अध्याय 3 : रासायनिक बलगतिकी ( Chemical Kinetics )

UP Board Class 12 Chemistry Chapter 3 Chemical Kinetics 2027 की तैयारी के लिए यहाँ Topper Notes, महत्वपूर्ण प्रश्न, PYQ Questions और Online Quiz उपलब्ध हैं। यह सामग्री UP Board Class 12 Chemistry परीक्षा की तैयारी में आपकी मदद  करेगी।

अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

1. रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics)

रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसमें रासायनिक अभिक्रिया के वेग, उसे प्रभावित करने वाले कारकों तथा अभिक्रिया की क्रियाविधि का अध्ययन किया जाता है, रासायनिक बलगतिकी कहलाती है।

2. अभिक्रिया का वेग (Rate of Reaction)

किसी अभिक्रिया में अभिकारक की सांद्रता में कमी या उत्पाद की सांद्रता में वृद्धि की दर को अभिक्रिया का वेग कहते हैं।

3. औसत वेग (Average Rate)

किसी निश्चित समय-अंतराल में सांद्रता में हुए परिवर्तन और उस समय-अंतराल के अनुपात को औसत वेग कहते हैं।

4. तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Rate)

किसी विशेष क्षण पर अभिक्रिया के वेग को तात्क्षणिक वेग कहते हैं।

5. वेग नियम (Rate Law)

अभिक्रिया के वेग और अभिकारकों की सांद्रता के बीच गणितीय संबंध को वेग नियम कहते हैं।

6. अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction)

वेग नियम में उपस्थित सांद्रता पदों की घातों के योग को अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।

7. आण्विकता (Molecularity)

किसी प्राथमिक अभिक्रिया के एक चरण में भाग लेने वाले अभिकारक कणों की संख्या को उस चरण की आण्विकता कहते हैं।

8. दर स्थिरांक (Rate Constant)

जब सभी अभिकारकों की सांद्रता 1 mol L⁻¹ हो, तब वेग नियम में वेग के बराबर प्राप्त होने वाले स्थिरांक को दर स्थिरांक कहते हैं।

9. अर्ध-आयु (Half-life)

किसी अभिकारक की प्रारम्भिक सांद्रता को आधा होने में लगा समय उसकी अर्ध-आयु कहलाता है।

10. सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)

अभिक्रिया को प्रारम्भ करने के लिए अभिकारक अणुओं को प्राप्त करनी पड़ने वाली न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा कहते हैं।

11. संघट्ट सिद्धांत (Collision Theory)

इस सिद्धांत के अनुसार अभिक्रिया तभी होती है जब अभिकारक कण आपस में प्रभावी संघट्ट करें और उनके पास आवश्यक ऊर्जा तथा उचित दिशा हो।

1. अभिक्रिया का वेग (Rate of Reaction)

परिभाषा

किसी रासायनिक अभिक्रिया में समय के साथ अभिकारकों की सांद्रता घटती है या उत्पादों की सांद्रता बढ़ती है। सांद्रता में होने वाले इस परिवर्तन की समय के साथ दर को अभिक्रिया का वेग कहते हैं।

सूत्र

यदि अभिक्रिया है:

A → B

तो,

औसत वेग = −Δ[A] / Δt

या

औसत वेग = Δ[B] / Δt

यहाँ ऋण चिह्न अभिकारक की सांद्रता घटने के कारण लगाया जाता है।

यह सूत्र क्या बताता है?

यह सूत्र बताता है कि निश्चित समय में किसी पदार्थ की सांद्रता कितनी तेजी से बदल रही है।

मुख्य बातें

1. अभिकारक के लिए वेग लिखते समय ऋण चिह्न लगाया जाता है।
2. उत्पाद के लिए वेग धनात्मक होता है।
3. वेग की सामान्य इकाई mol L⁻¹ s⁻¹ है।

छोटे उदाहरण

1. यदि किसी अभिकारक की सांद्रता तेजी से घटती है, तो अभिक्रिया तेज है।
2. दूध का खराब होना धीमी रासायनिक प्रक्रिया का उदाहरण है।
3. किसी अभिक्रिया में 10 सेकंड में सांद्रता 1 mol L⁻¹ से 0.5 mol L⁻¹ हो जाए, तो वेग निकाला जा सकता है।

Numerical 1

प्रश्न: किसी अभिक्रिया में A की सांद्रता 1.0 mol L⁻¹ से घटकर 0.6 mol L⁻¹ हो जाती है। समय 20 s है। औसत वेग ज्ञात कीजिए।

दिया है:

[A]₁ = 1.0 mol L⁻¹
[A]₂ = 0.6 mol L⁻¹
Δt = 20 s

सूत्र:

औसत वेग = −Δ[A] / Δt

= −(0.6 − 1.0) / 20

= 0.4 / 20

= 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

अतः

उत्तर:

अभिक्रिया का औसत वेग = 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

Numerical 2

प्रश्न: किसी उत्पाद की सांद्रता 0.2 mol L⁻¹ से बढ़कर 0.8 mol L⁻¹ हो जाती है और समय 30 s है। औसत वेग ज्ञात कीजिए।

औसत वेग = Δ[B] / Δt

= (0.8 − 0.2) / 30

= 0.6 / 30

= 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

अतः

उत्तर = 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

Numerical 3

प्रश्न: A की सांद्रता 2.0 mol L⁻¹ से 1.5 mol L⁻¹ हो जाती है। समय 25 s है।

औसत वेग = −(1.5 − 2.0) / 25

= 0.5 / 25

= 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

अतः

उत्तर = 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

Numerical 4

प्रश्न: किसी उत्पाद की सांद्रता 0.1 mol L⁻¹ से 0.5 mol L⁻¹ हो जाती है। समय 20 s है।

औसत वेग = (0.5 − 0.1) / 20

= 0.4 / 20

= 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

अतः

उत्तर = 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

2. अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कारक

परिभाषा

अभिक्रिया का वेग सभी परिस्थितियों में समान नहीं रहता। सांद्रता, तापमान, उत्प्रेरक तथा अभिकारकों की प्रकृति जैसे कारक अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं।

1. सांद्रता

अभिकारकों की सांद्रता बढ़ाने पर सामान्यतः संघट्टों की संख्या बढ़ती है और अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

2. तापमान

तापमान बढ़ाने पर अधिक अणुओं के पास आवश्यक ऊर्जा आ जाती है, इसलिए प्रभावी संघट्टों की संख्या बढ़ती है और वेग बढ़ता है।

3. उत्प्रेरक

उत्प्रेरक ऐसी वैकल्पिक क्रियाविधि उपलब्ध कराता है जिसमें सक्रियण ऊर्जा कम होती है।

4. अभिकारकों की प्रकृति

कुछ पदार्थ आसानी से अभिक्रिया करते हैं, जबकि कुछ पदार्थों की अभिक्रिया धीमी होती है।

मुख्य बातें

– सांद्रता बढ़ने पर सामान्यतः वेग बढ़ता है।
– तापमान बढ़ने पर सामान्यतः वेग बढ़ता है।
– उत्प्रेरक संतुलन की स्थिति को नहीं बदलता, बल्कि उसे जल्दी प्राप्त करने में मदद करता है।

छोटे उदाहरण

1. गर्म पानी में कई पदार्थ तेजी से घुलते हैं।
2. भोजन को ठंडा रखने पर उसके खराब होने की गति कम होती है।
3. उत्प्रेरक की उपस्थिति में कुछ अभिक्रियाएँ तेजी से होती हैं।

3. अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction)

परिभाषा

वेग नियम में अभिकारकों की सांद्रता के ऊपर लगी घातों के योग को अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।

यदि,

Rate = k[A]ᵐ[B]ⁿ

तो,

अभिक्रिया की कोटि = m + n

यह सूत्र क्या बताता है?

यह बताता है कि अभिक्रिया का वेग अभिकारकों की सांद्रता पर किस प्रकार निर्भर करता है।

उदाहरण

यदि,

Rate = k[A]²[B]

तो,

कोटि = 2 + 1 = 3

मुख्य बातें

1. कोटि शून्य, पूर्णांक या भिन्नात्मक भी हो सकती है।
2. कोटि प्रयोग द्वारा निर्धारित की जाती है।
3. समग्र अभिक्रिया के समीकरण से कोटि हमेशा सीधे नहीं बताई जा सकती।

Numerical 1

Rate = k[A]²[B]

कोटि = 2 + 1 = 3

अतः अभिक्रिया तृतीय कोटि की है।

Numerical 2

Rate = k[A]

कोटि = 1

अतः प्रथम कोटि

Numerical 3

Rate = k[A]⁰

कोटि = 0

अतः शून्य कोटि

Numerical 4

Rate = k[A]¹[B]²[C]¹

कोटि = 1 + 2 + 1

= 4

अतः चतुर्थ कोटि

4. आण्विकता (Molecularity)

परिभाषा

किसी प्राथमिक अभिक्रिया के एक चरण में भाग लेने वाले अभिकारक कणों की संख्या को उस चरण की आण्विकता कहते हैं।

उदाहरण

A → उत्पाद

आण्विकता = 1

A + B → उत्पाद

आण्विकता = 2

A + B + C → उत्पाद

आण्विकता = 3

मुख्य बातें

1. आण्विकता केवल प्राथमिक अभिक्रिया के लिए निर्धारित की जाती है।
2. यह हमेशा धनात्मक पूर्णांक होती है।
3. यह सामान्यतः 1, 2 या 3 होती है।

कोटि और आण्विकता में अंतर

कोटि| आण्विकता
वेग नियम से प्राप्त होती है| प्राथमिक चरण की अभिक्रिया से प्राप्त होती है
शून्य या भिन्नात्मक हो सकती है| शून्य या भिन्नात्मक नहीं होती
प्रयोग से निर्धारित की जाती है| प्राथमिक चरण के कणों की संख्या से निर्धारित होती है
समग्र अभिक्रिया के लिए बताई जा सकती है| केवल प्राथमिक चरण के लिए अर्थपूर्ण है

5. वेग नियम और दर स्थिरांक

परिभाषा

किसी अभिक्रिया के वेग को अभिकारकों की सांद्रता से जोड़ने वाले गणितीय संबंध को वेग नियम कहते हैं।

सामान्य रूप:

Rate = k[A]ᵐ[B]ⁿ

जहाँ k दर स्थिरांक है।

यह सूत्र क्या बताता है?

यह सूत्र बताता है कि अभिक्रिया का वेग अभिकारकों की सांद्रता बदलने पर किस प्रकार बदलेगा।

विशेष बातें

– k का मान किसी निश्चित तापमान पर स्थिर रहता है।
– तापमान बदलने पर k बदल सकता है।
– k की इकाई अभिक्रिया की कोटि पर निर्भर करती है।

Numerical 1

यदि,

Rate = k[A]

[A] = 2 mol L⁻¹ और k = 0.5 s⁻¹

तो,

Rate = 0.5 × 2

= 1 mol L⁻¹ s⁻¹

Numerical 2

Rate = k[A]²

k = 2 L mol⁻¹ s⁻¹
[A] = 0.5 mol L⁻¹

Rate = 2 × (0.5)²

= 2 × 0.25

= 0.5 mol L⁻¹ s⁻¹

Numerical 3

Rate = k[A][B]

k = 2 L mol⁻¹ s⁻¹
[A] = 0.2 mol L⁻¹
[B] = 0.5 mol L⁻¹

Rate = 2 × 0.2 × 0.5

= 0.2 mol L⁻¹ s⁻¹

Numerical 4

Rate = k[A]²[B]

k = 1 L² mol⁻² s⁻¹
[A] = 0.2 mol L⁻¹
[B] = 0.5 mol L⁻¹

Rate = 1 × (0.2)² × 0.5

= 0.04 × 0.5

= 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹

6. शून्य कोटि की अभिक्रिया (Zero Order Reaction)

परिभाषा

जिस अभिक्रिया का वेग अभिकारक की सांद्रता पर निर्भर नहीं करता, उसे शून्य कोटि की अभिक्रिया कहते हैं।

वेग नियम

Rate = k

व्युत्पत्ति (Derivation)

मान लें,

A → उत्पाद

शून्य कोटि के लिए,

−d[A]/dt = k

अर्थात्,

d[A] = −k dt

दोनों तरफ समाकलन करने पर,

[A]ₜ − [A]₀ = −kt

अतः,

[A]ₜ = [A]₀ − kt

यही शून्य कोटि की समाकलित वेग समीकरण है।

अंतिम सूत्र

[A]ₜ = [A]₀ − kt

या,

k = ([A]₀ − [A]ₜ) / t

अर्ध-आयु

जब,

[A]ₜ = [A]₀/2

तब,

[A]₀/2 = [A]₀ − kt₁/₂

अतः,

t₁/₂ = [A]₀ / 2k

मुख्य बातें

1. वेग = k होता है।
2. अर्ध-आयु प्रारम्भिक सांद्रता के समानुपाती होती है।
3. k की इकाई mol L⁻¹ s⁻¹ होती है।

Numerical 1

प्रश्न: [A]₀ = 1.0 mol L⁻¹, k = 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹ और t = 20 s है। [A]ₜ ज्ञात कीजिए।

[A]ₜ = [A]₀ − kt

= 1.0 − (0.02 × 20)

= 1.0 − 0.4

= 0.6 mol L⁻¹

Numerical 2

प्रश्न: [A]₀ = 0.8 mol L⁻¹ और [A]ₜ = 0.4 mol L⁻¹, t = 10 s है। k ज्ञात कीजिए।

k = ([A]₀ − [A]ₜ)/t

= (0.8 − 0.4)/10

= 0.04 mol L⁻¹ s⁻¹

Numerical 3

प्रश्न: [A]₀ = 2 mol L⁻¹ और k = 0.1 mol L⁻¹ s⁻¹ है। अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।

t₁/₂ = [A]₀/2k

= 2/(2 × 0.1)

= 10 s

Numerical 4

प्रश्न: [A]₀ = 1.2 mol L⁻¹ और k = 0.03 mol L⁻¹ s⁻¹ है। अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।

t₁/₂ = 1.2/(2 × 0.03)

= 1.2/0.06

= 20 s

7. प्रथम कोटि की अभिक्रिया (First Order Reaction)

परिभाषा

जिस अभिक्रिया का वेग किसी एक अभिकारक की सांद्रता की पहली घात के समानुपाती होता है, उसे प्रथम कोटि की अभिक्रिया कहते हैं।

वेग नियम

 Rate = k[A]

व्युत्पत्ति

मान लें,

 A → उत्पाद

तो,

 −d[A]/dt = k[A]

अर्थात्,

 −d[A]/[A] = k dt

समाकलन करने पर,

 ln([A]₀/[A]ₜ) = kt

या,

 k = (1/t) ln([A]₀/[A]ₜ)

लघुगणक को common logarithm में लिखने पर,

 k = (2.303/t) log([A]₀/[A]ₜ)

अंतिम सूत्र

 k = (2.303/t) log([A]₀/[A]ₜ)

अर्ध-आयु का सूत्र

प्रथम कोटि के लिए,

 t₁/₂ = 0.693/k

यह सूत्र क्या बताता है?

यह बताता है कि प्रथम कोटि की अभिक्रिया की दर स्थिरांक और अभिकारक के घटने के बीच क्या संबंध है।

मुख्य बातें

1. प्रथम कोटि में k की इकाई s⁻¹ होती है।
2. अर्ध-आयु प्रारम्भिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करती।
3. प्रथम कोटि के लिए t₁/₂ = 0.693/k होता है।

Numerical 1

प्रश्न: किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए k = 0.693 min⁻¹ है। अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।

 t₁/₂ = 0.693/k

 = 0.693/0.693

 = 1 min

Numerical 2

प्रश्न: k = 0.231 min⁻¹ है। अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।

 t₁/₂ = 0.693/0.231

 = 3 min

Numerical 3

प्रश्न: किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया में [A]₀ = 1 mol L⁻¹ और [A]ₜ = 0.25 mol L⁻¹ है। k = 0.0462 min⁻¹ है। समय ज्ञात कीजिए।

 k = (2.303/t) log([A]₀/[A]ₜ)

 t = (2.303/k) log(1/0.25)

 t = (2.303/0.0462) log 4

 log 4 = 0.602

 t ≈ 30 min

Numerical 4

प्रश्न: प्रथम कोटि की अभिक्रिया की अर्ध-आयु 10 min है। k ज्ञात कीजिए।

 k = 0.693/t₁/₂

 = 0.693/10

 = 0.0693 min⁻¹

8. अर्ध-आयु और प्रथम कोटि की अभिक्रिया

परिभाषा

किसी अभिकारक की प्रारम्भिक सांद्रता को आधा होने में लगने वाले समय को अर्ध-आयु कहते हैं।

प्रथम कोटि के लिए:

 t₁/₂ = 0.693/k

महत्वपूर्ण बात

प्रथम कोटि की अभिक्रिया में प्रारम्भिक सांद्रता बदलने पर भी अर्ध-आयु का मान नहीं बदलता, यदि तापमान और अन्य परिस्थितियाँ समान हों।

उदाहरण

यदि किसी अभिक्रिया की अर्ध-आयु 10 मिनट है:

पहली अर्ध-आयु के बाद = 50% शेष

दूसरी अर्ध-आयु के बाद = 25% शेष

तीसरी अर्ध-आयु के बाद = 12.5% शेष

Numerical 1

 t₁/₂ = 20 min

 k = 0.693/20

 = 0.03465 min⁻¹

Numerical 2

 k = 0.099 min⁻¹

 t₁/₂ = 0.693/0.099

 = 7 min

 Numerical 3

किसी पदार्थ की मात्रा 100 g है। एक अर्ध-आयु के बाद:

 = 50 g

Numerical 4

प्रारम्भिक मात्रा 80 g है। दो अर्ध-आयु के बाद:

 80 → 40 → 20 g

अतः शेष मात्रा = 20 g

9. सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)

परिभाषा

अभिकारक अणुओं को प्रभावी संघट्ट के लिए जितनी न्यूनतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, उसे सक्रियण ऊर्जा कहते हैं।

इसे Ea से दर्शाते हैं।

यह क्यों जरूरी है?

हर संघट्ट से अभिक्रिया नहीं होती। केवल वे कण प्रभावी अभिक्रिया कर सकते हैं जिनके पास आवश्यक ऊर्जा और उचित दिशा होती है।

मुख्य बातें

1. तापमान बढ़ाने पर अधिक कण आवश्यक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
2. उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा को कम करता है।
3. सक्रियण ऊर्जा अधिक होने पर सामान्यतः अभिक्रिया धीमी होती है।

छोटे उदाहरण

1. लकड़ी अपने-आप सामान्य तापमान पर आसानी से नहीं जलती; प्रारम्भ करने के लिए ऊर्जा चाहिए।
2. गैस को जलाने के लिए चिंगारी प्रारम्भिक ऊर्जा देती है।
3. उत्प्रेरक अभिक्रिया के लिए कम ऊर्जा वाला मार्ग उपलब्ध करा सकता है।

आरहेनियस समीकरण (Arrhenius Equation)

परिभाषा

तापमान और दर स्थिरांक के बीच संबंध बताने वाले समीकरण को Arrhenius समीकरण कहते हैं।

सूत्र

 k = A e⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ

जहाँ,

 k = दर स्थिरांक
 A = Arrhenius स्थिरांक
 Ea = सक्रियण ऊर्जा
 R = गैस स्थिरांक
 T = परम तापमान

दो तापमानों के लिए:

 log(k₂/k₁) = Ea / (2.303R) × (T₂ − T₁)/(T₁T₂)

यह सूत्र क्या बताता है?

तापमान बढ़ने पर सामान्यतः दर स्थिरांक बढ़ता है। इसलिए रासायनिक अभिक्रिया का वेग भी बढ़ सकता है।

मुख्य बातें

1. T को Kelvin में लेना चाहिए।
2. Ea की इकाई J mol⁻¹ होने पर R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ लें।
3. तापमान और k का संबंध घातीय होता है।

Numerical 1

यदि Ea = 50 kJ mol⁻¹ है, तो इसे J mol⁻¹ में बदलें।

 Ea = 50 × 1000

= 50000 J mol⁻¹

Numerical 2

यदि T = 27°C है, तो Kelvin तापमान:

 T = 27 + 273

= 300 K

Numerical 3

यदि T = 127°C है:

 T = 127 + 273

= 400 K

Numerical 4

यदि k₁ = 2 s⁻¹ और k₂ = 8 s⁻¹ है, तो:

 k₂/k₁ = 8/2

= 4

अतः,

 log(k₂/k₁) = log 4

 ≈ 0.602

 इस मान को Arrhenius समीकरण में रखकर सक्रियण ऊर्जा निकाली जा सकती है, यदि T₁ और T₂ दिए गए हों।

11. संघट्ट सिद्धांत (Collision Theory)

परिभाषा

संघट्ट सिद्धांत के अनुसार अभिक्रिया तभी होती है जब अभिकारक कण प्रभावी रूप से टकराएँ। प्रभावी संघट्ट के लिए पर्याप्त ऊर्जा और उचित दिशा आवश्यक होती है।

मुख्य बातें

1. सभी संघट्ट प्रभावी नहीं होते।
2. आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा से संबंधित होती है।
3. उचित अभिविन्यास भी अभिक्रिया के लिए जरूरी हो सकता है।

छोटे उदाहरण

1. दो गेंदों के टकराने से हर बार कोई विशेष परिणाम नहीं मिलता।
2. रासायनिक कणों में भी हर टक्कर से उत्पाद नहीं बनता।
3. तापमान बढ़ाने पर प्रभावी संघट्टों की संख्या बढ़ सकती है।

12. अभिक्रिया की कोटि की पहचान के आसान तरीके

शून्य कोटि

 Rate = k

अर्ध-आयु:

 t₁/₂ = [A]₀/2k

प्रथम कोटि

Rate = k[A]

अर्ध-आयु:

 t₁/₂ = 0.693/k

प्रथम कोटि में विशेष पहचान

यदि समय के साथ अभिकारक की मात्रा आधी-आधी होती जाती है और प्रत्येक आधा होने में समान समय लगता है, तो यह प्रथम कोटि की विशेष पहचान हो सकती है।

13. कोटि और आण्विकता में महत्वपूर्ण अंतर

1. कोटि वेग नियम से प्राप्त होती है।

2. आण्विकता प्राथमिक चरण में भाग लेने वाले कणों की संख्या है।

3. कोटि शून्य या भिन्नात्मक हो सकती है।

4. आण्विकता शून्य या भिन्नात्मक नहीं होती।

5. कोटि प्रयोग द्वारा निर्धारित की जाती है।

6. आण्विकता प्राथमिक अभिक्रिया के चरण से निर्धारित होती है।

अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

 1. रासायनिक बलगतिकी क्या है?

 2. अभिक्रिया का वेग किसे कहते हैं?

 3. दर स्थिरांक क्या है?

 4. अभिक्रिया की कोटि क्या है?

 5. आण्विकता क्या है?

 6. सक्रियण ऊर्जा क्या है?

 7. अर्ध-आयु किसे कहते हैं?

 8. प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग नियम लिखिए।

 9. शून्य कोटि की अभिक्रिया का वेग नियम लिखिए।

 10. Arrhenius समीकरण लिखिए।

उत्तर

1. रासायनिक अभिक्रियाओं के वेग और उसे प्रभावित करने वाले कारकों के अध्ययन को रासायनिक बलगतिकी कहते हैं।

2. सांद्रता में प्रति इकाई समय होने वाले परिवर्तन को अभिक्रिया का वेग कहते हैं।

3. वेग नियम में प्रयुक्त स्थिरांक को दर स्थिरांक कहते हैं।

4. वेग नियम में सांद्रता पदों की घातों के योग को अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।

5. प्राथमिक अभिक्रिया के एक चरण में भाग लेने वाले कणों की संख्या आण्विकता कहलाती है।

6. अभिक्रिया के लिए आवश्यक न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा कहते हैं।

7. प्रारम्भिक सांद्रता को आधा करने में लगा समय अर्ध-आयु कहलाता है।

8. Rate = k[A]

9. Rate = k

10. k = A e⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ

महत्वपूर्ण संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1

प्रथम कोटि की अभिक्रिया की अर्ध-आयु 20 मिनट है। दर स्थिरांक ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

 k = 0.693/20

 = 0.03465 min⁻¹

प्रश्न 2

शून्य कोटि की अभिक्रिया में [A]₀ = 1.0 mol L⁻¹, k = 0.05 mol L⁻¹ s⁻¹ तथा t = 10 s है। [A]ₜ ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

 [A]ₜ = [A]₀ − kt

= 1.0 − 0.05 × 10

= 0.5 mol L⁻¹

प्रश्न 3

Rate = k[A]² में [A] को दोगुना करने पर वेग कितने गुना होगा?

नया वेग:

 Rate’ = k(2[A])²

= 4k[A]²

अतः वेग 4 गुना हो जाएगा।

प्रश्न 4

Rate = k[A] में [A] को तीन गुना करने पर वेग कितना होगा?

 Rate’ = k(3[A])

= 3k[A]

अतः वेग 3 गुना होगा।

प्रश्न 5

यदि किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया का k = 0.0693 min⁻¹ है, तो अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।

 t₁/₂ = 0.693/0.0693

= 10 min

अध्याय के कुल महत्वपूर्ण सूत्र

1. औसत वेग = −Δ[A] / Δt

2. उत्पाद के लिए,
औसत वेग = Δ[B] / Δt

3. सामान्य वेग नियम:

 Rate = k[A]ᵐ[B]ⁿ

4. अभिक्रिया की कोटि:

 Order = m + n

5. शून्य कोटि:

 Rate = k

6. शून्य कोटि की समाकलित समीकरण:

  [A]ₜ = [A]₀ − kt

7. शून्य कोटि की अर्ध-आयु:

 t₁/₂ = [A]₀ / 2k

8. प्रथम कोटि:

 Rate = k[A]

9. प्रथम कोटि की समाकलित समीकरण:

 k = (2.303/t) log([A]₀/[A]ₜ)

10. प्रथम कोटि की अर्ध-आयु:

 t₁/₂ = 0.693/k

11. Arrhenius समीकरण:

 k = A e⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ

12. दो तापमानों के लिए:

 log(k₂/k₁) = Ea / (2.303R) × (T₂ − T₁)/(T₁T₂)

त्वरित पुनरावृत्ति

1. रासायनिक बलगतिकी में अभिक्रिया के वेग का अध्ययन किया जाता है।

2. अभिक्रिया का वेग सांद्रता में समय के साथ परिवर्तन से पता चलता है।

3. सांद्रता, तापमान और उत्प्रेरक वेग को प्रभावित कर सकते हैं।

4. वेग नियम में सांद्रता की घातों का योग अभिक्रिया की कोटि देता है।

5. आण्विकता प्राथमिक अभिक्रिया के एक चरण में भाग लेने वाले कणों की संख्या है।

6. शून्य कोटि में Rate = k होता है।

7. प्रथम कोटि में Rate = k[A] होता है।

8. प्रथम कोटि के लिए t₁/₂ = 0.693/k होता है।

9. सक्रियण ऊर्जा अभिक्रिया के लिए आवश्यक न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा से संबंधित है।

10. तापमान बढ़ने पर सामान्यतः दर स्थिरांक बढ़ता है।

11. उत्प्रेरक कम सक्रियण ऊर्जा वाला वैकल्पिक मार्ग देता है।

12. Arrhenius समीकरण तापमान और दर स्थिरांक का संबंध बताता है।

जरूरी बातें

– तापमान को Arrhenius समीकरण में Kelvin में लेना न भूलें।

– प्रथम कोटि की अर्ध-आयु का सूत्र 0.693/k है।

– शून्य कोटि और प्रथम कोटि की अर्ध-आयु के सूत्रों को आपस में न मिलाएँ।

– अभिकारक के वेग में ऋण चिह्न इसलिए आता है क्योंकि उसकी सांद्रता घटती है।

– उत्पाद की सांद्रता बढ़ती है, इसलिए उसके लिए वेग धनात्मक होता है।

– दर स्थिरांक की इकाई अभिक्रिया की कोटि पर निर्भर करती है।

– कोटि और आण्विकता को समान न समझें।

– हर संघट्ट से अभिक्रिया नहीं होती; प्रभावी संघट्ट आवश्यक है।

– उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा को कम करता है, लेकिन अभिक्रिया के साम्य स्थिरांक को नहीं बदलता।

– Numerical में दिए गए units को पहले एक समान करना सबसे जरूरी है।

अंतिम Self-Test

1. रासायनिक बलगतिकी की परिभाषा लिखिए।

2. औसत वेग और तात्क्षणिक वेग में अंतर बताइए।

3. अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कोई तीन कारक लिखिए।

4. अभिक्रिया की कोटि किसे कहते हैं?

5. आण्विकता की परिभाषा लिखिए।

6. शून्य कोटि की समाकलित वेग समीकरण लिखिए।

7. प्रथम कोटि की समाकलित वेग समीकरण लिखिए।

8. प्रथम कोटि की अर्ध-आयु का सूत्र लिखिए।

9. सक्रियण ऊर्जा क्या है?

10. Arrhenius समीकरण लिखिए।

11. Rate = k[A]²[B] के लिए अभिक्रिया की कोटि ज्ञात कीजिए।

12. प्रथम कोटि की अभिक्रिया की अर्ध-आयु 5 मिनट है। k ज्ञात कीजिए।

13. शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए [A]₀ = 1 mol L⁻¹ और k = 0.02 mol L⁻¹ s⁻¹ है। 10 s बाद [A] ज्ञात कीजिए।

14. यदि Rate = k[A]² है और [A] को दोगुना कर दिया जाए, तो वेग कितने गुना होगा?

15. प्रथम कोटि की अभिक्रिया में अर्ध-आयु प्रारम्भिक सांद्रता पर निर्भर क्यों नहीं करती?

Self-Test के उत्तर

1. रासायनिक अभिक्रियाओं के वेग और उसे प्रभावित करने वाले कारकों के अध्ययन को रासायनिक बलगतिकी कहते हैं।

2. औसत वेग निश्चित समय-अंतराल के लिए और तात्क्षणिक वेग किसी विशेष क्षण के लिए होता है।

3. सांद्रता, तापमान और उत्प्रेरक।

4. वेग नियम में सांद्रता पदों की घातों के योग को अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।

5. प्राथमिक अभिक्रिया के एक चरण में भाग लेने वाले कणों की संख्या आण्विकता कहलाती है।

6. [A]ₜ = [A]₀ − kt

7. k = (2.303/t) log([A]₀/[A]ₜ)

8. t₁/₂ = 0.693/k

9. अभिक्रिया के लिए आवश्यक न्यूनतम अतिरिक्त ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा कहते हैं।

10. k = A e⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ

11. कोटि = 2 + 1 = 3

12. k = 0.693/5 = 0.1386 min⁻¹

13. [A]ₜ = 1 − (0.02 × 10) = 0.8 mol L⁻¹

14. वेग 4 गुना होगा।

15. क्योंकि प्रथम कोटि में t₁/₂ = 0.693/k होता है और इसमें प्रारम्भिक सांद्रता उपस्थित नहीं है।

अध्याय का अंतिम सार

रासायनिक बलगतिकी हमें यह समझाती है कि कोई रासायनिक अभिक्रिया कितनी तेजी से होती है और उसकी गति किन परिस्थितियों में बदलती है। इस अध्याय में सबसे अधिक ध्यान अभिक्रिया के वेग, वेग नियम, कोटि, आण्विकता, शून्य एवं प्रथम कोटि की समाकलित समीकरण, अर्ध-आयु, सक्रियण ऊर्जा और Arrhenius समीकरण पर देना चाहिए। Numerical करते समय सही formula चुनना, units को एक समान रखना और calculation को क्रम से लिखना सबसे जरूरी है।

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