतह से मापने की बजाय अभिलंब से मापें।
2. दर्पण और लेंस के सूत्र आपस में न मिलाएँ।
3. दर्पण तथा लेंस के लिए संकेत परिपाटी के अनुसार चिन्ह लगाएँ।
4. लेंस की शक्ति निकालते समय फोकस दूरी मीटर में रखें।
5. अपवर्तनांक का कोई मात्रक नहीं होता।
6. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की दोनों आवश्यक शर्तें लिखें।
7. उत्तल और अवतल लेंस की शक्तियों के चिन्ह सही रखें।
8. प्रिज्म के प्रश्न में δ = i + e − A याद रखें।
9. न्यूनतम विचलन में i = e लिखना न भूलें।
10. आवर्धन में प्रतिबिंब और वस्तु की ऊँचाई के चिन्हों का ध्यान रखें।
11. संख्यात्मक प्रश्नों में सूत्र, मान, गणना और मात्रक स्पष्ट लिखें।
12. जहाँ व्युत्पत्ति पूछी जाए वहाँ केवल अंतिम सूत्र न लिखें।
13. जहाँ किरण आरेख पूछा जाए, वहाँ अभिलंब, कोण, किरणों की दिशा और प्रतिबिंब की स्थिति साफ दिखाएँ।
14. निकट दृष्टि दोष और दूर दृष्टि दोष के सुधार वाले लेंस उलटे न लिखें।
★ खुद से पूछो — अध्याय की जाँच
1. किरण प्रकाशिकी क्या है?
2. परावर्तन के दोनों नियम लिखिए।
3. अवतल और उत्तल दर्पण में अंतर बताइए।
4. गोलीय दर्पण के लिए R और f में संबंध लिखिए।
5. दर्पण सूत्र लिखिए।
6. दर्पण का आवर्धन क्या होता है?
7. प्रकाश का अपवर्तन क्या है?
8. स्नेल का नियम लिखिए।
9. अपवर्तनांक की परिभाषा और सूत्र लिखिए।
10. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की दोनों शर्तें लिखिए।
11. क्रांतिक कोण क्या है?
12. प्रकाशिक तंतु किस सिद्धांत पर काम करता है?
13. गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन का सूत्र लिखिए।
14. उत्तल और अवतल लेंस में अंतर बताइए।
15. लेंस सूत्र लिखिए।
16. लेंस निर्माता सूत्र लिखिए।
17. लेंस की शक्ति क्या है और इसका मात्रक क्या है?
18. संपर्क में रखे लेंसों की कुल शक्ति का सूत्र लिखिए।
19. प्रिज्म का विचलन कोण क्या है?
20. न्यूनतम विचलन की स्थिति में कौन-से संबंध होते हैं?
21. वर्ण-विक्षेपण क्या है?
22. सामान्य आँख का निकट बिंदु कितना होता है?
23. निकट दृष्टि दोष का सुधार कैसे होता है?
24. दूर दृष्टि दोष का सुधार कैसे होता है?
25. सरल सूक्ष्मदर्शी क्या है?
26. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में कौन-से दो लेंस होते हैं?
27. खगोलीय दूरदर्शक का उपयोग क्या है?
★ SELF TEST — बिना नोट्स देखे हल करो
प्रश्न 1
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 20 cm है। वक्रता त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 2
किसी माध्यम का अपवर्तनांक 1.5 है। उसमें प्रकाश की चाल ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 3
किसी माध्यम का अपवर्तनांक 2 है। क्रांतिक कोण ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 4
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 25 cm है। शक्ति ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 5
−4 D शक्ति वाले लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 6
दो लेंसों की शक्तियाँ +3 D और −1 D हैं। संयुक्त शक्ति ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 7
एक प्रिज्म का कोण 60°, आपतन कोण 50° और निर्गमन कोण 40° है। विचलन कोण ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 8
निकट दृष्टि दोष के सुधार के लिए किस प्रकार का लेंस उपयोग किया जाता है?
प्रश्न 9
दूर दृष्टि दोष के सुधार के लिए किस प्रकार का लेंस उपयोग किया जाता है?
प्रश्न 10
पूर्ण आंतरिक परावर्तन की दोनों शर्तें लिखिए।
प्रश्न 11
एक सरल सूक्ष्मदर्शी की फोकस दूरी 5 cm है। अनंत पर अंतिम प्रतिबिंब के लिए आवर्धन ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 12
एक खगोलीय दूरदर्शक की अभिदृश्यक फोकस दूरी 100 cm और नेत्रिका की फोकस दूरी 5 cm है। आवर्धन ज्ञात कीजिए।
—
★ SELF TEST — उत्तर
1. R = 2f = 40 cm
2. v = c/μ = 2 × 10⁸ m/s
3. sin C = 1/2, इसलिए C = 30°
4. f = 0.25 m; P = 1/0.25 = +4 D
5. f = 1/−4 = −0.25 m = −25 cm
6. P = 3 − 1 = +2 D
7. δ = 50° + 40° − 60° = 30°
8. अवतल लेंस
9. उत्तल लेंस
10. प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाए और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो।
11. M = D/f = 25/5 = 5
12. M = fₒ/fₑ = 100/5 = 20
★ बोर्ड परीक्षा में अच्छे उत्तर के लिए
परिभाषा वाले प्रश्न: परिभाषा स्पष्ट, वैज्ञानिक और सीधे शब्दों में लिखें।
सूत्र वाले प्रश्न: सूत्र के बाद प्रत्येक प्रतीक का अर्थ लिखें।
व्युत्पत्ति वाले प्रश्न: आवश्यक चित्र, संबंध, गणितीय चरण और अंतिम परिणाम क्रम से लिखें।
संख्यात्मक प्रश्न: दिए गए मान, सूत्र, मान रखने की प्रक्रिया, गणना और इकाई सहित उत्तर लिखें।
अंतर वाले प्रश्न: दोनों विषयों के अंतर अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
किरण आरेख: तीरों से प्रकाश की दिशा, अभिलंब, कोण और प्रतिबिंब की स्थिति साफ दिखाएँ।
★ अंतिम पाँच मिनट की रिवीजन सूची
1. i = r
2. R = 2f
3. 1/f = 1/v + 1/u
4. m = −v/u
5. μ = c/v
6. n₁ sin i = n₂ sin r
7. sin C = 1/μ
8. n₂/v − n₁/u = (n₂ − n₁)/R
9. 1/f = 1/v − 1/u
10. m = v/u
11. P = 1/f
12. P = P₁ + P₂ + …
13. δ = i + e − A
14. μ = sin[(A + δₘ)/2] / sin(A/2)
15. Myopia → अवतल लेंस
16. Hypermetropia → उत्तल लेंस
17. प्रकाशिक तंतु → पूर्ण आंतरिक परावर्तन
18. सरल सूक्ष्मदर्शी → M = D/f या 1 + D/f
19. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी → लगभग M = (L/fₒ)(D/fₑ)
20. खगोलीय दूरदर्शक → M = fₒ/fₑ