UP Board Class 12 Hindi Padhyansh
1. अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
पवन-दूतिका
(1) मेरे प्यारे नव जलद से कंज नेत्रवाले।
जाके आये न मधुबन से और न भेजा सँदेसा॥
मैं रो-रो के प्रिय-विरह से बावली हो रही हूँ।
जाके मेरी सब दुःख-कथा श्याम को तू सुना दे॥
ज्यों ही तेरा भवन तज तू अल्प आगे बढ़ेगी।
शोभावाली सुखद कितनी मंजु कुंजें मिलेंगी॥
प्यारी छाया मृदुल सुर से मोह लेंगी तुझे वे।
तो भी मेरा दुःख लख वहाँ जा न विश्राम लेना॥
[माशि०प० पाठ्यपुस्तक; 2022] [सु०ना०] [2022] [2024]
प्रसंग—राधा पवन को दूतिका बनाकर उसे श्रीकृष्ण की पहचान बताने के साथ-साथ अपना सन्देश देती हुई कहती है—
व्याख्या—राधिका पवन से कहती है कि नखों में मेघ जैसी शोभावाले और कमल जैसे नेत्रोंवाले मेरे प्रिय श्रीकृष्ण मथुरा जाकर वापस नहीं आए हैं और न ही उन्होंने वहाँ से कोई सन्देश भेजा है! पवन! तुम पर मेरा यह सन्देश है कि मैं उनके विरह में रो-रोकर पागल हो रही हूँ। तू शीघ्र उनके पास चली जा और मेरे दुःख की सम्पूर्ण कथा उन्हें सुना दे।
राधिका पवन-दूतिका से कहती है कि जैसे ही मेरा घर त्याग कर तू थोड़ा-सा आगे बढ़ेगी, तुझे अत्यन्त सुन्दर तथा सुखद अनेक कुंज दिखाई देंगे। उनकी छाया बड़ी शीतल तथा आकर्षक है। पक्षियों के चहकने से उनसे अत्यन्त मधुर ध्वनि निकलती है। अपने इन गुणों के कारण वे तुझे मोहित कर लेंगी, लेकिन फिर भी मेरे दुःख को ध्यान करके तू वहाँ रुकना मत।
काव्य-सौन्दर्य—(i) राधिका ने प्रकृति के माध्यम से अपनी पीड़ा को वाणी दी है। (ii) भाषा—खड़ीबोली। (3) अलंकार—उपमा। (4) रस—वियोग शृंगार। (5) शब्दशक्ति—अभिधा। (6) गुण—प्रसाद। (7) छन्द—मन्दाक्रान्ता।
प्रश्न
(क) राधा किसके द्वारा कृष्ण को सन्देश भिजवा रही है? [2020]
(ख) कृष्ण का सौन्दर्य कैसा है? [2020]
(ग) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। [2020, 22, 24]
(घ) राधा की मनोदशा का वर्णन कीजिए। [2020]
(ङ) उपर्युक्त पद्यांश से सम्बन्धित कविता का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए। [2020, 22]
अथवा प्रस्तुत पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(च) सन्देश-प्रेषिका ने ‘नव जलद से कंज नेत्रावाले’ शब्द किसके लिए प्रयोग किया है? [2022]
(छ) मधुबन जाकर किसने कोई सन्देश नहीं भेजा? [2022]
(ज) ‘बावली’ और ‘अल्प’ शब्दों का अर्थ लिखिए। [2022]
(झ) प्रस्तुत पद्यांश में प्रयुक्त रस तथा उसका स्थायीभाव लिखिए। [2024]
उत्तर
(क) राधा पवन-दूतिका के द्वारा कृष्ण को सन्देश भिजवाती है।
(ख) कृष्ण का सौन्दर्य नवीन मेघ के जैसा है। उनके नेत्र कमल के समान हैं।
(ग) रेखांकित अंश की व्याख्या के लिए उपर्युक्त व्याख्या के अन्तर्गत मोटे अक्षरों में छपा व्याख्यांश देखिए।
(घ) राधा की मनोदशा बावली जैसी हो गई है। (अर्थात् वह प्रिय-विरह में रो-रोकर पागल हो रही है।)
(ङ) पद्यांश का शीर्षक—‘पवन-दूतिका’। कवि का नाम—‘अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
(च) सन्देश-प्रेषिका ने ‘नव जलद से कंज नेत्रावाले’ शब्द का प्रयोग श्रीकृष्ण के लिए किया है।
(छ) मधुबन जाकर श्रीकृष्ण ने कोई सन्देश नहीं भेजा।
(ज) ‘बावली’ का अर्थ ‘पागल’ और ‘अल्प’ का अर्थ ‘थोड़ा’ है।
(झ) प्रस्तुत पद्यांश में वियोग शृंगार रस प्रयुक्त है तथा इसका स्थायीभाव रति है।
(2)
जाते-जाते अगर पथ में क्लान्त कोई दिखावे।
तो जा के सन्निकट उसकी क्लान्तियों को मिटाना॥
धीरे-धीरे परस करके गात उताप खोना।
सद्गन्धों से श्रमित जन को हर्षितों-सा बनाना॥
लज्जाशीला पथिक महिला जो कहीं दृष्टि आए।
होने देना विकल-वसना तो न तू सुन्दरी को॥
जो थोड़ी भी श्रमित हो गोद ले भान्ति खोना।
होठों की और कमल-मुख की म्लानताएँ मिटाना॥
कोई क्लान्ता कृषक-ललना खेत में जो दिखावे।
धीरे-धीरे परस उसकी क्लान्तियों को मिटाना॥
जाता कोई जलद यदि हो व्योम में तो उसे ला।
छाया द्वारा सुखित करना, तप्त भूतांगना को॥
लज्जाशीलता ॥ भूतांगना को ॥
[माशि०प० पाठ्यपुस्तक; 2023, 25 HK]
प्रसंग—राधिका श्रीकृष्ण के वियोग में दुःखी है और पवन को दूतिका बनाकर अपना सन्देश भेज रही है। अपने दुःख में भी उन्हें अन्य लोगों के दुःख की चिन्ता है।
व्याख्या—राधिका कहती हैं कि हे पवन! जाते-जाते यदि मार्ग में तुझे कोई थका हुआ, दुःखी और व्याकुल व्यक्ति दिखाई दे तो उसके निकट
जाकर उसके दुःख को दूर करना। धीरे-धीरे उसके शरीर का स्पर्श करके उसकी गर्मी को दूर करना और अपनी सुगन्धि से उस थके हुए व्यक्ति को प्रसन्न कर देना। राधिका पवन को समझाती हुई कहती है कि हे पवन! यदि मार्ग में तुझे कोई लज्जाशीला स्त्री दिखाई दे तो तू उसके वस्त्रों को मत उड़ाना। यदि वह थोड़ी-सी भी थकी प्रतीत हो तो उसे अपनी गोद में लेकर उसकी थकावट को दूर कर देना तथा उसके होठों तथा कमल जैसे मुख की मलिनता को अपनी शीतलता से दूर कर देना।
हे पवन! यदि खेत पर कोई थकी हुई किसान-स्त्री दिखाई दे तो धीरे-धीरे स्पर्श कर उसकी सम्पूर्ण थकावट को दूर कर देना। यदि आकाश में कोई मेघ-खण्ड जा रहा हो तो उसे उसके ऊपर लाकर छाया कर देना, जिससे उस स्त्री को शीतलता प्राप्त हो।
काव्य-सौन्दर्य—(1) यहाँ हरिऔधजी ने एक ओर राधिका की विरह-व्यथा का चित्रण किया है तो दूसरी ओर उन्हें समाज की पीड़ा से भी व्याकुल दिखाया है। (2) भाषा—खड़ीबोली। (3) अलंकार—मानवीकरण एवं उपमा। (4) रस—शृंगार का वियोग पक्ष। (5) शब्दशक्ति—लक्षणा। (6) गुण—प्रसाद। (7) छन्द—मन्दाक्रान्ता।
प्रश्नोत्तर
(क) राधा पवन को लज्जाशीला स्त्री के सम्बन्ध में क्या समझाती है?
अथवा राधिका पवन से लज्जाशीला महिला के प्रति कैसा आचरण अपनाने के लिए कहती है? [2023]
(ख) राधा के अनुसार पवन थकी स्त्री की थकावट कैसे दूर करेगा? [2023]
(ग) ‘कमल-मुख’ में कौन-सा अलंकार है? [2023]
(घ) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। [2023, 25 HK]
(ङ) कविता/पाठ का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए। [2023, 25 HK]
(च) उपर्युक्त पद्यांश किस महाकाव्य का अंश है? [2023]
(छ) ‘कृषक-ललना’ और ‘भूतांगना’ शब्दों का अर्थ लिखिए। [2023]
(ज) उपर्युक्त पद्यांश का प्रसंग लिखिए। [2025 HK]
(झ) राधा पवन-दूतिका से राह में मिलनेवाले पथिकों से कैसा व्यवहार करने को कहती है? [2025 HK]
(ञ) लज्जाशीला महिला के लिए राधा ने क्या कहा? [2025 HK]
उत्तर
(क) किसी लज्जाशीला स्त्री के सम्बन्ध में राधिका पवन से यह कहती हैं कि हे पवन! यदि तुझे मार्ग में कोई लज्जाशीला स्त्री दिखाई दे तो तू उसके वस्त्रों को मत उड़ाना और यदि वह थकी हो तो उसे अपनी गोद में लेकर उसकी थकावट दूर कर देना।
(ख) राधा के अनुसार पवन अपनी शीतलता के द्वारा किसी लज्जाशीला स्त्री के मुख की मलिनता (थकावट) को दूर करेगा।
(ग) उपमा अलंकार।
(घ) रेखांकित अंश की व्याख्या के लिए उपर्युक्त व्याख्या के अन्तर्गत मोटे अक्षरों में छपा व्याख्यांश देखिए।
(ङ) पाठ का शीर्षक—‘पवन-दूतिका’। कवि का नाम—अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
(च) उपर्युक्त पद्यांश ‘प्रियप्रवास’ महाकाव्य का अंश है।
(छ) ‘कृषक-ललना’ का अर्थ किसान की पत्नी और ‘भूतांगना’ का अर्थ थकी हुई स्त्री है।
(ज) उपर्युक्त पद्यांश की व्याख्या से पूर्व दिया प्रसंग देखिए।
(झ) राधा पवन-दूतिका से राह में मिलनेवाले पथिकों की थकान अपने कोमल स्पर्श से मिटाने के लिए कहती है।
(ञ) लज्जाशीला महिला के लिए राधा ने पवन-दूतिका से यह कहा कि तू अपनी चंचलता से वस्त्रों को उड़ाकर उसकी वेशभूषा को अव्यवस्थित करके उसे लज्जित मत करना।
(3)
हो प्यारे मंजु उपवन या वाटिका में खड़े हो।
छिद्रों में जा खगजित करना वेणु-सा कीचकों को॥
यों होवेगी सुरति उनको सर्व गोपांगना की।
जो है वंशी श्रवण-रुचि से दीर्घ उत्कण्ठ होतीं॥
ला के फूले कमलदल को श्याम के सामने ही।
थोड़ा-थोड़ा विपुल जल में व्यग्र हो-हो डुबोना॥
यों देना ऐ भगिनि जतला एक अम्भोजनी।
आँखों को विरह-विधुरा वारि में बोरती है॥
[माशि०प० पाठ्यपुस्तक; 2024]
प्रसंग—राधिका अपनी पवन-दूतिका को यह समझा रही है कि वह श्रीकृष्ण के पास जाकर वियोगिनी बाला (राधिका) के दुःख और सन्ताप को चतुरता के साथ व्यक्त करे।
व्याख्या—हे पवन! यदि प्रियतम सुन्दर उपवन या बगीचे में हों तो बाँसों के छेदों में जाकर उनसे बाँसुरी के समान बजना। इस प्रकार से उन्हें गोपियों का स्मरण होगा, जो प्रिय की बाँसुरी सुनने की इच्छा से बहुत व्याकुल हो जाया करती थीं।
हे पवन! प्रिय के सामने एक खिले हुए कमल-पुष्प को लाकर व्याकुलता के साथ थोड़ा-थोड़ा जल में डुबाना। हे बहिन! इस प्रकार उन्हें बतला देना कि कमल जैसे नेत्रोंवाली राधिका आपके वियोग में दुःखी होकर अपनी आँखों को अश्रुपूरित रखती है।
काव्य-सौन्दर्य—(1) राधिका ने संकेतों के माध्यम से श्रीकृष्ण को सन्देश पहुँचाने का चित्रण किया है। (2) भाषा—खड़ीबोली। (3) अलंकार—उपमा। (4) रस—शृंगार का वियोग पक्ष। (5) शब्दशक्ति—अभिधा और लक्षणा। (6) गुण—प्रसाद। (7) छन्द—मन्दाक्रान्ता।
प्रश्न
(क) पद्यांश के पाठ और कवि का नाम लिखिए।
अथवा उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए। [2024]
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। [2024]
(ग) उपर्युक्त पद्यांश के आधार पर राधा श्रीकृष्ण को पवन-दूतिका से अपनी याद किस प्रकार दिलाने को कहती है? [2024]
(घ) ‘भगिनी’ और ‘कीचक’ के शब्दार्थ लिखिए। [2024]
(ङ) ‘वेणु-सा’ शब्द में प्रयुक्त अलंकार लिखिए। [2024]
उत्तर
(क) प्रस्तुत पद्यांश द्विवेदी युग के प्रसिद्ध कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा लिखित महाकाव्य ‘प्रिय
प्रवास’ से हमारी हिन्दी की वाद्यपुस्तक के काव्य भाग में संकलित ‘पवन-दूतिका’ शीर्षक से उद्धृत है।
(ख) उपर्युक्त व्याख्या में मोटे अक्षरों से छपा व्याख्यांश देखिए।
(ग) उपर्युक्त पद्यांश के आधार पर राधा श्रीकृष्ण को पवन-दूतिका से अपनी याद दिलाने के लिए कहती है कि तू बाँसों के छिद्रों से गुजरते हुए बाँसुरी जैसा मधुर स्वर करना और किसी कमल पुष्प को लाकर श्याम के सामने ही धीरे-धीरे जल में डुबोना। इससे श्रीकृष्ण को हमारी याद आएगी कि गोपियाँ किस तरह मेरी बाँसुरी का स्वर सुनने के लिए व्याकुल हो जाती थीं और कमल जैसे नेत्रोंवाली राधिका मेरे विरह में अपनी आँखों को अश्रुपूरित किए होती।
(घ) ‘भगिनी’ का अर्थ बहिन तथा ‘कीचक’ का अर्थ ‘बाँस’ है।
(ङ) ‘वेणु-सा’ शब्द में उपमा अलंकार प्रयुक्त हुआ है।
(3)सूखी जाती मलिना लतिका जो धरा में पड़ी हो।
तो पाँवों के निकट उसको श्याम के ला गिराना॥
याँ सीधे से प्रकट करना प्रीति से वंचिता हो।
मेरा होना अति मलिन औ सूखते नित्य जाना॥
कोई पत्ता नवल तरु का पीत जो हो रहा हो।
तो प्यारे के दृग युगल के सामने ला उसे ही॥
धीरे-धीरे सम्हाल रखना और उन्हें यों बताना।
पीला होना प्रबल दुःख से प्रोषिता-सा हमारा॥ [2019]
प्रसंग—राधा पवन को दूतिका बनाकर श्रीकृष्ण के पास अपना सन्देश भेज रही हैं। इन पंक्तियों में श्रीकृष्ण के रूप-माधुर्य का चित्रण किया गया है।
व्याख्या—राधिका कहती हैं कि हे पवन! यदि तुझे धरती पर कोई सूखती हुई लता मिल जाए तो तू उसे श्रीकृष्ण के पाँवों के पास लाकर गिरा देना और स्पष्ट रूप से उन्हें बता देना कि प्रेम से रहित होकर मैं किस प्रकार नित्य ही सूखती तथा मलिन होती जा रही हूँ।
हे पवन! यदि किसी नए वृक्ष का कोई पत्ता पीला पड़ गया हो तो उस पीले पत्ते को प्रिय के दोनों नेत्रों के सामने धीरे से रख देना और उन्हें बताना कि उसी प्रकार मैं (राधिका) भी प्रोषितपतिका नायिका के समान पीली पड़ती जा रही हूँ।
काव्य-सौन्दर्य—(1) राधिका ने प्रकृति के माध्यम से अपनी पीड़ा को वाणी दी है। (2) भाषा—खड़ीबोली। (3) अलंकार—उपमा। (4) रस—वियोग शृंगार। (5) शब्दशक्ति—अभिधा और लक्षणा। (6) गुण—प्रसाद। (7) छन्द—मन्दाक्रान्ता।
प्रश्न
(क) राधा पवन से पृथ्वी पर पड़ी हुई लता को क्या करने के लिए कहती है? [2019]
(ख) सूखी लता से राधा कृष्ण को क्या सन्देश देना चाहती है? [2019]
अथवा राधा सूखी और मलिन लतिका के माध्यम से पवन दूतिका के द्वारा क्या सन्देश दिलाना चाहती है? [2019]
(ग) पीले पत्ते को श्रीकृष्ण के सामने लाने से राधा का क्या अभिप्राय है? [2019]
(घ) उपर्युक्त पद्यांश की रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए। [2019]
अथवा रेखांकित अंश का भावार्थ लिखिए। [2019, 25 HN]
(ङ) पाठ का शीर्षक तथा रचयिता के नाम का उल्लेख कीजिए। [2019, 25 HN]
(च) उपर्युक्त उद्धरणों में व्यक्त रस का नाम लिखकर उसके स्थायी भाव का उल्लेख कीजिए। [2019]
(छ) ‘प्रोषिता-सा’ में कौन-सा अलंकार है? [2019]
(ज) सूखी लता के माध्यम से नायिका अपने श्याम को क्या सन्देश देना चाहती है? [2025 HN]
(झ) कवि ने नायिका की शारीरिक स्थिति की तुलना किससे और क्यों की है? [2025 HN]
(ञ) प्रस्तुत पद्यांश की अलंकार-योजना पर प्रकाश डालिए। [2025 HN]
उत्तर
(क) राधा पवन से पृथ्वी पर पड़ी हुई लता को लाकर श्रीकृष्ण के पाँवों के निकट गिराने के लिए कहती है।
(ख) सूखी और मलिन लता से राधा कृष्ण को यह सन्देश देना चाहती है कि उनके विरह में उनकी प्रियतमा राधा का जीवन-रस भी इसी तरह सूख चुका है।
(ग) पीले पत्ते को श्रीकृष्ण के सामने लाने से अभिप्राय यह है कि राधा उसके माध्यम से कृष्ण के विरह में स्वयं के पीले पड़ने का सन्देश देना चाहती है।
(घ) रेखांकित अंश की व्याख्या के लिए व्याख्या के अन्तर्गत मोटे अक्षरों में छपा व्याख्यांश देखिए।
(ङ) पाठ का शीर्षक—’पवन-दूतिका’। रचयिता का नाम—अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’।
(च) उपर्युक्त उद्धरणों में व्यक्त रस में वियोग शृंगार रस है। इसका स्थायी भाव रति है।
(छ) ‘प्रोषिता-सा’ में उपमा अलंकार है। [2019]
(ज) सूखी लता के माध्यम से नायिका अपने श्याम को यह सन्देश देना चाहती है कि उससे बिछुड़कर उसकी दशा भी इस सूखी लता जैसी हो गई है।
(झ) कवि ने नायिका की शारीरिक स्थिति की तुलना सूखी लता से और पीली पत्ती से की है; क्योंकि सूखी लता की पत्तियों की चमक समाप्त हो जाती है और वे मुरझाकर मलिन पड़ जाती हैं। नायिका भी अपने जीवन के आधार नायक से बिछुड़कर मुरझा गई है, उसमें जीवन-रस समाप्त हो गया है।
(ञ) प्रस्तुत पद्यांश में उपमा अलंकार की सुन्दर योजना की गई है।

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