अध्याय 6 : विद्युतचुम्बकीय प्रेरण
UP Board Class 12 Physics Chapter 6 Electromagnetic Induction 2027 की तैयारी के लिए यहाँ Topper Notes, महत्वपूर्ण प्रश्न, PYQ Questions और Online Quiz उपलब्ध हैं। यह सामग्री UP Board Class 12 Physics परीक्षा की तैयारी में आपकी मदद करेगी।
★ अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) — किसी सतह से गुजरने वाले कुल चुंबकीय क्षेत्र का माप चुंबकीय फ्लक्स कहलाता है।
2. विद्युतचुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) — जब किसी बंद परिपथ से संबंधित चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। इस घटना को विद्युतचुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।
3. प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced EMF) — चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण परिपथ में उत्पन्न विद्युत वाहक बल को प्रेरित emf कहते हैं।
4. प्रेरित धारा (Induced Current) — यदि प्रेरित emf के कारण बंद परिपथ में धारा बहने लगे, तो उसे प्रेरित धारा कहते हैं।
5. लेंज का नियम (Lenz’s Law) — प्रेरित धारा की दिशा हमेशा ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह उत्पन्न हुई है।
6. गतिज विद्युत वाहक बल (Motional EMF) — चुंबकीय क्षेत्र में किसी चालक के गति करने के कारण चालक के सिरों के बीच उत्पन्न emf को गतिज emf कहते हैं।
7. स्वप्रेरण (Self Induction) — किसी कुंडली में धारा बदलने पर उसी कुंडली में उत्पन्न प्रेरित emf की घटना स्वप्रेरण कहलाती है।
8. स्वप्रेरकत्व (Self Inductance) — किसी कुंडली की वह विशेषता जिसके कारण वह अपनी धारा में परिवर्तन का विरोध करती है, स्वप्रेरकत्व कहलाती है।
9. अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) — एक कुंडली में धारा बदलने पर पास रखी दूसरी कुंडली में प्रेरित emf उत्पन्न होने की घटना अन्योन्य प्रेरण कहलाती है।
10. अन्योन्य प्रेरकत्व (Mutual Inductance) — दो कुंडलियों के बीच चुंबकीय संबंध के कारण उत्पन्न प्रेरित emf की मात्रा को निर्धारित करने वाली राशि अन्योन्य प्रेरकत्व कहलाती है।
11. प्रेरकत्व (Inductance) — वह गुण जिसके कारण किसी परिपथ में धारा के परिवर्तन का विरोध करने वाला प्रेरित emf उत्पन्न होता है, प्रेरकत्व कहलाता है।
12. एडी धाराएँ (Eddy Currents) — बदलते हुए चुंबकीय क्षेत्र के कारण किसी ठोस चालक के भीतर बनने वाली बंद प्रेरित धाराओं को एडी धाराएँ कहते हैं।
13. AC जनित्र (AC Generator) — वह यंत्र जो विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्ती विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
1. चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux)
परिभाषा
किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखी किसी सतह से होकर गुजरने वाले चुंबकीय क्षेत्र का माप चुंबकीय फ्लक्स कहलाता है।
यदि चुंबकीय क्षेत्र B, क्षेत्रफल A के अभिलंब से θ कोण बनाता है, तो
Φ = BA cos θ
जहाँ
Φ = चुंबकीय फ्लक्स
B = चुंबकीय क्षेत्र
A = सतह का क्षेत्रफल
θ = B और सतह के अभिलंब के बीच कोण
फ्लक्स की इकाई
SI इकाई — वेबर (Wb)
1 Wb = 1 T m²
यह सूत्र क्या बताता है?
यह बताता है कि किसी सतह से होकर कितना चुंबकीय क्षेत्र गुजर रहा है।
मुख्य बातें
i. θ = 0° होने पर Φ अधिकतम होता है।
ii. θ = 90° होने पर Φ = 0 होता है।
iii. चुंबकीय क्षेत्र या क्षेत्रफल बदलने पर फ्लक्स बदल सकता है।
विशेषताएँ
i. फ्लक्स अदिश राशि है।
ii. इसका मान धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
iii. फ्लक्स क्षेत्रफल और चुंबकीय क्षेत्र दोनों पर निर्भर करता है।
उदाहरण
i. चुंबकीय क्षेत्र में रखी कुंडली को घुमाने पर फ्लक्स बदलता है।
ii. कुंडली का क्षेत्रफल बदलने पर फ्लक्स बदल सकता है।
iii. चुंबकीय क्षेत्र को बढ़ाने या घटाने पर फ्लक्स बदलता है।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: 2 m² क्षेत्रफल की सतह में 0.5 T का चुंबकीय क्षेत्र अभिलंब के समानांतर है। फ्लक्स ज्ञात कीजिए।
हल:
Φ = BA cos 0°
= 0.5 × 2 × 1
= 1 Wb
प्रश्न 2: B = 0.4 T, A = 5 m² तथा θ = 60° है। फ्लक्स ज्ञात कीजिए।
Φ = BA cos 60°
= 0.4 × 5 × 1/2
= 1 Wb
प्रश्न 3: 0.8 T के क्षेत्र में 2 m² की सतह रखी है और θ = 90° है।
Φ = BA cos 90°
= 0 Wb
प्रश्न 4: B = 0.2 T, A = 10 m² और θ = 0° है।
Φ = 0.2 × 10
= 2 Wb
2. विद्युतचुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)
परिभाषा
जब किसी बंद परिपथ से संबंधित चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन किया जाता है, तो उस परिपथ में विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। इस घटना को विद्युतचुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।
इस घटना का प्रयोगात्मक अध्ययन फैराडे ने किया था।
मुख्य बिंदु
i. केवल चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति पर्याप्त नहीं है।
ii. चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन आवश्यक है।
iii. फ्लक्स में परिवर्तन जितना तेज होगा, प्रेरित emf उतना अधिक होगा।
फ्लक्स बदलने के तरीके
i. चुंबकीय क्षेत्र B बदलना।
ii. कुंडली का क्षेत्रफल A बदलना।
iii. कुंडली और चुंबकीय क्षेत्र के बीच कोण θ बदलना।
उदाहरण
i. चुंबक को कुंडली के पास आगे-पीछे करने पर धारा उत्पन्न हो सकती है।
ii. जनित्र में कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है।
iii. ट्रांसफॉर्मर में बदलती धारा के कारण बदलता चुंबकीय फ्लक्स दूसरी कुंडली में emf उत्पन्न करता है।
विशेष स्थिति
यदि चुंबकीय फ्लक्स में कोई परिवर्तन नहीं है, तो विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के कारण emf उत्पन्न नहीं होगा।
3. फैराडे का विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का नियम (Faraday’s Law)
परिभाषा
फैराडे के नियम के अनुसार किसी परिपथ में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
e ∝ − dΦ/dt
अर्थात्
e = − dΦ/dt
यदि कुंडली में N फेरे हों:
e = −N dΦ/dt
औसत emf के लिए:
e = −N(ΔΦ/Δt)
यहाँ ऋणात्मक चिन्ह लेंज के नियम को दर्शाता है।
यह सूत्र क्या बताता है?
यह बताता है कि फ्लक्स जितनी तेजी से बदलेगा, प्रेरित emf उतना अधिक होगा।
मुख्य बातें
i. emf फ्लक्स परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है।
ii. N बढ़ाने पर प्रेरित emf बढ़ता है।
iii. ऋणात्मक चिन्ह प्रेरित emf की दिशा बताता है।
सीमाएँ / विशेष स्थिति
i. यदि ΔΦ = 0, तो प्रेरित emf शून्य होगा।
ii. फ्लक्स में परिवर्तन बहुत धीरे होगा तो emf भी कम होगा।
iii. सूत्र में ऋणात्मक चिन्ह दिशा के लिए है, केवल परिमाण के लिए नहीं।
उदाहरण
i. चुंबक को कुंडली में तेजी से डालने पर अधिक emf मिलता है।
ii. जनित्र में कुंडली की गति बढ़ाने पर emf बढ़ता है।
iii. अधिक फेरों वाली कुंडली में समान फ्लक्स परिवर्तन पर अधिक emf उत्पन्न होता है।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: 2 Wb फ्लक्स 0.5 s में 0 हो जाता है। एक फेरे की कुंडली में औसत emf ज्ञात करें।
e = −ΔΦ/Δt
परिमाण = 2/0.5
= 4 V
प्रश्न 2: 100 फेरों की कुंडली में फ्लक्स 0.02 Wb से 0.08 Wb तक 0.3 s में बदलता है।
e = N(ΔΦ/Δt)
= 100 × (0.08 − 0.02)/0.3
= 100 × 0.06/0.3
= 20 V
प्रश्न 3: 200 फेरों की कुंडली में फ्लक्स 0.5 Wb से 0.1 Wb हो जाता है और समय 0.2 s है।
e = 200 × 0.4/0.2
= 400 V
प्रश्न 4: 50 फेरों में फ्लक्स परिवर्तन 0.01 Wb है और समय 0.05 s है।
e = 50 × 0.01/0.05
= 10 V
4. लेंज का नियम (Lenz’s Law)
परिभाषा
लेंज के नियम के अनुसार प्रेरित धारा की दिशा हमेशा ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण प्रेरित धारा उत्पन्न हुई है।
इसी कारण फैराडे के नियम में ऋणात्मक चिन्ह लगाया जाता है।
e = −N dΦ/dt
मुख्य बातें
i. यह प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
ii. यह ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुकूल है।
iii. यह चुंबकीय फ्लक्स में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है।
उदाहरण
i. चुंबक को कुंडली के पास लाने पर कुंडली का निकट वाला सिरा चुंबक को पीछे धकेलने जैसा प्रभाव पैदा करता है।
ii. चुंबक को कुंडली से दूर ले जाने पर कुंडली उसे आकर्षित करने जैसी दिशा में धारा उत्पन्न करती है।
iii. जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा लगाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
विशेषता
लेंज का नियम यह नहीं कहता कि प्रेरित धारा हमेशा चुंबकीय क्षेत्र का विरोध करेगी; वह फ्लक्स में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है।
5. गतिज विद्युत वाहक बल (Motional EMF)
परिभाषा
जब कोई चालक चुंबकीय क्षेत्र में इस प्रकार गति करता है कि उसके मुक्त आवेशों पर चुंबकीय बल कार्य करता है, तो चालक के सिरों के बीच विभवान्तर उत्पन्न होता है। इसे गतिज emf कहते हैं।
यदि लंबाई l का चालक B चुंबकीय क्षेत्र में v वेग से क्षेत्र के लंबवत गति करता है:
e = Blv
सूत्र की समझ
B = चुंबकीय क्षेत्र
l = चालक की लंबाई
v = चालक का वेग
यदि चालक और चुंबकीय क्षेत्र के बीच कोण θ हो:
e = Blv sin θ
मुख्य बातें
i. v = 0 होने पर गतिज emf शून्य होगा।
ii. θ = 90° पर emf अधिकतम होगा।
iii. चालक की लंबाई बढ़ाने पर emf बढ़ता है।
सीमाएँ / विशेष स्थिति
यह सरल सूत्र उस स्थिति में सीधे लागू होता है जब चालक की गति, चालक की लंबाई और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का संबंध उचित हो। सामान्य स्थिति में कोण का पद sin θ शामिल करना पड़ता है।
उदाहरण
i. चुंबकीय क्षेत्र में चलती धातु की छड़।
ii. रेल-पटरियों जैसी व्यवस्था में गतिशील चालक।
iii. विद्युत जनित्र की घूमती हुई कुंडली।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: l = 0.5 m, B = 2 T और v = 4 m/s है।
e = Blv
= 2 × 0.5 × 4
= 4 V
प्रश्न 2: B = 0.8 T, l = 2 m और v = 5 m/s।
e = 0.8 × 2 × 5
= 8 V
प्रश्न 3: B = 1 T, l = 0.4 m, v = 10 m/s और θ = 30°।
e = Blv sin 30°
= 1 × 0.4 × 10 × 1/2
= 2 V
प्रश्न 4: B = 0.5 T, l = 2 m और v = 6 m/s।
e = 0.5 × 2 × 6
= 6 V
6. प्रेरित धारा (Induced Current)
परिभाषा
प्रेरित emf के कारण बंद विद्युत परिपथ में जो धारा उत्पन्न होती है, उसे प्रेरित धारा कहते हैं।
ओम के नियम से:
I = e/R
जहाँ R परिपथ का प्रतिरोध है।
फैराडे के नियम से:
I = −(N/R)(dΦ/dt)
मुख्य बातें
i. खुला परिपथ होने पर emf हो सकता है, लेकिन धारा नहीं बहेगी।
ii. बंद परिपथ में प्रेरित emf धारा उत्पन्न कर सकता है।
iii. प्रतिरोध बढ़ाने पर समान emf के लिए धारा घटती है।
उदाहरण
i. कुंडली और चुंबक की गति से उत्पन्न धारा।
ii. जनित्र में उत्पन्न धारा।
iii. प्रेरण आधारित कुछ विद्युत उपकरणों में उत्पन्न धारा।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: प्रेरित emf 12 V और प्रतिरोध 4 Ω है।
I = e/R
= 12/4
= 3 A
प्रश्न 2: emf = 20 V और R = 5 Ω।
I = 20/5
= 4 A
प्रश्न 3: 100 फेरों में फ्लक्स परिवर्तन की दर 0.2 Wb/s है और R = 10 Ω।
e = N dΦ/dt
= 100 × 0.2
= 20 V
I = 20/10
= 2 A
प्रश्न 4: e = 15 V और R = 3 Ω।
I = 15/3
= 5 A
7. स्वप्रेरण (Self Induction)
परिभाषा
जब किसी कुंडली में बहने वाली धारा में परिवर्तन होता है, तो उसी कुंडली में बदलते चुंबकीय फ्लक्स के कारण एक प्रेरित emf उत्पन्न होता है। इस घटना को स्वप्रेरण कहते हैं।
इस प्रेरित emf की दिशा धारा में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है।
e = −L dI/dt
यहाँ L = स्वप्रेरकत्व।
स्वप्रेरकत्व की परिभाषा
किसी कुंडली का स्वप्रेरकत्व वह राशि है जो उसमें धारा के परिवर्तन के कारण उत्पन्न प्रेरित emf को निर्धारित करती है।
यदि
e = −L dI/dt
तो
L = e/(dI/dt)
SI इकाई
हेनरी (H)
1 हेनरी
यदि किसी कुंडली में धारा 1 A/s की दर से बदलने पर 1 V का प्रेरित emf उत्पन्न हो, तो उसका स्वप्रेरकत्व 1 H होता है।
मुख्य बातें
i. L कुंडली की बनावट पर निर्भर करता है।
ii. अधिक फेरों से सामान्यतः स्वप्रेरकत्व बढ़ता है।
iii. लोहे के कोर का प्रयोग करने से स्वप्रेरकत्व बढ़ाया जा सकता है।
सीमाएँ / विशेष स्थिति
स्वप्रेरण धारा के परिवर्तन का विरोध करता है, स्वयं धारा के अस्तित्व का नहीं।
उदाहरण
i. प्रेरक कुंडली में धारा बदलने पर विरोधी emf।
ii. विद्युत परिपथ में स्विच बंद करते समय उत्पन्न प्रेरण प्रभाव।
iii. चोक-कुंडली में प्रेरकत्व का उपयोग।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: L = 2 H और धारा 3 A/s की दर से बदल रही है।
e = L dI/dt
= 2 × 3
= 6 V
प्रश्न 2: L = 5 H और dI/dt = 2 A/s।
e = 5 × 2
= 10 V
प्रश्न 3: 4 V emf उत्पन्न होती है जब धारा 2 A/s की दर से बदलती है।
L = e/(dI/dt)
= 4/2
= 2 H
प्रश्न 4: L = 0.5 H तथा dI/dt = 8 A/s।
e = 0.5 × 8
= 4 V
8. लंबी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व (Self Inductance of a Long Solenoid)
यदि लंबी परिनालिका की लंबाई l, अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A और कुल फेरों की संख्या N है, तो
L = μ₀N²A/l
यदि अंदर परावैद्युत/चुंबकीय माध्यम हो:
L = μN²A/l
जहाँ μ = माध्यम की चुंबकीय पारगम्यता।
सूत्र क्या बताता है?
स्वप्रेरकत्व N² और A के साथ बढ़ता है तथा लंबाई l बढ़ने पर घटता है।
मुख्य बातें
i. N बढ़ाने पर L बहुत तेजी से बढ़ता है।
ii. A बढ़ाने पर L बढ़ता है।
iii. l बढ़ाने पर L घटता है।
उदाहरण
i. इंडक्टर में।
ii. परिनालिका में।
iii. विद्युत परिपथों में ऊर्जा संग्रह के लिए।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: N = 1000, A = 2 × 10⁻⁴ m² और l = 0.5 m।
L = μ₀N²A/l
= 4π × 10⁻⁷ × (1000)² × 2 × 10⁻⁴ / 0.5
L ≈ 5.03 × 10⁻⁴ H
प्रश्न 2: N = 500, A = 10⁻³ m², l = 1 m।
L = 4π × 10⁻⁷ × 500² × 10⁻³
L ≈ 3.14 × 10⁻⁴ H
प्रश्न 3: यदि N को 2 गुना कर दिया जाए तो L कितनी गुना होगा?
L ∝ N²
अतः नया L = 2²L = 4L
प्रश्न 4: यदि परिनालिका की लंबाई 2 गुना कर दी जाए और बाकी सब समान रहे।
L ∝ 1/l
अतः नया L = L/2
9. प्रेरक में संचित ऊर्जा (Energy Stored in an Inductor)
किसी प्रेरक में धारा स्थापित करने में किया गया कार्य उसके चुंबकीय क्षेत्र में ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
U = ½LI²
जहाँ
U = संचित ऊर्जा
L = स्वप्रेरकत्व
I = धारा
मुख्य बातें
i. ऊर्जा धारा के वर्ग के समानुपाती है।
ii. धारा दोगुनी करने पर ऊर्जा चार गुनी हो जाती है।
iii. ऊर्जा चुंबकीय क्षेत्र में संचित रहती है।
उदाहरण
i. इंडक्टर में।
ii. विद्युत परिपथ में ऊर्जा संग्रह।
iii. चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने वाले प्रेरकों में।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: L = 2 H और I = 3 A।
U = ½ × 2 × 3²
= 9 J
प्रश्न 2: L = 4 H और I = 2 A।
U = ½ × 4 × 4
= 8 J
प्रश्न 3: L = 0.5 H और I = 4 A।
U = ½ × 0.5 × 16
= 4 J
प्रश्न 4: L = 10 H और I = 1 A।
U = ½ × 10 × 1
= 5 J
10. अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction)
परिभाषा
जब एक कुंडली में धारा बदलने के कारण उसके पास रखी दूसरी कुंडली से संबंधित चुंबकीय फ्लक्स बदलता है और दूसरी कुंडली में प्रेरित emf उत्पन्न होता है, तो इस घटना को अन्योन्य प्रेरण कहते हैं।
e₂ = −M dI₁/dt
जहाँ M = अन्योन्य प्रेरकत्व।
अन्योन्य प्रेरकत्व
M = e₂/(dI₁/dt)
SI इकाई
हेनरी (H)
मुख्य बातें
i. दोनों कुंडलियों के बीच चुंबकीय संबंध होना चाहिए।
ii. पहली कुंडली की धारा बदलने पर दूसरी कुंडली में emf उत्पन्न हो सकता है।
iii. कुंडलियों के बीच दूरी और उनकी स्थिति M को प्रभावित करती है।
उदाहरण
i. ट्रांसफॉर्मर।
ii. दो पास-पास रखी कुंडलियाँ।
iii. प्रेरण आधारित विद्युत उपकरण।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: M = 2 H और प्राथमिक धारा 3 A/s की दर से बदलती है।
e = M dI/dt
= 2 × 3
= 6 V
प्रश्न 2: M = 0.5 H और dI/dt = 10 A/s।
e = 0.5 × 10
= 5 V
प्रश्न 3: e = 12 V और dI/dt = 4 A/s।
M = 12/4
= 3 H
प्रश्न 4: M = 4 H और dI/dt = 0.5 A/s।
e = 4 × 0.5
= 2 V
11. दो कुंडलियों का अन्योन्य प्रेरकत्व (Mutual Inductance of Two Coils)
दो कुंडलियों का अन्योन्य प्रेरकत्व उनके आकार, फेरों की संख्या, आपसी स्थिति तथा माध्यम पर निर्भर करता है।
आदर्श रूप से पूर्ण चुंबकीय युग्मन में:
M = √(L₁L₂)
सामान्य स्थिति में:
M = k√(L₁L₂)
जहाँ k = युग्मन गुणांक।
0 ≤ k ≤ 1
मुख्य बातें
i. k = 1 होने पर पूर्ण युग्मन।
ii. k = 0 होने पर चुंबकीय युग्मन नहीं।
iii. M की इकाई हेनरी है।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: L₁ = 4 H, L₂ = 9 H और k = 1।
M = √(4 × 9)
= 6 H
प्रश्न 2: L₁ = 2 H, L₂ = 8 H, k = 0.5।
M = 0.5√16
= 2 H
प्रश्न 3: L₁ = 9 H, L₂ = 4 H, k = 0.5।
M = 0.5√36
= 3 H
प्रश्न 4: L₁ = 1 H, L₂ = 16 H और k = 0.25।
M = 0.25√16
= 1 H
12. एडी धाराएँ (Eddy Currents)
परिभाषा
जब किसी ठोस चालक के भीतर चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो चालक के अंदर बंद पथों में प्रेरित धाराएँ उत्पन्न होती हैं। इन्हें एडी धाराएँ कहते हैं।
मुख्य बातें
i. ये ठोस चालक के भीतर घूमती हुई बंद धाराओं के रूप में होती हैं।
ii. इनके कारण ऊष्मा उत्पन्न हो सकती है।
iii. इन्हें कम करने के लिए लोहे के कोर को पतली-पतली परतों में बनाया जाता है।
उपयोग
i. विद्युत ब्रेक में।
ii. प्रेरण भट्ठी में।
iii. कुछ मापन उपकरणों में।
हानियाँ
i. अनावश्यक ऊष्मा उत्पन्न कर सकती हैं।
ii. ऊर्जा की हानि हो सकती है।
13. AC जनित्र (AC Generator)
परिभाषा
AC जनित्र वह यंत्र है जो विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्ती विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
सिद्धांत
यह विद्युतचुम्बकीय प्रेरण पर आधारित है।
जब कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो उससे संबंधित चुंबकीय फ्लक्स लगातार बदलता है और प्रेरित emf उत्पन्न होता है।
मुख्य भाग
i. चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने वाला चुंबक
ii. घूमने वाली कुंडली
iii. स्लिप रिंग
iv. ब्रश
v. बाहरी परिपथ
प्रेरित emf
यदि कुंडली के N फेरे हैं:
e = NBAω sin ωt
अधिकतम emf:
e₀ = NBAω
अतः
e = e₀ sin ωt
जहाँ
N = फेरों की संख्या
B = चुंबकीय क्षेत्र
A = कुंडली का क्षेत्रफल
ω = कोणीय वेग
मुख्य बातें
i. कुंडली को घुमाने पर फ्लक्स बदलता है।
ii. उत्पन्न emf की दिशा समय के साथ बदलती रहती है।
iii. इसलिए आउटपुट प्रत्यावर्ती होता है।
उदाहरण
i. विद्युत उत्पादन केंद्रों में जनित्र।
ii. जलविद्युत संयंत्र।
iii. ताप विद्युत संयंत्र।
★ संख्यात्मक प्रश्न
प्रश्न 1: N = 100, B = 0.2 T, A = 0.01 m² और ω = 100 rad/s।
e₀ = NBAω
= 100 × 0.2 × 0.01 × 100
= 20 V
प्रश्न 2: N = 50, B = 0.5 T, A = 0.02 m², ω = 200 rad/s।
e₀ = 50 × 0.5 × 0.02 × 200
= 100 V
प्रश्न 3: यदि N को 2 गुना कर दिया जाए, बाकी राशियाँ समान रहें।
e₀ ∝ N
अतः emf 2 गुना होगा।
प्रश्न 4: यदि ω को 3 गुना कर दिया जाए।
e₀ ∝ ω
अतः अधिकतम emf 3 गुना होगा।
★ महत्वपूर्ण व्युत्पत्तियाँ एक नजर में
1. फैराडे के नियम से प्रेरित emf
Φ = BA cos θ
यदि फ्लक्स समय के साथ बदलता है:
e = −N dΦ/dt
यही विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का मुख्य गणितीय संबंध है।
—
2. गतिज emf की व्युत्पत्ति
मान लें लंबाई l का चालक B चुंबकीय क्षेत्र में v वेग से चलता है।
चालक में आवेश q पर चुंबकीय बल:
F = qvB
संतुलन पर विद्युत बल और चुंबकीय बल बराबर होंगे:
qE = qvB
अतः
E = vB
चालक के सिरों के बीच विभवान्तर:
e = El
इसलिए
e = Blv
—
3. प्रेरक में ऊर्जा
प्रेरक में धारा I स्थापित करने के लिए किया गया कार्य:
U = ½LI²
अतः प्रेरक में संचित ऊर्जा:
U = ½LI²
★ अध्याय की बहुत जरूरी बातें
1. चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का मूल कारण है।
2. फैराडे का नियम प्रेरित emf का परिमाण देता है।
3. लेंज का नियम प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
4. फैराडे के नियम में ऋणात्मक चिन्ह लेंज के नियम को दर्शाता है।
5. गतिज emf के लिए महत्वपूर्ण सूत्र e = Blv है।
6. स्वप्रेरण में उसी कुंडली में emf उत्पन्न होता है।
7. अन्योन्य प्रेरण में एक कुंडली के कारण दूसरी कुंडली में emf उत्पन्न होता है।
8. स्वप्रेरकत्व और अन्योन्य प्रेरकत्व की SI इकाई हेनरी है।
9. प्रेरक में ऊर्जा ½LI² होती है।
10. AC जनित्र विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
11. एडी धाराएँ बदलते चुंबकीय फ्लक्स के कारण ठोस चालक में उत्पन्न होती हैं।
12. फ्लक्स का मान अधिकतम तब होता है जब B और सतह का अभिलंब एक ही दिशा में हों।
★ त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
चुंबकीय फ्लक्स:
Φ = BA cos θ
फैराडे का नियम:
e = −N dΦ/dt
औसत प्रेरित emf:
e = −N ΔΦ/Δt
गतिज emf:
e = Blv
सामान्य स्थिति:
e = Blv sin θ
प्रेरित धारा:
I = e/R
स्वप्रेरित emf:
e = −L dI/dt
परिनालिका का स्वप्रेरकत्व:
L = μ₀N²A/l
प्रेरक में ऊर्जा:
U = ½LI²
अन्योन्य प्रेरित emf:
e₂ = −M dI₁/dt
अन्योन्य प्रेरकत्व:
M = k√(L₁L₂)
AC जनित्र का अधिकतम emf:
e₀ = NBAω
AC जनित्र का तात्कालिक emf:
e = e₀ sin ωt
★ पूरे अध्याय के सभी महत्वपूर्ण सूत्र
1. Φ = BA cos θ
2. e = −N dΦ/dt
3. e = −N ΔΦ/Δt
4. I = e/R
5. e = Blv
6. e = Blv sin θ
7. e = −L dI/dt
8. L = e/(dI/dt)
9. L = μ₀N²A/l
10. U = ½LI²
11. e₂ = −M dI₁/dt
12. M = k√(L₁L₂)
13. e₀ = NBAω
14. e = e₀ sin ωt
★ बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. विद्युतचुम्बकीय प्रेरण क्या है?
2. चुंबकीय फ्लक्स की परिभाषा दीजिए।
3. फैराडे के विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के नियम लिखिए।
4. लेंज का नियम क्या है?
5. लेंज के नियम में ऋणात्मक चिन्ह का क्या महत्व है?
6. गतिज emf क्या है?
7. स्वप्रेरण क्या है?
8. अन्योन्य प्रेरण क्या है?
9. स्वप्रेरकत्व की SI इकाई क्या है?
10. एडी धाराएँ क्या हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. फैराडे के विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के नियम समझाइए।
2. लेंज के नियम को ऊर्जा संरक्षण के नियम से समझाइए।
3. गतिज emf का सूत्र प्राप्त कीजिए।
4. लंबी परिनालिका के स्वप्रेरकत्व का सूत्र प्राप्त कीजिए।
5. प्रेरक में संचित ऊर्जा का सूत्र प्राप्त कीजिए।
6. AC जनित्र का सिद्धांत, रचना और कार्यविधि समझाइए।
7. स्वप्रेरण तथा अन्योन्य प्रेरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
★ खुद को जाँचें (Self-Test)
प्रश्न 1: चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: वेबर (Wb)
प्रश्न 2: फैराडे के नियम में ऋणात्मक चिन्ह किस नियम को दर्शाता है?
उत्तर: लेंज का नियम।
प्रश्न 3: यदि चुंबकीय फ्लक्स में कोई परिवर्तन न हो तो प्रेरित emf कितना होगा?
उत्तर: शून्य।
प्रश्न 4: गतिज emf का सूत्र क्या है?
उत्तर: e = Blv
प्रश्न 5: स्वप्रेरकत्व की SI इकाई क्या है?
उत्तर: हेनरी (H)
प्रश्न 6: प्रेरक में संचित ऊर्जा का सूत्र क्या है?
उत्तर: U = ½LI²
प्रश्न 7: AC जनित्र किस सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर: विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर।
प्रश्न 8: अन्योन्य प्रेरण में कितनी कुंडलियाँ मुख्य रूप से शामिल होती हैं?
उत्तर: दो कुंडलियाँ।
प्रश्न 9: फ्लक्स अधिकतम कब होता है?
उत्तर: जब चुंबकीय क्षेत्र और सतह का अभिलंब एक ही दिशा में हों।
प्रश्न 10: यदि किसी कुंडली के फेरों की संख्या बढ़ाई जाए तो समान फ्लक्स परिवर्तन के लिए प्रेरित emf पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: प्रेरित emf बढ़ जाएगा।
★ परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ
i. फ्लक्स के सूत्र में θ को सतह और B के बीच का कोण मान लेना। यहाँ θ B और सतह के अभिलंब के बीच का कोण है।
ii. लेंज के नियम में ऋणात्मक चिन्ह को केवल गणितीय चिन्ह समझ लेना। यह प्रेरित emf की दिशा से संबंधित है।
iii. e = Blv को हर स्थिति में लगा देना। कोण होने पर e = Blv sin θ का ध्यान रखें।
iv. हेनरी और वेबर की इकाइयों को आपस में बदल देना।
v. AC जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा और विद्युत ऊर्जा के रूपांतरण की दिशा भूल जाना।
★ याद रखने की आसान कड़ी
फ्लक्स बदला → emf उत्पन्न हुआ → लेंज ने दिशा बताई → परिपथ बंद हुआ तो धारा बही।
इसी विचार से इस पूरे अध्याय को जोड़कर पढ़ने पर विद्युतचुम्बकीय प्रेरण काफी आसान हो जाता है।
अध्याय का सार
इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण विचार यह है कि बदलता हुआ चुंबकीय फ्लक्स विद्युत प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। फैराडे का नियम इस प्रेरित emf का परिमाण बताता है, जबकि लेंज का नियम उसकी दिशा समझने में सहायता करता है। इसी आधार पर गतिज emf, स्वप्रेरण, अन्योन्य प्रेरण और AC जनित्र जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत समझे जाते हैं।