अध्याय 4 : गतिमान आवेश और चुम्बकत्व (Moving Charges and Magnetism)

अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)

1. चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field)

किसी चुम्बक या गतिमान आवेश के आसपास का वह क्षेत्र, जहाँ किसी अन्य गतिमान आवेश या चुम्बकीय पदार्थ पर चुम्बकीय प्रभाव अनुभव किया जा सके, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।

2. चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता

किसी बिंदु पर रखे गए एकांक उत्तरी ध्रुव पर लगने वाले बल को उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता के रूप में समझा जाता है।

3. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines)

चुम्बकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने के लिए खींची गई काल्पनिक रेखाएँ, जिनके किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्शरेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती है, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कहलाती हैं।

4. बायो-सावर्ट नियम (Biot–Savart Law)

किसी धारावाही चालक के बहुत छोटे धारा-तत्व के कारण किसी बिंदु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान धारा, धारा-तत्व की लंबाई, कोण की ज्या के समानुपाती तथा बिंदु की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

5. एम्पियर का परिपथीय नियम (Ampere’s Circuital Law)

किसी बंद पथ के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस पथ द्वारा घिरी कुल धारा के μ₀ गुने के बराबर होता है।

6. लॉरेंज़ बल (Lorentz Force)

विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्रों की उपस्थिति में किसी आवेशित कण पर लगने वाले कुल बल को लॉरेंज़ बल कहते हैं।

7. चुम्बकीय बल

चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर लगने वाले बल को चुम्बकीय बल कहते हैं।

8. धारा-वाहक चालक पर चुम्बकीय बल

चुम्बकीय क्षेत्र में रखे किसी धारावाही चालक पर चुम्बकीय क्षेत्र के कारण लगने वाला बल, चालक पर चुम्बकीय बल कहलाता है।

9. एक एम्पियर

जब समान्तर रखे दो बहुत लंबे और सीधे धारावाही चालकों में ऐसी धाराएँ प्रवाहित हों कि उनके बीच प्रति मीटर लंबाई पर बल 2 × 10⁻⁷ N हो, तब प्रत्येक चालक में प्रवाहित धारा को ऐतिहासिक रूप से एक एम्पियर कहा जाता है।

10. बलाघूर्ण (Torque)

किसी वस्तु को किसी अक्ष के चारों ओर घुमाने की प्रवृत्ति उत्पन्न करने वाले बल के प्रभाव को बलाघूर्ण कहते हैं।

11. चुम्बकीय द्विध्रुव (Magnetic Dipole)

दो समान परिमाण के विपरीत चुम्बकीय ध्रुवों से बनी व्यवस्था, जिनके बीच कुछ दूरी हो, चुम्बकीय द्विध्रुव कहलाती है।

12. चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment)

चुम्बकीय द्विध्रुव की ध्रुव-शक्ति और दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी के गुणनफल को उसका चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।

13. धारा-लूप का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण

किसी धारावाही लूप का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण उसके क्षेत्रफल और उसमें प्रवाहित धारा के गुणनफल के बराबर होता है।

14. परिनालिका (Solenoid)

एक लम्बी बेलनाकार कुंडली, जिसमें तार के बहुत से फेरे पास-पास लपेटे गए हों, परिनालिका कहलाती है।

15. गैल्वेनोमीटर (Galvanometer)

बहुत छोटी विद्युत धारा की उपस्थिति तथा उसकी दिशा ज्ञात करने वाला यंत्र गैल्वेनोमीटर कहलाता है।

16. धारा सुग्राहिता (Current Sensitivity)

गैल्वेनोमीटर में प्रति इकाई धारा के कारण उत्पन्न विक्षेप को उसकी धारा सुग्राहिता कहते हैं।

1. चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field)

परिभाषा

किसी चुम्बक या गतिमान विद्युत आवेश के आसपास ऐसा क्षेत्र होता है जहाँ किसी दूसरे चुम्बक, धारावाही चालक या गतिमान आवेश पर चुम्बकीय प्रभाव दिखाई दे सकता है। इस प्रभाव वाले क्षेत्र को चुम्बकीय क्षेत्र कहते हैं।

सूत्र

चुम्बकीय क्षेत्र का SI मात्रक:

B = टेस्ला (T)

तीन छोटे उदाहरण

1. चुम्बक के पास लोहे की कील आकर्षित होती है।
2. धारावाही तार के पास कम्पास की सुई मुड़ सकती है।
3. पृथ्वी के चारों ओर भी चुम्बकीय क्षेत्र पाया जाता है।

मुख्य बिंदु

– चुम्बकीय क्षेत्र एक सदिश राशि है।
– इसका SI मात्रक टेस्ला है।
– क्षेत्र की दिशा को चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं से दिखाया जाता है।
– क्षेत्र की तीव्रता बढ़ने पर क्षेत्र रेखाएँ अधिक पास-पास दिखाई जाती हैं।

विशेषताएँ

– चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
– किसी बिंदु पर क्षेत्र रेखा की स्पर्शरेखा क्षेत्र की दिशा बताती है।
– बंद चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं का कोई आरंभ या अंत नहीं होता।

2. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines)

परिभाषा

चुम्बकीय क्षेत्र को चित्र के रूप में समझाने के लिए खींची गई काल्पनिक रेखाओं को चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कहते हैं। किसी बिंदु पर इनकी स्पर्शरेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती है।

तीन छोटे उदाहरण

1. छड़ चुम्बक के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ बनाई जा सकती हैं।
2. कम्पास की सहायता से क्षेत्र की दिशा समझी जा सकती है।
3. दो चुम्बकों के बीच क्षेत्र रेखाओं का स्वरूप बदल जाता है।

मुख्य बिंदु

– चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र होती हैं।
– बाहर की ओर ये उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर जाती हैं।
– चुम्बक के अंदर इनकी दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है।
– दो क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।

सीमाएँ

ये रेखाएँ वास्तविक भौतिक वस्तुएँ नहीं हैं। इनका उपयोग केवल चुम्बकीय क्षेत्र को चित्र द्वारा समझाने के लिए किया जाता है।

3. बायो-सावर्ट नियम (Biot–Savart Law)

परिभाषा

किसी धारावाही चालक के बहुत छोटे धारा-तत्व के कारण किसी बिंदु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान धारा और धारा-तत्व की लंबाई के समानुपाती, उस बिंदु की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती तथा धारा-तत्व और बिंदु को जोड़ने वाली रेखा के बीच के कोण की ज्या के समानुपाती होता है।

सूत्र

dB = (μ₀/4π) × (I dl sin θ)/r²

जहाँ,

dB = सूक्ष्म चुम्बकीय क्षेत्र
I = धारा
dl = धारा-तत्व की लंबाई
r = बिंदु की दूरी
θ = dl और r के बीच का कोण
μ₀ = मुक्त आकाश की चुम्बकीय पारगम्यता

विशेष स्थितियाँ

यदि θ = 90°,

dB = (μ₀/4π) × (I dl)/r²

यदि θ = 0°,

dB = 0

तीन छोटे उदाहरण

1. धारा बढ़ाने पर चुम्बकीय क्षेत्र बढ़ता है।
2. दूरी बढ़ाने पर सूक्ष्म चुम्बकीय क्षेत्र घटता है।
3. θ = 0° होने पर इस तत्व का चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होता है।

मुख्य बिंदु

– बायो-सावर्ट नियम छोटे धारा-तत्व के कारण क्षेत्र ज्ञात करने में उपयोगी है।
– दिशा दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम से निर्धारित की जा सकती है।
– क्षेत्र दूरी के वर्ग के साथ घटता है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: I = 2 A, dl = 0.01 m, r = 0.1 m तथा θ = 90° है। μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T·m/A हो तो dB ज्ञात कीजिए।

दिया है:

I = 2 A
dl = 0.01 m
r = 0.1 m
sin 90° = 1

सूत्र:

dB = (μ₀/4π) × (I dl)/r²

हल:

dB = (4π × 10⁻⁷/4π) × (2 × 0.01)/(0.1)²

dB = 10⁻⁷ × 0.02/0.01

dB = 2 × 10⁻⁷ T

अतः

उत्तर: 2 × 10⁻⁷ T

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: यदि समान परिस्थितियों में धारा 2 A से 4 A कर दी जाए, तो dB पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सूत्र:

dB ∝ I

हल:

धारा दोगुनी होने पर dB भी दोगुना होगा।

अतः

उत्तर: dB दोगुना होगा।

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: यदि दूरी r को दोगुना कर दिया जाए, तो dB कितने गुना होगा?

सूत्र:

dB ∝ 1/r²

हल:

dB’ = dB/4

अतः

उत्तर: dB एक-चौथाई हो जाएगा।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: यदि θ = 0° हो, तो dB का मान क्या होगा?

सूत्र:

dB = (μ₀/4π) × (I dl sin θ)/r²

हल:

sin 0° = 0

इसलिए

dB = 0

अतः

उत्तर: dB = 0

4. सीधे धारावाही चालक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field Due to a Straight Current-Carrying Conductor)

परिभाषा

एक सीधे और बहुत लंबे धारावाही चालक के कारण उसके आसपास उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र चालक से दूरी के साथ बदलता है। चालक से r दूरी पर क्षेत्र का मान धारा के समानुपाती और दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

सूत्र

B = μ₀I/(2πr)

दिशा

दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम:

यदि दाहिने हाथ का अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई उँगलियाँ चालक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं।

तीन छोटे उदाहरण

1. सीधे तार में धारा बहने पर उसके चारों ओर वृत्ताकार क्षेत्र बनता है।
2. धारा बढ़ाने पर क्षेत्र बढ़ता है।
3. तार से दूर जाने पर क्षेत्र घटता है।

मुख्य बिंदु

B ∝ I

B ∝ 1/r

चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दाहिने हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: 5 A धारा वाले सीधे लंबे तार से 0.1 m दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

दिया है:

I = 5 A
r = 0.1 m
μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T·m/A

सूत्र:

B = μ₀I/(2πr)

हल:

B = (4π × 10⁻⁷ × 5)/(2π × 0.1)

B = 1 × 10⁻⁵ T

अतः

उत्तर: 1 × 10⁻⁵ T

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: I = 10 A और r = 0.2 m है। B ज्ञात कीजिए।

हल:

B = (4π × 10⁻⁷ × 10)/(2π × 0.2)

B = 1 × 10⁻⁵ T

अतः

उत्तर: 1 × 10⁻⁵ T

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: किसी तार से दूरी दोगुनी करने पर चुम्बकीय क्षेत्र कितना होगा?

सूत्र:

B ∝ 1/r

हल:

r दोगुना होने पर B आधा हो जाएगा।

अतः

उत्तर: B’ = B/2

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: यदि धारा 3 A से 9 A कर दी जाए और दूरी समान रहे, तो क्षेत्र कितने गुना होगा?

सूत्र:

B ∝ I

हल:

B’/B = 9/3 = 3

अतः

उत्तर: चुम्बकीय क्षेत्र 3 गुना होगा।

5. वृत्ताकार धारावाही कुंडली का चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field Due to Circular Current Loop)

परिभाषा

जब किसी वृत्ताकार कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके केंद्र तथा अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। कुंडली के केंद्र पर क्षेत्र का मान धारा और फेरों की संख्या के समानुपाती तथा कुंडली की त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

केंद्र पर सूत्र

B = μ₀NI/(2R)

जहाँ,

N = फेरों की संख्या
I = धारा
R = कुंडली की त्रिज्या

अक्ष पर किसी बिंदु के लिए

B = μ₀NIR² / [2(R² + x²)³ᐟ²]

तीन छोटे उदाहरण

1. कुंडली में धारा बढ़ाने पर केंद्र पर क्षेत्र बढ़ता है।
2. फेरों की संख्या बढ़ाने पर क्षेत्र बढ़ता है।
3. कुंडली की त्रिज्या बढ़ाने पर केंद्र का क्षेत्र घटता है।

मुख्य बिंदु

B ∝ N

B ∝ I

B ∝ 1/R

व्युत्पत्ति (Derivation): वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र

वृत्ताकार कुंडली के प्रत्येक छोटे धारा-तत्व के कारण केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

बायो-सावर्ट नियम से,

dB = (μ₀/4π) × (I dl sin 90°)/R²

क्योंकि,

sin 90° = 1

इसलिए,

dB = (μ₀I/4πR²) dl

पूरी कुंडली के लिए,

B = (μ₀I/4πR²) ∫dl

वृत्त की पूरी लंबाई,

∫dl = 2πR

अतः,

B = (μ₀I/4πR²) × 2πR

इसलिए,

B = μ₀I/(2R)

यदि कुंडली में N फेरे हों,

B = μ₀NI/(2R)

अतः वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र:

B = μ₀NI/(2R)

उपयोग

– विद्युत चुम्बक बनाने में।
– चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने में।
– प्रयोगशाला में नियंत्रित चुम्बकीय क्षेत्र प्राप्त करने में।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: N = 10, I = 2 A और R = 0.1 m है। केंद्र पर B ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

B = μ₀NI/(2R)

हल:

B = (4π × 10⁻⁷ × 10 × 2)/(2 × 0.1)

B = 4π × 10⁻⁵ T

अतः

उत्तर: 4π × 10⁻⁵ T

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: N = 5, I = 4 A और R = 0.2 m है। B ज्ञात कीजिए।

हल:

B = (4π × 10⁻⁷ × 5 × 4)/(2 × 0.2)

B = 2π × 10⁻⁵ T

अतः

उत्तर: 2π × 10⁻⁵ T

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: कुंडली के फेरों की संख्या दोगुनी करने पर केंद्र का क्षेत्र कितना होगा?

सूत्र:

B ∝ N

अतः

उत्तर: क्षेत्र दोगुना होगा।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: कुंडली की त्रिज्या दोगुनी कर दी जाए और बाकी राशियाँ समान रहें, तो केंद्र का क्षेत्र कितना होगा?

सूत्र:

B ∝ 1/R

अतः

उत्तर: क्षेत्र आधा हो जाएगा।

6. परिनालिका का चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field of Solenoid)

परिभाषा

बहुत से वृत्ताकार फेरों को पास-पास रखकर बनाई गई लम्बी बेलनाकार कुंडली को परिनालिका कहते हैं। लंबी परिनालिका के अंदर लगभग समान चुम्बकीय क्षेत्र प्राप्त होता है।

सूत्र

B = μ₀nI

जहाँ,

n = प्रति इकाई लंबाई फेरों की संख्या

यदि कुल फेरे N और लंबाई l हो,

n = N/l

अतः,

B = μ₀NI/l

तीन छोटे उदाहरण

1. परिनालिका में धारा प्रवाहित करने पर वह चुम्बक जैसा व्यवहार करती है।
2. फेरों की संख्या बढ़ाने पर क्षेत्र बढ़ता है।
3. धारा बढ़ाने पर परिनालिका का क्षेत्र बढ़ता है।

मुख्य बिंदु

B ∝ n

B ∝ I

लम्बी परिनालिका के अंदर क्षेत्र लगभग समान होता है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: n = 1000 m⁻¹ और I = 2 A है। परिनालिका के अंदर B ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

B = μ₀nI

हल:

B = 4π × 10⁻⁷ × 1000 × 2

B = 8π × 10⁻⁴ T

अतः

उत्तर: 8π × 10⁻⁴ T

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: n = 500 m⁻¹ और I = 4 A है। B ज्ञात कीजिए।

हल:

B = 4π × 10⁻⁷ × 500 × 4

B = 8π × 10⁻⁴ T

अतः

उत्तर: 8π × 10⁻⁴ T

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: धारा दोगुनी करने पर परिनालिका के अंदर क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: क्षेत्र दोगुना होगा।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: प्रति इकाई लंबाई फेरों की संख्या आधी करने पर क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: क्षेत्र आधा हो जाएगा।

7. गतिमान आवेश पर चुम्बकीय बल (Magnetic Force on a Moving Charge)

परिभाषा

जब कोई आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर चुम्बकीय बल लग सकता है। यह बल आवेश, वेग, चुम्बकीय क्षेत्र तथा वेग और क्षेत्र के बीच कोण पर निर्भर करता है।

सूत्र

F = qvB sin θ

यदि v और B परस्पर लम्बवत हों,

F = qvB

यदि v और B समान दिशा में हों,

F = 0

तीन छोटे उदाहरण

1. चुम्बकीय क्षेत्र में चल रहा इलेक्ट्रॉन मुड़ सकता है।
2. वेग और क्षेत्र लम्बवत होने पर बल अधिकतम होता है।
3. वेग और क्षेत्र समान दिशा में होने पर चुम्बकीय बल शून्य होता है।

मुख्य बिंदु

F अधिकतम तब होगा जब θ = 90°।

F = qvB

F = 0 तब होगा जब θ = 0° या 180°।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: q = 2 × 10⁻⁶ C, v = 3 × 10⁵ m/s और B = 0.2 T है। वेग क्षेत्र के लम्बवत है। बल ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

F = qvB

हल:

F = 2 × 10⁻⁶ × 3 × 10⁵ × 0.2

F = 0.12 N

अतः

उत्तर: 0.12 N

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: q = 1.6 × 10⁻¹⁹ C, v = 2 × 10⁶ m/s और B = 0.5 T है। बल ज्ञात कीजिए।

हल:

F = 1.6 × 10⁻¹⁹ × 2 × 10⁶ × 0.5

F = 1.6 × 10⁻¹³ N

अतः

उत्तर: 1.6 × 10⁻¹³ N

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: v और B के बीच कोण 30° है। यदि q = 2 C, v = 3 m/s और B = 4 T हो, तो बल ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

F = qvB sin 30°

हल:

F = 2 × 3 × 4 × 1/2

F = 12 N

अतः

उत्तर: 12 N

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: कोई आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र के समान दिशा में चलता है। उस पर चुम्बकीय बल कितना होगा?

हल:

θ = 0°

sin 0° = 0

F = 0

अतः

उत्तर: 0 N

8. लॉरेंज़ बल (Lorentz Force)

परिभाषा

जब किसी आवेशित कण पर विद्युत तथा चुम्बकीय दोनों क्षेत्र एक साथ कार्य करते हैं, तो उस पर लगने वाला कुल बल लॉरेंज़ बल कहलाता है।

सूत्र

F = q(E + v × B)

परिमाण के रूप में,

F = qE + qvB sin θ

जहाँ विद्युत और चुम्बकीय बलों की दिशाएँ परिस्थिति के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।

तीन छोटे उदाहरण

1. विद्युत क्षेत्र आवेश को गति देने का काम कर सकता है।
2. चुम्बकीय क्षेत्र गतिमान आवेश की दिशा बदल सकता है।
3. दोनों क्षेत्रों की उपस्थिति में कुल बल दोनों प्रभावों पर निर्भर करता है।

मुख्य बिंदु

– केवल विद्युत क्षेत्र हो तो F = qE
– केवल चुम्बकीय क्षेत्र हो तो F = qvB sin θ
– चुम्बकीय बल वेग की दिशा के लम्बवत होता है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: q = 2 C और E = 5 N/C है। केवल विद्युत क्षेत्र के कारण बल ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

F = qE

हल:

F = 2 × 5

F = 10 N

अतः

उत्तर: 10 N

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: q = 1 C, v = 3 m/s और B = 2 T है तथा v ⟂ B है। चुम्बकीय बल ज्ञात कीजिए।

हल:

F = qvB

F = 1 × 3 × 2

F = 6 N

अतः

उत्तर: 6 N

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: v और B समान दिशा में हैं। चुम्बकीय बल ज्ञात कीजिए।

अतः

उत्तर: 0 N

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: q = 2 C, E = 3 N/C तथा चुम्बकीय बल 4 N है और दोनों बल एक ही दिशा में हैं। कुल बल ज्ञात कीजिए।

हल:

F कुल = 3 × 2 + 4

F कुल = 10 N

अतः

उत्तर: 10 N

9. एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में आवेशित कण की गति (Motion of Charged Particle in Magnetic Field)

परिभाषा

यदि कोई आवेशित कण एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में इस प्रकार प्रवेश करता है कि उसका वेग चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत है, तो उस पर लगने वाला चुम्बकीय बल उसकी गति की दिशा के लम्बवत होता है। इसलिए कण वृत्ताकार पथ पर गति करता है।

सूत्र

qvB = mv²/r

अतः,

r = mv/(qB)

कोणीय वेग

ω = qB/m

आवर्तकाल

T = 2πm/(qB)

आवृत्ति

f = qB/(2πm)

तीन छोटे उदाहरण

1. इलेक्ट्रॉन चुम्बकीय क्षेत्र में वृत्ताकार पथ पर चल सकता है।
2. वेग बढ़ने पर वृत्त की त्रिज्या बढ़ती है।
3. चुम्बकीय क्षेत्र बढ़ने पर त्रिज्या घटती है।

मुख्य बिंदु

r ∝ v

r ∝ 1/B

आवर्तकाल वेग पर निर्भर नहीं करता।

व्युत्पत्ति (Derivation)

चुम्बकीय बल:

F = qvB

वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल:

F = mv²/r

दोनों बराबर करने पर,

qvB = mv²/r

एक v काटने पर,

qB = mv/r

इसलिए,

r = mv/(qB)

अब,

v = ωr

अतः,

ω = v/r

ω = qB/m

और,

T = 2π/ω

इसलिए,

T = 2πm/(qB)

अतः आवर्तकाल:

T = 2πm/(qB)

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: m = 2 × 10⁻²⁷ kg, v = 4 × 10⁵ m/s, q = 2 × 10⁻¹⁹ C और B = 0.5 T है। वृत्त की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

r = mv/(qB)

हल:

r = (2 × 10⁻²⁷ × 4 × 10⁵)/(2 × 10⁻¹⁹ × 0.5)

r = 8 × 10⁻³ m

अतः

उत्तर: 8 × 10⁻³ m

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: किसी कण का आवेश 2 × 10⁻¹⁹ C, द्रव्यमान 4 × 10⁻²⁷ kg और B = 1 T है। उसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

T = 2πm/(qB)

हल:

T = 2π × 4 × 10⁻²⁷/(2 × 10⁻¹⁹ × 1)

T = 4π × 10⁻⁸ s

अतः

उत्तर: 4π × 10⁻⁸ s

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: यदि वेग दोगुना कर दिया जाए और B समान रहे, तो त्रिज्या पर क्या प्रभाव होगा?

सूत्र:

r ∝ v

अतः

उत्तर: त्रिज्या दोगुनी होगी।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: यदि चुम्बकीय क्षेत्र दोगुना कर दिया जाए और वेग समान रहे, तो त्रिज्या पर क्या प्रभाव होगा?

सूत्र:

r ∝ 1/B

अतः

उत्तर: त्रिज्या आधी होगी।

10. एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल (Force on Current-Carrying Conductor)

परिभाषा

जब किसी धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो चालक में प्रवाहित धारा के कारण उस पर चुम्बकीय बल लग सकता है। बल की दिशा धारा और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों की दिशा पर निर्भर करती है।

सूत्र

 F = BIl sin θ

 B = चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field)
 I = विद्युत धारा (Electric Current)
 l = चालक की लंबाई (Length of Conductor)
 θ = धारा की दिशा और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच का कोण
 F = चुम्बकीय बल (Magnetic Force)

यदि चालक और क्षेत्र लम्बवत हों,

F = BIl

तीन छोटे उदाहरण

1. मोटर में इसी प्रभाव से चालक पर बल लगता है।
2. धारा बढ़ाने पर बल बढ़ता है।
3. चालक और क्षेत्र लम्बवत होने पर बल अधिकतम होता है।

मुख्य बिंदु

F अधिकतम = BIl

जब θ = 90°

F = 0 जब θ = 0°

दिशा

बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से ज्ञात की जा सकती है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: B = 0.5 T, I = 4 A और l = 2 m है। चालक क्षेत्र के लम्बवत है। बल ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

F = BIl

हल:

F = 0.5 × 4 × 2

F = 4 N

अतः

उत्तर: 4 N

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: B = 2 T, I = 3 A और l = 0.5 m है। बल ज्ञात कीजिए।

हल:

F = 2 × 3 × 0.5

F = 3 N

अतः

उत्तर: 3 N

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: B = 1 T, I = 2 A, l = 3 m तथा θ = 30° है। बल ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

F = BIl sin θ

हल:

F = 1 × 2 × 3 × 1/2

F = 3 N

अतः

उत्तर: 3 N

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: यदि चालक चुम्बकीय क्षेत्र के समान दिशा में हो, तो बल कितना होगा?

अतः

उत्तर: 0 N

11. दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच बल (Force Between Two Parallel Current-Carrying Conductors)

परिभाषा

जब दो लम्बे समान्तर चालकों में विद्युत धाराएँ प्रवाहित होती हैं, तो प्रत्येक चालक दूसरे द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के कारण बल अनुभव करता है।

सूत्र

F/l = μ₀I₁I₂/(2πd)

जहाँ,

d = दोनों चालकों के बीच दूरी

मुख्य बिंदु

– समान दिशा की धाराएँ एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं।
– विपरीत दिशाओं की धाराएँ एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं।
– बल धारा के गुणनफल के समानुपाती है।
– दूरी बढ़ने पर बल घटता है।

तीन छोटे उदाहरण

1. समान दिशा की धाराओं वाले तार आकर्षित होते हैं।
2. विपरीत दिशा की धाराओं वाले तार दूर हटते हैं।
3. धारा बढ़ाने पर दोनों तारों के बीच बल बढ़ता है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: दो चालकों में 2 A और 3 A की धाराएँ हैं तथा दूरी 0.1 m है। प्रति मीटर बल ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

F/l = μ₀I₁I₂/(2πd)

हल:

F/l = (4π × 10⁻⁷ × 2 × 3)/(2π × 0.1)

F/l = 1.2 × 10⁻⁵ N/m

अतः

उत्तर: 1.2 × 10⁻⁵ N/m

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: I₁ = 4 A, I₂ = 5 A और d = 0.2 m है। F/l ज्ञात कीजिए।

हल:

F/l = (4π × 10⁻⁷ × 4 × 5)/(2π × 0.2)

F/l = 2 × 10⁻⁵ N/m

अतः

उत्तर: 2 × 10⁻⁵ N/m

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: यदि दोनों धाराएँ दोगुनी कर दी जाएँ, तो बल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सूत्र:

F/l ∝ I₁I₂

अतः

उत्तर: बल 4 गुना होगा।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: यदि चालकों के बीच दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो बल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सूत्र:

F/l ∝ 1/d

अतः

उत्तर: बल आधा होगा।

12. धारा-लूप पर बलाघूर्ण (Torque on a Current Loop)

परिभाषा

जब किसी धारावाही कुंडली को एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो कुंडली की विपरीत भुजाओं पर लगने वाले बल उसे घुमाने की प्रवृत्ति पैदा कर सकते हैं। इस घूर्णन प्रभाव को बलाघूर्ण कहते हैं।

सूत्र

τ = NIAB sin θ

जहाँ,

N = फेरों की संख्या
I = धारा
A = कुंडली का क्षेत्रफल
B = चुम्बकीय क्षेत्र
θ = कुंडली के अभिलम्ब और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच कोण

अधिकतम बलाघूर्ण:

τₘₐₓ = NIAB

तीन छोटे उदाहरण

1. विद्युत मोटर में धारावाही कुंडली घूमती है।
2. धारा बढ़ाने पर बलाघूर्ण बढ़ता है।
3. कुंडली के फेरे बढ़ाने पर बलाघूर्ण बढ़ता है।

मुख्य बिंदु

τ अधिकतम तब होता है जब θ = 90°

τ = 0 जब θ = 0°

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: N = 10, I = 2 A, A = 0.01 m² और B = 0.5 T है। θ = 90° पर बलाघूर्ण ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

τ = NIAB

हल:

τ = 10 × 2 × 0.01 × 0.5

τ = 0.1 N·m

अतः

उत्तर: 0.1 N·m

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: N = 5, I = 4 A, A = 0.02 m² और B = 1 T है। अधिकतम बलाघूर्ण ज्ञात कीजिए।

हल:

τₘₐₓ = 5 × 4 × 0.02 × 1

τₘₐₓ = 0.4 N·m

अतः

उत्तर: 0.4 N·m

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: यदि धारा दोगुनी कर दी जाए, तो बलाघूर्ण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

अतः

उत्तर: बलाघूर्ण दोगुना होगा।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: यदि θ = 0° हो, तो बलाघूर्ण कितना होगा?

हल:

sin 0° = 0

τ = 0

अतः

उत्तर: 0 N·m

13. धारा-लूप का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment of Current Loop)

परिभाषा

किसी धारावाही कुंडली की चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता को उसके चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण से व्यक्त किया जाता है। यह धारा और कुंडली के क्षेत्रफल के गुणनफल के बराबर होता है।

सूत्र

M = IA

N फेरों के लिए:

M = NIA

दिशा

चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा दाहिने हाथ के नियम से निर्धारित की जाती है।

तीन छोटे उदाहरण

1. अधिक धारा वाली कुंडली का M अधिक होता है।
2. बड़े क्षेत्रफल वाली कुंडली का M अधिक होता है।
3. अधिक फेरों वाली कुंडली का M अधिक होता है।

मुख्य बिंदु

M ∝ I

M ∝ A

M ∝ N

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: I = 2 A और A = 0.05 m² है। M ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

M = IA

हल:

M = 2 × 0.05

M = 0.1 A·m²

अतः

उत्तर: 0.1 A·m²

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: N = 10, I = 2 A और A = 0.01 m² है। M ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

M = NIA

हल:

M = 10 × 2 × 0.01

M = 0.2 A·m²

अतः

उत्तर: 0.2 A·m²

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: धारा दोगुनी होने पर M पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

अतः

उत्तर: M दोगुना होगा।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: क्षेत्रफल तीन गुना करने पर M पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

अतः

उत्तर: M तीन गुना होगा।

14. चुम्बकीय द्विध्रुव पर बलाघूर्ण (Torque on Magnetic Dipole)

परिभाषा

जब किसी चुम्बकीय द्विध्रुव को एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बलाघूर्ण कार्य कर सकता है। यह द्विध्रुव को चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित करने की प्रवृत्ति रखता है।

सूत्र

τ = MB sin θ

तीन छोटे उदाहरण

1. कम्पास की सुई पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में घूमकर एक दिशा में आ जाती है।
2. चुम्बकीय द्विध्रुव को घुमाने के लिए बलाघूर्ण बदलता है।
3. M बढ़ाने पर बलाघूर्ण बढ़ सकता है।

मुख्य बिंदु

τₘₐₓ = MB

जब θ = 90°

τ = 0 जब θ = 0°

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: M = 2 A·m² और B = 0.5 T है। θ = 90° पर बलाघूर्ण ज्ञात कीजिए।

हल:

τ = MB

τ = 2 × 0.5

τ = 1 N·m

अतः

उत्तर: 1 N·m

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: M = 3 A·m², B = 2 T और θ = 30° है। बलाघूर्ण ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

τ = MB sin θ

हल:

τ = 3 × 2 × 1/2

τ = 3 N·m

अतः

उत्तर: 3 N·m

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: θ = 0° होने पर बलाघूर्ण ज्ञात कीजिए।

अतः

उत्तर: 0 N·m

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: यदि M दोगुना कर दिया जाए और बाकी राशियाँ समान रहें, तो बलाघूर्ण कितना होगा?

अतः

उत्तर: बलाघूर्ण दोगुना होगा।

15. गैल्वेनोमीटर (Galvanometer)

परिभाषा

गैल्वेनोमीटर एक संवेदनशील यंत्र है, जिसका उपयोग बहुत छोटी विद्युत धारा की उपस्थिति, दिशा तथा लगभग परिमाण का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसमें धारावाही कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में रखकर धारा के कारण उत्पन्न बलाघूर्ण का उपयोग किया जाता है।

सिद्धांत

धारावाही कुंडली पर चुम्बकीय क्षेत्र में बलाघूर्ण लगता है।

 τ = NIAB

स्प्रिंग का प्रतिरोधी बलाघूर्ण:

 τ = kθ

संतुलन पर,

NIAB = kθ

अतः,

 I = kθ/(NAB)

धारा सुग्राहिता

 Sᵢ = θ/I

इसलिए,

 Sᵢ = NAB/k

तीन छोटे उदाहरण

1. बहुत छोटी धारा का पता लगाने में गैल्वेनोमीटर उपयोगी है।
2. धारा की दिशा बदलने पर कुंडली का विक्षेप बदल जाता है।
3. गैल्वेनोमीटर को उचित परिवर्तन द्वारा अमीटर बनाया जा सकता है।

मुख्य बिंदु

– विक्षेप धारा के समानुपाती होता है।
– अधिक धारा सुग्राहिता का अर्थ है कि कम धारा से अधिक विक्षेप प्राप्त हो।
– गैल्वेनोमीटर को अमीटर और वोल्टमीटर में बदला जा सकता है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: k = 2 × 10⁻⁶ N·m/rad, θ = 0.1 rad, N = 100, A = 0.01 m² और B = 0.2 T है। धारा ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

 I = kθ/(NAB)

हल:

 I = (2 × 10⁻⁶ × 0.1)/(100 × 0.01 × 0.2)

 I = 1 × 10⁻⁵ A

अतः

उत्तर: 1 × 10⁻⁵ A

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: यदि किसी गैल्वेनोमीटर में 2 × 10⁻⁶ A धारा से 0.2 rad विक्षेप मिलता है, तो धारा सुग्राहिता ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

 Sᵢ = θ/I

हल:

 Sᵢ = 0.2/(2 × 10⁻⁶)

 Sᵢ = 1 × 10⁵ rad/A

अतः

उत्तर: 1 × 10⁵ rad/A

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: यदि समान परिस्थितियों में N को दोगुना कर दिया जाए, तो धारा सुग्राहिता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सूत्र:

 Sᵢ ∝ N

अतः

उत्तर: धारा सुग्राहिता दोगुनी होगी।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: यदि स्प्रिंग नियतांक k दोगुना हो जाए, तो धारा सुग्राहिता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सूत्र:

 Sᵢ ∝ 1/k

अतः

उत्तर: धारा सुग्राहिता आधी हो जाएगी। 

16. गैल्वेनोमीटर को अमीटर में बदलना (Conversion of Galvanometer into Ammeter)

परिभाषा

गैल्वेनोमीटर बहुत छोटी धारा के लिए बनाया जाता है। इसे बड़ी धारा मापने योग्य बनाने के लिए उसके समानांतर कम प्रतिरोध का शंट जोड़ा जाता है। इस प्रकार परिवर्तित यंत्र अमीटर कहलाता है।

सूत्र

यदि गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध G, पूर्ण विक्षेप धारा I₉ तथा अमीटर की सीमा I हो, तो शंट प्रतिरोध:

 S = I₉G/(I − I₉)

तीन छोटे उदाहरण

1. बड़ी धारा मापने के लिए शंट लगाया जाता है।
2. शंट गैल्वेनोमीटर के समानांतर जुड़ता है।
3. अमीटर का कुल प्रतिरोध बहुत कम रखा जाता है।

मुख्य बिंदु

– शंट समानांतर में लगाया जाता है।
– अमीटर को परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
– आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य माना जाता है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: G = 10 Ω, I₉ = 1 mA तथा I = 1 A है। शंट प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

दिया है:

 G = 10 Ω
 I₉ = 0.001 A
 I = 1 A

सूत्र:

S = I₉G/(I − I₉)

हल:

 S = (0.001 × 10)/(1 − 0.001)

 S = 0.01/0.999

 S ≈ 0.010 Ω

अतः

उत्तर: लगभग 0.010 Ω

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: G = 20 Ω, I₉ = 2 mA तथा I = 2 A है। S ज्ञात कीजिए।

हल:

 S = (0.002 × 20)/(2 − 0.002)

 S = 0.04/1.998

 S ≈ 0.020 Ω

अतः

उत्तर: लगभग 0.020 Ω

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: यदि गैल्वेनोमीटर की सीमा से अधिक धारा मापनी हो तो क्या किया जाता है?

अतः

उत्तर: गैल्वेनोमीटर के समानांतर कम प्रतिरोध का शंट जोड़ा जाता है।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: अमीटर को परिपथ में किस प्रकार जोड़ा जाता है?

अतः

उत्तर: अमीटर को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।

17. गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलना (Conversion of Galvanometer into Voltmeter)

परिभाषा

गैल्वेनोमीटर को विभवान्तर मापने योग्य बनाने के लिए उसके साथ श्रेणीक्रम में बड़ा प्रतिरोध जोड़ा जाता है। इस प्रकार प्राप्त यंत्र वोल्टमीटर कहलाता है।

सूत्र

यदि वोल्टमीटर की सीमा V हो,

 R = V/I₉ − G

जहाँ R बाहरी श्रेणीक्रम प्रतिरोध है।

तीन छोटे उदाहरण

1. वोल्टमीटर विभवान्तर मापता है।
2. वोल्टमीटर को परिपथ में समानांतर जोड़ा जाता है।
3. आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।

मुख्य बिंदु

– बड़ा प्रतिरोध श्रेणीक्रम में लगाया जाता है।
– वोल्टमीटर समानांतर में जोड़ा जाता है।
– आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत माना जाता है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: G = 100 Ω, I₉ = 1 mA और वोल्टमीटर की सीमा 10 V है। श्रेणीक्रम प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

R = V/I₉ − G

हल:

R = 10/0.001 − 100

R = 10000 − 100

R = 9900 Ω

अतः

उत्तर: 9900 Ω 

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: G = 50 Ω, I₉ = 2 mA और V = 5 V है। R ज्ञात कीजिए।

हल:

R = 5/0.002 − 50

R = 2500 − 50

R = 2450 Ω

अतः

उत्तर: 2450 Ω

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: वोल्टमीटर को परिपथ में किस प्रकार जोड़ा जाता है?

अतः

उत्तर: समानांतर में।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध कैसा माना जाता है?

अतः

उत्तर: बहुत अधिक या अनंत।

18. चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश का हेलिकल पथ (Helical Motion)

परिभाषा

यदि आवेशित कण का वेग चुम्बकीय क्षेत्र से न तो पूर्णतः समान दिशा में हो और न ही पूर्णतः लम्बवत, तो वेग के दो घटक होते हैं। लम्बवत घटक वृत्तीय गति कराता है और समानान्तर घटक कण को आगे बढ़ाता है। परिणामस्वरूप कण हेलिकल पथ पर चलता है।

सूत्र

 v⊥ = v sin θ

 v∥ = v cos θ

 

सबसे आसान याद रखने का तरीका

 ⊥ = लम्बवत → v⊥ = v sin θ

 ∥ = समानान्तर → v∥ = v cos θ

त्रिज्या:

 r = mv⊥/(qB)

पिच:  

 p = v∥T

तीन छोटे उदाहरण

1. कोण पर प्रवेश करने वाला आवेशित कण कुंडलीदार पथ ले सकता है।
2. v⊥ वृत्तीय गति के लिए जिम्मेदार है।
3. v∥ कण को क्षेत्र की दिशा में आगे ले जाता है।

मुख्य बिंदु

– θ = 90° पर वृत्तीय गति।
– θ = 0° पर सीधी गति।
– बीच के कोण पर हेलिकल गति।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: v = 10 m/s और θ = 30° है। v⊥ ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

v⊥ = v sin θ

हल:

v⊥ = 10 × 1/2

v⊥ = 5 m/s

अतः

उत्तर: 5 m/s

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: v = 10 m/s और θ = 60° है। v∥ ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

v∥ = v cos θ

हल:

v∥ = 10 × 1/2

v∥ = 5 m/s

अतः

उत्तर: 5 m/s

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: θ = 90° होने पर गति का स्वरूप क्या होगा?

अतः

उत्तर: वृत्तीय गति।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: θ = 0° होने पर गति का स्वरूप क्या होगा?

अतः

उत्तर: सीधी रेखीय गति।

19. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron)

परिभाषा

साइक्लोट्रॉन एक ऐसा उपकरण है जिसकी सहायता से आवेशित कणों को विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्रों की मदद से उच्च ऊर्जा तक त्वरित किया जाता है।

सिद्धांत

चुम्बकीय क्षेत्र आवेशित कण को वृत्तीय पथ पर घुमाता है और विद्युत क्षेत्र उपयुक्त समय पर उसकी ऊर्जा बढ़ाता है।

आवर्तकाल

 T = 2πm/(qB)

आवृत्ति

 f = qB/(2πm)

अधिकतम वेग

 vₘₐₓ = qBR/m

अधिकतम गतिज ऊर्जा

 Kₘₐₓ = q²B²R²/(2m)

तीन छोटे उदाहरण

1. आवेशित कण को बार-बार त्वरित किया जाता है।
2. चुम्बकीय क्षेत्र कण का पथ मोड़ता है।
3. विद्युत क्षेत्र कण की ऊर्जा बढ़ाता है।

मुख्य बिंदु

– साइक्लोट्रॉन आवेशित कणों के लिए उपयोगी है।
– आवृत्ति कण के वेग पर निर्भर नहीं करती।
– बहुत अधिक वेग पर सापेक्षिक प्रभावों के कारण साधारण साइक्लोट्रॉन की सीमा आती है।

संख्यात्मक प्रश्न 1

प्रश्न: m = 2 × 10⁻²⁷ kg, q = 2 × 10⁻¹⁹ C और B = 1 T है। आवृत्ति ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

f = qB/(2πm)

हल:

f = (2 × 10⁻¹⁹)/(2π × 2 × 10⁻²⁷)

f = 10⁸/2π Hz

अतः

उत्तर: 10⁸/(2π) Hz

संख्यात्मक प्रश्न 2

प्रश्न: q = 2 × 10⁻¹⁹ C, B = 0.5 T और R = 0.1 m है। m = 2 × 10⁻²⁷ kg हो तो अधिकतम वेग ज्ञात कीजिए।

सूत्र:

vₘₐₓ = qBR/m

हल:

vₘₐₓ = (2 × 10⁻¹⁹ × 0.5 × 0.1)/(2 × 10⁻²⁷)

vₘₐₓ = 5 × 10⁶ m/s

अतः

उत्तर: 5 × 10⁶ m/s

संख्यात्मक प्रश्न 3

प्रश्न: B दोगुना करने पर साइक्लोट्रॉन की आवृत्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सूत्र:

f ∝ B

अतः

उत्तर: आवृत्ति दोगुनी होगी।

संख्यात्मक प्रश्न 4

प्रश्न: चुम्बकीय क्षेत्र दोगुना करने पर आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सूत्र:

T ∝ 1/B

अतः

उत्तर: आवर्तकाल आधा होगा।

20. अध्याय के महत्वपूर्ण तुलना बिंदु (Important Comparisons)

धारावाही तार और गतिमान आवेश

– गतिमान आवेश के लिए: F = qvB sin θ
– धारावाही तार के लिए: F = BIl sin θ

अमीटर और वोल्टमीटर

अमीटर:

– धारा मापता है।
– श्रेणीक्रम में जुड़ता है।
– प्रतिरोध बहुत कम होता है।

वोल्टमीटर:

– विभवान्तर मापता है।
– समानांतर में जुड़ता है।
– प्रतिरोध बहुत अधिक होता है।

समान दिशा और विपरीत दिशा की समान्तर धाराएँ

– समान दिशा → आकर्षण
– विपरीत दिशा → प्रतिकर्षण

21. अध्याय की सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)

1. B = μ₀I/(2πr) में दूरी r को भूलना नहीं है।

2. वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर B = μ₀NI/(2R) होता है।

3. परिनालिका के लिए B = μ₀nI होता है।

4. F = qvB sin θ में θ वेग और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच का कोण है।

5. चालक पर बल के लिए F = BIl sin θ उपयोग होता है।

6. समान दिशा की समान्तर धाराएँ आकर्षित करती हैं।

7. गैल्वेनोमीटर को अमीटर बनाने में शंट समानांतर लगाया जाता है।

8. गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर बनाने में बड़ा प्रतिरोध श्रेणीक्रम में लगाया जाता है।

9. चुम्बकीय क्षेत्र में आवेशित कण की वृत्तीय गति के लिए r = mv/(qB) याद रखें।

10. धारा-लूप का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण M = NIA होता है।

11. बलाघूर्ण में कोण की सही पहचान करें।

12. सूत्र लगाने से पहले सभी मात्रकों को SI मात्रक में बदलें।

22. अध्याय के महत्वपूर्ण सूत्र एक जगह (Important Formula Sheet)

चुम्बकीय बल

 F = qvB sin θ

लॉरेंज़ बल

 F = q(E + v × B)

बायो-सावर्ट नियम

 dB = (μ₀/4π) × (I dl sin θ)/r²

सीधे लंबे तार का क्षेत्र

 B = μ₀I/(2πr)

वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर क्षेत्र

 B = μ₀NI/(2R)

वृत्ताकार कुंडली के अक्ष पर क्षेत्र

 B = μ₀NIR²/[2(R² + x²)³ᐟ²]

परिनालिका

 B = μ₀nI

धारावाही चालक पर बल

 F = BIl sin θ

दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच बल

 F/l = μ₀I₁I₂/(2πd)

आवेशित कण की वृत्तीय गति

 r = mv/(qB)

कोणीय वेग

 ω = qB/m

आवर्तकाल

 T = 2πm/(qB)

आवृत्ति

 f = qB/(2πm)

धारा-लूप का बलाघूर्ण

 τ = NIAB sin θ

अधिकतम बलाघूर्ण

 τₘₐₓ = NIAB

धारा-लूप का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण

 M = NIA

चुम्बकीय द्विध्रुव पर बलाघूर्ण

 τ = MB sin θ

गैल्वेनोमीटर

 I = kθ/(NAB)

धारा सुग्राहिता

 Sᵢ = θ/I = NAB/k

अमीटर बनाने के लिए शंट

 S = I₉G/(I − I₉)

वोल्टमीटर बनाने के लिए श्रेणी प्रतिरोध

 R = V/I₉ − G

साइक्लोट्रॉन की आवृत्ति

 f = qB/(2πm)

साइक्लोट्रॉन का अधिकतम वेग

 Vₘₐₓ = qBR/m

23. त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)

– गतिमान आवेश और विद्युत धारा चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकते हैं।

– चुम्बकीय क्षेत्र की SI इकाई टेस्ला है।

– बायो-सावर्ट नियम धारा-तत्व के कारण चुम्बकीय क्षेत्र बताता है।

– सीधे लंबे तार के लिए B = μ₀I/(2πr)

– वृत्ताकार कुंडली के केंद्र के लिए B = μ₀NI/(2R)

– लंबी परिनालिका के अंदर B = μ₀nI

– गतिमान आवेश पर F = qvB sin θ

– धारावाही चालक पर F = BIl sin θ

– समान दिशा की समान्तर धाराएँ आकर्षित करती हैं।

– विपरीत दिशा की समान्तर धाराएँ प्रतिकर्षित करती हैं।

– चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत प्रवेश करने वाला आवेशित कण वृत्तीय गति करता है।

– वृत्तीय पथ की त्रिज्या r = mv/(qB)

– धारा-लूप का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण M = NIA

– धारावाही लूप पर बलाघूर्ण τ = NIAB sin θ

– गैल्वेनोमीटर छोटी धारा मापने का संवेदनशील यंत्र है।

– अमीटर बनाने के लिए कम प्रतिरोध का शंट समानांतर लगाया जाता है।

– वोल्टमीटर बनाने के लिए बड़ा प्रतिरोध श्रेणीक्रम में लगाया जाता है।

– साइक्लोट्रॉन विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्रों की सहायता से आवेशित कणों को त्वरित करता है।

24. स्वयं जाँच प्रश्न (Self Check Questions)

प्रश्न 1

चुम्बकीय क्षेत्र का SI मात्रक क्या है?

उत्तर: टेस्ला।

प्रश्न 2

सीधे लंबे धारावाही तार के कारण चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र क्या है?

उत्तर: B = μ₀I/(2πr)

प्रश्न 3

बायो-सावर्ट नियम में चुम्बकीय क्षेत्र दूरी के किस घात पर निर्भर करता है?

उत्तर: दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती।

प्रश्न 4

समान दिशा में बहने वाली दो समान्तर धाराएँ एक-दूसरे को क्या करती हैं?

उत्तर: आकर्षित करती हैं।

प्रश्न 5

चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर बल अधिकतम कब होता है?

उत्तर: जब वेग और चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत हों।

प्रश्न 6

यदि कोई आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र के समान दिशा में चले तो चुम्बकीय बल कितना होगा?

उत्तर: शून्य।

प्रश्न 7

आवेशित कण की वृत्तीय गति की त्रिज्या का सूत्र क्या है?

उत्तर: r = mv/(qB)

प्रश्न 8

धारा-लूप का चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण क्या होता है?

उत्तर: M = NIA

प्रश्न 9

धारा-लूप पर अधिकतम बलाघूर्ण कब लगता है?

उत्तर: जब कुंडली का अभिलम्ब चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत हो।

प्रश्न 10

गैल्वेनोमीटर को अमीटर में बदलने के लिए क्या जोड़ा जाता है?

उत्तर: कम प्रतिरोध का शंट समानांतर में।

प्रश्न 11

गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए क्या जोड़ा जाता है?

उत्तर: बड़ा प्रतिरोध श्रेणीक्रम में।

प्रश्न 12

परिनालिका के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र क्या है?

उत्तर: B = μ₀nI

25. परीक्षा के लिए खास बातें (Important Exam Points)

1. बायो-सावर्ट नियम का सूत्र और उसकी विशेष स्थितियाँ याद रखें।

2. सीधे लंबे तार, वृत्ताकार कुंडली और परिनालिका के चुम्बकीय क्षेत्र के सूत्रों में अंतर स्पष्ट रखें।

3. दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम अवश्य समझें।

4. फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम की दिशा समझें।

5. गतिमान आवेश पर चुम्बकीय बल और धारावाही चालक पर बल के सूत्रों को अलग-अलग पहचानें।

6. समान्तर धारावाही चालकों के बीच बल से संबंधित प्रश्नों में दूरी का ध्यान रखें।

7. वृत्तीय गति में चुम्बकीय बल को अभिकेन्द्रीय बल के बराबर रखकर सूत्र प्राप्त करना सीखें।

8. धारा-लूप के बलाघूर्ण की व्युत्पत्ति को क्रम से लिखने का अभ्यास करें।

9. गैल्वेनोमीटर को अमीटर और वोल्टमीटर में बदलने के सूत्रों को अलग रखें।

10. संख्यात्मक प्रश्नों में μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T·m/A का सही उपयोग करें।

11. प्रत्येक उत्तर में SI मात्रक अवश्य लिखें।

12. कोण वाले प्रश्नों में sin θ का सही मान लगाएँ।

13. चुम्बकीय क्षेत्र में आवेशित कण की दिशा संबंधी प्रश्नों में बल हमेशा वेग के लम्बवत होने की बात याद रखें।

14. जहाँ आवश्यक हो, पहले चित्र बनाकर दिशाओं को स्पष्ट करना उत्तर को बेहतर बनाता है।

26. अंतिम सूत्र-आधारित याद रखने की ट्रिक (Formula Revision)

सीधा तार:

B = μ₀I/(2πr)

वृत्ताकार कुंडली:

B = μ₀NI/(2R)

परिनालिका:

B = μ₀nI

गतिमान आवेश:

F = qvB sin θ

धारावाही तार:

F = BIl sin θ

वृत्तीय पथ:

r = mv/(qB)

आवर्तकाल:

T = 2πm/(qB)

धारा-लूप:

M = NIA

बलाघूर्ण:

τ = NIAB sin θ

गैल्वेनोमीटर:

I = kθ/(NAB)

अमीटर का शंट:

S = I₉G/(I − I₉)

वोल्टमीटर का श्रेणी प्रतिरोध:

R = V/I₉ − G

साइक्लोट्रॉन:

f = qB/(2πm)

इसलिए इस पूरे अध्याय में सबसे अधिक ध्यान इन बातों पर रखना चाहिए:

चुम्बकीय क्षेत्र → धारा से क्षेत्र → क्षेत्र में आवेश पर बल → चालक पर बल → लूप पर बलाघूर्ण → चुम्बकीय द्विध्रुव → गैल्वेनोमीटर → साइक्लोट्रॉन

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