अध्याय 1 — वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

Electric Charges and Fields Class 12 – इस अध्याय में विद्युत आवेश तथा क्षेत्र के महत्वपूर्ण Notes, MCQ और Important Questions दिए गए हैं।

शुरुआत में जानने योग्य छोटी-छोटी परिभाषाएँ

अध्याय को आसानी से समझने के लिए पहले कुछ ऐसी छोटी परिभाषाएँ जान लेते हैं, जिनका प्रयोग आगे पूरे अध्याय में बार-बार होगा।

1. वैद्युत आवेश (Electric Charge)

पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वह विद्युत आकर्षण या प्रतिकर्षण का अनुभव करता है, वैद्युत आवेश कहलाता है।

इसे q या Q से दर्शाते हैं।

SI मात्रक — कूलॉम (C)

—

2. धनावेश और ऋणावेश

जिस आवेश की प्रकृति धनात्मक हो उसे धनावेश और जिसकी प्रकृति ऋणात्मक हो उसे ऋणावेश कहते हैं।

धनावेश = +

ऋणावेश = −

समान प्रकृति के आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा विपरीत प्रकृति के आवेश आकर्षित करते हैं।

—

3. आवेश का क्वांटीकरण

किसी वस्तु पर उपस्थित कुल आवेश हमेशा मूल आवेश e के पूर्णांक गुणज के रूप में होता है।

q = ne

जहाँ n = पूर्णांक और e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C

—

4. आवेश संरक्षण का नियम

किसी पृथक निकाय में कुल वैद्युत आवेश न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। केवल एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित किया जा सकता है।

—

5. कूलॉम का नियम

दो स्थिर बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाला वैद्युत बल उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

—

6. वैद्युत क्षेत्र (Electric Field)

किसी आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें कोई अन्य आवेश वैद्युत बल का अनुभव करता है, वैद्युत क्षेत्र कहलाता है।

इसे E से दर्शाते हैं।

—

7. वैद्युत क्षेत्र तीव्रता

किसी बिन्दु पर रखे एकांक धनात्मक परीक्षण आवेश पर लगने वाला वैद्युत बल उस बिन्दु की वैद्युत क्षेत्र तीव्रता कहलाता है।

E = F/q₀

—

8. वैद्युत क्षेत्र रेखाएँ

वैद्युत क्षेत्र में खींची गई काल्पनिक रेखाएँ, जिनके किसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्शरेखा उस बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की दिशा बताती है, वैद्युत क्षेत्र रेखाएँ कहलाती हैं।

—

9. वैद्युत द्विध्रुव

समान परिमाण के दो विपरीत प्रकृति के आवेश, जो बहुत कम दूरी पर स्थित हों, वैद्युत द्विध्रुव कहलाते हैं।

—

10. वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण

द्विध्रुव के किसी एक आवेश के परिमाण और दोनों आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।

p = q × 2a

SI मात्रक — C m

—

11. वैद्युत फ्लक्स

किसी पृष्ठ से होकर गुजरने वाले वैद्युत क्षेत्र की मात्रा को वैद्युत फ्लक्स कहते हैं।

इसे ΦE से दर्शाते हैं।

—

12. गॉस का नियम

किसी बन्द पृष्ठ से होकर गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ के भीतर स्थित कुल आवेश को ε₀ से भाग देने के बराबर होता है।

ΦE = Q/ε₀

1. वैद्युत आवेश के गुण

वैद्युत आवेश के मुख्य गुण हैं—

★ आवेश संरक्षण

कुल आवेश संरक्षित रहता है।

★ आवेश का क्वांटीकरण

q = ne

★ आवेशों का योगात्मक गुण

किसी निकाय का कुल आवेश उसके सभी आवेशों के बीजीय योग के बराबर होता है।

Q = q₁ + q₂ + q₃ + …

★ आवेशों में आकर्षण और प्रतिकर्षण

समान आवेश → प्रतिकर्षण

विपरीत आवेश → आकर्षण

तीन छोटे उदाहरण

(i) +q और +q एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करेंगे।

(ii) +q और −q एक-दूसरे को आकर्षित करेंगे।

(iii) दो वस्तुओं को रगड़ने पर आवेश स्थानांतरित हो सकता है, लेकिन कुल आवेश संरक्षित रहता है।

आसान तरीके से समझो

आवेश को पदार्थ का ऐसा गुण समझो जिसके कारण वस्तुएँ विद्युत बल का अनुभव करती हैं। आवेश अकेले दिखाई देने वाली कोई वस्तु नहीं, बल्कि पदार्थ का एक भौतिक गुण है।

★ मुख्य बिंदु

* आवेश अदिश राशि है।
* आवेश का SI मात्रक कूलॉम है।
* आवेश संरक्षित रहता है।
* q = ne आवेश के क्वांटीकरण को दर्शाता है।
* समान आवेश प्रतिकर्षित और विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।

2. आवेश का क्वांटीकरण

व्युत्पत्ति / संबंध

किसी वस्तु पर कुल आवेश q हो।

यदि उसमें n अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन या मूल आवेश उपस्थित हों, तो

q = ne

जहाँ

e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C

इसलिए किसी वस्तु पर आवेश:

★ q = ne

यहाँ n का मान 1, 2, 3, 4… जैसा पूर्णांक होगा।

तीन छोटे उदाहरण

(i) n = 5 हो तो q = 5e।

(ii) किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता हो तो वस्तु ऋणावेशित होगी।

(iii) इलेक्ट्रॉनों की कमी होने पर वस्तु धनावेशित हो सकती है।

आसान तरीके से समझो

आवेश किसी भी मनमानी मात्रा में नहीं मिलता। वह मूल आवेश e के पूर्णांक गुणज में पाया जाता है।

★ मुख्य बिंदु

q = ne

e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C

★ चार न्यूमेरिकल

प्रश्न 1: n = 5 हो तो आवेश ज्ञात करें।

q = ne

= 5 × 1.6 × 10⁻¹⁹

= 8 × 10⁻¹⁹ C

उत्तर: 8 × 10⁻¹⁹ C

प्रश्न 2: 10 इलेक्ट्रॉनों का कुल आवेश कितना होगा?

q = −ne

= −10 × 1.6 × 10⁻¹⁹

= −1.6 × 10⁻¹⁸ C

उत्तर: −1.6 × 10⁻¹⁸ C

प्रश्न 3: q = 3.2 × 10⁻¹⁸ C हो तो n ज्ञात करें।

n = q/e

= 3.2 × 10⁻¹⁸ / 1.6 × 10⁻¹⁹

= 20

उत्तर: 20

प्रश्न 4: 1.6 × 10⁻¹⁷ C आवेश के लिए n ज्ञात करें।

n = 1.6 × 10⁻¹⁷ / 1.6 × 10⁻¹⁹

= 100

उत्तर: 100

3. कूलॉम का नियम

परिभाषा

दो स्थिर बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाला वैद्युत बल उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

मान लें दो आवेश q₁ और q₂ के बीच दूरी r है।

तब

F ∝ q₁q₂

और

F ∝ 1/r²

दोनों को मिलाने पर:

F ∝ q₁q₂/r²

अतः

★ F = 1/4πε₀ × q₁q₂/r²

निर्वात में:

F = kq₁q₂/r²

जहाँ

k = 1/4πε₀

और

k ≈ 9 × 10⁹ N m² C⁻²

माध्यम में

यदि माध्यम का परावैद्युतांक K हो:

★ F = 1/4πε₀K × q₁q₂/r²

अर्थात

Fmedium = Fvacuum/K

तीन छोटे उदाहरण

(i) दूरी दोगुनी करने पर बल 1/4 हो जाएगा।

(ii) किसी एक आवेश को दोगुना करने पर बल दोगुना होगा।

(iii) दोनों आवेशों को दोगुना करने पर बल चार गुना होगा।

आसान तरीके से समझो

कूलॉम का नियम बताता है कि दो आवेश एक-दूसरे को कितनी ताकत से खींचेंगे या धकेलेंगे। आवेश जितने बड़े होंगे, बल उतना अधिक होगा और दूरी बढ़ने पर बल तेजी से घटेगा।

★ मुख्य बिंदु

F = kq₁q₂/r²

k = 9 × 10⁹ N m² C⁻²

बल की दिशा दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा के अनुदिश होती है।

★ चार न्यूमेरिकल

प्रश्न 1: q₁ = 2 μC, q₂ = 3 μC और r = 1 m।

F = 9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶ × 3 × 10⁻⁶

= 54 × 10⁻³

= 0.054 N

उत्तर: 0.054 N

प्रश्न 2: q₁ = 1 μC, q₂ = 1 μC और r = 0.1 m।

F = 9 × 10⁹ × 10⁻¹² / 0.01

= 0.9 N

उत्तर: 0.9 N

प्रश्न 3: यदि दूरी 2 m से 4 m कर दी जाए, तो नया बल क्या होगा?

F ∝ 1/r²

F₂/F₁ = (2/4)²

= 1/4

उत्तर: नया बल 1/4 होगा।

प्रश्न 4: q₁ = 4 μC, q₂ = 2 μC और r = 2 m।

F = 9 × 10⁹ × 4 × 10⁻⁶ × 2 × 10⁻⁶ / 4

= 0.018 N

उत्तर: 0.018 N

4. वैद्युत क्षेत्र

परिभाषा

किसी आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें कोई अन्य आवेश वैद्युत बल का अनुभव करता है, वैद्युत क्षेत्र कहलाता है।

यदि परीक्षण आवेश q₀ पर बल F लगे, तो:

★ E = F/q₀

अतः

F = q₀E

SI मात्रक

N/C

इसे V/m भी लिखा जा सकता है।

बिन्दु आवेश के कारण वैद्युत क्षेत्र

कूलॉम के नियम से:

F = 1/4πε₀ × Qq₀/r²

अब

E = F/q₀

अतः

★ E = 1/4πε₀ × Q/r²

तीन छोटे उदाहरण

(i) धनावेश के कारण क्षेत्र की दिशा आवेश से बाहर की ओर होती है।

(ii) ऋणावेश के कारण क्षेत्र की दिशा आवेश की ओर होती है।

(iii) आवेश से दूरी बढ़ाने पर E घटता है।

आसान तरीके से समझो

किसी आवेश के पास दूसरा आवेश रखने से पहले ही उस स्थान पर विद्युत प्रभाव मौजूद होता है। उसी प्रभाव को वैद्युत क्षेत्र कहते हैं।

★ मुख्य बिंदु

E = F/q₀

बिन्दु आवेश के लिए:

E = kQ/r²

★ चार न्यूमेरिकल

प्रश्न 1: Q = 2 μC और r = 1 m।

E = 9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁶

= 1.8 × 10⁴ N/C

उत्तर: 1.8 × 10⁴ N/C

प्रश्न 2: Q = 5 μC और r = 2 m।

E = 9 × 10⁹ × 5 × 10⁻⁶/4

= 1.125 × 10⁴ N/C

उत्तर: 1.125 × 10⁴ N/C

प्रश्न 3: Q = 1 μC और r = 0.1 m।

E = 9 × 10⁵ N/C

उत्तर: 9 × 10⁵ N/C

प्रश्न 4: यदि दूरी दोगुनी कर दी जाए:

E₂ = E₁/4

उत्तर: वैद्युत क्षेत्र एक-चौथाई हो जाएगा।

5. वैद्युत क्षेत्र रेखाएँ

परिभाषा

वैद्युत क्षेत्र में खींची गई काल्पनिक रेखाएँ, जिनकी किसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्शरेखा उस बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की दिशा बताती है, वैद्युत क्षेत्र रेखाएँ कहलाती हैं।

मुख्य गुण

★ क्षेत्र रेखाएँ धनावेश से निकलती हैं और ऋणावेश पर समाप्त होती हैं।

★ दो वैद्युत क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काट नहीं सकतीं।

★ जहाँ क्षेत्र रेखाएँ अधिक पास-पास हों, वहाँ क्षेत्र अधिक प्रबल होता है।

★ जहाँ क्षेत्र रेखाएँ दूर-दूर हों, वहाँ क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर होता है।

★ क्षेत्र रेखाओं की स्पर्शरेखा उस बिन्दु पर E की दिशा बताती है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) एक अकेले धनावेश की क्षेत्र रेखाएँ बाहर की ओर होती हैं।

(ii) अकेले ऋणावेश की क्षेत्र रेखाएँ अंदर की ओर होती हैं।

(iii) समान क्षेत्र में क्षेत्र रेखाएँ समानांतर और समान दूरी पर होती हैं।

आसान तरीके से समझो

क्षेत्र रेखाएँ वास्तव में कोई भौतिक तार या रेखा नहीं हैं। ये केवल वैद्युत क्षेत्र को चित्र के माध्यम से समझने का तरीका हैं।

★ मुख्य बिंदु

क्षेत्र रेखाओं की संख्या क्षेत्र की तीव्रता का प्रत्यक्ष मात्रात्मक माप नहीं है; चित्र में उनकी सघनता से क्षेत्र की अपेक्षाकृत प्रबलता समझी जाती है।

6. अध्यारोपण का सिद्धान्त

परिभाषा

किसी बिन्दु पर अनेक आवेशों के कारण उत्पन्न परिणामी वैद्युत क्षेत्र, प्रत्येक आवेश द्वारा अलग-अलग उत्पन्न वैद्युत क्षेत्रों का सदिश योग होता है।

यदि E₁, E₂ और E₃ अलग-अलग आवेशों के कारण क्षेत्र हैं:

★ E = E₁ + E₂ + E₃ + …

इसी प्रकार कुल बल:

★ F = F₁ + F₂ + F₃ + …

तीन छोटे उदाहरण

(i) दो आवेशों के क्षेत्र की दिशा समान हो तो वे जुड़ते हैं।

(ii) विपरीत दिशा के क्षेत्र एक-दूसरे को घटा सकते हैं।

(iii) अनेक आवेशों के लिए सदिश योग करना पड़ता है।

आसान तरीके से समझो

हर आवेश अपना अलग वैद्युत क्षेत्र बनाता है। किसी स्थान पर मौजूद कुल क्षेत्र इन सभी क्षेत्रों का संयुक्त प्रभाव होता है।

★ मुख्य बिंदु

अध्यारोपण में साधारण जोड़ नहीं, बल्कि सदिश जोड़ किया जाता है।

7. वैद्युत द्विध्रुव

परिभाषा

समान परिमाण के दो विपरीत आवेश +q और −q, जिनके बीच बहुत कम दूरी 2a हो, वैद्युत द्विध्रुव कहलाते हैं।

वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण

★ p = q × 2a

अर्थात

p = 2aq

SI मात्रक:

C m

दिशा

द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा −q से +q की ओर होती है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) +q और −q की समान मात्रा द्विध्रुव बनाती है।

(ii) आवेश बढ़ाने पर p बढ़ता है।

(iii) दोनों आवेशों के बीच दूरी बढ़ाने पर p बढ़ता है।

आसान तरीके से समझो

द्विध्रुव को दो बराबर लेकिन विपरीत आवेशों की जोड़ी समझें। इसकी विद्युत प्रकृति को एक संख्या p से बताया जाता है।

★ चार न्यूमेरिकल

प्रश्न 1: q = 2 C और 2a = 3 m।

p = q × 2a

= 2 × 3

= 6 C m

उत्तर: 6 C m

प्रश्न 2: q = 2 × 10⁻⁶ C और 2a = 0.1 m।

p = 2 × 10⁻⁷ C m

उत्तर: 2 × 10⁻⁷ C m

प्रश्न 3: p = 4 × 10⁻⁶ C m और 2a = 0.2 m।

q = p/2a

= 4 × 10⁻⁶/0.2

= 2 × 10⁻⁵ C

उत्तर: 2 × 10⁻⁵ C

प्रश्न 4: q = 5 μC और 2a = 4 cm।

p = 5 × 10⁻⁶ × 4 × 10⁻²

= 2 × 10⁻⁷ C m

उत्तर: 2 × 10⁻⁷ C m

8. अक्षीय स्थिति में द्विध्रुव का वैद्युत क्षेत्र

व्युत्पत्ति

मान लें द्विध्रुव के आवेश +q और −q के बीच दूरी 2a है।

द्विध्रुव के केन्द्र O से अक्षीय बिन्दु P की दूरी r है।

+q से P की दूरी:

r − a

−q से P की दूरी:

r + a

+q के कारण क्षेत्र:

E₊ = kq/(r − a)²

−q के कारण क्षेत्र:

E₋ = kq/(r + a)²

दोनों क्षेत्रों की दिशाएँ विपरीत होंगी।

अतः परिणामी क्षेत्र:

E = kq[1/(r − a)² − 1/(r + a)²]

सरलीकरण करने पर:

E = kq × 4ar/(r² − a²)²

क्योंकि

p = 2aq

अतः

★ E = 1/4πε₀ × 2pr/(r² − a²)²

यदि r बहुत बड़ा हो अर्थात r ≫ a:

★ E = 1/4πε₀ × 2p/r³

तीन छोटे उदाहरण

(i) अक्षीय बिन्दु द्विध्रुव की सीध में होता है।

(ii) दूर बिन्दु के लिए E ∝ 1/r³।

(iii) p बढ़ाने पर अक्षीय क्षेत्र बढ़ता है।

आसान तरीके से समझो

द्विध्रुव के दोनों आवेश अलग-अलग क्षेत्र बनाते हैं। अक्षीय बिन्दु पर दोनों क्षेत्रों की दिशाएँ विपरीत होती हैं, इसलिए उनका अंतर लिया जाता है।

★ मुख्य बिंदु

सामान्य सूत्र:

E = k × 2pr/(r² − a²)²

दूर बिन्दु के लिए:

E = 2kp/r³

9. विषुवतीय स्थिति में द्विध्रुव का वैद्युत क्षेत्र

व्युत्पत्ति

द्विध्रुव के केन्द्र O से P की दूरी r है और P द्विध्रुव की विषुवतीय रेखा पर स्थित है।

प्रत्येक आवेश से P की दूरी:

√(r² + a²)

प्रत्येक आवेश के कारण क्षेत्र:

E₀ = kq/(r² + a²)

दोनों क्षेत्रों के क्षैतिज घटक आपस में जुड़ते हैं और परिणामी क्षेत्र द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा के विपरीत होता है।

सरलीकरण के बाद:

★ E = kp/(r² + a²)³ᐟ²

यदि r ≫ a:

★ E = kp/r³

अर्थात

E = 1/4πε₀ × p/r³

दिशा p के विपरीत होती है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) विषुवतीय बिन्दु द्विध्रुव के मध्य से खींची गई लम्ब रेखा पर होता है।

(ii) दूर बिन्दु के लिए E ∝ 1/r³।

(iii) विषुवतीय क्षेत्र की दिशा p के विपरीत होती है।

★ मुख्य बिंदु

अक्षीय स्थिति:

Eaxial = 2kp/r³

विषुवतीय स्थिति:

Eequatorial = kp/r³

अतः समान दूरी पर:

Eaxial = 2Eequatorial

10. वैद्युत क्षेत्र में द्विध्रुव पर आघूर्ण

व्युत्पत्ति

मान लें द्विध्रुव को समान वैद्युत क्षेत्र E में θ कोण पर रखा गया है।

दोनों आवेशों पर बल:

F = qE

दोनों बल परिमाण में समान लेकिन दिशाओं में विपरीत होते हैं। इसलिए वे एक बल-युग्म बनाते हैं।

इस बल-युग्म का आघूर्ण:

τ = F × 2a sinθ

F = qE रखने पर:

τ = qE × 2a sinθ

लेकिन

p = q × 2a

अतः

★ τ = pE sinθ

अधिकतम आघूर्ण

θ = 90° पर:

★ τmax = pE

तीन छोटे उदाहरण

(i) θ = 0° पर τ = 0।

(ii) θ = 90° पर τ अधिकतम।

(iii) p बढ़ने पर आघूर्ण बढ़ता है।

आसान तरीके से समझो

विद्युत क्षेत्र द्विध्रुव को अपनी दिशा में घुमाने की कोशिश करता है। यही घुमाने वाला प्रभाव आघूर्ण है।

★ चार न्यूमेरिकल

प्रश्न 1: p = 2 C m, E = 3 N/C और θ = 90°।

τ = pE

= 6 N m

उत्तर: 6 N m

प्रश्न 2: p = 4 C m, E = 2 N/C और θ = 30°।

τ = 4 × 2 × 1/2

= 4 N m

उत्तर: 4 N m

प्रश्न 3: θ = 0° होने पर:

τ = pE sin0°

= 0

उत्तर: 0 N m

प्रश्न 4: p = 5 × 10⁻⁶ C m, E = 2 × 10⁵ N/C।

τmax = pE

= 1 N m

उत्तर: 1 N m

11. वैद्युत फ्लक्स

परिभाषा

किसी सतह से होकर गुजरने वाले वैद्युत क्षेत्र के प्रभाव की मात्रा को वैद्युत फ्लक्स कहते हैं।

यदि समान वैद्युत क्षेत्र E में क्षेत्रफल A की सतह हो और क्षेत्रफल सदिश तथा E के बीच θ कोण हो:

★ ΦE = EA cosθ

विशेष स्थितियाँ

θ = 0°:

ΦE = EA

θ = 90°:

ΦE = 0

तीन छोटे उदाहरण

(i) क्षेत्रफल सदिश और E समान दिशा में हों तो फ्लक्स अधिकतम।

(ii) दोनों परस्पर लम्बवत हों तो फ्लक्स शून्य।

(iii) क्षेत्रफल बढ़ाने पर फ्लक्स बढ़ता है।

आसान तरीके से समझो

वैद्युत फ्लक्स को ऐसे समझें जैसे किसी सतह से होकर वैद्युत क्षेत्र कितना गुजर रहा है। सतह की दिशा बदलने पर फ्लक्स भी बदल जाता है।

★ मुख्य बिंदु

ΦE = EA cosθ

SI मात्रक:

N m²/C

★ चार न्यूमेरिकल

प्रश्न 1: E = 10 N/C, A = 2 m² और θ = 0°।

Φ = EA

= 20 N m²/C

उत्तर: 20 N m²/C

प्रश्न 2: E = 5 N/C, A = 4 m² और θ = 60°।

Φ = 5 × 4 × 1/2

= 10 N m²/C

उत्तर: 10 N m²/C

प्रश्न 3: θ = 90° हो।

Φ = EA cos90°

= 0

उत्तर: 0

प्रश्न 4: E = 20 N/C, A = 0.5 m², θ = 60°।

Φ = 20 × 0.5 × 1/2

= 5 N m²/C

उत्तर: 5 N m²/C

12. गॉस का नियम

परिभाषा

किसी बन्द पृष्ठ से होकर गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ के भीतर उपस्थित कुल आवेश को ε₀ से भाग देने के बराबर होता है।

★ ΦE = Qenclosed/ε₀

या

★ ∮E·dA = Qenclosed/ε₀

जहाँ ε₀ निर्वात की वैद्युतशीलता है।

ε₀ = 8.85 × 10⁻¹² C² N⁻¹ m⁻²

तीन छोटे उदाहरण

(i) बन्द पृष्ठ के अंदर आवेश है तो फ्लक्स प्राप्त होगा।

(ii) बाहर का आवेश कुल बन्द पृष्ठ के फ्लक्स में शुद्ध योगदान नहीं देता।

(iii) बन्द पृष्ठ के अंदर कुल आवेश शून्य हो तो कुल फ्लक्स शून्य होगा।

आसान तरीके से समझो

गॉस का नियम किसी बन्द सतह से निकलने वाले कुल वैद्युत फ्लक्स को उस सतह के अंदर मौजूद कुल आवेश से जोड़ता है।

★ मुख्य बिंदु

Φ = Q/ε₀

गॉस का नियम विशेष रूप से सममिति वाले मामलों में बहुत उपयोगी है।

13. अनन्त लम्बे सीधे आवेशित तार के कारण वैद्युत क्षेत्र

व्युत्पत्ति

मान लें अनन्त लम्बे तार पर रैखिक आवेश घनत्व λ है।

तार के चारों ओर त्रिज्या r और लंबाई l का बेलनाकार गॉस पृष्ठ लेते हैं।

बेलन का वक्र पृष्ठ क्षेत्रफल:

A = 2πrl

वक्र पृष्ठ पर E समान होगा।

कुल फ्लक्स:

Φ = E × 2πrl

गॉस नियम से:

E × 2πrl = λl/ε₀

अतः

★ E = λ/2πε₀r

तीन छोटे उदाहरण

(i) λ बढ़ने पर E बढ़ता है।

(ii) r बढ़ने पर E घटता है।

(iii) E ∝ 1/r।

★ मुख्य बिंदु

E = λ/2πε₀r

14. अनन्त समतल आवेशित चादर के कारण वैद्युत क्षेत्र

व्युत्पत्ति

मान लें सतह आवेश घनत्व σ वाली अनन्त समतल चादर है।

चादर को काटता हुआ एक बेलनाकार गॉस पृष्ठ लें।

दोनों सिरों से फ्लक्स निकलेगा।

कुल फ्लक्स:

Φ = EA + EA

= 2EA

गॉस नियम:

2EA = σA/ε₀

अतः

★ E = σ/2ε₀

महत्वपूर्ण बात

यह क्षेत्र दूरी पर निर्भर नहीं करता।

तीन छोटे उदाहरण

(i) σ बढ़ने पर E बढ़ेगा।

(ii) चादर से दूरी बदलने पर आदर्श अनन्त चादर के लिए E नहीं बदलता।

(iii) क्षेत्र चादर के दोनों ओर समान परिमाण का होता है।

★ मुख्य बिंदु

E = σ/2ε₀

15. समान रूप से आवेशित पतले गोलाकार खोल के कारण वैद्युत क्षेत्र

व्युत्पत्ति

मान लें त्रिज्या R के गोलाकार खोल पर कुल आवेश Q है।

स्थिति 1 — r > R

गॉस पृष्ठ खोल के बाहर है।

गॉस नियम:

E × 4πr² = Q/ε₀

अतः

★ E = 1/4πε₀ × Q/r²

अर्थात बाहर से पूरा आवेश केन्द्र पर स्थित बिन्दु आवेश जैसा व्यवहार करता है।

स्थिति 2 — r < R

गॉस पृष्ठ खोल के अंदर है।

अंदर कोई आवेश बंद नहीं है।

Qenclosed = 0

अतः

★ E = 0

सतह पर

r = R पर:

E = 1/4πε₀ × Q/R²

तीन छोटे उदाहरण

(i) खोल के बाहर E = kQ/r²।

(ii) खोल के अंदर E = 0।

(iii) बाहर से गोलाकार खोल बिन्दु आवेश जैसा व्यवहार करता है।

★ चार न्यूमेरिकल

प्रश्न 1: Q = 2 μC, r = 1 m।

E = 1.8 × 10⁴ N/C

उत्तर: 1.8 × 10⁴ N/C

प्रश्न 2: Q = 4 μC, r = 2 m।

E = 9 × 10³ N/C

उत्तर: 9 × 10³ N/C

प्रश्न 3: खोल के अंदर किसी बिन्दु पर Qenclosed = 0 है।

E = 0

उत्तर: 0 N/C

प्रश्न 4: Q = 5 μC और R = 0.5 m।

E = kQ/R²

= 9 × 10⁹ × 5 × 10⁻⁶ / 0.25

= 1.8 × 10⁵ N/C

उत्तर: 1.8 × 10⁵ N/C

16. वैद्युत क्षेत्र और आवेश घनत्व

परिभाषाएँ

रैखिक आवेश घनत्व

λ = Q/l

SI मात्रक — C/m

पृष्ठीय आवेश घनत्व

σ = Q/A

SI मात्रक — C/m²

आयतन आवेश घनत्व

ρ = Q/V

SI मात्रक — C/m³

तीन छोटे उदाहरण

(i) तार जैसे लम्बे पिंड के लिए λ उपयोगी है।

(ii) चादर जैसी सतह के लिए σ उपयोगी है।

(iii) ठोस आयतन में फैले आवेश के लिए ρ उपयोगी है।

★ मुख्य बिंदु

λ = Q/l

σ = Q/A

ρ = Q/V

17. महत्वपूर्ण संबंध — आवेश घनत्व

यदि आवेश समान रूप से वितरित है:

Q = λl

Q = σA

Q = ρV

ये तीनों संबंध आगे गॉस नियम के प्रश्नों में बहुत काम आते हैं।

उदाहरण

(i) λ दिया हो तो Q = λl

(ii) σ दिया हो तो Q = σA

(iii) ρ दिया हो तो Q = ρV

18. वैद्युत क्षेत्र में चालक

परिभाषा

स्थिर वैद्युत अवस्था में चालक के अंदर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है।

★ Einside = 0

चालक का अतिरिक्त आवेश उसकी बाहरी सतह पर स्थित होता है।

चालक की सतह के ठीक बाहर:

★ E = σ/ε₀

यहाँ σ चालक की सतह का पृष्ठीय आवेश घनत्व है।

तीन छोटे उदाहरण

(i) स्थिर अवस्था में चालक के अंदर E = 0।

(ii) अतिरिक्त आवेश चालक की सतह पर रहता है।

(iii) चालक की नुकीली जगहों पर आवेश घनत्व अधिक हो सकता है।

आसान तरीके से समझो

चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन आसानी से गति कर सकते हैं। यदि अंदर वैद्युत क्षेत्र मौजूद हो तो वे गति करते रहेंगे। स्थिर अवस्था में वे इस प्रकार पुनर्व्यवस्थित होते हैं कि चालक के अंदर कुल क्षेत्र शून्य हो जाता है।

★ मुख्य बिंदु

चालक के अंदर:

E = 0

सतह के ठीक बाहर:

E = σ/ε₀

19. वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा

व्युत्पत्ति

समान वैद्युत क्षेत्र E में द्विध्रुव को θ कोण तक घुमाने पर आघूर्ण:

τ = pE sinθ

इससे द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा:

★ U = −pE cosθ

विशेष स्थितियाँ

θ = 0°

U = −pE

θ = 90°

U = 0

θ = 180°

U = +pE

तीन छोटे उदाहरण

(i) p और E समान दिशा में हों तो ऊर्जा न्यूनतम होती है।

(ii) विपरीत दिशा में हों तो ऊर्जा अधिकतम होती है।

(iii) θ = 90° पर U = 0

★ चार न्यूमेरिकल

प्रश्न 1: p = 2 C m, E = 3 N/C, θ = 0°

U = −pE

= −6 J

उत्तर: −6 J

प्रश्न 2: p = 2 C m, E = 3 N/C, θ = 90°

U = 0

उत्तर: 0 J

प्रश्न 3: p = 2 C m, E = 4 N/C, θ = 60°

U = −2 × 4 × 1/2

= −4 J

उत्तर: −4 J

प्रश्न 4: p = 5 × 10⁻⁶ C m, E = 2 × 10⁵ N/C, θ = 180°

U = +pE

= 1 J

उत्तर: 1 J

20. वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का अध्यारोपण

यदि किसी बिन्दु पर कई आवेश उपस्थित हों, तो प्रत्येक आवेश के कारण अलग-अलग क्षेत्र निकालकर उनका सदिश योग किया जाता है।

★ E = E₁ + E₂ + E₃ + …

यदि दो क्षेत्र एक ही दिशा में हों:

E = E₁ + E₂

यदि विपरीत दिशा में हों:

E = |E₁ − E₂|

आसान तरीके से समझो

एक से अधिक आवेशों के प्रश्न में पहले हर आवेश का क्षेत्र अलग निकालें। फिर उनकी दिशाएँ देखकर सदिश जोड़ करें। केवल संख्याओं को जोड़ देना हमेशा सही नहीं होता।

★ मुख्य बिंदु

अध्यारोपण का सिद्धान्त पूरे अध्याय में कई जगह उपयोगी है।

21. महत्वपूर्ण तुलना

बिन्दु आवेश

E = kQ/r²

अर्थात

E ∝ 1/r²

अनन्त रेखीय आवेश

E = λ/2πε₀r

अर्थात

E ∝ 1/r

अनन्त समतल चादर

E = σ/2ε₀

अर्थात

E दूरी पर निर्भर नहीं करता।

गोलाकार खोल के बाहर

E = kQ/r²

गोलाकार खोल के अंदर

E = 0

22. महत्वपूर्ण विमीय सूत्र

वैद्युत आवेश

[q] = [A T]

वैद्युत क्षेत्र

[E] = [M L T⁻³ A⁻¹]

वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण

[p] = [A T L]

वैद्युत फ्लक्स

[ΦE] = [M L³ T⁻³ A⁻¹]

पृष्ठीय आवेश घनत्व

[σ] = [A T L⁻²]

रैखिक आवेश घनत्व

[λ] = [A T L⁻¹]

आयतन आवेश घनत्व

[ρ] = [A T L⁻³]

वैद्युत बल

[F] = [M L T⁻²]

23. एक नज़र में महत्वपूर्ण सूत्र

आवेश का क्वांटीकरण

q = ne

कूलॉम का नियम

F = 1/4πε₀ × q₁q₂/r²

वैद्युत क्षेत्र

E = F/q₀

बिन्दु आवेश का क्षेत्र

E = 1/4πε₀ × Q/r²

वैद्युत फ्लक्स

ΦE = EA cosθ

गॉस का नियम

∮E·dA = Q/ε₀

वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण

p = q(2a)

द्विध्रुव का अक्षीय क्षेत्र

Eaxial = 1/4πε₀ × 2pr/(r² − a²)²

दूर बिन्दु के लिए:

Eaxial = 1/4πε₀ × 2p/r³

द्विध्रुव का विषुवतीय क्षेत्र

Eequatorial = 1/4πε₀ × p/(r² + a²)³ᐟ²

दूर बिन्दु के लिए:

Eequatorial = 1/4πε₀ × p/r³

द्विध्रुव पर आघूर्ण

τ = pE sinθ

अधिकतम आघूर्ण

τmax = pE

द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा

U = −pE cosθ

रैखिक आवेश घनत्व

λ = Q/l

पृष्ठीय आवेश घनत्व

σ = Q/A

आयतन आवेश घनत्व

ρ = Q/V

अनन्त लम्बे तार का क्षेत्र

E = λ/2πε₀r

अनन्त समतल चादर का क्षेत्र

E = σ/2ε₀

चालक की सतह के ठीक बाहर

E = σ/ε₀

गोलाकार खोल के बाहर

E = 1/4πε₀ × Q/r²

गोलाकार खोल के अंदर

E = 0

24. परीक्षा से पहले याद रखने वाले मुख्य बिंदु

1. आवेश का SI मात्रक कूलॉम है।

2. आवेश एक अदिश राशि है।

3. आवेश संरक्षण का नियम हमेशा याद रखें।

4. आवेश का क्वांटीकरण: q = ne।

5. कूलॉम बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

6. वैद्युत क्षेत्र की परिभाषा E = F/q₀ से

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