अध्याय 7 — ऐल्कोहॉल, फिनॉल एवं ईथर
★ अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. ऐल्कोहॉल (Alcohol)
वे कार्बनिक यौगिक जिनमें हाइड्रॉक्सिल समूह (–OH) किसी संतृप्त कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है, ऐल्कोहॉल कहलाते हैं।
सामान्य रूप: R–OH
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2. मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल (Monohydric Alcohol)
जिन ऐल्कोहॉलों में एक ही –OH समूह उपस्थित होता है, उन्हें मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल कहते हैं।
उदाहरण: CH₃OH, C₂H₅OH
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3. प्राथमिक ऐल्कोहॉल (Primary Alcohol)
जिस ऐल्कोहॉल में –OH से जुड़ा कार्बन केवल एक अन्य कार्बन से जुड़ा हो, वह प्राथमिक ऐल्कोहॉल कहलाता है।
उदाहरण: CH₃CH₂OH
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4. द्वितीयक ऐल्कोहॉल (Secondary Alcohol)
जिस ऐल्कोहॉल में –OH से जुड़ा कार्बन दो अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा हो, वह द्वितीयक ऐल्कोहॉल कहलाता है।
उदाहरण: CH₃–CHOH–CH₃
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5. तृतीयक ऐल्कोहॉल (Tertiary Alcohol)
जिस ऐल्कोहॉल में –OH से जुड़ा कार्बन तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा हो, वह तृतीयक ऐल्कोहॉल कहलाता है।
उदाहरण: (CH₃)₃COH
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6. फिनॉल (Phenol)
वह कार्बनिक यौगिक जिसमें –OH समूह सीधे बेंजीन वलय के कार्बन से जुड़ा होता है, फिनॉल कहलाता है।
सूत्र: C₆H₅OH
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7. ईथर (Ether)
वे कार्बनिक यौगिक जिनमें एक ऑक्सीजन परमाणु दो ऐल्किल या एरिल समूहों के बीच जुड़ा होता है, ईथर कहलाते हैं।
सामान्य रूप: R–O–R′
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8. हाइड्रोजन बंध (Hydrogen Bond)
जब हाइड्रोजन परमाणु किसी अधिक विद्युतऋणात्मक परमाणु, जैसे O, N या F, से जुड़ा हो और दूसरे विद्युतऋणात्मक परमाणु की ओर आकर्षित हो, तो इस आकर्षण को हाइड्रोजन बंध कहते हैं।
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9. निर्जलीकरण (Dehydration)
किसी यौगिक से जल के अणु का निकलना निर्जलीकरण कहलाता है।
ऐल्कोहॉल में निर्जलीकरण से सामान्यतः ऐल्कीन बनता है।
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10. ऑक्सीकरण (Oxidation)
किसी कार्बनिक यौगिक में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ना या हाइड्रोजन की मात्रा घटना ऑक्सीकरण कहलाता है।
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11. ईथरीकरण (Etherification)
ऐल्कोहॉल से ईथर बनने की अभिक्रिया को ईथरीकरण कहते हैं।
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12. अम्लीय प्रकृति (Acidic Nature)
किसी पदार्थ की H⁺ आयन देने की प्रवृत्ति को उसकी अम्लीय प्रकृति कहते हैं।
फिनॉल कमजोर अम्ल है।
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13. इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन (Electrophilic Substitution)
वह अभिक्रिया जिसमें इलेक्ट्रॉन-समृद्ध कार्बनिक वलय में कोई इलेक्ट्रॉनरागी कण प्रवेश करता है और वलय का एक हाइड्रोजन परमाणु उसके स्थान पर आ जाता है, इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन कहलाती है।
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14. मोनोहाइड्रिक फिनॉल (Monohydric Phenol)
जिस फिनॉल में एक –OH समूह उपस्थित हो, उसे मोनोहाइड्रिक फिनॉल कहते हैं।
उदाहरण: C₆H₅OH
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15. ऐल्कोहॉल का वर्गीकरण (Classification of Alcohols)
ऐल्कोहॉलों को उस कार्बन की प्रकृति के आधार पर प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉल में बाँटा जाता है जिससे –OH समूह जुड़ा होता है।
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16. फिनॉल की अम्लीयता (Acidity of Phenol)
फिनॉल से H⁺ निकलने के बाद बनने वाला फिनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थिर हो जाता है। इसी कारण फिनॉल ऐल्कोहॉल की तुलना में अधिक अम्लीय होता है।
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17. फिनॉक्साइड आयन (Phenoxide Ion)
फिनॉल से H⁺ हटने पर प्राप्त C₆H₅O⁻ आयन को फिनॉक्साइड आयन कहते हैं।
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18. एथेनॉल (Ethanol)
C₂H₅OH सूत्र वाला प्राथमिक ऐल्कोहॉल एथेनॉल कहलाता है।
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19. मेथेनॉल (Methanol)
CH₃OH सूत्र वाला सबसे सरल ऐल्कोहॉल मेथेनॉल कहलाता है।
★ 1. ऐल्कोहॉल का नामकरण (Nomenclature of Alcohols)
परिभाषा
ऐल्कोहॉलों का नामकरण करते समय उस सबसे लंबी कार्बन शृंखला को चुना जाता है जिसमें –OH समूह उपस्थित हो। नाम के अंत में –ol लगाया जाता है और –OH की स्थिति संख्या द्वारा बताई जाती है।
उदाहरण
CH₃OH → मेथेनॉल (Methanol)
CH₃CH₂OH → एथेनॉल (Ethanol)
CH₃CH₂CH₂OH → प्रोपेन-1-ऑल (Propan-1-ol)
CH₃CHOHCH₃ → प्रोपेन-2-ऑल (Propan-2-ol)
मुख्य बिंदु
– सबसे लंबी शृंखला का चुनाव करें।
– –OH समूह को न्यूनतम संख्या दें।
– नाम में –ol प्रत्यय लगाया जाता है।
– एक से अधिक –OH हों तो diol, triol आदि प्रयोग किए जाते हैं।
उदाहरण
i. CH₃OH → मेथेनॉल
ii. CH₃CH₂OH → एथेनॉल
iii. CH₃CH₂CH₂OH → प्रोपेन-1-ऑल
★ 2. ऐल्कोहॉल की संरचना एवं वर्गीकरण (Structure and Classification of Alcohols)
ऐल्कोहॉल में ऑक्सीजन परमाणु एक ओर हाइड्रोजन और दूसरी ओर कार्बन से जुड़ा रहता है।
सामान्य संरचना: R–OH
प्राथमिक
R–CH₂–OH
द्वितीयक
R–CH(OH)–R′
तृतीयक
R–C(OH)(R′)–R″
पहचान की आसान विधि
–OH जिस कार्बन से जुड़ा है, उस कार्बन के साथ जुड़े कार्बनों की संख्या गिनें।
1 कार्बन → प्राथमिक
2 कार्बन → द्वितीयक
3 कार्बन → तृतीयक
उदाहरण
i. CH₃CH₂OH → प्राथमिक
ii. CH₃CHOHCH₃ → द्वितीयक
iii. (CH₃)₃COH → तृतीयक
★ 3. ऐल्कोहॉल बनाने की विधियाँ (Methods of Preparation of Alcohols)
(क) ऐल्कीन का जलयोजन (Hydration of Alkene)
ऐल्कीन में जल का योग कराने पर ऐल्कोहॉल प्राप्त किया जा सकता है।
CH₂=CH₂ + H₂O → CH₃CH₂OH
H⁺
मुख्य बात
असंतृप्त यौगिक के द्विबंध पर जल के जुड़ने से ऐल्कोहॉल बनता है।
अन्य उदाहरण
i. CH₂=CHCH₃ + H₂O → CH₃CHOHCH₃
ii. CH₂=CHCH₂CH₃ + H₂O → संबंधित ऐल्कोहॉल
iii. CH₂=CH₂ + H₂O → C₂H₅OH
iv. प्रोपीन का जलयोजन → प्रोपेन-2-ऑल
★ 4. ऐल्कोहॉल के भौतिक गुण (Physical Properties of Alcohols)
परिभाषा
ऐल्कोहॉलों के वे गुण जिन्हें बिना रासायनिक परिवर्तन के देखा या मापा जा सकता है, उनके भौतिक गुण कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु
– छोटे ऐल्कोहॉल सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं।
– ऐल्कोहॉलों में हाइड्रोजन बंध पाया जाता है।
– अणुभार बढ़ने पर जल में विलेयता सामान्यतः घटती है।
– हाइड्रोजन बंध के कारण ऐल्कोहॉलों के क्वथनांक अपेक्षाकृत अधिक होते हैं।
– ऐल्कोहॉल का –OH समूह उसके ध्रुवीय स्वभाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उदाहरण
i. मेथेनॉल जल में मिश्रणीय है।
ii. एथेनॉल जल में अच्छी तरह घुलता है।
iii. लंबे कार्बन शृंखला वाले ऐल्कोहॉलों की जल में विलेयता घटती जाती है।
★ 5. प्राथमिक ऐल्कोहॉलों के रासायनिक गुण (Chemical Properties of Primary Alcohols)
UP Board के वर्तमान पाठ्यक्रम में ऐल्कोहॉल के रासायनिक गुणों में विशेष रूप से प्राथमिक ऐल्कोहॉलों पर ध्यान दिया गया है।
(क) सोडियम के साथ अभिक्रिया
ऐल्कोहॉल सोडियम से अभिक्रिया करके सोडियम ऐल्कॉक्साइड तथा हाइड्रोजन बनाता है।
2ROH + 2Na → 2RONa + H₂↑
उदाहरण
2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa + H₂↑
मुख्य बात
इस अभिक्रिया से ऐल्कोहॉल के –OH समूह में उपस्थित हाइड्रोजन की अभिक्रियाशीलता दिखाई देती है।
चार उपयोगी उदाहरण
i. 2CH₃OH + 2Na → 2CH₃ONa + H₂↑
ii. 2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa + H₂↑
iii. 2C₃H₇OH + 2Na → 2C₃H₇ONa + H₂↑
iv. 2C₄H₉OH + 2Na → 2C₄H₉ONa + H₂↑
★ 6. ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण (Oxidation of Alcohol)
प्राथमिक ऐल्कोहॉल का नियंत्रित ऑक्सीकरण करने पर पहले ऐल्डिहाइड और आगे ऑक्सीकरण करने पर कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त हो सकता है।
प्राथमिक ऐल्कोहॉल → ऐल्डिहाइड → कार्बोक्सिलिक अम्ल
उदाहरण:
CH₃CH₂OH + [O] → CH₃CHO + H₂O
आगे:
CH₃CHO + [O] → CH₃COOH
चार महत्वपूर्ण उदाहरण
i. CH₃CH₂OH → CH₃CHO → CH₃COOH
ii. CH₃CH₂CH₂OH → CH₃CH₂CHO → CH₃CH₂COOH
iii. CH₃CH₂CH₂CH₂OH → संबंधित ऐल्डिहाइड → संबंधित अम्ल
iv. प्राथमिक ऐल्कोहॉल → ऐल्डिहाइड → कार्बोक्सिलिक अम्ल
याद रखें
प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण = पहले ऐल्डिहाइड, फिर अम्ल।
★ 7. ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण (Dehydration of Alcohol)
परिभाषा
ऐल्कोहॉल से जल के अणु को हटाकर ऐल्कीन बनाने की प्रक्रिया को निर्जलीकरण कहते हैं।
सामान्य अभिक्रिया
C₂H₅OH → CH₂=CH₂ + H₂O
सांद्र H₂SO₄, ऊष्मा
मुख्य बिंदु
– निर्जलीकरण में H₂O निकलता है।
– ऐल्कोहॉल से ऐल्कीन बनता है।
– सांद्र H₂SO₄ निर्जलीकरण में सहायक होता है।
– उपयुक्त ताप और परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं।
चार उदाहरण
i. C₂H₅OH → CH₂=CH₂ + H₂O
ii. CH₃CH₂CH₂OH → प्रोपीन + H₂O
iii. CH₃CHOHCH₃ → प्रोपीन + H₂O
iv. उपयुक्त ऐल्कोहॉल → संबंधित ऐल्कीन + H₂O
बोर्ड में ध्यान दें
निर्जलीकरण को ऑक्सीकरण न समझें। यहाँ मुख्य परिवर्तन जल का निकलना है।
★ 8. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉल की पहचान (Identification of Alcohols)
ऐल्कोहॉलों की पहचान के लिए लुकास परीक्षण (Lucas Test) महत्वपूर्ण है।
लुकास अभिकर्मक
सांद्र HCl + निर्जल ZnCl₂
यह परीक्षण ऐल्कोहॉलों की अलग-अलग अभिक्रियाशीलता पर आधारित है।
क्रम
तृतीयक ऐल्कोहॉल > द्वितीयक ऐल्कोहॉल > प्राथमिक ऐल्कोहॉल
मुख्य बात
तृतीयक ऐल्कोहॉल सामान्यतः सबसे तेजी से अभिक्रिया करता है, जबकि प्राथमिक ऐल्कोहॉल सबसे धीरे।
तीन उदाहरण
i. प्राथमिक ऐल्कोहॉल → धीमी अभिक्रिया
ii. द्वितीयक ऐल्कोहॉल → अपेक्षाकृत तेज
iii. तृतीयक ऐल्कोहॉल → सबसे तेज
★ 9. मेथेनॉल (Methanol)
परिभाषा
CH₃OH सूत्र वाला सबसे सरल ऐल्कोहॉल मेथेनॉल कहलाता है।
मुख्य गुण
– यह रंगहीन और ज्वलनशील द्रव है।
– इसका उपयोग औद्योगिक रसायन के रूप में होता है।
– यह अत्यंत विषैला पदार्थ है।
उपयोग
– विलायक के रूप में
– विभिन्न रासायनिक पदार्थों के निर्माण में
– औद्योगिक प्रक्रियाओं में
महत्वपूर्ण सावधानी
मेथेनॉल को पीने योग्य अल्कोहल समझना गलत है; यह विषैला है।
★ 10. एथेनॉल (Ethanol)
परिभाषा
C₂H₅OH सूत्र वाला प्राथमिक ऐल्कोहॉल एथेनॉल कहलाता है।
मुख्य गुण
– रंगहीन द्रव
– जल के साथ अच्छी तरह मिश्रित
– ज्वलनशील
– अनेक पदार्थों के लिए अच्छा विलायक
उपयोग
i. विलायक के रूप में
ii. औद्योगिक रसायन के रूप में
iii. विभिन्न रासायनिक पदार्थों की तैयारी में
★ 11. फिनॉल का नामकरण (Nomenclature of Phenol)
फिनॉल में –OH समूह सीधे बेंजीन वलय से जुड़ा होता है।
सूत्र: C₆H₅OH
प्रतिस्थापित फिनॉलों में –OH वाले कार्बन को सामान्यतः 1 माना जाता है।
उदाहरण
o-cresol → 2-मिथाइलफिनॉल
m-cresol → 3-मिथाइलफिनॉल
p-cresol → 4-मिथाइलफिनॉल
★ 12. फिनॉल बनाने की विधियाँ (Preparation of Phenol)
(क) क्लोरोबेंजीन से
क्लोरोबेंजीन को NaOH के साथ उपयुक्त कठोर परिस्थितियों में अभिक्रिया कराने पर सोडियम फिनॉक्साइड बनता है, जिसे अम्लीकरण करने पर फिनॉल प्राप्त होता है।
C₆H₅Cl + NaOH → C₆H₅ONa + NaCl
C₆H₅ONa + HCl → C₆H₅OH + NaCl
मुख्य बात
पहले फिनॉक्साइड लवण बनता है, फिर अम्लीकरण से फिनॉल मिलता है।
★ 13. फिनॉल के भौतिक गुण (Physical Properties of Phenol)
मुख्य बिंदु
– शुद्ध फिनॉल रंगहीन क्रिस्टलीय ठोस होता है।
– इसमें विशिष्ट गंध होती है।
– फिनॉल जल में सीमित मात्रा में घुलता है।
– फिनॉल में हाइड्रोजन बंध पाया जाता है।
– फिनॉल का –OH समूह इसके गुणों को प्रभावित करता है।
तीन बातें
i. फिनॉल में –OH सीधे बेंजीन से जुड़ा है।
ii. फिनॉल ऐल्कोहॉल से अलग प्रकार का यौगिक है।
iii. फिनॉल कमजोर अम्लीय प्रकृति दिखाता है।
★ 14. फिनॉल की अम्लीय प्रकृति (Acidic Nature of Phenol)
परिभाषा
फिनॉल कमजोर अम्ल है क्योंकि यह H⁺ आयन दे सकता है और बनने वाला फिनॉक्साइड आयन अनुनाद के कारण स्थिर होता है।
अभिक्रिया
C₆H₅OH ⇌ C₆H₅O⁻ + H⁺
फिनॉल की अम्लीयता का मुख्य कारण
फिनॉल से H⁺ निकलने के बाद फिनॉक्साइड आयन बनता है।
फिनॉक्साइड आयन में ऋणावेश का विस्थानीकरण अनुनाद द्वारा होता है, जिससे आयन स्थिर होता है।
मुख्य बिंदु
– फिनॉल कमजोर अम्ल है।
– फिनॉल, ऐल्कोहॉल की अपेक्षा अधिक अम्लीय है।
– फिनॉक्साइड आयन की अनुनादी स्थिरता इसका मुख्य कारण है।
– फिनॉल NaOH से अभिक्रिया कर सकता है।
अभिक्रिया
C₆H₅OH + NaOH → C₆H₅ONa + H₂O
★ 15. फिनॉल की Na और NaOH से अभिक्रिया
सोडियम के साथ
2C₆H₅OH + 2Na → 2C₆H₅ONa + H₂↑
NaOH के साथ
C₆H₅OH + NaOH → C₆H₅ONa + H₂O
महत्वपूर्ण अंतर
फिनॉल NaOH से अभिक्रिया करता है, जबकि सामान्य ऐल्कोहॉल सामान्यतः NaOH से ऐसी अम्ल-क्षार अभिक्रिया नहीं दिखाते।
चार याद रखने योग्य अभिक्रियाएँ
i. C₆H₅OH + NaOH → C₆H₅ONa + H₂O
ii. 2C₆H₅OH + 2Na → 2C₆H₅ONa + H₂
iii. C₆H₅OH + Na → अभिक्रिया द्वारा फिनॉक्साइड
iv. फिनॉल ⇌ H⁺ + फिनॉक्साइड आयन
★ 16. फिनॉल की इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Electrophilic Substitution Reactions)
फिनॉल में –OH समूह बेंजीन वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है। इसलिए इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन मुख्यतः ऑर्थो और पैरा स्थानों पर होता है।
—
(क) ब्रोमीनीकरण (Bromination)
फिनॉल की ब्रोमीन जल से अभिक्रिया कराने पर 2,4,6-ट्राइब्रोमोफिनॉल का सफेद अवक्षेप बनता है।
C₆H₅OH + 3Br₂ → C₆H₂Br₃OH + 3HBr
मुख्य बात
सफेद अवक्षेप बनना फिनॉल की पहचान के लिए उपयोगी है।
—
(ख) नाइट्रीकरण (Nitration)
पतले HNO₃ से फिनॉल की अभिक्रिया करने पर मुख्यतः ऑर्थो- और पैरा-नाइट्रोफिनॉल बनते हैं।
C₆H₅OH + HNO₃ → o-nitrophenol + p-nitrophenol + H₂O
चार महत्वपूर्ण अभिक्रिया प्रकार
i. फिनॉल + Br₂ → ब्रोमो-प्रतिस्थापित फिनॉल
ii. फिनॉल + HNO₃ → नाइट्रोफिनॉल
iii. फिनॉल + सांद्र HNO₃ → अधिक नाइट्रीकरण
iv. फिनॉल का इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन → मुख्यतः o और p उत्पाद
★ 17. ईथर का नामकरण (Nomenclature of Ethers)
ईथर का सामान्य रूप:
R–O–R′
IUPAC नामकरण में बड़े ऐल्किल समूह को मूल शृंखला और छोटे समूह को ऐल्कॉक्सी समूह माना जाता है।
उदाहरण
CH₃–O–CH₃ → मेथॉक्सीमेथेन
CH₃–O–C₂H₅ → मेथॉक्सीएथेन
C₂H₅–O–C₂H₅ → एथॉक्सीएथेन
★ 18. ईथर बनाने की विधि (Preparation of Ethers)
विलियमसन ईथर संश्लेषण (Williamson Ether Synthesis)
सोडियम ऐल्कॉक्साइड की ऐल्किल हैलाइड से अभिक्रिया कराने पर ईथर बनता है।
RONa + R′X → ROR′ + NaX
उदाहरण
C₂H₅ONa + CH₃I → C₂H₅OCH₃ + NaI
मुख्य बिंदु
– ईथर बनाने की महत्वपूर्ण विधि।
– इसमें ऐल्कॉक्साइड आयन प्रयोग होता है।
– प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड इसके लिए विशेष रूप से उपयोगी होते हैं।
चार उदाहरण
i. CH₃ONa + CH₃I → CH₃OCH₃ + NaI
ii. C₂H₅ONa + CH₃I → C₂H₅OCH₃ + NaI
iii. C₂H₅ONa + C₂H₅Br → C₂H₅OC₂H₅ + NaBr
iv. C₃H₇ONa + CH₃I → C₃H₇OCH₃ + NaI
★ 19. ईथर के भौतिक गुण (Physical Properties of Ethers)
मुख्य बिंदु
– ईथर अपेक्षाकृत वाष्पशील होते हैं।
– ईथर में ऑक्सीजन के कारण ध्रुवीयता होती है।
– ईथर आपस में हाइड्रोजन बंध नहीं बना सकते क्योंकि उनमें O–H बंध नहीं होता।
– छोटे ईथर जल में कुछ मात्रा में घुल सकते हैं।
– ईथर कई कार्बनिक पदार्थों के अच्छे विलायक होते हैं।
तीन उदाहरण
i. डाइएथिल ईथर एक उपयोगी कार्बनिक विलायक है।
ii. ईथर के अणुओं में O परमाणु होता है।
iii. ईथर में O–H बंध नहीं होता।
★ 20. ईथर के रासायनिक गुण (Chemical Properties of Ethers)
हाइड्रोजन हैलाइड से अभिक्रिया
ईथर HI या HBr जैसे हाइड्रोजन हैलाइडों से अभिक्रिया कर सकता है।
ROR′ + HI → RI + R′OH
अधिक HI तथा गर्म करने पर आगे:
R′OH + HI → R′I + H₂O
उदाहरण
C₂H₅OC₂H₅ + HI → C₂H₅I + C₂H₅OH
चार उदाहरण
i. CH₃OCH₃ + HI → CH₃I + CH₃OH
ii. C₂H₅OC₂H₅ + HI → C₂H₅I + C₂H₅OH
iii. CH₃OC₂H₅ + HI → CH₃I + C₂H₅OH
iv. ईथर + अधिक HI → ऐल्किल आयोडाइड + जल
★ 21. ऐल्कोहॉल और फिनॉल में अंतर (Difference between Alcohol and Phenol)
आधार | ऐल्कोहॉल | फिनॉल
–OH की स्थिति | संतृप्त कार्बन से जुड़ा | सीधे बेंजीन वलय से जुड़ा
सामान्य उदाहरण | C₂H₅OH | C₆H₅OH
अम्लीयता | बहुत कमजोर | अपेक्षाकृत अधिक
NaOH से अभिक्रिया | सामान्यतः नहीं | हाँ
संरचना | R–OH | C₆H₅OH
सबसे आसान याद
Alcohol में –OH → संतृप्त कार्बन पर
Phenol में –OH → Benzene ring पर सीधे
★ 22. ऐल्कोहॉल और ईथर में अंतर (Difference between Alcohol and Ether)
आधार | ऐल्कोहॉल | ईथर
सामान्य रूप | R–OH | R–O–R′
O–H बंध | उपस्थित | अनुपस्थित
हाइड्रोजन बंध | आपस में बना सकते हैं | आपस में नहीं बना सकते
उदाहरण| C₂H₅OH| C₂H₅OC₂H₅
★ 23. फिनॉल और ईथर के बीच मुख्य अंतर
फिनॉल में –OH समूह सीधे बेंजीन वलय से जुड़ा होता है, जबकि ईथर में ऑक्सीजन दो कार्बनिक समूहों के बीच होती है।
फिनॉल: C₆H₅OH
ईथर: R–O–R′
★ 24. बहुत महत्वपूर्ण तुलना — अम्लीयता
याद रखें:
फिनॉल > ऐल्कोहॉल
फिनॉल अधिक अम्लीय है क्योंकि फिनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थिर होता है।
परीक्षा में लिखने योग्य उत्तर
“फिनॉल, ऐल्कोहॉल की अपेक्षा अधिक अम्लीय होता है क्योंकि फिनॉल से H⁺ निकलने पर बनने वाला फिनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थिर हो जाता है।”
★ 25. हाइड्रोजन बंध और क्वथनांक
ऐल्कोहॉलों में O–H बंध के कारण अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध बनते हैं। इस कारण उन्हें अलग करने के लिए अधिक ऊर्जा चाहिए और उनके क्वथनांक बढ़ जाते हैं।
तीन मुख्य बातें
i. O–H बंध → हाइड्रोजन बंध
ii. हाइड्रोजन बंध → अणुओं के बीच आकर्षण
iii. अधिक आकर्षण → अपेक्षाकृत अधिक क्वथनांक
★ 26. मेथेनॉल और एथेनॉल — विशेष तथ्य
मेथेनॉल
CH₃OH
– सबसे सरल ऐल्कोहॉल।
– अत्यंत विषैला।
– औद्योगिक उपयोग महत्वपूर्ण।
एथेनॉल
C₂H₅OH
– प्राथमिक ऐल्कोहॉल।
– जल में अच्छी तरह मिश्रित।
– विलायक के रूप में उपयोगी।
★ 27. इस अध्याय की सबसे जरूरी रासायनिक अभिक्रियाएँ
1. सोडियम के साथ ऐल्कोहॉल
2ROH + 2Na → 2RONa + H₂↑
2. एथेनॉल का ऑक्सीकरण
CH₃CH₂OH + [O] → CH₃CHO + H₂O
CH₃CHO + [O] → CH₃COOH
3. एथेनॉल का निर्जलीकरण
C₂H₅OH → CH₂=CH₂ + H₂O
4. फिनॉल की NaOH से अभिक्रिया
C₆H₅OH + NaOH → C₆H₅ONa + H₂O
5. फिनॉल का ब्रोमीनीकरण
C₆H₅OH + 3Br₂ → C₆H₂Br₃OH + 3HBr
6. विलियमसन संश्लेषण
RONa + R′X → ROR′ + NaX
7. ईथर की HI से अभिक्रिया
ROR′ + HI → RI + R′OH
★ 28. बोर्ड परीक्षा में बार-बार पूछे जाने योग्य कारण
फिनॉल ऐल्कोहॉल से अधिक अम्लीय क्यों है?
फिनॉक्साइड आयन की अनुनादी स्थिरता के कारण।
ऐल्कोहॉलों का क्वथनांक अधिक क्यों होता है?
अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध के कारण।
फिनॉल NaOH से अभिक्रिया क्यों करता है?
फिनॉल की अम्लीय प्रकृति के कारण।
ईथर का क्वथनांक समान अणुभार वाले ऐल्कोहॉल से कम क्यों होता है?
ईथर के अणुओं में आपस में O–H बंध नहीं होने से मजबूत हाइड्रोजन बंध नहीं बनता।
प्राथमिक ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण में क्या बनता है?
पहले ऐल्डिहाइड और आगे कार्बोक्सिलिक अम्ल।
★ 29. क्विक रिवीजन (Quick Revision)
ऐल्कोहॉल: R–OH
प्राथमिक: R–CH₂OH
द्वितीयक: R₂CHOH
तृतीयक: R₃COH
फिनॉल: C₆H₅OH
ईथर: R–O–R′
ऐल्कोहॉल + Na → ऐल्कॉक्साइड + H₂
प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण → ऐल्डिहाइड → अम्ल
ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण → ऐल्कीन + H₂O
फिनॉल + NaOH → सोडियम फिनॉक्साइड + H₂O
फिनॉल + Br₂ → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफिनॉल
RONa + R′X → ROR′ + NaX
ईथर + HI → ऐल्किल आयोडाइड + ऐल्कोहॉल
★ 30. पूरे अध्याय के जरूरी सूत्र एवं रासायनिक रूप एक जगह
ऐल्कोहॉल
R–OH
प्राथमिक ऐल्कोहॉल
R–CH₂OH
द्वितीयक ऐल्कोहॉल
R–CHOH–R′
तृतीयक ऐल्कोहॉल
R–C(OH)(R′)–R″
फिनॉल
C₆H₅OH
ईथर
R–O–R′
ऐल्कोहॉल + सोडियम
2ROH + 2Na → 2RONa + H₂
ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण
ROH → Alkene + H₂O
प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण
Primary alcohol → Aldehyde → Carboxylic acid
फिनॉल का आयनीकरण
C₆H₅OH ⇌ C₆H₅O⁻ + H⁺
फिनॉल + NaOH
C₆H₅OH + NaOH → C₆H₅ONa + H₂O
फिनॉल + Br₂
C₆H₅OH + 3Br₂ → C₆H₂Br₃OH + 3HBr
विलियमसन संश्लेषण
RONa + R′X → ROR′ + NaX
ईथर + HI
ROR′ + HI → RI + R′OH
★ 31. बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्न
1. ऐल्कोहॉल क्या है? इसके प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक प्रकार समझाइए।
2. ऐल्कोहॉल के नामकरण की विधि उदाहरण सहित लिखिए।
3. ऐल्कोहॉल बनाने की प्रमुख विधियाँ लिखिए।
4. प्राथमिक ऐल्कोहॉल के रासायनिक गुण लिखिए।
5. प्राथमिक ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण को समझाइए।
6. ऐल्कोहॉल के निर्जलीकरण की अभिक्रिया लिखिए।
7. मेथेनॉल और एथेनॉल के उपयोग लिखिए।
8. फिनॉल क्या है? इसके भौतिक गुण लिखिए ।
9. फिनॉल की अम्लीय प्रकृति समझाइए।
10. फिनॉल ऐल्कोहॉल से अधिक अम्लीय क्यों है?
11. फिनॉल की NaOH के साथ अभिक्रिया लिखिए।
12. फिनॉल की ब्रोमीन जल के साथ अभिक्रिया लिखिए।
13. फिनॉल की इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ समझाइए।
14. ईथर क्या है? इसका सामान्य सूत्र लिखिए।
15. विलियमसन ईथर संश्लेषण समझाइए।
16. ईथर के रासायनिक गुण लिखिए।
17. ऐल्कोहॉल और फिनॉल में अंतर लिखिए।
18. ऐल्कोहॉल और ईथर में अंतर लिखिए।
19. ईथर HI के साथ कैसे अभिक्रिया करता है?
20. हाइड्रोजन बंध का ऐल्कोहॉलों के गुणों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
★ 32. स्वयं से पूछें — Self Test
प्रश्न 1
ऐल्कोहॉल का सामान्य सूत्र क्या है?
उत्तर: R–OH
प्रश्न 2
फिनॉल में –OH समूह कहाँ जुड़ा होता है?
उत्तर: सीधे बेंजीन वलय के कार्बन से।
प्रश्न 3
C₂H₅OH किस प्रकार का ऐल्कोहॉल है?
उत्तर: प्राथमिक ऐल्कोहॉल।
प्रश्न 4
CH₃CHOHCH₃ किस प्रकार का ऐल्कोहॉल है?
उत्तर: द्वितीयक ऐल्कोहॉल।
प्रश्न 5
(CH₃)₃COH किस प्रकार का ऐल्कोहॉल है?
उत्तर: तृतीयक ऐल्कोहॉल।
प्रश्न 6
फिनॉल अधिक अम्लीय क्यों है?
उत्तर: फिनॉक्साइड आयन की अनुनादी स्थिरता के कारण।
प्रश्न 7
ऐल्कोहॉल के निर्जलीकरण से क्या बनता है?
उत्तर: ऐल्कीन।
प्रश्न 8
प्राथमिक ऐल्कोहॉल के पूर्ण ऑक्सीकरण से क्या बन सकता है?
उत्तर: कार्बोक्सिलिक अम्ल।
प्रश्न 9
ईथर का सामान्य सूत्र क्या है?
उत्तर: R–O–R′
प्रश्न 10
विलियमसन संश्लेषण से क्या बनाया जाता है?
उत्तर: ईथर।
प्रश्न 11
फिनॉल ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करने पर क्या देता है?
उत्तर: 2,4,6-ट्राइब्रोमोफिनॉल का सफेद अवक्षेप।
प्रश्न 12
मेथेनॉल का सूत्र क्या है?
उत्तर: CH₃OH
प्रश्न 13
एथेनॉल का सूत्र क्या है?
उत्तर: C₂H₅OH
प्रश्न 14
ऐल्कोहॉल में हाइड्रोजन बंध क्यों बनता है?
उत्तर: O–H बंध की ध्रुवीयता के कारण।
प्रश्न 15
ईथर में O–H बंध क्यों नहीं होता?
उत्तर: क्योंकि ऑक्सीजन दोनों ओर कार्बनिक समूहों से जुड़ी होती है।
★ 33. बोर्ड परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ
गलती 1
फिनॉल और ऐल्कोहॉल को एक ही पदार्थ समझना।
सही: फिनॉल में –OH सीधे बेंजीन वलय से जुड़ा होता है।
गलती 2
फिनॉल का सूत्र गलत लिखना।
सही: C₆H₅OH
गलती 3
ईथर का सूत्र R–OH लिख देना।
सही: R–O–R′
गलती 4
प्राथमिक ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण में सीधे अम्ल लिख देना और बीच का ऐल्डिहाइड भूल जाना।
सही: Primary alcohol → Aldehyde → Carboxylic acid
गलती 5
निर्जलीकरण को ऑक्सीकरण समझना।
सही: निर्जलीकरण में H₂O निकलता है।
गलती 6
फिनॉल को मजबूत अम्ल लिख देना।
सही: फिनॉल एक कमजोर अम्ल है।
गलती 7
विलियमसन अभिक्रिया में उत्पाद का सूत्र गलत बनाना।
सही: RONa + R′X → ROR′ + NaX
गलती 8
फिनॉल की अम्लीयता का कारण केवल “O–H बंध” लिख देना।
बेहतर उत्तर: फिनॉक्साइड आयन की अनुनादी स्थिरता फिनॉल की अम्लीयता का मुख्य कारण है।
★ 34. अध्याय की सबसे जरूरी बातें
★ R–OH → ऐल्कोहॉल
★ C₆H₅OH → फिनॉल
★ R–O–R′ → ईथर
★ प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण पहले ऐल्डिहाइड और फिर अम्ल देता है।
★ ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण ऐल्कीन देता है।
★ फिनॉल ऐल्कोहॉल से अधिक अम्लीय है।
★ फिनॉल की अम्लीयता का कारण फिनॉक्साइड आयन की अनुनादी स्थिरता है।
★ फिनॉल + Br₂ → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफिनॉल।
★ Williamson synthesis → ईथर निर्माण की महत्वपूर्ण विधि।
★ ऐल्कोहॉलों में हाइड्रोजन बंध उनके भौतिक गुणों को प्रभावित करता है।
★ मेथेनॉल का सूत्र CH₃OH और एथेनॉल का सूत्र C₂H₅OH है।
★ ईथर में O–H बंध नहीं होता।
★ 35. अंतिम 1-मिनट रिवीजन
ऐल्कोहॉल → R–OH
फिनॉल → C₆H₅OH
ईथर → R–O–R′
Primary → 1 carbon attached to OH carbon
Secondary → 2 carbons attached to OH carbon
Tertiary → 3 carbons attached to OH carbon
Alcohol + Na → Alkoxide + H₂
Primary alcohol → Aldehyde → Acid
Alcohol − H₂O → Alkene
Phenol + NaOH → Sodium phenoxide + H₂O
Phenol + Br₂ → 2,4,6-Tribromophenol
Alkoxide + Alkyl halide → Ether