अध्याय 13 : नाभिक (Nuclei)
★ अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. नाभिक (Nucleus)
परमाणु के केंद्र में स्थित बहुत छोटा, सघन और धनावेशित भाग नाभिक कहलाता है। इसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन उपस्थित होते हैं तथा परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित रहता है।
2. न्यूक्लियॉन (Nucleon)
नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को सामूहिक रूप से न्यूक्लियॉन कहते हैं।
3. परमाणु क्रमांक (Atomic Number)
किसी नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को परमाणु क्रमांक कहते हैं। इसे Z से दर्शाते हैं।
4. द्रव्यमान संख्या (Mass Number)
किसी नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या को द्रव्यमान संख्या कहते हैं। इसे A से दर्शाते हैं।
5. द्रव्यमान दोष (Mass Defect)
स्वतंत्र प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के कुल द्रव्यमान तथा बने हुए नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान के अंतर को द्रव्यमान दोष कहते हैं।
6. बंधन ऊर्जा (Binding Energy)
नाभिक को उसके सभी न्यूक्लियॉनों में अलग करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को नाभिक की बंधन ऊर्जा कहते हैं।
7. प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा
नाभिक की कुल बंधन ऊर्जा को उसमें उपस्थित कुल न्यूक्लियॉनों की संख्या से भाग देने पर प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा प्राप्त होती है।
8. नाभिकीय बल (Nuclear Force)
नाभिक के अंदर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को एक साथ बाँधकर रखने वाले अत्यंत प्रबल बल को नाभिकीय बल कहते हैं।
9. रेडियोधर्मिता (Radioactivity)
अस्थिर नाभिकों द्वारा स्वतः α, β या γ विकिरण उत्सर्जित करके अधिक स्थिर अवस्था में जाने की घटना को रेडियोधर्मिता कहते हैं।
10. क्षय नियतांक (Decay Constant)
किसी रेडियोधर्मी नाभिक के प्रति इकाई समय में क्षय होने की संभावना को व्यक्त करने वाली नियतांक को क्षय नियतांक कहते हैं। इसे λ से दर्शाते हैं।
11. अर्ध-आयु (Half Life)
वह समय जिसमें किसी रेडियोधर्मी पदार्थ के प्रारंभिक नाभिकों की संख्या घटकर आधी रह जाती है, अर्ध-आयु कहलाती है।
12. औसत आयु (Mean Life)
रेडियोधर्मी नाभिकों की औसत जीवन अवधि को उस पदार्थ की औसत आयु कहते हैं।
13. सक्रियता (Activity)
किसी रेडियोधर्मी पदार्थ में प्रति सेकंड होने वाले नाभिकीय क्षयों की संख्या को उसकी सक्रियता कहते हैं।
14. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)
किसी भारी नाभिक के दो या अधिक हल्के नाभिकों में टूटने तथा इस प्रक्रिया में ऊर्जा निकलने को नाभिकीय विखंडन कहते हैं।
15. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
दो या अधिक हल्के नाभिकों के मिलकर एक भारी नाभिक बनाने तथा ऊर्जा मुक्त करने की प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते हैं।
★ 1. नाभिक की संरचना (Structure of Nucleus)
★ परिभाषा
परमाणु के केंद्र में स्थित नाभिक बहुत छोटा और अत्यधिक सघन क्षेत्र होता है। इसमें धनावेशित प्रोटॉन और विद्युत उदासीन न्यूट्रॉन उपस्थित रहते हैं। इन्हीं दोनों को मिलाकर न्यूक्लियॉन कहा जाता है।
★ सूत्र
A = Z + N
जहाँ,
A = द्रव्यमान संख्या
Z = प्रोटॉनों की संख्या
N = न्यूट्रॉनों की संख्या
अतः,
N = A − Z
★ यह सूत्र क्या बताता है?
यह सूत्र बताता है कि किसी नाभिक में कुल न्यूक्लियॉनों की संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या के योग के बराबर होती है।
★ मुख्य बिंदु
– प्रोटॉन धनावेशित होता है।
– न्यूट्रॉन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता।
– नाभिक का कुल आवेश +Ze होता है।
– परमाणु की लगभग पूरी द्रव्यमान मात्रा नाभिक में होती है।
★ विशेषताएँ
– नाभिक का आकार बहुत छोटा होता है।
– नाभिक का घनत्व बहुत अधिक होता है।
– नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन नाभिकीय बल से बँधे रहते हैं।
★ सीमाएँ / विशेष स्थिति
यहाँ A केवल न्यूक्लियॉनों की कुल संख्या बताता है; यह नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान को सीधे नहीं बताता।
★ उदाहरण
i. ¹⁴₆C में प्रोटॉन = 6 और न्यूट्रॉन = 8।
ii. ²³₁₁Na में प्रोटॉन = 11 और न्यूट्रॉन = 12।
iii. ²⁷₁₃Al में प्रोटॉन = 13 और न्यूट्रॉन = 14।
★ 4 Numerical
प्रश्न 1: ¹⁴₆C में न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात करें।
N = A − Z
= 14 − 6
N = 8
—
प्रश्न 2: ²³₁₁Na में न्यूट्रॉनों की संख्या:
N = 23 − 11
N = 12
—
प्रश्न 3: किसी नाभिक में Z = 17 और N = 18 है। A ज्ञात करें।
A = Z + N
= 17 + 18
A = 35
—
प्रश्न 4: किसी नाभिक की A = 40 और Z = 18 है। न्यूट्रॉन संख्या:
N = 40 − 18
N = 22
★ 2. समस्थानिक, समभारिक और समन्यूट्रॉनिक
★ परिभाषा
समान परमाणु क्रमांक लेकिन अलग द्रव्यमान संख्या वाले नाभिक समस्थानिक, समान द्रव्यमान संख्या लेकिन अलग परमाणु क्रमांक वाले नाभिक समभारिक, तथा समान न्यूट्रॉन संख्या वाले नाभिक समन्यूट्रॉनिक कहलाते हैं।
★ सूत्र
समस्थानिक → Z समान
समभारिक → A समान
समन्यूट्रॉनिक → N समान
★ यह क्या बताता है?
इन तीनों में तुलना करने के लिए यह देखा जाता है कि Z, A या N में से कौन-सी संख्या समान है।
★ मुख्य बिंदु
– समस्थानिक एक ही तत्व के होते हैं।
– समभारिक अलग-अलग तत्व हो सकते हैं।
– समन्यूट्रॉनिक नाभिकों में न्यूट्रॉन संख्या समान होती है।
★ विशेषताएँ
Isotopes: Z समान, A अलग।
Isobars: A समान, Z अलग।
Isotones: N समान।
★ सीमाएँ / विशेष स्थिति
केवल A समान होने से नाभिक समस्थानिक नहीं कहलाते। समस्थानिक के लिए Z समान होना आवश्यक है।
★ उदाहरण
i. ¹H, ²H और ³H → समस्थानिक।
ii. ¹⁴₆C और ¹⁴₇N → समभारिक।
iii. ¹⁴₆C और ¹⁵₇N → समन्यूट्रॉनिक।
★ 4 अभ्यास
प्रश्न 1: ¹²₆C और ¹⁴₆C किस प्रकार के नाभिक हैं?
Z समान है।
उत्तर: समस्थानिक
—
प्रश्न 2: ¹⁴₆C और ¹⁴₇N किस प्रकार के नाभिक हैं?
A समान है।
उत्तर: समभारिक
—
प्रश्न 3: ¹⁴₆C और ¹⁵₇N में न्यूट्रॉन संख्या ज्ञात करें।
¹⁴₆C:
N = 14 − 6 = 8
¹⁵₇N:
N = 15 − 7 = 8
अतः ये समन्यूट्रॉनिक हैं।
—
प्रश्न 4: ²³₁₁Na और ²⁴₁₂Mg में N ज्ञात करें।
Na:
N = 23 − 11 = 12
Mg:
N = 24 − 12 = 12
अतः दोनों समन्यूट्रॉनिक हैं।
★ 3. नाभिकीय त्रिज्या (Nuclear Radius)
★ परिभाषा
नाभिक का आकार उसकी त्रिज्या द्वारा व्यक्त किया जाता है। प्रयोगों से पाया गया कि नाभिक की त्रिज्या उसकी द्रव्यमान संख्या के घनमूल के समानुपाती होती है।
★ सूत्र
R = R₀A¹ᐟ³
जहाँ:
R₀ ≈ 1.2 × 10⁻¹⁵ m
★ यह सूत्र क्या बताता है?
यह बताता है कि द्रव्यमान संख्या बढ़ने पर नाभिक की त्रिज्या बढ़ती है, लेकिन A के समान नहीं बल्कि A¹ᐟ³ के अनुसार।
★ मुख्य बिंदु
– R नाभिक की त्रिज्या है।
– A द्रव्यमान संख्या है।
– R₀ नाभिकीय त्रिज्या नियतांक है।
– R₀ लगभग 1.2 fm होता है।
★ विशेषताएँ
R ∝ A¹ᐟ³
इसलिए A चार गुना करने पर त्रिज्या चार गुनी नहीं होती।
★ सीमाएँ / विशेष स्थिति
यह संबंध नाभिक के सामान्य आकार के लिए प्रयोग किया जाता है और नाभिकीय संरचना की सूक्ष्म जानकारी नहीं देता।
★ उदाहरण
i. A बढ़ने पर R बढ़ती है।
ii. A = 8 होने पर A¹ᐟ³ = 2।
iii. A = 64 होने पर A¹ᐟ³ = 4।
★ 4 Numerical
प्रश्न 1: A = 8 के लिए R ज्ञात करें।
R = 1.2 × 8¹ᐟ³ fm
R = 1.2 × 2
R = 2.4 fm
—
प्रश्न 2: A = 27 के लिए:
R = 1.2 × 27¹ᐟ³
= 1.2 × 3
R = 3.6 fm
—
प्रश्न 3: A = 64 के लिए:
R = 1.2 × 4
R = 4.8 fm
—
प्रश्न 4: यदि A = 125 हो:
R = 1.2 × 5
R = 6.0 fm
★ 4. नाभिक का आयतन और घनत्व
★ परिभाषा
नाभिक का आयतन उसकी त्रिज्या पर निर्भर करता है। क्योंकि नाभिक का द्रव्यमान और आयतन दोनों द्रव्यमान संख्या A के समानुपाती होते हैं, इसलिए नाभिकीय घनत्व लगभग स्थिर रहता है।
★ सूत्र
V = 4/3 πR³
और:
R = R₀A¹ᐟ³
अतः:
V = 4/3 πR₀³A
इसलिए:
V ∝ A
और:
ρ = M/V ≈ स्थिर
★ यह सूत्र क्या बताता है?
यह बताता है कि A बढ़ने के साथ नाभिक का आयतन बढ़ता है, लेकिन उसका औसत घनत्व लगभग समान रहता है।
★ मुख्य बिंदु
– V ∝ A
– M ∝ A
– इसलिए M/V लगभग स्थिर।
– नाभिकीय पदार्थ का घनत्व बहुत अधिक होता है।
★ विशेषताएँ
– सभी सामान्य नाभिकों का औसत घनत्व लगभग समान माना जा सकता है।
– नाभिक का पदार्थ अत्यधिक सघन होता है।
★ सीमाएँ / विशेष स्थिति
यह एक औसत नाभिकीय गुण है; नाभिक के अंदर की सूक्ष्म संरचना इससे ज्ञात नहीं होती।
★ उदाहरण
i. A बढ़ने पर आयतन बढ़ता है।
ii. भारी नाभिक का आयतन हल्के नाभिक से अधिक होता है।
iii. फिर भी दोनों का औसत नाभिकीय घनत्व लगभग समान रहता है।
★ 4 Numerical
प्रश्न 1: यदि A = 8 हो, तो V का A के साथ संबंध क्या होगा?
V ∝ A
अतः V का सापेक्ष मान = 8
—
प्रश्न 2: यदि दो नाभिकों की A क्रमशः 27 और 8 है, तो उनके आयतन का अनुपात:
V₁/V₂ = A₁/A₂
= 27/8
V₁ : V₂ = 27 : 8
—
प्रश्न 3: यदि A दोगुनी हो जाए तो आयतन:
V ∝ A
अतः आयतन भी दोगुना होगा।
—
प्रश्न 4: यदि A चार गुना हो जाए, तो त्रिज्या कितनी गुनी होगी?
R ∝ A¹ᐟ³
R₂/R₁ = 4¹ᐟ³
R₂/R₁ = ∛4
★ 5. द्रव्यमान दोष (Mass Defect)
★ परिभाषा
जब किसी नाभिक को बनाने वाले सभी स्वतंत्र प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के द्रव्यमानों का योग किया जाता है, तो यह योग वास्तविक नाभिक के द्रव्यमान से थोड़ा अधिक मिलता है। इस अंतर को द्रव्यमान दोष कहते हैं।
★ सूत्र
नाभिकीय द्रव्यमान के लिए:
Δm = [Zmₚ + (A − Z)mₙ] − m
Atomic mass दिए होने पर:
Δm = ZmH + (A − Z)mn − Matom
★ यह सूत्र क्या बताता है?
यह बताता है कि नाभिक बनने के दौरान द्रव्यमान का कितना अंतर उत्पन्न हुआ।
★ मुख्य बिंदु
– Δm सामान्यतः धनात्मक होता है।
– द्रव्यमान दोष बंधन ऊर्जा से जुड़ा है।
– यही द्रव्यमान अंतर ऊर्जा में परिवर्तित हो सकता है।
★ विशेषताएँ
द्रव्यमान दोष को u में व्यक्त किया जा सकता है।
★ सीमाएँ / विशेष स्थिति
यदि atomic masses का प्रयोग किया जा रहा हो तो इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान को अलग से जोड़ने की आवश्यकता नहीं होती।
★ उदाहरण
i. नाभिक बनने पर स्वतंत्र न्यूक्लियॉनों का कुल द्रव्यमान घटता है।
ii. यह अंतर ऊर्जा से संबंधित होता है।
iii. इसी से नाभिक की बंधन ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
★ 4 Numerical
प्रश्न 1: स्वतंत्र कणों का द्रव्यमान 10.050 u और नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान 10.000 u है।
Δm = 10.050 − 10.000
Δm = 0.050 u
—
प्रश्न 2: स्वतंत्र कणों का कुल द्रव्यमान 20.10 u और नाभिक का द्रव्यमान 20.00 u है।
Δm = 20.10 − 20.00
Δm = 0.10 u
—
प्रश्न 3: यदि Δm = 0.02 u हो तो बंधन ऊर्जा:
B.E. = 0.02 × 931.5
B.E. = 18.63 MeV
—
प्रश्न 4: Δm = 0.05 u के लिए:
B.E. = 0.05 × 931.5
B.E. = 46.575 MeV
★ 6. बंधन ऊर्जा (Binding Energy)
★ परिभाषा
किसी नाभिक को उसके सभी प्रोटॉन और न्यूट्रॉन में पूरी तरह अलग करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को नाभिक की बंधन ऊर्जा कहते हैं। यही ऊर्जा नाभिक के निर्माण के समय मुक्त होने वाली ऊर्जा के बराबर होती है।
★ सूत्र
B.E. = Δmc²
यदि Δm u में है:
B.E. = Δm × 931.5 MeV
★ यह सूत्र क्या बताता है?
यह बताता है कि द्रव्यमान दोष के कारण नाभिक में कितनी बंधन ऊर्जा उपलब्ध है।
★ मुख्य बिंदु
– B.E. अधिक → नाभिक अधिक मजबूती से बंधा हो सकता है।
– B.E. का मान सामान्यतः MeV में दिया जाता है।
– तुलना के लिए प्रति न्यूक्लियॉन B.E. अधिक उपयोगी है।
★ विशेषताएँ
1 u → 931.5 MeV
यह नाभिकीय गणनाओं में बहुत उपयोगी रूपांतरण है।
★ सीमाएँ / विशेष स्थिति
केवल कुल बंधन ऊर्जा देखकर अलग-अलग आकार के नाभिकों की स्थिरता की सही तुलना नहीं की जाती; इसके लिए प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा देखी जाती है।
★ उदाहरण
i. 0.01 u द्रव्यमान दोष → 9.315 MeV।
ii. 0.02 u → 18.63 MeV।
iii. अधिक द्रव्यमान दोष का अर्थ अधिक बंधन ऊर्जा हो सकता है।
★ 4 Numerical
प्रश्न 1: Δm = 0.01 u
B.E. = 0.01 × 931.5
= 9.315 MeV
—
प्रश्न 2: Δm = 0.03 u
B.E. = 0.03 × 931.5
= 27.945 MeV
—
प्रश्न 3: Δm = 0.04 u
B.E. = 0.04 × 931.5
= 37.26 MeV
—
प्रश्न 4: Δm = 0.10 u
B.E. = 0.10 × 931.5
= 93.15 MeV
★ 7. प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा
★ परिभाषा
किसी नाभिक की कुल बंधन ऊर्जा को उस नाभिक में उपस्थित कुल न्यूक्लिऑनों की संख्या अर्थात द्रव्यमान संख्या A से भाग देने पर प्राप्त ऊर्जा को प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा कहते हैं।
सरल शब्दों में, यह बताती है कि नाभिक के प्रत्येक न्यूक्लिऑन को नाभिक से अलग करने के लिए औसतन कितनी ऊर्जा चाहिए।
★ सूत्र
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा = कुल बंधन ऊर्जा / द्रव्यमान संख्या
अर्थात,
B.E. प्रति न्यूक्लिऑन = B.E. / A
जहाँ,
B.E. = कुल बंधन ऊर्जा
A = द्रव्यमान संख्या
★ यह सूत्र क्या बताता है?
यह नाभिक की स्थिरता (Stability) का अच्छा माप है।
जिस नाभिक की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा अधिक होती है, उसके न्यूक्लिऑन अधिक मजबूती से बंधे होते हैं और नाभिक सामान्यतः अधिक स्थिर होता है।
★ मुख्य बिंदु
★ हल्के नाभिकों में प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा अपेक्षाकृत कम होती है।
★ मध्यम द्रव्यमान वाले नाभिकों में यह अधिक होती है।
★ लोहे के आसपास के नाभिकों की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा बहुत अधिक होती है, इसलिए वे बहुत स्थिर होते हैं।
★ बहुत भारी नाभिकों में प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा फिर धीरे-धीरे कम होने लगती है।
★ विशेषताएँ
1. यह नाभिक की स्थिरता की तुलना करने में उपयोगी है।
2. इसका मान जितना अधिक होगा, नाभिक सामान्यतः उतना अधिक स्थिर होगा।
3. नाभिकीय विखंडन (Fission) और संलयन (Fusion) में ऊर्जा निकलने को समझने में यह महत्वपूर्ण है।
★ उदाहरण
i. लोहे के नाभिक की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा अधिक होने के कारण वह बहुत स्थिर होता है।
ii. हल्के नाभिकों के संलयन से प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा बढ़ सकती है।
iii. भारी नाभिक के विखंडन से बनने वाले नाभिकों की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा अधिक हो सकती है।
★ संख्यात्मक प्रश्न 1
किसी नाभिक की कुल बंधन ऊर्जा 56 MeV है और उसकी द्रव्यमान संख्या 8 है। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
दिया है:
B.E. = 56 MeV
A = 8
सूत्र:
B.E. प्रति न्यूक्लिऑन = B.E. / A
= 56 / 8
= 7 MeV
उत्तर: 7 MeV प्रति न्यूक्लिऑन
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 2
किसी नाभिक की कुल बंधन ऊर्जा 92 MeV तथा द्रव्यमान संख्या 12 है। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
B.E. प्रति न्यूक्लिऑन = 92 / 12
= 7.67 MeV
उत्तर: लगभग 7.67 MeV प्रति न्यूक्लिऑन
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 3
किसी नाभिक की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा 8 MeV है और उसमें 20 न्यूक्लिऑन हैं। उसकी कुल बंधन ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
दिया है:
B.E. प्रति न्यूक्लिऑन = 8 MeV
A = 20
सूत्र:
कुल B.E. = A × प्रति न्यूक्लिऑन B.E.
= 20 × 8
= 160 MeV
उत्तर: 160 MeV
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 4
किसी नाभिक की कुल बंधन ऊर्जा 180 MeV तथा प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा 7.5 MeV है। नाभिक की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए।
सूत्र:
A = कुल B.E. / प्रति न्यूक्लिऑन B.E.
= 180 / 7.5
= 24
उत्तर: द्रव्यमान संख्या = 24
★ 8. नाभिकीय बल (Nuclear Force)
★ परिभाषा
नाभिक के अंदर उपस्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को एक साथ बाँधकर रखने वाला अत्यंत प्रबल आकर्षण बल नाभिकीय बल कहलाता है।
यह बल बहुत छोटी दूरी पर कार्य करता है और नाभिक को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
★ मुख्य बिंदु
★ यह बल प्रोटॉन-प्रोटॉन, न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन-न्यूट्रॉन के बीच कार्य कर सकता है।
★ इसकी प्रकृति अत्यंत प्रबल होती है।
★ यह बहुत छोटी दूरी तक ही प्रभावी होता है।
★ यह विद्युत बल से अलग प्रकार का बल है।
★ विशेषताएँ
1. बहुत प्रबल बल है।
2. इसकी प्रभावी दूरी बहुत कम होती है।
3. लगभग आवेश-स्वतंत्र माना जाता है।
4. यह नाभिक को बाँधे रखने में सहायता करता है।
★ सीमाएँ / विशेष स्थिति
नाभिकीय बल की प्रभावी सीमा लगभग 1 से 2 fm के क्रम की होती है।
★ उदाहरण
i. प्रोटॉन और न्यूट्रॉन नाभिक में नाभिकीय बल के कारण बँधे रहते हैं।
ii. नाभिक की स्थिरता में नाभिकीय बल महत्वपूर्ण है।
iii. नाभिकीय विखंडन में नाभिकीय बल की भूमिका होती है।
★ 9. रेडियोधर्मिता (Radioactivity)
★ परिभाषा
अस्थिर परमाणु नाभिकों द्वारा स्वतः α, β या γ विकिरणों का उत्सर्जन करके अधिक स्थिर अवस्था की ओर जाने की घटना को रेडियोधर्मिता कहते हैं।
यह एक स्वतः होने वाली नाभिकीय प्रक्रिया है।
★ मुख्य बिंदु
★ रेडियोधर्मिता स्वतः होने वाली प्रक्रिया है।
★ यह मुख्यतः अस्थिर नाभिकों में होती है।
★ ताप और दाब जैसे बाहरी भौतिक कारकों का सामान्यतः इसके क्षय की दर पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
★ रेडियोधर्मी पदार्थ समय के साथ कम होते जाते हैं।
★ विशेषताएँ
1. यह नाभिकीय घटना है।
2. प्रत्येक रेडियोधर्मी नाभिक के क्षय की संभावना निश्चित होती है।
3. रेडियोधर्मी क्षय सांख्यिकीय प्रकृति का होता है।
4. क्षय के दौरान नया नाभिक बन सकता है।
★ उदाहरण
i. यूरेनियम का रेडियोधर्मी क्षय।
ii. रेडियम से विकिरण का उत्सर्जन।
iii. कार्बन-14 का क्षय।
★ 10. रेडियोधर्मी क्षय नियम (Radioactive Decay Law)
★ परिभाषा
रेडियोधर्मी पदार्थ में किसी क्षण उपस्थित नाभिकों के क्षय की दर उस समय उपस्थित रेडियोधर्मी नाभिकों की संख्या के समानुपाती होती है। इसे रेडियोधर्मी क्षय नियम कहते हैं।
★ सूत्र
−dN/dt = λN
जहाँ,
N = समय t पर बचे हुए रेडियोधर्मी नाभिकों की संख्या
λ = क्षय नियतांक (Decay Constant)
समाकलन करने पर,
N = N₀e⁻λᵗ
जहाँ,
N₀ = प्रारंभ में नाभिकों की संख्या
N = t समय बाद बचे नाभिक
★ यह सूत्र क्या बताता है?
समय बढ़ने पर रेडियोधर्मी पदार्थ में बचे हुए नाभिकों की संख्या लगातार घटती जाती है।
★ मुख्य बिंदु
★ क्षय की दर प्रारंभ में अधिक होती है।
★ समय के साथ क्षय की दर कम होती जाती है।
★ रेडियोधर्मी पदार्थ का क्षय घातांकीय (Exponential) नियम का पालन करता है।
★ विशेष स्थिति
जब t = 0, तब
N = N₀
★ उदाहरण
i. किसी रेडियोधर्मी पदार्थ में समय के साथ परमाणुओं की संख्या घटना।
ii. रेडियोधर्मी समस्थानिक का धीरे-धीरे क्षय होना।
iii. चिकित्सा में प्रयुक्त रेडियोधर्मी पदार्थ का समय के साथ कम होना।
★ संख्यात्मक प्रश्न 1
किसी पदार्थ में प्रारंभ में 1000 रेडियोधर्मी नाभिक हैं। यदि 1 अर्ध-आयु के बाद कितने नाभिक बचेंगे?
एक अर्ध-आयु के बाद आधे नाभिक बचते हैं।
N = 1000 / 2
= 500
उत्तर: 500 नाभिक
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 2
किसी पदार्थ में प्रारंभ में 800 नाभिक हैं। 2 अर्ध-आयु के बाद कितने नाभिक बचेंगे?
पहली अर्ध-आयु के बाद = 400
दूसरी अर्ध-आयु के बाद = 200
उत्तर: 200 नाभिक
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 3
यदि किसी रेडियोधर्मी पदार्थ की प्रारंभिक मात्रा 160 g है, तो 3 अर्ध-आयु के बाद कितनी मात्रा बचेगी?
160 → 80 → 40 → 20 g
उत्तर: 20 g
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 4
किसी पदार्थ की प्रारंभिक संख्या 6400 नाभिक है। 4 अर्ध-आयु के बाद कितने नाभिक बचेंगे?
N = N₀ / 2ⁿ
N = 6400 / 2⁴
= 6400 / 16
= 400
उत्तर: 400 नाभिक
★ 11. क्षय नियतांक (Decay Constant)
★ परिभाषा
किसी रेडियोधर्मी पदार्थ के एक नाभिक के प्रति इकाई समय में क्षय होने की संभावना को उस पदार्थ का क्षय नियतांक कहते हैं।
इसे λ (लैम्ब्डा) से प्रदर्शित करते हैं।
★ सूत्र
λ = −(1/N)(dN/dt)
★ मात्रक
s⁻¹
★ मुख्य बिंदु
★ λ का मान रेडियोधर्मी पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।
★ λ अधिक होने पर पदार्थ तेजी से क्षय करता है।
★ λ कम होने पर क्षय धीमा होता है।
★ उदाहरण
i. अधिक क्षय नियतांक वाले पदार्थ का क्षय जल्दी होता है।
ii. कम क्षय नियतांक वाले पदार्थ का जीवन अधिक लंबा हो सकता है।
iii. अलग-अलग रेडियोधर्मी समस्थानिकों के λ अलग-अलग होते हैं।
★ 12. अर्ध-आयु (Half Life)
★ परिभाषा
किसी रेडियोधर्मी पदार्थ के प्रारंभिक नाभिकों की संख्या या मात्रा को घटकर आधा होने में लगने वाले समय को उसकी अर्ध-आयु कहते हैं।
इसे T₁/₂ से दर्शाते हैं।
★ सूत्र
T₁/₂ = 0.693 / λ
★ मुख्य बिंदु
★ प्रत्येक रेडियोधर्मी पदार्थ की अर्ध-आयु निश्चित होती है।
★ एक अर्ध-आयु के बाद पदार्थ की मात्रा आधी बचती है।
★ दो अर्ध-आयु के बाद प्रारंभिक मात्रा की 1/4 बचती है।
★ तीन अर्ध-आयु के बाद 1/8 बचती है।
★ विशेषता
अर्ध-आयु प्रारंभिक मात्रा पर निर्भर नहीं करती।
★ उदाहरण
i. 100 g पदार्थ की एक अर्ध-आयु के बाद 50 g बचेगा।
ii. 80 g पदार्थ की दो अर्ध-आयु के बाद 20 g बचेगा।
iii. किसी रेडियोधर्मी पदार्थ की अर्ध-आयु उसके क्षय की गति बताती है।
★ संख्यात्मक प्रश्न 1
यदि किसी पदार्थ का क्षय नियतांक 0.1 s⁻¹ है, तो उसकी अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।
T₁/₂ = 0.693 / λ
= 0.693 / 0.1
= 6.93 s
उत्तर: 6.93 सेकंड
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 2
यदि λ = 0.2 s⁻¹ है, तो अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।
T₁/₂ = 0.693 / 0.2
= 3.465 s
उत्तर: 3.465 सेकंड
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 3
किसी पदार्थ की अर्ध-आयु 10 s है। उसका क्षय नियतांक ज्ञात कीजिए।
λ = 0.693 / T₁/₂
= 0.693 / 10
= 0.0693 s⁻¹
उत्तर: 0.0693 s⁻¹
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 4
किसी पदार्थ की अर्ध-आयु 20 मिनट है। दो अर्ध-आयु के बाद उसकी प्रारंभिक मात्रा का कितना भाग बचेगा?
दो अर्ध-आयु के बाद,
बचा भाग = 1/2²
= 1/4
उत्तर: प्रारंभिक मात्रा का 1/4 भाग
★ 13. औसत आयु (Mean Life)
★ परिभाषा
रेडियोधर्मी नाभिकों की औसत जीवन अवधि को औसत आयु कहते हैं।
इसे τ (टाऊ) से प्रदर्शित करते हैं।
★ सूत्र
τ = 1 / λ
अर्ध-आयु से संबंध:
T₁/₂ = 0.693τ
★ मात्रक
सेकंड (s)
★ मुख्य बिंदु
★ औसत आयु क्षय नियतांक के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
★ λ अधिक होने पर औसत आयु कम होती है।
★ λ कम होने पर औसत आयु अधिक होती है।
★ उदाहरण
i. किसी पदार्थ का λ बढ़ने पर उसकी औसत आयु घटती है।
ii. लंबे समय तक रहने वाले रेडियोधर्मी पदार्थ का λ सामान्यतः कम होता है।
iii. रेडियोधर्मी पदार्थों की आयु की तुलना में औसत आयु उपयोगी होती है।
★ संख्यात्मक प्रश्न 1
यदि λ = 0.25 s⁻¹ है, तो औसत आयु ज्ञात कीजिए।
τ = 1 / λ
= 1 / 0.25
= 4 s
उत्तर: 4 सेकंड
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 2
यदि λ = 0.5 s⁻¹ है, तो औसत आयु ज्ञात कीजिए।
τ = 1 / 0.5
= 2 s
उत्तर: 2 सेकंड
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 3
किसी पदार्थ की औसत आयु 5 s है। उसका क्षय नियतांक ज्ञात कीजिए।
λ = 1 / τ
= 1 / 5
= 0.2 s⁻¹
उत्तर: 0.2 s⁻¹
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 4
किसी पदार्थ की औसत आयु 10 s है। उसकी अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।
T₁/₂ = 0.693τ
= 0.693 × 10
= 6.93 s
उत्तर: 6.93 सेकंड
★ 14. रेडियोधर्मिता की सक्रियता (Activity)
★ परिभाषा
किसी रेडियोधर्मी पदार्थ में प्रति इकाई समय में होने वाले नाभिकीय क्षयों की संख्या को उसकी सक्रियता (Activity) कहते हैं।
इसे A से प्रदर्शित किया जाता है।
★ सूत्र
A = −dN/dt
और,
A = λN
★ SI मात्रक
बेकरेल (Becquerel)
1 Bq = 1 क्षय/सेकंड
★ मुख्य बिंदु
★ सक्रियता नाभिकों की संख्या पर निर्भर करती है।
★ समय के साथ सक्रियता घटती जाती है।
★ सक्रियता अधिक होने का अर्थ है कि प्रति सेकंड अधिक क्षय हो रहे हैं।
★ उदाहरण
i. किसी रेडियोधर्मी नमूने की गतिविधि समय के साथ कम होती है।
ii. रेडियोधर्मी पदार्थ की सक्रियता को Bq में मापा जाता है।
iii. चिकित्सा में रेडियोधर्मी पदार्थ की सक्रियता महत्वपूर्ण होती है।
★ संख्यात्मक प्रश्न 1
यदि λ = 0.2 s⁻¹ और N = 500 है, तो सक्रियता ज्ञात कीजिए।
A = λN
= 0.2 × 500
= 100 Bq
उत्तर: 100 Bq
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 2
यदि λ = 0.5 s⁻¹ और N = 200 है, तो सक्रियता ज्ञात कीजिए।
A = 0.5 × 200
= 100 Bq
उत्तर: 100 Bq
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 3
किसी पदार्थ में 1000 नाभिक हैं और λ = 0.01 s⁻¹ है। सक्रियता ज्ञात कीजिए।
A = 0.01 × 1000
= 10 Bq
उत्तर: 10 Bq
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 4
यदि किसी पदार्थ की सक्रियता 50 Bq और λ = 0.05 s⁻¹ है, तो उपस्थित नाभिकों की संख्या ज्ञात कीजिए।
N = A / λ
= 50 / 0.05
= 1000
उत्तर: 1000 नाभिक
★ 15. रेडियोधर्मी विकिरणों के प्रकार
रेडियोधर्मी पदार्थ मुख्यतः तीन प्रकार के विकिरण उत्सर्जित करते हैं—
★ (i) अल्फा विकिरण (α-rays)
अल्फा कण वास्तव में हीलियम नाभिक होते हैं।
इसमें 2 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं।
आवेश = +2e
★ (ii) बीटा विकिरण (β-rays)
बीटा विकिरण में उच्च वेग वाले इलेक्ट्रॉन या पॉज़िट्रॉन निकल सकते हैं।
β⁻ क्षय में इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होता है।
★ (iii) गामा विकिरण (γ-rays)
गामा विकिरण अत्यधिक ऊर्जा वाले विद्युतचुंबकीय विकिरण होते हैं।
इनका आवेश शून्य होता है।
★ मुख्य बिंदु
★ α-कणों की भेदन क्षमता सबसे कम होती है।
★ γ-किरणों की भेदन क्षमता सबसे अधिक होती है।
★ β-किरणों की भेदन क्षमता α और γ के बीच होती है।
★ उदाहरण
i. α-कण = हीलियम नाभिक।
ii. β⁻-कण = इलेक्ट्रॉन।
iii. γ-किरण = विद्युतचुंबकीय विकिरण।
★ 16. अल्फा क्षय (Alpha Decay)
★ परिभाषा
जब कोई भारी अस्थिर नाभिक एक α-कण अर्थात हीलियम नाभिक उत्सर्जित करता है और नया नाभिक बनता है, तो इस प्रक्रिया को अल्फा क्षय कहते हैं।
★ सामान्य समीकरण
ᴬ_ZX → ᴬ⁻⁴_Z⁻²Y + ⁴₂He
★ मुख्य बिंदु
★ द्रव्यमान संख्या 4 घटती है।
★ परमाणु क्रमांक 2 घटता है।
★ α-कण का आवेश +2e होता है।
★ उदाहरण
²³⁸₉₂U → ²³⁴₉₀Th + ⁴₂He
★ 17. बीटा क्षय (Beta Decay)
★ परिभाषा
जब अस्थिर नाभिक में न्यूट्रॉन या प्रोटॉन के परिवर्तन के कारण β-कण का उत्सर्जन होता है, तो इसे बीटा क्षय कहते हैं।
β⁻ क्षय में:
n → p + e⁻ + ν̄
★ मुख्य बिंदु
★ β⁻ क्षय में परमाणु क्रमांक 1 बढ़ता है।
★ द्रव्यमान संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता।
★ β⁻ कण इलेक्ट्रॉन होता है।
★ उदाहरण
¹⁴₆C → ¹⁴₇N + e⁻ + ν̄
★ 18. गामा क्षय (Gamma Decay)
★ परिभाषा
जब उत्तेजित नाभिक अपनी अतिरिक्त ऊर्जा को γ-किरण के रूप में उत्सर्जित करके निम्न ऊर्जा अवस्था में आ जाता है, तो इसे गामा क्षय कहते हैं।
★ मुख्य बिंदु
★ द्रव्यमान संख्या नहीं बदलती।
★ परमाणु क्रमांक नहीं बदलता।
★ केवल नाभिक की ऊर्जा अवस्था बदलती है।
★ उदाहरण
उत्तेजित नाभिक → निम्न ऊर्जा अवस्था + γ-किरण
★ 19. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)
★ परिभाषा
जब कोई भारी नाभिक दो या दो से अधिक हल्के नाभिकों में टूटता है और इस प्रक्रिया में बहुत अधिक ऊर्जा निकलती है, तो इसे नाभिकीय विखंडन कहते हैं।
★ मुख्य बिंदु
★ भारी नाभिक टूटता है।
★ ऊर्जा निकलती है।
★ अतिरिक्त न्यूट्रॉन निकल सकते हैं।
★ इससे श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) हो सकती है।
★ उदाहरण
यूरेनियम-235 का न्यूट्रॉन द्वारा विखंडन।
★ संख्यात्मक प्रश्न 1
यदि एक विखंडन में 200 MeV ऊर्जा निकलती है, तो 10 विखंडनों में कितनी ऊर्जा निकलेगी?
E = 10 × 200
= 2000 MeV
उत्तर: 2000 MeV
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 2
एक विखंडन में 200 MeV ऊर्जा निकलती है। 100 विखंडनों में ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
E = 100 × 200
= 20000 MeV
उत्तर: 20000 MeV
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 3
यदि प्रत्येक विखंडन में 200 MeV ऊर्जा निकलती है, तो 1 MeV = 1.6 × 10⁻¹³ J मानकर एक विखंडन की ऊर्जा जूल में ज्ञात कीजिए।
E = 200 × 1.6 × 10⁻¹³
= 3.2 × 10⁻¹¹ J
उत्तर: 3.2 × 10⁻¹¹ J
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 4
यदि एक विखंडन में 3.2 × 10⁻¹¹ J ऊर्जा निकलती है, तो 100 विखंडनों में कुल ऊर्जा होगी—
E = 100 × 3.2 × 10⁻¹¹
= 3.2 × 10⁻⁹ J
उत्तर: 3.2 × 10⁻⁹ J
★ 20. नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया (Nuclear Chain Reaction)
★ परिभाषा
नाभिकीय विखंडन में उत्पन्न न्यूट्रॉन यदि अन्य भारी नाभिकों का विखंडन कराते हैं और यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, तो इसे नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया कहते हैं।
★ मुख्य बिंदु
★ एक विखंडन से नए न्यूट्रॉन निकलते हैं।
★ ये न्यूट्रॉन अन्य नाभिकों को विखंडित कर सकते हैं।
★ नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया का उपयोग नाभिकीय रिएक्टर में किया जाता है।
★ अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया बहुत तेजी से ऊर्जा मुक्त कर सकती है।
★ उदाहरण
i. नाभिकीय रिएक्टर में नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया।
ii. यूरेनियम के विखंडन में उत्पन्न न्यूट्रॉन।
iii. एक विखंडन से दूसरे विखंडन का होना।
★ 21. नाभिकीय रिएक्टर (Nuclear Reactor)
★ परिभाषा
वह यंत्र जिसमें नाभिकीय विखंडन की नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया द्वारा ऊर्जा उत्पन्न की जाती है, उसे नाभिकीय रिएक्टर कहते हैं।
★ मुख्य भाग
1. ईंधन (Fuel)
नाभिकीय विखंडन के लिए ईंधन उपलब्ध कराता है।
2. मंदक (Moderator)
तेज न्यूट्रॉनों की गति कम करता है।
3. नियंत्रक छड़ें (Control Rods)
अतिरिक्त न्यूट्रॉनों को अवशोषित करके अभिक्रिया की दर नियंत्रित करती हैं।
4. शीतलक (Coolant)
उत्पन्न ऊष्मा को बाहर ले जाता है।
★ मुख्य बिंदु
★ रिएक्टर में अभिक्रिया नियंत्रित होती है।
★ उत्पन्न ऊष्मा का उपयोग भाप बनाने में किया जा सकता है।
★ भाप टरबाइन को घुमाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न कर सकती है।
★ उदाहरण
i. विद्युत उत्पादन के लिए नाभिकीय रिएक्टर।
ii. अनुसंधान के लिए प्रयुक्त रिएक्टर।
iii. चिकित्सा उपयोग के लिए रेडियोआइसोटोप बनाने वाले रिएक्टर।
★ 22. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
★ परिभाषा
जब दो या दो से अधिक हल्के नाभिक आपस में मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं और इस प्रक्रिया में बहुत अधिक ऊर्जा निकलती है, तो इसे नाभिकीय संलयन कहते हैं।
★ मुख्य बिंदु
★ हल्के नाभिक आपस में जुड़ते हैं।
★ बहुत अधिक तापमान की आवश्यकता होती है।
★ बहुत अधिक ऊर्जा निकल सकती है।
★ सूर्य और तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है।
★ उदाहरण
i. सूर्य में हाइड्रोजन नाभिकों का संलयन।
ii. तारों में होने वाली नाभिकीय संलयन प्रक्रियाएँ।
iii. ड्यूटेरियम और ट्रिटियम का संलयन।
★ संख्यात्मक प्रश्न 1
यदि एक संलयन प्रक्रिया में 17.6 MeV ऊर्जा निकलती है, तो 10 ऐसी प्रक्रियाओं में ऊर्जा होगी—
E = 10 × 17.6
= 176 MeV
उत्तर: 176 MeV
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 2
यदि प्रत्येक संलयन में 17.6 MeV ऊर्जा निकलती है, तो 100 प्रक्रियाओं में ऊर्जा होगी—
E = 100 × 17.6
= 1760 MeV
उत्तर: 1760 MeV
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 3
17.6 MeV ऊर्जा को जूल में बदलें।
E = 17.6 × 1.6 × 10⁻¹³
= 2.816 × 10⁻¹² J
उत्तर: 2.816 × 10⁻¹² J
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 4
यदि 50 संलयन प्रक्रियाएँ होती हैं और प्रत्येक से 17.6 MeV ऊर्जा निकलती है, तो कुल ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
E = 50 × 17.6
= 880 MeV
उत्तर: 880 MeV
★ 23. द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध (Mass-Energy Relation)
★ परिभाषा
आइंस्टीन के अनुसार द्रव्यमान और ऊर्जा एक-दूसरे से संबंधित हैं। किसी द्रव्यमान में निहित ऊर्जा उसके द्रव्यमान और प्रकाश की चाल के वर्ग के गुणनफल के बराबर होती है।
★ सूत्र
E = mc²
जहाँ,
E = ऊर्जा
m = द्रव्यमान
c = प्रकाश की चाल
c = 3 × 10⁸ m/s
★ मुख्य बिंदु
★ थोड़े से द्रव्यमान के ऊर्जा में बदलने पर बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त हो सकती है।
★ नाभिकीय अभिक्रियाओं में द्रव्यमान की कमी ऊर्जा में बदल सकती है।
★ इसी सिद्धांत से नाभिकीय ऊर्जा को समझा जाता है।
★ उदाहरण
i. नाभिकीय विखंडन में द्रव्यमान का कुछ भाग ऊर्जा में बदलता है।
ii. नाभिकीय संलयन में भी द्रव्यमान-अंतर ऊर्जा में बदल सकता है।
iii. सूर्य की ऊर्जा को द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध से समझा जा सकता है।
★ संख्यात्मक प्रश्न 1
यदि 1 × 10⁻³ kg द्रव्यमान पूरी तरह ऊर्जा में बदल जाए, तो ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
E = mc²
= 10⁻³ × (3 × 10⁸)²
= 10⁻³ × 9 × 10¹⁶
= 9 × 10¹³ J
उत्तर: 9 × 10¹³ J
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 2
यदि m = 2 × 10⁻³ kg है, तो ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
E = 2 × 10⁻³ × 9 × 10¹⁶
= 1.8 × 10¹⁴ J
उत्तर: 1.8 × 10¹⁴ J
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 3
यदि 1 × 10⁻⁶ kg द्रव्यमान ऊर्जा में बदल जाए—
E = 10⁻⁶ × 9 × 10¹⁶
= 9 × 10¹⁰ J
उत्तर: 9 × 10¹⁰ J
—
★ संख्यात्मक प्रश्न 4
यदि ऊर्जा 9 × 10¹⁰ J है, तो इसके तुल्य द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
m = E/c²
= 9 × 10¹⁰ / 9 × 10¹⁶
= 10⁻⁶ kg
उत्तर: 10⁻⁶ kg
★ 24. नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन में अंतर
नाभिकीय विखंडन | नाभिकीय संलयन
भारी नाभिक टूटता है। | हल्के नाभिक जुड़ते हैं।
भारी नाभिकों में होता है। | हल्के नाभिकों में होता है।
श्रृंखला अभिक्रिया संभव है। | अत्यधिक उच्च तापमान आवश्यक होता है।
नाभिकीय रिएक्टर में उपयोग किया जाता है। | सूर्य और तारों में होता है।
★ 25. महत्वपूर्ण स्थिरांक
★ प्रकाश की चाल:
c = 3 × 10⁸ m/s
★ परमाणु द्रव्यमान इकाई:
1 u = 1.66 × 10⁻²⁷ kg
★ 1 u का द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यांक:
1 u ≈ 931.5 MeV/c²
★ इलेक्ट्रॉन का आवेश:
e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C
★ 26. सभी महत्वपूर्ण सूत्र एक साथ
★ नाभिक की त्रिज्या
R = R₀A¹ᐟ³
जहाँ,
R₀ ≈ 1.2 fm
★ नाभिक का आयतन
V = 4/3 πR³
★ द्रव्यमान दोष
Δm = Zmₕ + (A − Z)mₙ − M
★ बंधन ऊर्जा
B.E. = Δmc²
यदि Δm को u में लिया जाए—
B.E. = Δm × 931.5 MeV
★ प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा
B.E. प्रति न्यूक्लिऑन = B.E. / A
★ रेडियोधर्मी क्षय
N = N₀e⁻λᵗ
★ सक्रियता
A = λN
★ अर्ध-आयु
T₁/₂ = 0.693 / λ
★ औसत आयु
τ = 1 / λ
★ अर्ध-आयु और औसत आयु
T₁/₂ = 0.693τ
★ द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध
E = mc²
★ 27. परीक्षा के लिए बहुत जरूरी बातें
★ द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन
★ परमाणु क्रमांक Z = प्रोटॉन की संख्या
★ न्यूट्रॉन की संख्या:
N = A − Z
★ समस्थानिकों (Isotopes) में Z समान और A अलग होता है।
★ समभारिकों (Isobars) में A समान और Z अलग होता है।
★ अल्फा क्षय में:
A → A − 4
Z → Z − 2
★ β⁻ क्षय में:
A समान
Z → Z + 1
★ γ क्षय में A और Z दोनों अपरिवर्तित रहते हैं।
★ प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा नाभिक की स्थिरता का महत्वपूर्ण माप है।
★ अधिक प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा → सामान्यतः अधिक स्थिर नाभिक।
★ विखंडन में भारी नाभिक टूटता है।
★ संलयन में हल्के नाभिक जुड़ते हैं।
★ सूर्य की ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है।
★ 28. त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
नाभिक → परमाणु का छोटा, घना और धनावेशित भाग।
A → कुल न्यूक्लिऑन।
Z → प्रोटॉन की संख्या।
N → न्यूट्रॉन की संख्या।
Δm → द्रव्यमान दोष।
B.E. → नाभिक को अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा।
B.E./A → प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा।
λ → क्षय नियतांक।
T₁/₂ → अर्ध-आयु।
τ → औसत आयु।
α → हीलियम नाभिक।
β⁻ → इलेक्ट्रॉन।
γ → विद्युतचुंबकीय विकिरण।
विखंडन → भारी नाभिक का टूटना।
संलयन → हल्के नाभिकों का जुड़ना।
★ 29. बोर्ड परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ
★ द्रव्यमान संख्या A को परमाणु क्रमांक Z न लिखें।
★ β⁻ क्षय में A को बदलना नहीं है।
★ γ क्षय में A और Z दोनों अपरिवर्तित रहते हैं।
★ B.E. और B.E./A को एक ही चीज न समझें।
★ अर्ध-आयु का सूत्र 0.693/λ याद रखें।
★ औसत आयु का सूत्र 1/λ है।
★ बंधन ऊर्जा निकालते समय द्रव्यमान की इकाई का ध्यान रखें।
★ यदि द्रव्यमान दोष u में दिया है, तो 931.5 MeV का प्रयोग किया जा सकता है।
★ विखंडन और संलयन की परिभाषाएँ आपस में न मिलाएँ।
★ 30. महत्वपूर्ण स्व-परीक्षण प्रश्न
1. प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा क्या है?
2. नाभिकीय बल की दो विशेषताएँ लिखिए।
3. रेडियोधर्मिता क्या है?
4. क्षय नियतांक से क्या समझते हैं?
5. अर्ध-आयु और औसत आयु में संबंध लिखिए।
6. α, β और γ विकिरणों में अंतर बताइए।
7. α क्षय में A और Z पर क्या प्रभाव पड़ता है?
8. β⁻ क्षय में परमाणु क्रमांक क्यों बढ़ता है?
9. नाभिकीय विखंडन क्या है?
10. नाभिकीय संलयन क्या है?
11. नाभिकीय रिएक्टर के मुख्य भाग लिखिए।
12. सूर्य में ऊर्जा किस नाभिकीय प्रक्रिया से उत्पन्न होती है?
13. E = mc² का अर्थ समझाइए।
14. प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा नाभिक की स्थिरता से कैसे संबंधित है?
15. रेडियोधर्मी क्षय नियम का सूत्र लिखिए।
★ 31. छोटे संख्यात्मक प्रश्न — अभ्यास के लिए
★ किसी नाभिक की कुल बंधन ऊर्जा 120 MeV और A = 16 है। प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
★ किसी पदार्थ की अर्ध-आयु 5 घंटे है। 15 घंटे बाद प्रारंभिक मात्रा का कितना भाग बचेगा?
★ किसी पदार्थ का क्षय नियतांक 0.1 s⁻¹ है। उसकी औसत आयु ज्ञात कीजिए।
★ किसी रेडियोधर्मी पदार्थ में 500 नाभिक और λ = 0.2 s⁻¹ है। सक्रियता ज्ञात कीजिए।
★ 1 × 10⁻⁴ kg द्रव्यमान की पूर्ण ऊर्जा तुल्यता ज्ञात कीजिए।
★ 32. अंतिम याद रखने योग्य सार
नाभिक की स्थिरता समझने के लिए बंधन ऊर्जा और विशेष रूप से प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा बहुत महत्वपूर्ण है।
रेडियोधर्मी नाभिक समय के साथ α, β या γ विकिरण निकाल सकते हैं। इनके क्षय को क्षय नियतांक, अर्ध-आयु और औसत आयु से समझा जाता है।
नाभिकीय ऊर्जा मुख्य रूप से दो प्रक्रियाओं से जुड़ी है—
भारी नाभिक का टूटना → विखंडन (Fission)
हल्के नाभिकों का जुड़ना → संलयन (Fusion)
और नाभिकीय प्रक्रियाओं में निकलने वाली विशाल ऊर्जा को समझने का आधार है—
E = mc²
★ सबसे जरूरी सूत्र:
B.E. = Δmc²
B.E. प्रति न्यूक्लिऑन = B.E./A
N = N₀e⁻λᵗ
A = λN
T₁/₂ = 0.693/λ
τ = 1/λ
E = mc²