अध्याय 9 — ऐमीन (Amines)
★ अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. अमीन (Amines)
अमोनिया (NH₃) के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं के स्थान पर ऐल्किल या एरिल समूह आने से प्राप्त कार्बनिक यौगिक अमीन कहलाते हैं।
2. प्राथमिक अमीन (Primary Amine)
जिस अमीन में नाइट्रोजन परमाणु केवल एक कार्बनिक समूह से जुड़ा हो, प्राथमिक अमीन कहलाता है।
सामान्य रूप: R–NH₂
3. द्वितीयक अमीन (Secondary Amine)
जिस अमीन में नाइट्रोजन परमाणु दो कार्बनिक समूहों से जुड़ा हो, द्वितीयक अमीन कहलाता है।
सामान्य रूप: R–NH–R′
4. तृतीयक अमीन (Tertiary Amine)
जिस अमीन में नाइट्रोजन परमाणु तीन कार्बनिक समूहों से जुड़ा हो, तृतीयक अमीन कहलाता है।
सामान्य रूप: R–N(R′)–R″
5. ऐलिफैटिक अमीन (Aliphatic Amine)
जिस अमीन में नाइट्रोजन ऐल्किल समूह से जुड़ा हो, ऐलिफैटिक अमीन कहलाता है।
6. एरोमैटिक अमीन (Aromatic Amine)
जिस अमीन में नाइट्रोजन सीधे एरोमैटिक वलय से जुड़ा हो, एरोमैटिक अमीन कहलाता है।
उदाहरण: C₆H₅NH₂ — ऐनिलीन
7. ऐनिलीन (Aniline)
ऐनिलीन वह एरोमैटिक प्राथमिक अमीन है जिसका सूत्र C₆H₅NH₂ है।
8. डायजोनीकरण (Diazotisation)
प्राथमिक एरोमैटिक अमीन को 0–5°C पर नाइट्रस अम्ल की उपस्थिति में डायजोनीयम लवण में बदलने की प्रक्रिया डायजोनीकरण कहलाती है।
9. डायजोनीयम लवण (Diazonium Salt)
ऐसे यौगिक जिनमें –N₂⁺ समूह उपस्थित होता है, डायजोनीयम लवण कहलाते हैं।
उदाहरण: C₆H₅N₂⁺Cl⁻
10. कार्बाइलअमीन अभिक्रिया (Carbylamine Reaction)
प्राथमिक अमीन को क्लोरोफॉर्म और ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ गर्म करने पर दुर्गंधयुक्त आइसोसाइनाइड बनने की अभिक्रिया कार्बाइलअमीन अभिक्रिया कहलाती है।
11. हिन्सबर्ग अभिकर्मक (Hinsberg Reagent)
बेंज़ीन सल्फोनिल क्लोराइड (C₆H₅SO₂Cl) को हिन्सबर्ग अभिकर्मक कहते हैं।
12. हिन्सबर्ग परीक्षण (Hinsberg Test)
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक अमीनों में अंतर करने के लिए बेंज़ीन सल्फोनिल क्लोराइड का उपयोग करने वाली विधि हिन्सबर्ग परीक्षण कहलाती है।
13. डायजोनीयम लवणों का युग्मन (Coupling Reaction)
डायजोनीयम लवण की फिनॉल या ऐरोमैटिक अमीन के साथ अभिक्रिया से रंगीन एज़ो यौगिक बनने की अभिक्रिया युग्मन अभिक्रिया कहलाती है।
14. एज़ो यौगिक (Azo Compound)
वे कार्बनिक यौगिक जिनमें –N=N– समूह उपस्थित होता है, एज़ो यौगिक कहलाते हैं।
15. एरिल डायजोनीयम लवण (Aryl Diazonium Salt)
ऐसे डायजोनीयम लवण जिनमें डायजोनीयम समूह एरिल समूह से जुड़ा होता है, एरिल डायजोनीयम लवण कहलाते हैं।
16. अमीनों की क्षारकीयता (Basicity of Amines)
अमीनों की वह प्रवृत्ति जिसमें नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म H⁺ को ग्रहण करता है, अमीनों की क्षारकीयता कहलाती है।
17. गैब्रियल फ्थैलिमाइड संश्लेषण
प्राथमिक ऐल्किल अमीनों की तैयारी के लिए फ्थैलिमाइड का उपयोग करने वाली विधि गैब्रियल फ्थैलिमाइड संश्लेषण कहलाती है।
18. हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया
अमाइड को Br₂ और KOH के साथ गर्म करने पर उससे एक कम कार्बन वाला प्राथमिक अमीन प्राप्त होता है। इसे हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया कहते हैं।
★ भाग 1 — अमीनों का वर्गीकरण (Classification of Amines)
परिभाषा
अमीनों का वर्गीकरण नाइट्रोजन परमाणु से जुड़े कार्बनिक समूहों की संख्या के आधार पर किया जाता है।
मुख्य बिंदु
प्राथमिक अमीन:
R–NH₂
द्वितीयक अमीन:
R–NH–R′
तृतीयक अमीन:
R–N(R′)–R″
चार उदाहरण
(1) CH₃NH₂ — प्राथमिक अमीन
(2) (CH₃)₂NH — द्वितीयक अमीन
(3) (CH₃)₃N — तृतीयक अमीन
(4) C₆H₅NH₂ — प्राथमिक एरोमैटिक अमीन
विशेषताएँ
★ वर्गीकरण नाइट्रोजन से जुड़े कार्बनिक समूहों की संख्या पर आधारित है।
★ NH₂, NH और N के आसपास उपस्थित समूह देखकर प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक अमीन पहचाने जा सकते हैं।
सीमा
केवल कार्बन की संख्या देखकर अमीन का वर्ग निर्धारित नहीं किया जाता।
★ भाग 2 — अमीनों का नामकरण (Nomenclature of Amines)
परिभाषा
अमीनों के नामकरण में ऐल्किल समूह के नाम के साथ अमीन शब्द का प्रयोग किया जाता है। एरोमैटिक प्राथमिक अमीन का सामान्य नाम ऐनिलीन है।
चार उदाहरण
(1) CH₃NH₂ — मेथिलअमीन
(2) C₂H₅NH₂ — एथिलअमीन
(3) (CH₃)₂NH — डाइमेथिलअमीन
(4) C₆H₅NH₂ — ऐनिलीन
मुख्य बिंदु
★ नाइट्रोजन पर जुड़े समूहों की संख्या से प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक वर्ग पहचाना जाता है।
★ भाग 3 — अमीनों की संरचना (Structure of Amines)
परिभाषा
अमीनों में नाइट्रोजन परमाणु सामान्यतः sp³ संकरण अवस्था में होता है तथा उसके पास एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित रहता है।
संरचना
अमोनिया की तरह अमीनों की आकृति लगभग त्रिकोणीय पिरामिडीय होती है।
R–NH₂
नाइट्रोजन के पास एक lone pair होता है।
मुख्य बिंदु
★ नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म अमीनों के अनेक रासायनिक गुणों के लिए जिम्मेदार है।
★ इसी के कारण अमीन H⁺ को ग्रहण कर सकते हैं।
चार अभिक्रियाएँ
(1)
CH₃NH₂ + HCl → CH₃NH₃⁺Cl⁻
(2)
C₂H₅NH₂ + HCl → C₂H₅NH₃⁺Cl⁻
(3)
C₆H₅NH₂ + HCl → C₆H₅NH₃⁺Cl⁻
(4)
(CH₃)₂NH + HCl → (CH₃)₂NH₂⁺Cl⁻
★ भाग 4 — अमीनों की क्षारकीय प्रकृति (Basic Nature of Amines)
परिभाषा
नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण अमीन H⁺ को ग्रहण कर सकते हैं। इसलिए अमीन क्षारकीय प्रकृति प्रदर्शित करते हैं।
मुख्य अभिक्रिया
R–NH₂ + H₂O ⇌ R–NH₃⁺ + OH⁻
चार उदाहरण
(1)
CH₃NH₂ + H₂O ⇌ CH₃NH₃⁺ + OH⁻
(2)
C₂H₅NH₂ + H₂O ⇌ C₂H₅NH₃⁺ + OH⁻
(3)
(CH₃)₂NH + H₂O ⇌ (CH₃)₂NH₂⁺ + OH⁻
(4)
C₆H₅NH₂ + H₂O ⇌ C₆H₅NH₃⁺ + OH⁻
विशेषताएँ
★ अमीनों में lone pair उपस्थित होता है।
★ अमीन H⁺ ग्रहण कर सकते हैं।
★ ऐलिफैटिक अमीन सामान्यतः ऐनिलीन से अधिक क्षारकीय होते हैं।
सीमा
अमीनों की क्षारकीयता पर ऐल्किल समूह, अनुनाद और विलायक का प्रभाव पड़ता है।
★ भाग 5 — अमीनों की क्षारकीयता को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Basicity)
मुख्य बिंदु
अमीन की क्षारकीयता मुख्यतः नाइट्रोजन के lone pair की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
1. +I प्रभाव
ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे नाइट्रोजन का lone pair H⁺ को ग्रहण करने के लिए अधिक उपलब्ध हो सकता है।
2. अनुनाद प्रभाव
ऐनिलीन में नाइट्रोजन का lone pair बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में भाग लेता है। इसलिए वह H⁺ ग्रहण करने के लिए कम उपलब्ध रहता है।
चार महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ
(1)
CH₃NH₂ + H⁺ → CH₃NH₃⁺
(2)
C₂H₅NH₂ + H⁺ → C₂H₅NH₃⁺
(3)
C₆H₅NH₂ + H⁺ → C₆H₅NH₃⁺
(4)
(CH₃)₂NH + H⁺ → (CH₃)₂NH₂⁺
विशेष बात
ऐनिलीन में lone pair बेंजीन वलय के साथ अनुनाद करता है, इसलिए उसकी क्षारकीयता कम होती है।
★ भाग 6 — अमीनों की तैयारी (Preparation of Amines)
अमीनों की तैयारी के लिए कई महत्वपूर्ण विधियाँ हैं।
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6.1 नाइट्रो यौगिकों का अपचयन
(Reduction of Nitro Compounds)
परिभाषा
नाइट्रो यौगिकों का अपचयन करने पर प्राथमिक अमीन प्राप्त होते हैं।
सामान्य अभिक्रिया
R–NO₂ + 6[H] → R–NH₂ + 2H₂O
चार उदाहरण
(1)
C₆H₅NO₂ + 6[H] → C₆H₅NH₂ + 2H₂O
(2)
CH₃NO₂ + 6[H] → CH₃NH₂ + 2H₂O
(3)
C₂H₅NO₂ + 6[H] → C₂H₅NH₂ + 2H₂O
(4)
C₆H₄(NO₂)₂ + 12[H] → C₆H₄(NH₂)₂ + 4H₂O
मुख्य बिंदु
★ Sn/HCl, Fe/HCl आदि अपचायक प्रयुक्त किए जा सकते हैं।
★ नाइट्रो यौगिक का –NO₂ समूह –NH₂ में बदल जाता है।
विशेषता
यह प्राथमिक अमीन तैयार करने की महत्वपूर्ण विधि है।
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★ 6.2 अमोनिया द्वारा ऐल्किल हैलाइड का अमोनीकरण
(Ammonolysis of Alkyl Halides)
परिभाषा
ऐल्किल हैलाइड की अमोनिया के साथ अभिक्रिया से अमीन प्राप्त होते हैं। इस प्रक्रिया को अमोनीकरण कहते हैं।
मुख्य अभिक्रिया
RX + 2NH₃ → RNH₂ + NH₄X
चार उदाहरण
(1)
CH₃Cl + 2NH₃ → CH₃NH₂ + NH₄Cl
(2)
C₂H₅Br + 2NH₃ → C₂H₅NH₂ + NH₄Br
(3)
C₃H₇Cl + 2NH₃ → C₃H₇NH₂ + NH₄Cl
(4)
C₄H₉Br + 2NH₃ → C₄H₉NH₂ + NH₄Br
सीमा
प्राथमिक अमीन के साथ आगे अभिक्रिया होने से द्वितीयक, तृतीयक अमीन और चतुर्थक अमोनियम लवण भी बन सकते हैं।
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★ 6.3 गैब्रियल फ्थैलिमाइड संश्लेषण
(Gabriel Phthalimide Synthesis)
परिभाषा
गैब्रियल फ्थैलिमाइड विधि द्वारा प्राथमिक ऐल्किल अमीन तैयार किए जाते हैं।
मुख्य अभिक्रियाएँ
चरण 1:
C₆H₄(CO)₂NH + KOH → C₆H₄(CO)₂NK + H₂O
चरण 2:
C₆H₄(CO)₂NK + R–X → C₆H₄(CO)₂NR + KX
चरण 3:
C₆H₄(CO)₂NR + H₂NNH₂ → R–NH₂ + फ्थैलहाइड्राजाइड
चार उदाहरण
(1) R = CH₃
(2) R = C₂H₅
(3) R = C₃H₇
(4) R = C₄H₉
विशेषता
★ प्राथमिक ऐल्किल अमीन प्राप्त करने की उपयोगी विधि।
सीमा
इस विधि से सामान्यतः प्राथमिक एरोमैटिक अमीन सीधे तैयार नहीं किए जाते।
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★ 6.4 हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया
(Hofmann Bromamide Reaction)
परिभाषा
अमाइड को Br₂ और KOH के साथ गर्म करने पर उससे एक कम कार्बन वाला प्राथमिक अमीन प्राप्त होता है। इसे हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया कहते हैं।
सामान्य अभिक्रिया
R–CONH₂ + Br₂ + 4KOH → R–NH₂ + 2KBr + K₂CO₃ + 2H₂O
चार उदाहरण
(1)
CH₃CONH₂ + Br₂ + 4KOH → CH₃NH₂ + 2KBr + K₂CO₃ + 2H₂O
(2)
C₂H₅CONH₂ + Br₂ + 4KOH → C₂H₅NH₂ + 2KBr + K₂CO₃ + 2H₂O
(3)
C₆H₅CONH₂ + Br₂ + 4KOH → C₆H₅NH₂ + 2KBr + K₂CO₃ + 2H₂O
(4)
C₃H₇CONH₂ + Br₂ + 4KOH → C₃H₇NH₂ + 2KBr + K₂CO₃ + 2H₂O
मुख्य बिंदु
★ प्राप्त अमीन में मूल अमाइड की तुलना में एक कार्बन कम होता है।
★ यह प्राथमिक अमीन तैयार करने की महत्वपूर्ण विधि है।
विशेषता
एक कार्बन कम होता है।
★ भाग 7 — अमीनों के भौतिक गुण (Physical Properties of Amines)
परिभाषा
अमीनों के भौतिक गुण उनके आण्विक द्रव्यमान, हाइड्रोजन बंध और अणुओं की संरचना पर निर्भर करते हैं।
मुख्य बिंदु
★ निम्न सदस्य जल में घुलनशील हो सकते हैं।
★ प्राथमिक और द्वितीयक अमीन हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं।
★ निम्न अमीनों में विशिष्ट गंध पाई जा सकती है।
चार उदाहरण
(1) CH₃NH₂
(2) C₂H₅NH₂
(3) (CH₃)₂NH
(4) C₆H₅NH₂
विशेषता
अमीनों में हाइड्रोजन बंध के कारण उनके क्वथनांक पर प्रभाव पड़ता है।
★ भाग 8 — अमीनों की रासायनिक अभिक्रियाएँ (Chemical Reactions of Amines)
8.1 अम्लों के साथ अभिक्रिया
(Reaction with Acids)
परिभाषा
अमीन अम्लों के साथ अभिक्रिया करके अमोनियम लवण बनाते हैं।
सामान्य अभिक्रिया
R–NH₂ + HCl → R–NH₃⁺Cl⁻
चार अभिक्रियाएँ
(1)
CH₃NH₂ + HCl → CH₃NH₃Cl
(2)
C₂H₅NH₂ + HCl → C₂H₅NH₃Cl
(3)
C₆H₅NH₂ + HCl → C₆H₅NH₃Cl
(4)
(CH₃)₂NH + HCl → (CH₃)₂NH₂Cl
मुख्य बिंदु
★ यह अमीनों की क्षारकीय प्रकृति को दर्शाती है।
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★ 8.2 ऐल्किलीकरण
(Alkylation)
परिभाषा
अमीन की ऐल्किल हैलाइड से अभिक्रिया द्वारा नाइट्रोजन पर ऐल्किल समूह जुड़ने की प्रक्रिया ऐल्किलीकरण कहलाती है।
चार अभिक्रियाएँ
(1)
CH₃NH₂ + CH₃Cl → (CH₃)₂NH + HCl
(2)
(CH₃)₂NH + CH₃Cl → (CH₃)₃N + HCl
(3)
(CH₃)₃N + CH₃Cl → [(CH₃)₄N]⁺Cl⁻
(4)
C₂H₅NH₂ + C₂H₅Br → (C₂H₅)₂NH + HBr
सीमा
आगे की अभिक्रियाओं के कारण मिश्रण में विभिन्न प्रकार के अमीन बन सकते हैं।
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★ 8.3 एसीलीकरण
(Acylation)
परिभाषा
प्राथमिक या द्वितीयक अमीन की अम्ल क्लोराइड या अम्ल ऐनहाइड्राइड के साथ अभिक्रिया से ऐमाइड बनने की प्रक्रिया एसीलीकरण कहलाती है।
चार अभिक्रियाएँ
(1)
CH₃NH₂ + CH₃COCl → CH₃NHCOCH₃ + HCl
(2)
C₂H₅NH₂ + CH₃COCl → C₂H₅NHCOCH₃ + HCl
(3)
C₆H₅NH₂ + CH₃COCl → C₆H₅NHCOCH₃ + HCl
(4)
2CH₃NH₂ + CH₃COCl → CH₃NHCOCH₃ + CH₃NH₃Cl
मुख्य बिंदु
★ प्राथमिक और द्वितीयक अमीन एसीलीकरण करते हैं।
★ तृतीयक अमीन में N–H बंध नहीं होता, इसलिए सामान्य एसीलीकरण नहीं होता।
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★ 8.4 कार्बाइलअमीन अभिक्रिया
(Carbylamine Reaction)
परिभाषा
प्राथमिक अमीन को CHCl₃ और ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ गर्म करने पर दुर्गंधयुक्त आइसोसाइनाइड बनता है।
सामान्य अभिक्रिया
R–NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → R–NC + 3KCl + 3H₂O
चार अभिक्रियाएँ
(1)
CH₃NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → CH₃NC + 3KCl + 3H₂O
(2)
C₂H₅NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → C₂H₅NC + 3KCl + 3H₂O
(3)
C₆H₅NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → C₆H₅NC + 3KCl + 3H₂O
(4)
C₃H₇NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → C₃H₇NC + 3KCl + 3H₂O
मुख्य बिंदु
★ यह केवल प्राथमिक अमीनों द्वारा दी जाती है।
★ इससे आइसोसाइनाइड प्राप्त होता है।
★ आइसोसाइनाइड की गंध अत्यंत अप्रिय होती है।
सीमा
द्वितीयक और तृतीयक अमीन यह अभिक्रिया नहीं देते।
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★ 8.5 नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया
(Reaction with Nitrous Acid)
प्राथमिक ऐलिफैटिक अमीन
प्राथमिक ऐलिफैटिक अमीन नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके अल्कोहॉल, नाइट्रोजन गैस और जल देते हैं।
चार उदाहरण
(1)
CH₃NH₂ + HNO₂ → CH₃OH + N₂ + H₂O
(2)
C₂H₅NH₂ + HNO₂ → C₂H₅OH + N₂ + H₂O
(3)
C₃H₇NH₂ + HNO₂ → C₃H₇OH + N₂ + H₂O
(4)
C₄H₉NH₂ + HNO₂ → C₄H₉OH + N₂ + H₂O
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★ 8.6 प्राथमिक एरोमैटिक अमीन का डायजोनीकरण
(Diazotisation)
परिभाषा
प्राथमिक एरोमैटिक अमीन को NaNO₂ और HCl की उपस्थिति में 0–5°C पर डायजोनीयम लवण में बदलने की प्रक्रिया डायजोनीकरण कहलाती है।
मुख्य अभिक्रिया
C₆H₅NH₂ + NaNO₂ + 2HCl → C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + NaCl + 2H₂O
चार उदाहरण
(1)
C₆H₅NH₂ → C₆H₅N₂⁺Cl⁻
(2)
o-CH₃C₆H₄NH₂ → o-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻
(3)
p-CH₃C₆H₄NH₂ → p-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻
(4)
p-ClC₆H₄NH₂ → p-ClC₆H₄N₂⁺Cl⁻
मुख्य बिंदु
★ तापमान 0–5°C रखा जाता है।
★ NaNO₂ + HCl से नाइट्रस अम्ल बनता है।
NaNO₂ + HCl → HNO₂ + NaCl
★ डायजोनीयम लवण सामान्यतः कम तापमान पर अधिक स्थिर रहता है।
★ भाग 9 — डायजोनीयम लवणों की महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ (Reactions of Diazonium Salts)
यह अध्याय का बहुत महत्वपूर्ण भाग है।
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9.1 सैंडमेयर अभिक्रिया
(Sandmeyer Reaction)
परिभाषा
डायजोनीयम लवण में उपस्थित –N₂⁺ समूह को CuCl, CuBr आदि की सहायता से Cl या Br द्वारा विस्थापित करने की अभिक्रिया सैंडमेयर अभिक्रिया कहलाती है।
चार अभिक्रियाएँ
(1)
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + CuCl → C₆H₅Cl + N₂
(2)
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + CuBr → C₆H₅Br + N₂
(3)
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + CuCN → C₆H₅CN + N₂
(4)
p-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻ + CuCl → p-CH₃C₆H₄Cl + N₂
मुख्य बिंदु
★ CuCl → क्लोरो यौगिक
★ CuBr → ब्रोमो यौगिक
★ CuCN → सायनो यौगिक
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★ 9.2 गैटरमैन अभिक्रिया
(Gattermann Reaction)
परिभाषा
डायजोनीयम लवण से Cu पाउडर तथा HCl या HBr की सहायता से क्रमशः क्लोरो या ब्रोमो बेंजीन बनाने की अभिक्रिया गैटरमैन अभिक्रिया कहलाती है।
चार अभिक्रियाएँ
(1)
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + HCl + Cu → C₆H₅Cl + N₂
(2)
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + HBr + Cu → C₆H₅Br + N₂
(3)
p-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻ + HCl + Cu → p-CH₃C₆H₄Cl + N₂
(4)
p-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻ + HBr + Cu → p-CH₃C₆H₄Br + N₂
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★ 9.3 आयोडोबेंजीन का निर्माण
(Preparation of Iodobenzene)
डायजोनीयम लवण की KI के साथ अभिक्रिया से आयोडोबेंजीन प्राप्त होता है।
चार अभिक्रियाएँ
(1)
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + KI → C₆H₅I + KCl + N₂
(2)
p-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻ + KI → p-CH₃C₆H₄I + KCl + N₂
(3)
o-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻ + KI → o-CH₃C₆H₄I + KCl + N₂
(4)
p-ClC₆H₄N₂⁺Cl⁻ + KI → p-ClC₆H₄I + KCl + N₂
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★ 9.4 फ्लुओरोबेंजीन का निर्माण
(Preparation of Fluorobenzene)
डायजोनीयम लवण से पहले डायजोनीयम टेट्राफ्लुओरोबोरेट बनाया जाता है। गर्म करने पर फ्लुओरोबेंजीन प्राप्त होता है।
अभिक्रियाएँ
(1)
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + HBF₄ → C₆H₅N₂⁺BF₄⁻ + HCl
(2)
C₆H₅N₂⁺BF₄⁻ → C₆H₅F + BF₃ + N₂
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★ 9.5 डायजोनीयम लवण से फिनॉल
(Preparation of Phenol)
डायजोनीयम लवण को गर्म जल के साथ गर्म करने पर फिनॉल प्राप्त होता है।
चार अभिक्रियाएँ
(1)
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + H₂O → C₆H₅OH + N₂ + HCl
(2)
p-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻ + H₂O → p-CH₃C₆H₄OH + N₂ + HCl
(3)
o-CH₃C₆H₄N₂⁺Cl⁻ + H₂O → o-CH₃C₆H₄OH + N₂ + HCl
(4)
p-ClC₆H₄N₂⁺Cl⁻ + H₂O → p-ClC₆H₄OH + N₂ + HCl
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★ 9.6 अपचयन द्वारा बेंजीन
(Reduction to Benzene)
डायजोनीयम लवण को हाइपोफॉस्फोरस अम्ल से अपचयित करने पर बेंजीन प्राप्त होता है।
मुख्य अभिक्रिया
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + H₃PO₂ + H₂O → C₆H₆ + N₂ + H₃PO₃ + HCl
चार उदाहरण
इसी प्रकार विभिन्न एरिल डायजोनीयम लवणों में –N₂⁺ समूह H से प्रतिस्थापित होकर संबंधित हाइड्रोकार्बन बनाता है।
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★ 9.7 युग्मन अभिक्रिया
(Coupling Reaction)
परिभाषा
डायजोनीयम लवण की फिनॉल या एरोमैटिक अमीन के साथ अभिक्रिया से रंगीन एज़ो यौगिक बनने की प्रक्रिया युग्मन अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + C₆H₅OH → एज़ो यौगिक
चार उदाहरण
(1) डायजोनीयम लवण + फिनॉल → एज़ो डाई
(2) डायजोनीयम लवण + β-नैफ्थॉल → नारंगी-लाल रंग का एज़ो यौगिक
(3) डायजोनीयम लवण + ऐनिलीन → एज़ो यौगिक
(4) प्रतिस्थापित डायजोनीयम लवण + फिनॉल → रंगीन एज़ो यौगिक
मुख्य बिंदु
★ एज़ो यौगिकों में –N=N– समूह होता है।
★ इनका उपयोग रंगों के निर्माण में किया जाता है।
★ भाग 10 — हिन्सबर्ग परीक्षण (Hinsberg Test)
परिभाषा
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक अमीनों में अंतर करने के लिए बेंज़ीन सल्फोनिल क्लोराइड का उपयोग किया जाता है। इसे हिन्सबर्ग परीक्षण कहते हैं।
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प्राथमिक अमीन
R–NH₂ + C₆H₅SO₂Cl → C₆H₅SO₂NHR + HCl
बना हुआ सल्फोनामाइड NaOH में घुल सकता है।
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द्वितीयक अमीन
R₂NH + C₆H₅SO₂Cl → C₆H₅SO₂NR₂ + HCl
यह सल्फोनामाइड NaOH में नहीं घुलता।
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तृतीयक अमीन
R₃N + C₆H₅SO₂Cl → सामान्यतः अभिक्रिया नहीं
मुख्य बिंदु
★ प्राथमिक अमीन → सल्फोनामाइड बनता है और क्षार में घुलता है।
★ द्वितीयक अमीन → सल्फोनामाइड बनता है लेकिन क्षार में नहीं घुलता।
★ तृतीयक अमीन → हिन्सबर्ग अभिकर्मक से सामान्यतः अभिक्रिया नहीं करता।
★ भाग 11 — ऐनिलीन की महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ (Reactions of Aniline)
11.1 ब्रोमीनीकरण
(Bromination)
ऐनिलीन में –NH₂ समूह बेंजीन वलय को सक्रिय करता है। इसलिए ब्रोमीन जल के साथ अभिक्रिया करने पर 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन बनता है।
मुख्य अभिक्रिया
C₆H₅NH₂ + 3Br₂ → 2,4,6-C₆H₂Br₃NH₂ + 3HBr
चार उदाहरण
(1)
ऐनिलीन + Br₂ → 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन
(2)
C₆H₅NH₂ + Br₂ → o-ब्रोमोऐनिलीन
(3)
C₆H₅NH₂ + Br₂ → p-ब्रोमोऐनिलीन
(4)
अधिक Br₂ की उपस्थिति में → 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन
विशेषता
ब्रोमीन जल के साथ सफेद अवक्षेप बनना ऐनिलीन की पहचान के लिए महत्वपूर्ण है।
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★ 11.2 एसीटिलीकरण
(Acetylation of Aniline)
ऐनिलीन की एसीटिक एनहाइड्राइड से अभिक्रिया पर एसीटैनिलाइड बनता है।
अभिक्रिया
C₆H₅NH₂ + (CH₃CO)₂O → C₆H₅NHCOCH₃ + CH₃COOH
मुख्य बिंदु
★ उत्पाद को एसीटैनिलाइड कहते हैं।
★ –NH₂ समूह की सक्रियता को नियंत्रित करने में यह परिवर्तन उपयोगी है।
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★ 11.3 नाइट्रीकरण
(Nitration of Aniline)
ऐनिलीन का सीधे अम्लीय नाइट्रीकरण करने पर –NH₂ समूह protonated होकर –NH₃⁺ बन सकता है, जिससे अभिविन्यास और उत्पादों का स्वरूप प्रभावित होता है।
इसलिए सामान्यतः ऐनिलीन को पहले एसीटिलीकरण करके एसीटैनिलाइड बनाया जाता है।
मुख्य अभिक्रिया
C₆H₅NHCOCH₃ + HNO₃ → p-NO₂C₆H₄NHCOCH₃ + H₂O
फिर:
p-NO₂C₆H₄NHCOCH₃ → p-NO₂C₆H₄NH₂
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★ 11.4 सल्फोनीकरण
(Sulphonation)
ऐनिलीन की सांद्र H₂SO₄ के साथ अभिक्रिया तथा गर्म करने पर सल्फानिलिक अम्ल प्राप्त किया जा सकता है।
मुख्य अभिक्रिया
C₆H₅NH₂ + H₂SO₄ → p-H₂NC₆H₄SO₃H
मुख्य बिंदु
★ उत्पाद को सल्फानिलिक अम्ल कहा जाता है।
★ यह अभिक्रिया एरोमैटिक अमीनों के व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण है।
★ भाग 12 — अमीनों की पहचान के महत्वपूर्ण परीक्षण
1. कार्बाइलअमीन परीक्षण
केवल प्राथमिक अमीन:
R–NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → R–NC + 3KCl + 3H₂O
2. हिन्सबर्ग परीक्षण
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक अमीनों में अंतर।
3. ब्रोमीन जल परीक्षण
ऐनिलीन + Br₂ → 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन
★ पूरे अध्याय की महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाएँ — एक जगह
★ अमीन की क्षारकीयता
R–NH₂ + H₂O ⇌ R–NH₃⁺ + OH⁻
★ अम्ल के साथ
R–NH₂ + HCl → R–NH₃⁺Cl⁻
★ अमोनीकरण
RX + 2NH₃ → RNH₂ + NH₄X
★ नाइट्रो यौगिक का अपचयन
R–NO₂ + 6[H] → R–NH₂ + 2H₂O
★ हॉफमैन ब्रोमामाइड
R–CONH₂ + Br₂ + 4KOH → R–NH₂ + 2KBr + K₂CO₃ + 2H₂O
★ कार्बाइलअमीन
R–NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → R–NC + 3KCl + 3H₂O
★ डायजोनीकरण
C₆H₅NH₂ + NaNO₂ + 2HCl → C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + NaCl + 2H₂O
★ सैंडमेयर
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + CuCl → C₆H₅Cl + N₂
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + CuBr → C₆H₅Br + N₂
★ आयोडोबेंजीन
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + KI → C₆H₅I + KCl + N₂
★ फिनॉल
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + H₂O → C₆H₅OH + N₂ + HCl
★ बेंजीन
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + H₃PO₂ + H₂O → C₆H₆ + N₂ + H₃PO₃ + HCl
★ ऐनिलीन का ब्रोमीनीकरण
C₆H₅NH₂ + 3Br₂ → 2,4,6-C₆H₂Br₃NH₂ + 3HBr
★★★ Quick Revision — पूरा अध्याय एक नजर में ★★★
अमीन की पहचान
R–NH₂ → प्राथमिक
R₂NH → द्वितीयक
R₃N → तृतीयक
सबसे जरूरी तैयारी विधियाँ
नाइट्रो यौगिक → अपचयन → अमीन
RX + NH₃ → अमीन
गैब्रियल → प्राथमिक ऐल्किल अमीन
हॉफमैन ब्रोमामाइड → एक कार्बन कम वाला अमीन
सबसे जरूरी अभिक्रियाएँ
अमीन + HCl → अमोनियम लवण
प्राथमिक अमीन + CHCl₃ + KOH → आइसोसाइनाइड
प्राथमिक एरोमैटिक अमीन + NaNO₂/HCl, 0–5°C → डायजोनीयम लवण
डायजोनीयम लवण से
CuCl → Ar–Cl
CuBr → Ar–Br
KI → Ar–I
H₂O → Ar–OH
H₃PO₂ → Ar–H
युग्मन → एज़ो यौगिक
★ बोर्ड परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ
गलती 1
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक अमीन को कार्बन की संख्या से पहचानना।
सही तरीका: नाइट्रोजन से जुड़े कार्बनिक समूहों की संख्या देखो।
गलती 2
कार्बाइलअमीन अभिक्रिया सभी अमीनों की लिख देना।
सही: केवल प्राथमिक अमीन।
गलती 3
डायजोनीकरण का तापमान भूल जाना।
सही: 0–5°C
गलती 4
सैंडमेयर और गैटरमैन को एक ही मान लेना।
सैंडमेयर: CuCl/CuBr/CuCN
गैटरमैन: Cu + HCl/HBr
गलती 5
हॉफमैन ब्रोमामाइड में कार्बन की संख्या न घटाना।
याद रखें:
अमाइड → एक कार्बन कम → प्राथमिक अमीन
गलती 6
ऐनिलीन को सामान्य ऐलिफैटिक अमीन की तरह लिखना।
ऐनिलीन में –NH₂ समूह बेंजीन वलय के साथ अनुनाद करता है।
गलती 7
स्पेक्ट्रम या reaction में reagent गलत लिखना।
रासायनिक समीकरण में अभिकारक, तापमान और catalyst/reagent जहाँ आवश्यक हो, जरूर लिखें।
★ Self Test — खुद को जाँचें
प्रश्न 1
प्राथमिक अमीन का सामान्य सूत्र क्या है?
प्रश्न 2
ऐनिलीन का सूत्र क्या है?
प्रश्न 3
कार्बाइलअमीन अभिक्रिया कौन-से अमीन देते हैं?
प्रश्न 4
हिन्सबर्ग अभिकर्मक क्या है?
प्रश्न 5
हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया में कार्बन की संख्या पर क्या प्रभाव पड़ता है?
प्रश्न 6
डायजोनीकरण के लिए तापमान कितना रखा जाता है?
प्रश्न 7
NaNO₂ और HCl से कौन-सा अभिकर्मक बनता है?
प्रश्न 8
डायजोनीयम लवण को CuCl के साथ गर्म करने पर क्या बनता है?
प्रश्न 9
KI के साथ डायजोनीयम लवण की अभिक्रिया से कौन-सा यौगिक बनता है?
प्रश्न 10
डायजोनीयम लवण को गर्म जल से अभिक्रिया कराने पर क्या बनता है?
प्रश्न 11
अमीनों की क्षारकीयता का मुख्य कारण क्या है?
प्रश्न 12
ऐनिलीन की Br₂ जल के साथ अभिक्रिया का उत्पाद क्या है?
प्रश्न 13
गैब्रियल संश्लेषण से किस प्रकार के अमीन बनाए जाते हैं?
प्रश्न 14
सैंडमेयर अभिक्रिया में CuCN का उपयोग किस समूह को लाने के लिए किया जाता है?
प्रश्न 15
एज़ो यौगिक में कौन-सा समूह उपस्थित होता है?
★ Self Test — उत्तर
1. R–NH₂
2. C₆H₅NH₂
3. प्राथमिक अमीन
4. C₆H₅SO₂Cl
5. एक कार्बन कम हो जाता है।
6. 0–5°C
7. HNO₂
8. क्लोरोबेंजीन या संबंधित एरिल क्लोराइड
9. आयोडोबेंजीन या संबंधित एरिल आयोडाइड
10. फिनॉल
11. नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म
12. 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन
13. प्राथमिक ऐल्किल अमीन
14. –CN समूह
15. –N=N–
★ Extra Important — परीक्षा में बहुत काम आने वाली बातें
★ 1. यह चार जोड़ी पक्की याद रखें
प्राथमिक अमीन → कार्बाइलअमीन
प्राथमिक एरोमैटिक अमीन → डायजोनीयम लवण
डायजोनीयम + CuCl → Ar–Cl
डायजोनीयम + KI → Ar–I
—
★ 2. यह तापमान कभी न भूलें
डायजोनीकरण → 0–5°C
—
★ 3. हॉफमैन ब्रोमामाइड की पहचान
Amide → Amine
और
एक carbon कम
—
★ 4. ऐनिलीन की पहचान
C₆H₅NH₂ + 3Br₂ → 2,4,6-C₆H₂Br₃NH₂ + 3HBr
सफेद अवक्षेप बनता है।
—
★ 5. डायजोनीयम लवण को याद रखने की ट्रिक
Cl → CuCl
Br → CuBr
I → KI
OH → H₂O
H → H₃PO₂
★ अंतिम 1-मिनट रिवीजन
अमीन = NH₃ के H का ऐल्किल/एरिल समूह से प्रतिस्थापन
R–NH₂ = प्राथमिक
R₂NH = द्वितीयक
R₃N = तृतीयक
R–NO₂ → R–NH₂ = अपचयन
R–CONH₂ → R–NH₂ = हॉफमैन
R–NH₂ + CHCl₃ + KOH → R–NC = कार्बाइलअमीन
C₆H₅NH₂ + NaNO₂ + HCl, 0–5°C → C₆H₅N₂⁺Cl⁻
ArN₂⁺Cl⁻ + CuCl → ArCl
ArN₂⁺Cl⁻ + CuBr → ArBr
ArN₂⁺Cl⁻ + KI → ArI
ArN₂⁺Cl⁻ + H₂O → ArOH
ArN₂⁺Cl⁻ + H₃PO₂ → ArH
डायजोनीयम लवण + फिनॉल → एज़ो यौगिक
एज़ो समूह = –N=N–
★ अध्याय का अंतिम सार
अमीन नाइट्रोजन युक्त महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक हैं। इनके अध्ययन में वर्गीकरण, नामकरण, क्षारकीयता, तैयारी की विधियाँ, रासायनिक अभिक्रियाएँ, ऐनिलीन, डायजोनीकरण और डायजोनीयम लवणों की अभिक्रियाएँ सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं।
इस अध्याय में केवल अभिक्रिया का नाम याद करना पर्याप्त नहीं है। परीक्षा में सही reactant + सही reagent + सही condition + सही product लिखना बहुत महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से ये reactions अच्छी तरह तैयार करें:
हॉफमैन ब्रोमामाइड
कार्बाइलअमीन
हिन्सबर्ग परीक्षण
डायजोनीकरण
सैंडमेयर
गैटरमैन
डायजोनीयम लवण की प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ
युग्मन अभिक्रिया