★ अध्याय 11 : विकिरण तथा पदार्थ की द्वैत प्रकृति (Dual Nature of Radiation and Matter)
★ महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. विकिरण (Radiation)
ऊर्जा का तरंग या कण के रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचरण विकिरण कहलाता है।
2. प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect)
जब किसी धातु की सतह पर उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश डाला जाता है और उससे इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होने लगता है, तो इस घटना को प्रकाश-विद्युत प्रभाव कहते हैं।
3. प्रकाश-इलेक्ट्रॉन (Photoelectron)
प्रकाश-विद्युत प्रभाव के दौरान धातु की सतह से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन को प्रकाश-इलेक्ट्रॉन कहते हैं।
4. प्रकाश-विद्युत धारा (Photoelectric Current)
प्रकाश-विद्युत प्रभाव के कारण उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से प्राप्त विद्युत धारा को प्रकाश-विद्युत धारा कहते हैं।
5. कार्य-फलन (Work Function)
धातु की सतह से किसी इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को उस धातु का कार्य-फलन कहते हैं।
इसे φ₀ से दर्शाते हैं।
6. देहली आवृत्ति (Threshold Frequency)
किसी धातु की सतह से प्रकाश-इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम प्रकाश आवृत्ति को देहली आवृत्ति कहते हैं।
इसे ν₀ से दर्शाते हैं।
7. देहली तरंगदैर्ध्य (Threshold Wavelength)
वह अधिकतम तरंगदैर्ध्य, जिस पर किसी धातु से प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होना शुरू होता है, देहली तरंगदैर्ध्य कहलाता है।
इसे λ₀ से दर्शाते हैं।
8. निरोधी विभव (Stopping Potential)
वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव, जो सबसे तेज प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों को भी संग्राहक तक पहुँचने से रोक देता है, निरोधी विभव कहलाता है।
इसे V₀ से दर्शाते हैं।
9. संतृप्त प्रकाश-विद्युत धारा (Saturation Photoelectric Current)
जब सभी उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉन संग्राहक तक पहुँचने लगते हैं और प्रकाश-विद्युत धारा का मान अधिकतम होकर स्थिर हो जाता है, तो उस धारा को संतृप्त प्रकाश-विद्युत धारा कहते हैं।
10. फोटॉन (Photon)
विद्युतचुम्बकीय विकिरण की ऊर्जा का सबसे छोटा अविभाज्य पैकेट फोटॉन कहलाता है।
11. फोटॉन की ऊर्जा
किसी फोटॉन की ऊर्जा उसकी आवृत्ति के समानुपाती होती है।
E = hν
12. फोटॉन का संवेग
फोटॉन का संवेग उसकी ऊर्जा तथा तरंगदैर्ध्य से संबंधित होता है।
p = h/λ
13. पदार्थ की द्वैत प्रकृति (Dual Nature of Matter)
पदार्थ के कणों में कण तथा तरंग दोनों प्रकार के गुण पाए जाने की अवधारणा को पदार्थ की द्वैत प्रकृति कहते हैं।
14. दे-ब्रॉग्ली तरंग (de Broglie Wave)
गतिशील पदार्थ-कण से संबद्ध तरंग को दे-ब्रॉग्ली तरंग कहते हैं।
15. दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य (de Broglie Wavelength)
किसी गतिशील कण से संबद्ध तरंग की तरंगदैर्ध्य को दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य कहते हैं।
λ = h/p
16. इलेक्ट्रॉन का द्वैत स्वरूप
इलेक्ट्रॉन में कण की तरह द्रव्यमान और संवेग तथा तरंग की तरह तरंगदैर्ध्य और विवर्तन जैसे गुण पाए जाते हैं। इसलिए इलेक्ट्रॉन को पदार्थ की द्वैत प्रकृति का प्रमुख उदाहरण माना जाता है।
17. प्रकाश का कण स्वरूप
प्रकाश को फोटॉनों का समूह मानकर उसके ऊर्जा और संवेग जैसे गुणों की व्याख्या करना प्रकाश का कण स्वरूप कहलाता है।
18. प्रकाश का तरंग स्वरूप
प्रकाश में व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण जैसी तरंग घटनाओं का पाया जाना उसके तरंग स्वरूप को दर्शाता है।
★ 1. प्रकाश की द्वैत प्रकृति (Dual Nature of Light)
परिभाषा
प्रकाश में कुछ घटनाएँ ऐसी हैं जिन्हें तरंग सिद्धान्त से समझाया जाता है, जबकि कुछ घटनाओं जैसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव की व्याख्या कण सिद्धान्त से होती है। इस प्रकार प्रकाश के तरंग और कण दोनों प्रकार के गुणों को उसकी द्वैत प्रकृति कहते हैं।
मुख्य बिंदु
– व्यतिकरण → प्रकाश का तरंग स्वरूप।
– विवर्तन → प्रकाश का तरंग स्वरूप।
– ध्रुवण → प्रकाश का तरंग स्वरूप।
– प्रकाश-विद्युत प्रभाव → प्रकाश का कण स्वरूप।
– फोटॉन → प्रकाश के कण स्वरूप की ऊर्जा इकाई।
तीन उदाहरण
i. साबुन की पतली परत में रंग → तरंग प्रकृति।
ii. प्रकाश का विवर्तन → तरंग प्रकृति।
iii. प्रकाश-विद्युत प्रभाव → कण प्रकृति।
★ 2. फोटॉन की अवधारणा (Concept of Photon)
परिभाषा
प्रकाश ऊर्जा को लगातार प्रवाह के रूप में न देकर छोटे-छोटे ऊर्जा पैकेटों के रूप में ले जाता है। प्रत्येक पैकेट को फोटॉन कहते हैं।
फोटॉन की ऊर्जा
E = hν
जहाँ,
h = प्लांक नियतांक
ν = प्रकाश की आवृत्ति
और क्योंकि:
ν = c/λ
इसलिए:
E = hc/λ
मुख्य बातें
– फोटॉन की ऊर्जा आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ती है।
– तरंगदैर्ध्य बढ़ने पर फोटॉन की ऊर्जा घटती है।
– फोटॉन विराम अवस्था में नहीं पाया जाता।
– निर्वात में फोटॉन प्रकाश की चाल c से चलता है।
– फोटॉन की विद्युत आवेश मात्रा शून्य होती है।
तीन उदाहरण
i. उच्च आवृत्ति की पराबैंगनी किरण का फोटॉन अधिक ऊर्जा रखता है।
ii. लाल प्रकाश का फोटॉन अपेक्षाकृत कम ऊर्जा रखता है।
iii. एक्स-किरण का फोटॉन उच्च ऊर्जा वाला होता है।
★ 3. फोटॉन का संवेग (Momentum of Photon)
परिभाषा
फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य माना जाता है, फिर भी उसमें ऊर्जा और संवेग होता है।
फोटॉन का संवेग:
p = h/λ
और:
p = E/c
क्योंकि:
E = hν = hc/λ
चार संख्यात्मक
प्रश्न 1: λ = 600 nm के फोटॉन का संवेग ज्ञात करें।
दिया:
λ = 600 × 10⁻⁹ m
p = h/λ
p = 6.63 × 10⁻³⁴ / 600 × 10⁻⁹
p ≈ 1.105 × 10⁻²⁷ kg m/s
—
प्रश्न 2: किसी फोटॉन की ऊर्जा 6 × 10⁻¹⁹ J है। उसका संवेग ज्ञात करें।
p = E/c
p = (6 × 10⁻¹⁹)/(3 × 10⁸)
p = 2 × 10⁻²⁷ kg m/s
—
प्रश्न 3: λ = 400 nm।
p = 6.63 × 10⁻³⁴/(400 × 10⁻⁹)
p ≈ 1.66 × 10⁻²⁷ kg m/s
—
प्रश्न 4: E = 9 × 10⁻¹⁹ J।
p = E/c
p = 9 × 10⁻¹⁹ / 3 × 10⁸
p = 3 × 10⁻²⁷ kg m/s
★ 4. प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect)
परिभाषा
जब किसी धातु की सतह पर पर्याप्त ऊर्जा वाला प्रकाश डाला जाता है और उसकी सतह से इलेक्ट्रॉन बाहर निकलने लगते हैं, तो इस घटना को प्रकाश-विद्युत प्रभाव कहते हैं।
उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन → प्रकाश-इलेक्ट्रॉन
आवश्यक शर्त
प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति से कम नहीं होनी चाहिए।
ν ≥ ν₀
यदि:
ν < ν₀
तो प्रकाश की तीव्रता कितनी भी बढ़ा दी जाए, प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन नहीं होगा।
मुख्य बातें
– प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन के लिए न्यूनतम आवृत्ति आवश्यक है।
– आवृत्ति बढ़ाने पर प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
– तीव्रता बढ़ाने पर उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है।
– उचित आवृत्ति होने पर उत्सर्जन लगभग तात्कालिक होता है।
उदाहरण
i. पराबैंगनी प्रकाश से जिंक की सतह से इलेक्ट्रॉन निकलना।
ii. प्रकाश सेंसर।
iii. स्वचालित प्रकाश-नियंत्रित उपकरण।
★ 5. प्रकाश-विद्युत प्रभाव के प्रयोगात्मक नियम
नियम 1 — देहली आवृत्ति
प्रत्येक धातु के लिए एक न्यूनतम आवृत्ति होती है। इससे कम आवृत्ति पर उत्सर्जन नहीं होता।
नियम 2 — तात्कालिक उत्सर्जन
उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश पड़ते ही प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन लगभग तुरंत शुरू हो जाता है।
नियम 3 — तीव्रता का प्रभाव
एक निश्चित आवृत्ति पर प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने से प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की संख्या और इसलिए संतृप्त धारा बढ़ती है।
नियम 4 — आवृत्ति का प्रभाव
प्रकाश की आवृत्ति बढ़ाने पर उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
नियम 5 — निरोधी विभव
अधिकतम गतिज ऊर्जा बढ़ने पर निरोधी विभव भी बढ़ता है।
★ 6. आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण (Einstein’s Photoelectric Equation)
सिद्धान्त
आइंस्टीन ने माना कि प्रकाश छोटे ऊर्जा पैकेटों अर्थात् फोटॉनों के रूप में ऊर्जा लेकर आता है।
एक फोटॉन की ऊर्जा:
E = hν
यह ऊर्जा दो भागों में खर्च होती है:
फोटॉन की ऊर्जा = कार्य-फलन + इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा
अतः:
hν = φ₀ + Kmax
और:
Kmax = ½mv²max
इसलिए:
hν = φ₀ + ½mv²max
यदि अधिकतम गतिज ऊर्जा को निरोधी विभव V₀ से व्यक्त करें:
Kmax = eV₀
अतः:
hν = φ₀ + eV₀
देहली आवृत्ति के लिए
जब:
ν = ν₀
तब इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा शून्य होती है।
इसलिए:
φ₀ = hν₀
अतः:
hν = hν₀ + eV₀
या,
eV₀ = h(ν − ν₀)
मुख्य निष्कर्ष
Kmax = hν − φ₀
और:
Kmax = h(ν − ν₀)
★ 7. कार्य-फलन (Work Function)
परिभाषा
किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन को ठीक बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को उस धातु का कार्य-फलन कहते हैं।
φ₀ = hν₀
इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में
यदि कार्य-फलन φ₀ eV में दिया गया हो:
φ₀(J) = φ₀(eV) × 1.6 × 10⁻¹⁹
मुख्य बातें
– कार्य-फलन धातु की प्रकृति पर निर्भर करता है।
– प्रत्येक धातु का कार्य-फलन अलग हो सकता है।
– कार्य-फलन जितना अधिक होगा, इलेक्ट्रॉन निकालना उतना कठिन होगा।
– कार्य-फलन देहली आवृत्ति से संबंधित है।
तीन उदाहरण
i. कम कार्य-फलन वाली धातु से इलेक्ट्रॉन अपेक्षाकृत आसानी से निकलते हैं।
ii. उच्च कार्य-फलन वाली धातु को अधिक ऊर्जा वाले फोटॉन की आवश्यकता होती है।
iii. देहली आवृत्ति बढ़ने पर कार्य-फलन बढ़ता है।
★ 8. देहली आवृत्ति और देहली तरंगदैर्ध्य
देहली आवृत्ति
φ₀ = hν₀
अतः:
ν₀ = φ₀/h
देहली तरंगदैर्ध्य
क्योंकि:
c = ν₀λ₀
अतः:
λ₀ = c/ν₀
और:
λ₀ = hc/φ₀
महत्वपूर्ण संबंध
λ ≤ λ₀ → प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन संभव।
λ > λ₀ → उत्सर्जन नहीं होगा।
★ 9. निरोधी विभव (Stopping Potential)
परिभाषा
वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव, जो सबसे अधिक गतिज ऊर्जा वाले प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों को भी संग्राहक तक पहुँचने से रोक देता है, निरोधी विभव कहलाता है।
सूत्र
Kmax = eV₀
आइंस्टीन समीकरण से:
eV₀ = hν − φ₀
अतः:
V₀ = hν/e − φ₀/e
चार संख्यात्मक
प्रश्न 1: किसी प्रकाश की आवृत्ति 8 × 10¹⁴ Hz है और धातु का कार्य-फलन 2 eV है। निरोधी विभव ज्ञात करें।
फोटॉन ऊर्जा:
E = hν
= 6.63 × 10⁻³⁴ × 8 × 10¹⁴
≈ 5.304 × 10⁻¹⁹ J
eV में:
≈ 3.315 eV
अतः:
Kmax = 3.315 − 2
Kmax = 1.315 eV
इसलिए:
V₀ ≈ 1.315 V
—
प्रश्न 2: यदि Kmax = 3 eV है, तो निरोधी विभव क्या होगा?
eV₀ = 3 eV
अतः:
V₀ = 3 V
—
प्रश्न 3: ν = 6 × 10¹⁴ Hz और ν₀ = 4 × 10¹⁴ Hz।
eV₀ = h(ν − ν₀)
V₀ = h(2 × 10¹⁴)/e
≈ 0.83 V
—
प्रश्न 4: यदि निरोधी विभव 2 V है, तो अधिकतम गतिज ऊर्जा कितनी होगी?
Kmax = eV₀
= 2 × 1.6 × 10⁻¹⁹
Kmax = 3.2 × 10⁻¹⁹ J
★ 10. प्रकाश की तीव्रता और आवृत्ति का प्रभाव
तीव्रता बढ़ाने पर
यदि आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक है, तो तीव्रता बढ़ाने पर:
– अधिक फोटॉन प्रति सेकंड पहुँचते हैं।
– अधिक इलेक्ट्रॉन निकलते हैं।
– प्रकाश-विद्युत धारा बढ़ती है।
– अधिकतम गतिज ऊर्जा नहीं बदलती।
आवृत्ति बढ़ाने पर
– फोटॉन की ऊर्जा बढ़ती है।
– अधिकतम गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
– निरोधी विभव बढ़ता है।
– प्रकाश-विद्युत धारा की अधिकतम सीमा आवश्यक रूप से आवृत्ति के कारण नहीं बढ़ती।
तीन उदाहरण
i. अधिक तीव्रता वाला प्रकाश → अधिक फोटोइलेक्ट्रॉन।
ii. अधिक आवृत्ति वाला प्रकाश → अधिक ऊर्जा वाले फोटोइलेक्ट्रॉन।
iii. ν < ν₀ होने पर तीव्रता बढ़ाने से भी उत्सर्जन नहीं।
★ 11. प्रकाश-विद्युत धारा और विभव
मुख्य बात
यदि संग्राहक का विभव बढ़ाया जाता है, तो अधिक इलेक्ट्रॉन संग्राहक तक पहुँचते हैं और धारा बढ़ती है।
एक निश्चित विभव के बाद सभी उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन संग्राहक तक पहुँच जाते हैं।
उस अवस्था में:
प्रकाश-विद्युत धारा = संतृप्त धारा
निरोधी विभव
यदि संग्राहक को पर्याप्त ऋणात्मक विभव दिया जाए, तो सबसे तेज इलेक्ट्रॉन भी वापस लौट जाते हैं।
उस अवस्था में:
I = 0
और संबंधित विभव:
V = −V₀
★ 12. प्रकाश-विद्युत प्रभाव की आइंस्टीन व्याख्या
मुख्य विचार
1. प्रकाश फोटॉनों से बना माना जाता है।
2. प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा hν होती है।
3. एक फोटॉन अपनी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को देता है।
4. ऊर्जा का एक भाग कार्य-फलन में खर्च होता है।
5. बची ऊर्जा इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा बनती है।
अतः:
hν = φ₀ + Kmax
यही प्रकाश-विद्युत प्रभाव की मूल ऊर्जा समीकरण है।
इस सिद्धान्त से समझाई गई बातें
– देहली आवृत्ति क्यों होती है।
– उत्सर्जन लगभग तात्कालिक क्यों होता है।
– आवृत्ति बढ़ने पर गतिज ऊर्जा क्यों बढ़ती है।
– तीव्रता बढ़ने पर इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्यों बढ़ती है।
★ 13. प्रकाश का कण स्वरूप और पदार्थ की द्वैत प्रकृति
परिभाषा
प्रकाश में तरंग और कण दोनों के गुण पाए जाते हैं। इसी प्रकार गतिशील पदार्थ-कण भी तरंग गुण प्रदर्शित कर सकते हैं। इसे प्रकाश और पदार्थ की द्वैत प्रकृति कहते हैं।
तुलना
प्रकाश:
– व्यतिकरण → तरंग गुण
– विवर्तन → तरंग गुण
– ध्रुवण → तरंग गुण
– प्रकाश-विद्युत प्रभाव → कण गुण
पदार्थ:
– द्रव्यमान → कण गुण
– संवेग → कण गुण
– दे-ब्रॉग्ली तरंग → तरंग गुण
– इलेक्ट्रॉन विवर्तन → तरंग गुण
★ 14. दे-ब्रॉग्ली परिकल्पना (de Broglie Hypothesis)
परिभाषा
दे-ब्रॉग्ली ने प्रस्तावित किया कि प्रत्येक गतिशील पदार्थ-कण से एक तरंग संबद्ध होती है। इस तरंग को दे-ब्रॉग्ली तरंग कहते हैं।
दे-ब्रॉग्ली समीकरण
λ = h/p
यदि p = mv,
तो:
λ = h/mv
मुख्य बिंदु
– तरंगदैर्ध्य संवेग के व्युत्क्रमानुपाती है।
– संवेग बढ़ने पर λ घटती है।
– छोटे द्रव्यमान वाले कणों में यह प्रभाव अधिक स्पष्ट हो सकता है।
– बड़े दैनिक वस्तुओं के लिए दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य अत्यंत छोटी होती है।
उदाहरण
i. इलेक्ट्रॉन
ii. प्रोटॉन
iii. न्यूट्रॉन
★ 15. गतिज ऊर्जा से दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य
यदि कण की गतिज ऊर्जा K है:
K = ½mv²
और:
p = mv
इससे:
p² = 2mK
अतः:
p = √(2mK)
इसलिए:
λ = h/√(2mK)
महत्वपूर्ण निष्कर्ष
λ ∝ 1/√K
अर्थात् गतिज ऊर्जा बढ़ाने पर दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य घटती है।
★ 16. विभवांतर से त्वरित इलेक्ट्रॉन की दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य
यदि इलेक्ट्रॉन को V विभवांतर से त्वरित किया जाए:
इलेक्ट्रॉन द्वारा प्राप्त ऊर्जा:
eV = K
और:
K = p²/2m
अतः:
p = √(2meV)
इसलिए:
λ = h/√(2meV)
इलेक्ट्रॉन के लिए उपयोगी रूप:
λ = 1.227/√V nm
जहाँ V को वोल्ट में लिया गया है।
चार संख्यात्मक
प्रश्न 1: इलेक्ट्रॉन को 100 V से त्वरित किया गया। λ ज्ञात करें।
λ = 1.227/√100
λ = 1.227/10
λ = 0.1227 nm
—
प्रश्न 2: इलेक्ट्रॉन को 400 V से त्वरित किया गया।
λ = 1.227/√400
= 1.227/20
λ = 0.06135 nm
—
प्रश्न 3: V = 25 V।
λ = 1.227/5
λ = 0.2454 nm
—
प्रश्न 4: V = 900 V।
λ = 1.227/30
λ ≈ 0.0409 nm
★ 17. पदार्थ की तरंग प्रकृति का प्रायोगिक प्रमाण
डेविसन-जर्मर प्रयोग (Davisson-Germer Experiment)
मुख्य विचार
इलेक्ट्रॉनों को निकेल क्रिस्टल पर गिराया गया। कुछ दिशाओं में इलेक्ट्रॉनों की तीव्रता अधिक प्राप्त हुई, जो विवर्तन जैसी घटना को दर्शाती थी।
निष्कर्ष
इलेक्ट्रॉन केवल कण की तरह व्यवहार नहीं करता बल्कि तरंग की तरह भी व्यवहार कर सकता है।
इस प्रयोग ने दे-ब्रॉग्ली की पदार्थ तरंग परिकल्पना को प्रायोगिक समर्थन दिया।
मुख्य बिंदु
– इलेक्ट्रॉन का विवर्तन देखा गया।
– विवर्तन तरंग प्रकृति का गुण है।
– इसलिए इलेक्ट्रॉन में तरंग प्रकृति की पुष्टि हुई।
★ 18. दे-ब्रॉग्ली तरंग के महत्वपूर्ण संबंध
λ = h/p
λ = h/mv
λ = h/√(2mK)
इलेक्ट्रॉन के लिए:
λ = 1.227/√V nm
याद रखने की बात
यदि गति या संवेग बढ़े:
p ↑ → λ ↓
यदि गतिज ऊर्जा बढ़े:
K ↑ → λ ↓
★ 19. महत्वपूर्ण स्थिरांक
प्लांक नियतांक:
h = 6.626 × 10⁻³⁴ J s
प्रकाश का वेग:
c = 3 × 10⁸ m/s
इलेक्ट्रॉन का आवेश:
e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान:
mₑ = 9.1 × 10⁻³¹ kg
1 eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ J
★ 20. महत्वपूर्ण सूत्र — पूरा अध्याय एक जगह
फोटॉन की ऊर्जा
E = hν
तरंगदैर्ध्य के रूप में
E = hc/λ
फोटॉन का संवेग
p = h/λ
ऊर्जा और संवेग
p = E/c
कार्य-फलन
φ₀ = hν₀
देहली आवृत्ति
ν₀ = φ₀/h
देहली तरंगदैर्ध्य
λ₀ = c/ν₀
या
λ₀ = hc/φ₀
आइंस्टीन समीकरण
hν = φ₀ + Kmax
अधिकतम गतिज ऊर्जा
Kmax = ½mv²max
निरोधी विभव
Kmax = eV₀
संयुक्त समीकरण
eV₀ = hν − φ₀
दे-ब्रॉग्ली समीकरण
λ = h/p
गतिशील कण के लिए
λ = h/mv
गतिज ऊर्जा से
λ = h/√(2mK)
V विभवांतर से त्वरित इलेक्ट्रॉन
λ = h/√(2meV)
इलेक्ट्रॉन के लिए
λ = 1.227/√V nm
★ महत्वपूर्ण अंतर
प्रकाश की तीव्रता और आवृत्ति का प्रभाव
तीव्रता बढ़ाने पर | आवृत्ति बढ़ाने पर
फोटॉनों की संख्या बढ़ती है | प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा बढ़ती है
फोटोइलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है | निरोधी विभव बढ़ता है
Kmax नहीं बदलता | Kmax बढ़ता है
★ बोर्ड परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न
1. प्रकाश-विद्युत प्रभाव की परिभाषा दीजिए।
2. प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नियम लिखिए।
3. कार्य-फलन क्या है?
4. देहली आवृत्ति क्या है?
5. निरोधी विभव की परिभाषा दीजिए।
6. आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण प्राप्त कीजिए।
7. प्रकाश-विद्युत प्रभाव से प्रकाश की कण प्रकृति कैसे सिद्ध होती है?
8. फोटॉन क्या है? उसकी ऊर्जा का सूत्र लिखिए।
9. फोटॉन के संवेग का सूत्र प्राप्त कीजिए।
10. दे-ब्रॉग्ली परिकल्पना समझाइए।
11. दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र प्राप्त कीजिए।
12. गतिज ऊर्जा के रूप में दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य लिखिए।
13. विभवांतर V से त्वरित इलेक्ट्रॉन की दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र प्राप्त कीजिए।
14. डेविसन-जर्मर प्रयोग का निष्कर्ष लिखिए।
15. प्रकाश और पदार्थ की द्वैत प्रकृति समझाइए।
16. प्रकाश की तीव्रता और आवृत्ति का प्रकाश-विद्युत प्रभाव पर प्रभाव समझाइए।
17. कार्य-फलन और देहली आवृत्ति में संबंध स्थापित कीजिए।
18. देहली तरंगदैर्ध्य और कार्य-फलन में संबंध स्थापित कीजिए।
★ खुद से पूछो
1. प्रकाश-विद्युत प्रभाव कब होता है?
2. क्या कम आवृत्ति के प्रकाश की तीव्रता बढ़ाकर फोटोइलेक्ट्रॉन निकाले जा सकते हैं?
3. कार्य-फलन किस पर निर्भर करता है?
4. फोटॉन की ऊर्जा किस राशि के समानुपाती है?
5. फोटॉन का संवेग किस सूत्र से मिलता है?
6. प्रकाश की आवृत्ति बढ़ाने पर Kmax पर क्या प्रभाव होगा?
7. तीव्रता बढ़ाने पर फोटोइलेक्ट्रॉनों की संख्या पर क्या प्रभाव होगा?
8. देहली आवृत्ति से कम आवृत्ति पर उत्सर्जन क्यों नहीं होता?
9. दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य किसके व्युत्क्रमानुपाती है?
10. इलेक्ट्रॉन को अधिक विभव से त्वरित करने पर उसकी λ क्यों घटती है?
11. डेविसन-जर्मर प्रयोग ने क्या सिद्ध किया?
12. प्रकाश की तरंग और कण प्रकृति के दो-दो उदाहरण बताइए।
★ SELF TEST
1. फोटॉन की ऊर्जा है—
(A) h/ν
(B) hν
(C) hcν
(D) ν/h
2. फोटॉन का संवेग है—
(A) hλ
(B) h/λ
(C) λ/h
(D) hc/λ
3. कार्य-फलन का संबंध है—
(A) φ₀ = h/ν₀
(B) φ₀ = hν₀
(C) φ₀ = ν₀/h
(D) φ₀ = hcν₀
4. प्रकाश-विद्युत प्रभाव के लिए आवश्यक है—
(A) ν < ν₀
(B) ν = 0
(C) ν ≥ ν₀
(D) केवल अधिक तीव्रता
5. प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर, उपयुक्त आवृत्ति पर—
(A) फोटोइलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है
(B) कार्य-फलन बढ़ता है
(C) देहली आवृत्ति बढ़ती है
(D) Kmax अनिवार्य रूप से बढ़ती है
6. आवृत्ति बढ़ाने पर—
(A) Kmax बढ़ती है
(B) कार्य-फलन बढ़ता है
(C) इलेक्ट्रॉन का आवेश बढ़ता है
(D) h बदलता है
7. दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य है—
(A) h/mv
(B) mv/h
(C) h/mv
(D) hm/v
8. इलेक्ट्रॉन की विभवांतर से त्वरित होने पर—
(A) λ ∝ √V
(B) λ ∝ V
(C) λ ∝ 1/√V
(D) λ ∝ V²
9. 1 eV बराबर है—
(A) 1.6 × 10⁻¹⁹ J
(B) 1.6 × 10¹⁹ J
(C) 9.1 × 10⁻³¹ J
(D) 6.626 × 10⁻³⁴ J
10. डेविसन-जर्मर प्रयोग से सिद्ध हुआ—
(A) इलेक्ट्रॉन केवल कण है
(B) इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति
(C) प्रकाश केवल तरंग है
(D) प्रोटॉन का आवेश
—
★ SELF TEST के उत्तर
1. (B) ✓
2. (B) ✓
3. (B) ✓
4. (C) ✓
5. (A) ✓
6. (A) ✓
7. (C) ✓
8. (C) ✓
9. (A) ✓
10. (B) ✓
★ बोर्ड परीक्षा में ये गलतियाँ न करें
★ 1. कार्य-फलन को hν मत लिख देना।
φ₀ = hν₀
★ 2. दे-ब्रॉग्ली सूत्र में उल्टा मत लिखना।
सही:
λ = h/p
★ 3. प्रकाश की तीव्रता बढ़ने का अर्थ फोटॉन की ऊर्जा बढ़ना नहीं है।
फोटॉन की ऊर्जा:
E = hν
★ 4. तीव्रता बढ़ाने पर Kmax बढ़ती है—यह गलत है।
★ 5. आवृत्ति बढ़ाने पर फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
★ 6. ν < ν₀ होने पर केवल तीव्रता बढ़ाकर उत्सर्जन नहीं कराया जा सकता।
★ 7. 1 eV को 1.6 × 10⁻¹⁹ J में बदलना न भूलें।
★ 8. nm को m में बदलते समय:
1 nm = 10⁻⁹ m
★ 9. दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य को संवेग के साथ सीधे समानुपाती मत लिखना।
λ ∝ 1/p
★ 10. डेविसन-जर्मर प्रयोग का निष्कर्ष इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति है।
★ त्वरित पुनरावृत्ति
फोटॉन की ऊर्जा → E = hν
फोटॉन का संवेग → p = h/λ
कार्य-फलन → φ₀ = hν₀
आइंस्टीन समीकरण → hν = φ₀ + Kmax
अधिकतम गतिज ऊर्जा → Kmax = eV₀
दे-ब्रॉग्ली → λ = h/p
कण के लिए → λ = h/mv
गतिज ऊर्जा के लिए → λ = h/√(2mK)
इलेक्ट्रॉन के लिए → λ = 1.227/√V nm
★ अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण सार
इस अध्याय का मुख्य विचार है कि प्रकाश और पदार्थ को केवल एक ही रूप में नहीं समझा जा सकता।
प्रकाश में तरंग गुण भी हैं और कण गुण भी।
व्यतिकरण + विवर्तन + ध्रुवण → प्रकाश की तरंग प्रकृति
प्रकाश-विद्युत प्रभाव → प्रकाश की कण प्रकृति
इसी प्रकार गतिशील पदार्थ-कणों के साथ भी तरंग संबद्ध हो सकती है।
दे-ब्रॉग्ली → λ = h/p
इसलिए अध्याय 11 का सबसे मुख्य निष्कर्ष:
★ “प्रकाश और पदार्थ दोनों में द्वैत प्रकृति पाई जाती है।”
★ अंतिम बोर्ड रिवीजन
परीक्षा से पहले इन 8 चीजों को जरूर दोहराएँ:
1. प्रकाश-विद्युत प्रभाव की परिभाषा और नियम।
2. कार्य-फलन और देहली आवृत्ति।
3. आइंस्टीन प्रकाश-विद्युत समीकरण।
4. तीव्रता और आवृत्ति का प्रभाव।
5. फोटॉन की ऊर्जा और संवेग।
6. दे-ब्रॉग्ली परिकल्पना और λ = h/p।
7. विभवांतर से त्वरित इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य।
8. डेविसन-जर्मर प्रयोग और उसका निष्कर्ष।
★ एक लाइन में पूरा अध्याय:
फोटॉन की ऊर्जा → प्रकाश-विद्युत प्रभाव → आइंस्टीन समीकरण → प्रकाश की कण प्रकृति → दे-ब्रॉग्ली तरंग → पदार्थ की तरंग प्रकृति → डेविसन-जर्मर प्रयोग।