अध्याय 5 : चुम्बकत्व एवं द्रव्य (Magnetism and Matter)

UP Board Class 12 Physics Chapter 5 Magnetism 2027 की तैयारी के लिए यहाँ Topper Notes, महत्वपूर्ण प्रश्न, PYQ Questions और Online Quiz उपलब्ध हैं।

अध्याय की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

1. चुम्बक (Magnet)

वह पदार्थ जो लोहे, निकिल, कोबाल्ट आदि को आकर्षित करता है तथा जिसके दो ध्रुव होते हैं, चुम्बक कहलाता है।

2. चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field)

चुम्बक या गतिमान आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र, जहाँ किसी चुम्बकीय ध्रुव अथवा गतिमान आवेश पर चुम्बकीय प्रभाव अनुभव किया जा सकता है, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।

3. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines)

चुम्बकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने के लिए खींची गई काल्पनिक रेखाओं को चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कहते हैं।

4. चुम्बकीय द्विध्रुव (Magnetic Dipole)

दो समान परिमाण के विपरीत चुम्बकीय ध्रुवों का बहुत कम दूरी पर स्थित युग्म चुम्बकीय द्विध्रुव कहलाता है।

5. चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण (Magnetic Dipole Moment)

चुम्बकीय द्विध्रुव की ध्रुव-शक्ति और दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी के गुणनफल को चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण कहते हैं।

m = p × 2l

6. चुम्बकीय ध्रुव-शक्ति (Magnetic Pole Strength)

किसी चुम्बकीय ध्रुव की चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता को उसकी ध्रुव-शक्ति कहते हैं।

7. चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता (Magnetic Field Intensity)

किसी बिन्दु पर रखे गए इकाई उत्तर ध्रुव पर लगने वाले बल के बराबर राशि को चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता कहा जाता है।

8. चुम्बकीय आघूर्ण पर बलाघूर्ण (Torque on Magnetic Dipole)

चुम्बकीय क्षेत्र में रखे चुम्बकीय द्विध्रुव पर लगने वाला घुमाने वाला प्रभाव चुम्बकीय बलाघूर्ण कहलाता है।

τ = mB sin θ

9. चुम्बकीकरण (Magnetisation)

किसी चुम्बकीय पदार्थ के प्रति इकाई आयतन में उत्पन्न कुल चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण को चुम्बकीकरण कहते हैं।

M = m/V

10. चुम्बकीय तीव्रता (Magnetic Intensity)

किसी चुम्बकीय पदार्थ को चुम्बकित करने वाले बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता को चुम्बकीय तीव्रता कहते हैं।

इसे H से प्रदर्शित करते हैं।

11. चुम्बकीय प्रवणता (Magnetic Susceptibility)

किसी पदार्थ के चुम्बकीकरण और उसे चुम्बकित करने वाली चुम्बकीय तीव्रता के अनुपात को चुम्बकीय प्रवणता कहते हैं।

χ = M/H

12. सापेक्ष चुम्बकीय पारगम्यता (Relative Magnetic Permeability)

किसी पदार्थ की चुम्बकीय पारगम्यता और निर्वात की चुम्बकीय पारगम्यता के अनुपात को सापेक्ष चुम्बकीय पारगम्यता कहते हैं।

μᵣ = μ/μ₀

13. चुम्बकीय पारगम्यता (Magnetic Permeability)

किसी पदार्थ के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित होने की क्षमता को चुम्बकीय पारगम्यता कहते हैं।

14. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Substance)

वे पदार्थ जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा बहुत कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं, प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

15. अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic Substance)

वे पदार्थ जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

16. लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic Substance)

वे पदार्थ जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा बहुत अधिक आकर्षित होते हैं और प्रबल चुम्बकत्व धारण कर सकते हैं, लौहचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

17. क्यूरी तापमान (Curie Temperature)

वह तापमान जिसके ऊपर लौहचुम्बकीय पदार्थ अपना लौहचुम्बकीय व्यवहार खोकर अनुचुम्बकीय जैसा व्यवहार करने लगता है, क्यूरी तापमान कहलाता है।

18. हिस्टेरिसिस (Hysteresis)

चुम्बकीय पदार्थ में चुम्बकीकरण बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन के साथ पीछे रह जाता है। इस घटना को हिस्टेरिसिस कहते हैं।

19. अवशिष्ट चुम्बकत्व (Retentivity)

बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र हटाने के बाद पदार्थ में बचा हुआ चुम्बकत्व धारण करने की क्षमता अवशिष्ट चुम्बकत्व कहलाती है।

20. निग्रहिता (Coercivity)

पदार्थ के अवशिष्ट चुम्बकत्व को शून्य करने के लिए आवश्यक विपरीत चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता को निग्रहिता कहते हैं।

21. पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र (Earth’s Magnetic Field)

पृथ्वी के चारों ओर पाया जाने वाला चुम्बकीय क्षेत्र पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।

22. नति कोण (Angle of Dip)

पृथ्वी के कुल चुम्बकीय क्षेत्र और क्षैतिज दिशा के बीच के कोण को नति कोण कहते हैं।

23. क्षैतिज घटक (Horizontal Component)

पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज दिशा में घटक, क्षैतिज घटक कहलाता है।

Bᴴ = B cos δ

24. ऊर्ध्वाधर घटक (Vertical Component)

पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर दिशा में घटक, ऊर्ध्वाधर घटक कहलाता है।

Bⱽ = B sin δ

1. चुम्बकीय द्विध्रुव (Magnetic Dipole)

परिभाषा

दो समान परिमाण के विपरीत चुम्बकीय ध्रुव, जो बहुत कम दूरी पर एक-दूसरे के पास स्थित हों, मिलकर चुम्बकीय द्विध्रुव बनाते हैं।

चुम्बकीय द्विध्रुव को एक छोटे छड़ चुम्बक के रूप में आसानी से समझा जा सकता है।

चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण

यदि किसी चुम्बक की ध्रुव-शक्ति p और दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी 2l हो, तो—

m = p × 2l

अर्थात्

m = 2pl

सूत्र में राशियों का अर्थ

m = चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
p = ध्रुव-शक्ति
2l = दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी

SI मात्रक = A m²

सूत्र की समझ

चुम्बक की ध्रुव-शक्ति जितनी अधिक होगी या उसके दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी जितनी अधिक होगी, उसका चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण उतना ही अधिक होगा।

मुख्य बिंदु

– चुम्बकीय द्विध्रुव में दो विपरीत ध्रुव होते हैं।
– चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर मानी जाती है।
– इसका SI मात्रक A m² है।

सीमाएँ

यह संबंध आदर्श छोटे चुम्बकीय द्विध्रुव के लिए प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण

(i) छड़ चुम्बक को एक चुम्बकीय द्विध्रुव माना जा सकता है।
(ii) पृथ्वी का चुम्बकीय व्यवहार लगभग एक बड़े द्विध्रुव जैसा माना जाता है।
(iii) छोटी चुम्बकीय सुई भी द्विध्रुव जैसा व्यवहार करती है।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: किसी चुम्बक की ध्रुव-शक्ति 2 A m और ध्रुवों के बीच दूरी 10 cm है। उसका चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात कीजिए।

हल:
m = p × 2l
m = 2 × 0.10
m = 0.20 A m²

प्रश्न 2: p = 5 A m और 2l = 0.20 m हो, तो m ज्ञात कीजिए।

हल:
m = 5 × 0.20
m = 1 A m²

प्रश्न 3: किसी चुम्बक का द्विध्रुव आघूर्ण 0.8 A m² तथा ध्रुव-शक्ति 4 A m है। ध्रुवों के बीच दूरी ज्ञात कीजिए।

हल:
m = p × 2l

0.8 = 4 × 2l

2l = 0.2 m

दूरी = 20 cm

प्रश्न 4: p = 3 A m और 2l = 0.5 m हो, तो द्विध्रुव आघूर्ण ज्ञात कीजिए।

हल:
m = 3 × 0.5

m = 1.5 A m²

2. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ (Magnetic Field Lines)

परिभाषा

वे काल्पनिक रेखाएँ जिनके किसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्शरेखा उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती है, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कहलाती हैं।

मुख्य बिंदु

– चुम्बक के बाहर क्षेत्र रेखाएँ उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर जाती हैं।
– चुम्बक के अंदर इनकी दिशा दक्षिण से उत्तर की ओर होती है।
– इसलिए चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बन्द वक्र बनाती हैं।
– दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
– जहाँ रेखाएँ अधिक पास-पास हों, वहाँ क्षेत्र अधिक प्रबल होता है।

सीमाएँ

चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ वास्तविक भौतिक तार या वस्तु नहीं हैं। वे क्षेत्र को समझाने का एक चित्रात्मक तरीका हैं।

उदाहरण

(i) छड़ चुम्बक के चारों ओर रेखाओं का फैलाव।
(ii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का चित्र।
(iii) कम्पास की सुई से क्षेत्र की दिशा का पता लगाना।

3. चुम्बकीय द्विध्रुव पर बलाघूर्ण (Torque on a Magnetic Dipole)

परिभाषा

जब किसी चुम्बकीय द्विध्रुव को बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में किसी कोण पर रखा जाता है, तो उस पर उसे क्षेत्र की दिशा में घुमाने वाला बलाघूर्ण लगता है।

सूत्र

τ = mB sin θ

जहाँ—

 τ = बलाघूर्ण
 m = चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
 B = चुम्बकीय क्षेत्र
 θ = m और B के बीच कोण

SI मात्रक = N m

सूत्र की जानकारी

यदि चुम्बक क्षेत्र के समानांतर है, तो θ = 0° और बलाघूर्ण शून्य होगा।

यदि θ = 90° है, तो बलाघूर्ण अधिकतम होगा।

τₘₐₓ = mB

मुख्य बिंदु

– θ = 0° → τ = 0
– θ = 90° → τ = mB
– θ = 180° → τ = 0
– बलाघूर्ण चुम्बक को क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित करने की कोशिश करता है।

विशेष स्थिति

अधिकतम बलाघूर्ण = mB

उदाहरण

(i) कम्पास की सुई पृथ्वी के क्षेत्र में घूमकर एक निश्चित दिशा में रुकती है।
(ii) चुम्बकीय सुई को घुमाने पर वह फिर क्षेत्र की दिशा में आने की कोशिश करती है।
(iii) विद्युत मोटर में धारा-लूप पर लगने वाला बलाघूर्ण इसी विचार से जुड़ा है।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: m = 2 A m², B = 0.5 T और θ = 90° है। बलाघूर्ण ज्ञात कीजिए।

 τ = mB sin 90°

 τ = 2 × 0.5 × 1

 τ = 1 N m

प्रश्न 2: m = 4 A m², B = 2 T और θ = 30° है।

 τ = 4 × 2 × 1/2

 τ = 4 N m

प्रश्न 3: m = 3 A m², B = 0.4 T और θ = 0° है।

 τ = 3 × 0.4 × 0

 τ = 0

प्रश्न 4: किसी द्विध्रुव का अधिकतम बलाघूर्ण 6 N m है और B = 2 T है। m ज्ञात कीजिए।

 τₘₐₓ = mB

 6 = m × 2

 m = 3 A m²   

4. चुम्बकीय द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy of Magnetic Dipole)

परिभाषा

चुम्बकीय क्षेत्र में किसी द्विध्रुव की स्थिति के कारण उसमें संचित ऊर्जा को उसकी चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।

सूत्र

 U = −mB cos θ

जहाँ—

U = स्थितिज ऊर्जा
m = चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
B = चुम्बकीय क्षेत्र
θ = m और B के बीच कोण

मुख्य बातें

 θ = 0° पर—

 U = −mB

 θ = 90° पर—

 U = 0

 θ = 180° पर—

 U = +mB

स्थिरता

 θ = 0° पर स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है, इसलिए यह स्थिति स्थिर होती है।

 θ = 180° पर स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है, इसलिए यह स्थिति अस्थिर होती है।

उदाहरण

(i) कम्पास की सुई क्षेत्र की दिशा में स्थिर होना चाहती है।
(ii) चुम्बकीय सुई को उल्टी दिशा में रखने पर वह घूमती है।
(iii) बाहरी क्षेत्र में चुम्बक स्वतः अनुकूल दिशा लेने की कोशिश करता है।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: m = 2 A m² और B = 3 T है। θ = 0° पर U ज्ञात कीजिए।

U = −mB cos 0°

U = −2 × 3

U = −6 J

प्रश्न 2: m = 4 A m², B = 2 T और θ = 90° है।

U = −4 × 2 × 0

U = 0 J

प्रश्न 3: m = 2 A m², B = 5 T और θ = 180° है।

U = −2 × 5 × (−1)

U = 10 J

प्रश्न 4: m = 3 A m², B = 2 T और θ = 60° है।

U = −3 × 2 × 1/2

U = −3 J 

5. चुम्बकीय द्विध्रुव का अक्षीय क्षेत्र (Axial Magnetic Field)

परिभाषा

चुम्बकीय द्विध्रुव की अक्ष पर स्थित किसी बिन्दु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र को अक्षीय चुम्बकीय क्षेत्र कहते हैं।

दूर स्थित बिन्दु के लिए चुम्बक को छोटे द्विध्रुव के रूप में माना जा सकता है।

सूत्र

यदि बिन्दु की चुम्बक के केंद्र से दूरी r है और r, 2l की तुलना में बहुत बड़ी है, तो—

Bₐ = μ₀/4π × 2m/r³

अर्थात्

Bₐ = μ₀m/2πr³

सूत्र की जानकारी

Bₐ = अक्षीय चुम्बकीय क्षेत्र
m = चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
r = केंद्र से दूरी
μ₀ = निर्वात की चुम्बकीय पारगम्यता

μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m/A

व्युत्पत्ति

अक्ष पर बहुत दूर स्थित बिन्दु के लिए चुम्बकीय द्विध्रुव का क्षेत्र—

Bₐ = μ₀/4π × 2m/r³

और

m = p × 2l

अतः—

Bₐ = μ₀/4π × 2(p × 2l)/r³

यही अक्षीय क्षेत्र का दूर-बिन्दु रूप है।

मुख्य बिंदु

– Bₐ ∝ m
– Bₐ ∝ 1/r³
– दूरी बढ़ने पर क्षेत्र बहुत तेजी से घटता है।
– अक्षीय क्षेत्र की दिशा द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा के अनुरूप होती है।

विशेष स्थिति

यह सूत्र r ≫ 2l के लिए उपयोग करना उचित है।

उदाहरण

(i) चुम्बक के उत्तर ध्रुव की ओर अक्ष पर क्षेत्र।
(ii) दूर स्थित कम्पास पर चुम्बक का प्रभाव।
(iii) छोटे चुम्बक के दूर क्षेत्र का अनुमान।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: m = 2 A m² और r = 1 m है। अक्षीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

Bₐ = (10⁻⁷ × 2m)/r³

Bₐ = 2 × 10⁻⁷ T

उत्तर: 2 × 10⁻⁷ T

प्रश्न 2: m = 4 A m² और r = 2 m है।

Bₐ = 2 × 10⁻⁷ × 4/2³

Bₐ = 8 × 10⁻⁷/8

Bₐ = 1 × 10⁻⁷ T

प्रश्न 3: m = 5 A m² और r = 1 m है।

Bₐ = 2 × 10⁻⁷ × 5

Bₐ = 1 × 10⁻⁶ T

प्रश्न 4: m = 8 A m² और r = 2 m है।

Bₐ = 2 × 10⁻⁷ × 8/8

Bₐ = 2 × 10⁻⁷ T

6. चुम्बकीय द्विध्रुव का विषुवतीय क्षेत्र (Equatorial Magnetic Field)

परिभाषा

चुम्बकीय द्विध्रुव के केंद्र से गुजरने वाली उसकी अक्ष के लम्बवत दिशा में किसी बिन्दु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र को विषुवतीय क्षेत्र कहते हैं।

सूत्र

दूर स्थित बिन्दु के लिए—

Bₑ = μ₀/4π × m/r³

मुख्य बातें

– विषुवतीय क्षेत्र की दिशा चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा के विपरीत होती है।
– Bₑ ∝ m
– Bₑ ∝ 1/r³

अक्षीय और विषुवतीय क्षेत्र का संबंध

एक ही दूरी r पर—

Bₐ = 2Bₑ

अर्थात् अक्षीय क्षेत्र विषुवतीय क्षेत्र का दोगुना होता है।

उदाहरण

(i) चुम्बक के मध्य से बगल की दिशा में क्षेत्र।
(ii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र को समझने में द्विध्रुव मॉडल।
(iii) छोटे छड़ चुम्बक के दूर क्षेत्र का अनुमान।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: m = 2 A m² और r = 1 m है। विषुवतीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

Bₑ = 10⁻⁷ × m/r³

Bₑ = 2 × 10⁻⁷ T

प्रश्न 2: m = 4 A m² और r = 2 m है।

Bₑ = 10⁻⁷ × 4/8

Bₑ = 5 × 10⁻⁸ T

प्रश्न 3: किसी बिन्दु पर अक्षीय क्षेत्र 6 × 10⁻⁷ T है। उसी दूरी पर विषुवतीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

Bₐ = 2Bₑ

Bₑ = Bₐ/2

Bₑ = 3 × 10⁻⁷ T

प्रश्न 4: विषुवतीय क्षेत्र 2 × 10⁻⁷ T है। उसी दूरी पर अक्षीय क्षेत्र कितना होगा?

Bₐ = 2Bₑ

Bₐ = 4 × 10⁻⁷ T

7. चुम्बकीय क्षेत्र के लिए गाउस का नियम (Gauss’s Law of Magnetism)

परिभाषा

किसी बन्द पृष्ठ से होकर गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स हमेशा शून्य होता है।

सूत्र

∮ B · dS = 0

इसका अर्थ

चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बन्द वक्र होती हैं। इसलिए किसी बन्द पृष्ठ में जितनी क्षेत्र रेखाएँ प्रवेश करती हैं, उतनी ही बाहर निकलती हैं।

चुम्बक के लिए अलग-अलग उत्तर और दक्षिण ध्रुव को अकेले प्राप्त नहीं किया जा सकता।

मुख्य बिंदु

– चुम्बकीय एकध्रुव नहीं पाया जाता।
– चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बन्द होती हैं।
– बन्द पृष्ठ से कुल चुम्बकीय फ्लक्स शून्य होता है।

उदाहरण

(i) छड़ चुम्बक में उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रुव होते हैं।
(ii) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ चुम्बक के बाहर और अंदर दोनों चलती हैं।
(iii) किसी बन्द पृष्ठ में कुल चुम्बकीय फ्लक्स शून्य होता है।

8. पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र (Earth’s Magnetic Field)

परिभाषा

पृथ्वी के चारों ओर उपस्थित चुम्बकीय क्षेत्र को पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र कहते हैं।

पृथ्वी को लगभग एक विशाल चुम्बकीय द्विध्रुव के रूप में समझा जा सकता है।

चुम्बकीय क्षेत्र के घटक

यदि पृथ्वी का कुल चुम्बकीय क्षेत्र B है और नति कोण δ है, तो—

Bᴴ = B cos δ

Bⱽ = B sin δ

और—

tan δ = Bⱽ/Bᴴ

सूत्र की जानकारी

B = पृथ्वी का कुल चुम्बकीय क्षेत्र
Bᴴ = क्षैतिज घटक
Bⱽ = ऊर्ध्वाधर घटक
δ = नति कोण

मुख्य बिंदु

– चुम्बकीय विषुवत रेखा पर δ = 0°।
– वहाँ Bⱽ = 0 होता है।
– चुम्बकीय ध्रुवों के पास δ लगभग 90° हो जाता है।
– पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र स्थान के साथ बदलता है।

उदाहरण

(i) कम्पास पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण दिशा बताता है।
(ii) अलग-अलग स्थानों पर नति कोण अलग हो सकता है।
(iii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण चुम्बकीय सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में व्यवस्थित होती है।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र 5 × 10⁻⁵ T है और δ = 0° है। क्षैतिज घटक ज्ञात कीजिए।

Bᴴ = B cos 0°

Bᴴ = 5 × 10⁻⁵ T

प्रश्न 2: B = 4 × 10⁻⁵ T और δ = 90° है। ऊर्ध्वाधर घटक ज्ञात कीजिए।

Bⱽ = B sin 90°

Bⱽ = 4 × 10⁻⁵ T

प्रश्न 3: B = 6 × 10⁻⁵ T और δ = 30° है। क्षैतिज घटक ज्ञात कीजिए।

Bᴴ = 6 × 10⁻⁵ × √3/2

Bᴴ ≈ 5.2 × 10⁻⁵ T

प्रश्न 4: Bᴴ = 3 × 10⁻⁵ T और Bⱽ = 3 × 10⁻⁵ T है। नति कोण ज्ञात कीजिए।

tan δ = Bⱽ/Bᴴ

tan δ = 1

δ = 45°

9. चुम्बकीकरण (Magnetisation)

परिभाषा

किसी चुम्बकीय पदार्थ के प्रति इकाई आयतन में उपस्थित कुल चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण को चुम्बकीकरण कहते हैं।

सूत्र

M = m/V

जहाँ—

M = चुम्बकीकरण
m = कुल चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
V = पदार्थ का आयतन

SI मात्रक

A/m

सूत्र की समझ

एक ही आयतन में जितना अधिक कुल चुम्बकीय आघूर्ण होगा, पदार्थ का चुम्बकीकरण उतना अधिक होगा।

मुख्य बिंदु

– M पदार्थ के अंदर उत्पन्न चुम्बकीय अवस्था को बताता है।
– आयतन घटने पर समान m के लिए M बढ़ता है।
– SI मात्रक A/m है।

उदाहरण

(i) लोहे को चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर उसका चुम्बकीकरण होता है।
(ii) स्थायी चुम्बक में चुम्बकीकरण लंबे समय तक बना रह सकता है।
(iii) अलग-अलग पदार्थ बाहरी क्षेत्र में अलग मात्रा में चुम्बकीकृत होते हैं।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: किसी पदार्थ का कुल चुम्बकीय आघूर्ण 2 A m² और आयतन 0.5 m³ है। M ज्ञात कीजिए।

M = m/V

M = 2/0.5

M = 4 A/m

प्रश्न 2: m = 6 A m² और V = 2 m³ है।

M = 3 A/m

प्रश्न 3: M = 10 A/m और V = 0.2 m³ है। कुल चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए।

m = MV

m = 10 × 0.2

m = 2 A m²

प्रश्न 4: M = 5 A/m और m = 1 A m² है। आयतन ज्ञात कीजिए।

V = m/M

V = 1/5

V = 0.2 m³

10. चुम्बकीय तीव्रता और चुम्बकीकरण (Magnetic Intensity and Magnetisation)

परिभाषा

किसी चुम्बकीय पदार्थ को प्रभावित करने वाले बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता को चुम्बकीय तीव्रता H कहते हैं।

संबंध

चुम्बकीय पदार्थ के लिए—

B = μ₀(H + M)

जहाँ—

B = पदार्थ के अंदर कुल चुम्बकीय क्षेत्र
H = चुम्बकीय तीव्रता
M = चुम्बकीकरण

निर्वात में

यदि M = 0 हो, तो—

B = μ₀H

मुख्य बिंदु

– H बाहरी क्षेत्र के प्रभाव को बताता है।
– M पदार्थ की प्रतिक्रिया को बताता है।
– B कुल प्रभावी चुम्बकीय क्षेत्र को दर्शाता है।

उदाहरण

(i) लोहे को बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर M उत्पन्न होता है।
(ii) निर्वात में M शून्य माना जाता है।
(iii) अलग-अलग पदार्थों में समान H के लिए M अलग हो सकता है।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: H = 1000 A/m और M = 500 A/m है। B ज्ञात कीजिए।

B = μ₀(H + M)

B = 4π × 10⁻⁷ × 1500

B ≈ 1.885 × 10⁻³ T

प्रश्न 2: H = 2000 A/m और M = 1000 A/m है।

B = 4π × 10⁻⁷ × 3000

B ≈ 3.77 × 10⁻³ T

प्रश्न 3: निर्वात में H = 500 A/m है। B ज्ञात कीजिए।

B = μ₀H

B = 4π × 10⁻⁷ × 500

B ≈ 6.28 × 10⁻⁴ T

प्रश्न 4: H = 1000 A/m, B = 2.513 × 10⁻³ T है। M ज्ञात कीजिए।

B = μ₀(H + M)

H + M = B/μ₀

M ≈ 1000 A/m

उत्तर: M ≈ 1000 A/m

11. चुम्बकीय प्रवणता (Magnetic Susceptibility)

परिभाषा

किसी पदार्थ के चुम्बकीकरण और चुम्बकीय तीव्रता के अनुपात को चुम्बकीय प्रवणता कहते हैं।

सूत्र

χ = M/H

जहाँ—

χ = चुम्बकीय प्रवणता
M = चुम्बकीकरण
H = चुम्बकीय तीव्रता

विशेष बात

SI पद्धति में χ की कोई इकाई नहीं होती।

यदि पदार्थ अनुचुम्बकीय है, तो χ धनात्मक होती है।

यदि पदार्थ प्रतिचुम्बकीय है, तो χ ऋणात्मक होती है।

मुख्य बिंदु

– χ > 0 → अनुचुम्बकीय
– χ < 0 → प्रतिचुम्बकीय
– लौहचुम्बकीय पदार्थ में χ बहुत अधिक धनात्मक हो सकती है।

उदाहरण

(i) अनुचुम्बकीय पदार्थ का χ धनात्मक होता है।
(ii) प्रतिचुम्बकीय पदार्थ का χ ऋणात्मक होता है।
(iii) χ पदार्थ की चुम्बकीय प्रतिक्रिया को बताती है।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: M = 100 A/m और H = 500 A/m है।

χ = 100/500

χ = 0.2

प्रश्न 2: M = 50 A/m और H = 1000 A/m है।

χ = 0.05

प्रश्न 3: χ = 0.4 और H = 200 A/m है। M ज्ञात कीजिए।

M = χH

M = 0.4 × 200

M = 80 A/m

प्रश्न 4: χ = −0.02 और H = 500 A/m है।

M = −0.02 × 500

M = −10 A/m

12. सापेक्ष चुम्बकीय पारगम्यता (Relative Magnetic Permeability)

परिभाषा

किसी पदार्थ की चुम्बकीय पारगम्यता μ और निर्वात की चुम्बकीय पारगम्यता μ₀ के अनुपात को सापेक्ष चुम्बकीय पारगम्यता कहते हैं।

सूत्र

μᵣ = μ/μ₀

चुम्बकीय प्रवणता से संबंध—

μᵣ = 1 + χ

मुख्य बिंदु

– μᵣ की कोई इकाई नहीं होती।
– प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के लिए μᵣ थोड़ा कम than 1 होता है।
– अनुचुम्बकीय पदार्थ के लिए μᵣ थोड़ा अधिक than 1 होता है।
– लौहचुम्बकीय पदार्थ के लिए μᵣ बहुत अधिक हो सकता है।

उदाहरण

(i) लोहे की सापेक्ष पारगम्यता बहुत अधिक हो सकती है।
(ii) प्रतिचुम्बकीय पदार्थों में μᵣ लगभग 1 के थोड़ा नीचे होती है।
(iii) अनुचुम्बकीय पदार्थों में μᵣ लगभग 1 के थोड़ा ऊपर होती है।

चार संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1: χ = 0.2 है। μᵣ ज्ञात कीजिए।

μᵣ = 1 + χ

μᵣ = 1.2

प्रश्न 2: χ = −0.05 है।

μᵣ = 1 − 0.05

μᵣ = 0.95

प्रश्न 3: μ = 8π × 10⁻⁷ H/m और μ₀ = 4π × 10⁻⁷ H/m है।

μᵣ = μ/μ₀

μᵣ = 2

प्रश्न 4: μᵣ = 1.5 है। χ ज्ञात कीजिए।

χ = μᵣ − 1

χ = 0.5

13. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Materials)

परिभाषा

वे पदार्थ जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिति में उसके विपरीत दिशा में बहुत कमजोर चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करते हैं और क्षेत्र द्वारा कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं, प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

मुख्य बिंदु

– इनमें स्थायी अयुग्मित चुम्बकीय आघूर्ण नहीं होता।
– बाहरी क्षेत्र इन्हें बहुत कमजोर रूप से प्रतिकर्षित करता है।
– χ ऋणात्मक होती है।
– μᵣ 1 से थोड़ा कम होती है।

उदाहरण

(i) बिस्मथ
(ii) ताँबा
(iii) जल

14. अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic Materials)

परिभाषा

वे पदार्थ जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण स्थायी चुम्बकीय आघूर्ण होता है और जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं, अनुचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

मुख्य बिंदु

– अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं।
– χ धनात्मक होती है।
– μᵣ 1 से थोड़ा अधिक होती है।
– तापमान बढ़ने पर इनका चुम्बकीय प्रभाव सामान्यतः घटता है।

उदाहरण

(i) एल्युमिनियम
(ii) प्लैटिनम
(iii) ऑक्सीजन

15. लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic Materials)

परिभाषा

वे पदार्थ जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा बहुत अधिक आकर्षित होते हैं तथा क्षेत्र हटने के बाद भी पर्याप्त चुम्बकत्व बनाए रख सकते हैं, लौहचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं।

मुख्य बिंदु

– इनमें बहुत प्रबल चुम्बकीय प्रभाव होता है।
– इनके अंदर चुम्बकीय डोमेन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
– इनकी χ बहुत अधिक धनात्मक हो सकती है।
– क्यूरी तापमान के ऊपर लौहचुम्बकीय गुण समाप्त हो जाता है।

उदाहरण

(i) लोहा
(ii) कोबाल्ट
(iii) निकिल

16. तीनों चुम्बकीय पदार्थों की तुलना

गुण|  प्रतिचुम्बकीय|   अनुचुम्बकीय| लौहचुम्बकीय
बाहरी क्षेत्र का प्रभाव|   कमजोर प्रतिकर्षण| कमजोर आकर्षण|  प्रबल आकर्षण
χ|   ऋणात्मक| धनात्मक|   बहुत अधिक धनात्मक
μᵣ|   1 से थोड़ा कम|   1 से थोड़ा अधिक| बहुत अधिक
अयुग्मित इलेक्ट्रॉन|   सामान्यतः नहीं| होते हैं|   प्रबल सामूहिक प्रभाव
उदाहरण|   बिस्मथ| एल्युमिनियम|   लोहा

17. हिस्टेरिसिस (Hysteresis)

परिभाषा

जब किसी लौहचुम्बकीय पदार्थ में चुम्बकीकरण M, बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र H के परिवर्तन से पीछे रह जाता है, तो इस घटना को हिस्टेरिसिस कहते हैं।

हिस्टेरिसिस लूप

H और M के बीच ग्राफ बनाने पर बन्द वक्र प्राप्त होता है, जिसे हिस्टेरिसिस लूप कहते हैं।

मुख्य बिंदु

– लूप का क्षेत्रफल ऊर्जा हानि को दर्शाता है।
– कम हिस्टेरिसिस हानि वाले पदार्थ ट्रांसफॉर्मर के कोर के लिए उपयोगी होते हैं।
– अधिक अवशिष्ट चुम्बकत्व और निग्रहिता वाले पदार्थ स्थायी चुम्बक के लिए उपयोगी होते हैं।

उदाहरण

(i) ट्रांसफॉर्मर के कोर में नरम लौह पदार्थ।
(ii) स्थायी चुम्बक में कठोर चुम्बकीय पदार्थ।
(iii) विद्युत मशीनों में हिस्टेरिसिस हानि का महत्व।

18. अवशिष्ट चुम्बकत्व और निग्रहिता (Retentivity and Coercivity)

अवशिष्ट चुम्बकत्व

बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र हटाने के बाद पदार्थ में बचा हुआ चुम्बकत्व धारण करने की क्षमता को अवशिष्ट चुम्बकत्व कहते हैं।

निग्रहिता

बचे हुए चुम्बकत्व को समाप्त करने के लिए आवश्यक विपरीत चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता को निग्रहिता कहते हैं।

मुख्य बातें

स्थायी चुम्बक के लिए

– अधिक अवशिष्ट चुम्बकत्व
– अधिक निग्रहिता

विद्युतचुम्बक के लिए

– कम अवशिष्ट चुम्बकत्व
– कम निग्रहिता

19. चुम्बकीय पदार्थों के दैनिक जीवन में उपयोग

प्रतिचुम्बकीय

(i) वैज्ञानिक उपकरणों में।
(ii) चुम्बकीय प्रभाव को कम करने वाले प्रयोगों में।
(iii) कुछ विशेष प्रयोगशाला व्यवस्थाओं में।

अनुचुम्बकीय

(i) वैज्ञानिक मापन में।
(ii) पदार्थों के चुम्बकीय गुणों के अध्ययन में।
(iii) ऑक्सीजन जैसे पदार्थों के व्यवहार को समझने में।

लौहचुम्बकीय

(i) स्थायी चुम्बक बनाने में।
(ii) विद्युत मोटर और जनित्र के विभिन्न भागों में।
(iii) ट्रांसफॉर्मर के कोर में उपयुक्त पदार्थ के रूप में।

20. (Quick Revision)

★ चुम्बकीय द्विध्रुव = दो विपरीत ध्रुवों का युग्म।

★ चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण—

m = p × 2l

★ द्विध्रुव पर बलाघूर्ण—

τ = mB sin θ

★ अधिकतम बलाघूर्ण—

τₘₐₓ = mB

★ स्थितिज ऊर्जा—

U = −mB cos θ

★ अक्षीय क्षेत्र—

Bₐ = μ₀/4π × 2m/r³

★ विषुवतीय क्षेत्र—

Bₑ = μ₀/4π × m/r³

★ समान दूरी पर—

Bₐ = 2Bₑ

★ चुम्बकीय गाउस नियम—

∮ B · dS = 0

★ चुम्बकीकरण—

M = m/V

★ पदार्थ के अंदर क्षेत्र—

B = μ₀(H + M)

★ चुम्बकीय प्रवणता—

χ = M/H

★ सापेक्ष पारगम्यता—

μᵣ = 1 + χ

★ पृथ्वी के क्षेत्र के घटक—

Bᴴ = B cos δ

Bⱽ = B sin δ

tan δ = Bⱽ/Bᴴ

21. पूरे अध्याय के सभी जरूरी सूत्र एक साथ

1. m = p × 2l

2. τ = mB sin θ

3. τₘₐₓ = mB

4. U = −mB cos θ

5. Bₐ = μ₀/4π × 2m/r³

6. Bₑ = μ₀/4π × m/r³

7. Bₐ = 2Bₑ

8. ∮ B · dS = 0

9. M = m/V

10. B = μ₀(H + M)

11. χ = M/H

12. μᵣ = μ/μ₀

13. μᵣ = 1 + χ

14. Bᴴ = B cos δ

15. Bⱽ = B sin δ

16. tan δ = Bⱽ/Bᴴ

17. μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T m/A

 

22. पूरे अध्याय से पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल

प्रश्न 1.

चुम्बकीय द्विध्रुव क्या है? इसके चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण का सूत्र लिखिए।

प्रश्न 2.

चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के कोई चार गुण लिखिए।

प्रश्न 3.

चुम्बकीय क्षेत्र में रखे द्विध्रुव पर लगने वाले बलाघूर्ण का सूत्र प्राप्त कीजिए।

प्रश्न 4.

चुम्बकीय द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा का सूत्र लिखिए तथा स्थिर और अस्थिर स्थिति बताइए।

प्रश्न 5.

अक्षीय तथा विषुवतीय बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र के सूत्र लिखिए।

प्रश्न 6.

समान दूरी पर अक्षीय और विषुवतीय चुम्बकीय क्षेत्र में क्या संबंध है?

प्रश्न 7.

चुम्बकीय क्षेत्र के लिए गाउस का नियम लिखिए।

प्रश्न 8.

पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटक लिखिए।

प्रश्न 9.

चुम्बकीकरण तथा चुम्बकीय प्रवणता को परिभाषित कीजिए।

प्रश्न 10.

प्रतिचुम्बकीय, अनुचुम्बकीय और लौहचुम्बकीय पदार्थों में अंतर लिखिए।

प्रश्न 11.

हिस्टेरिसिस क्या है?

प्रश्न 12.

स्थायी चुम्बक और विद्युतचुम्बक बनाने के लिए पदार्थ के कौन-से गुण आवश्यक हैं?

प्रश्न 13.

लैंगिक रूप से नहीं—चुम्बकीय दृष्टि से—लौहचुम्बकीय पदार्थ तापमान बढ़ने पर अपना गुण क्यों खो सकता है? क्यूरी तापमान समझाइए।

प्रश्न 14.

चुम्बकीय एकध्रुव क्यों नहीं मिलता? गाउस के नियम के आधार पर समझाइए।

 

23. इस अध्याय में होने वाली सामान्य गलतियाँ

★ गलती 1: चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा को उत्तर से दक्षिण लिख देना।
सही: इसकी दिशा दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर मानी जाती है।

★ गलती 2: अक्षीय और विषुवतीय क्षेत्र के सूत्रों को उलट देना।
याद रखें: अक्षीय में 2m, विषुवतीय में केवल m आता है।

★ गलती 3: Bₐ = Bₑ लिख देना।
सही: समान दूरी पर Bₐ = 2Bₑ।

★ गलती 4: θ को गलत दिशा का कोण लेना।
सही: θ, m और B के बीच का कोण है।

★ गलती 5: स्थितिज ऊर्जा में ऋण चिह्न भूल जाना।
सही: U = −mB cos θ

★ गलती 6: χ की इकाई लिख देना।
सही: चुम्बकीय प्रवणता χ विमाहीन है।

★ गलती 7: प्रतिचुम्बकीय और अनुचुम्बकीय पदार्थ के χ का चिन्ह उलट देना।
सही: प्रतिचुम्बकीय → χ ऋणात्मक, अनुचुम्बकीय → χ धनात्मक।

★ गलती 8: B = μ₀H को हर पदार्थ के लिए लिख देना।
सही: यह निर्वात/चुम्बकीय रूप से निष्क्रिय माध्यम की विशेष स्थिति में उपयोग होता है; पदार्थ के लिए सामान्य संबंध B = μ₀(H + M) है।

★ गलती 9: नति कोण को क्षैतिज घटक से जोड़ते समय sin और cos उलट देना।
सही: Bᴴ = B cos δ, Bⱽ = B sin δ

24. महत्वपूर्ण तथ्य

1. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बन्द वक्र होती हैं।
2. दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
3. चुम्बकीय एकध्रुव का स्वतंत्र रूप से अस्तित्व नहीं पाया गया है।
4. चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण का SI मात्रक A m² है।
5. चुम्बकीय क्षेत्र B का SI मात्रक tesla (T) है।
6. चुम्बकीय तीव्रता H का SI मात्रक A/m है।
7. चुम्बकीकरण M का SI मात्रक A/m है।
8. चुम्बकीय प्रवणता χ विमाहीन राशि है।
9. निर्वात में B = μ₀H।
10. समान दूरी पर अक्षीय क्षेत्र विषुवतीय क्षेत्र का दोगुना होता है।
11. θ = 0° पर द्विध्रुव का बलाघूर्ण शून्य होता है।
12. θ = 90° पर बलाघूर्ण अधिकतम होता है।
13. θ = 0° पर चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है।
14. θ = 180° पर चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है।
15. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं।
16. अनुचुम्बकीय पदार्थ कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं।
17. लौहचुम्बकीय पदार्थ प्रबल रूप से आकर्षित होते हैं।
18. हिस्टेरिसिस में चुम्बकीकरण, बाहरी क्षेत्र से पीछे रहता है।
19. स्थायी चुम्बक के लिए अधिक निग्रहिता और अधिक अवशिष्ट चुम्बकत्व उपयोगी होते हैं।
20. ट्रांसफॉर्मर के कोर के लिए कम हिस्टेरिसिस हानि वाला पदार्थ उपयोगी होता है।
21. पृथ्वी को लगभग एक विशाल चुम्बकीय द्विध्रुव के रूप में माना जा सकता है।
22. चुम्बकीय विषुवत रेखा पर नति कोण लगभग 0° होता है।
23. चुम्बकीय ध्रुवों के पास नति कोण लगभग 90° होता है।

25. चार अंतिम अभ्यास संख्यात्मक

प्रश्न 1

एक चुम्बकीय द्विध्रुव का आघूर्ण 5 A m² है। उसे 0.2 T के चुम्बकीय क्षेत्र में 30° के कोण पर रखा गया है। बलाघूर्ण ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
 τ = mB sin θ

 τ = 5 × 0.2 × 1/2

 τ = 0.5 N m

प्रश्न 2

किसी चुम्बकीय द्विध्रुव का आघूर्ण 2 A m² है। 0.5 T क्षेत्र में 60° पर रखने पर स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
 U = −mB cos 60°

 U = −2 × 0.5 × 1/2

 U = −0.5 J

प्रश्न 3

किसी पदार्थ का चुम्बकीकरण 200 A/m और चुम्बकीय तीव्रता 1000 A/m है। चुम्बकीय प्रवणता ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
 χ = M/H

 χ = 200/1000

 χ = 0.2

प्रश्न 4

किसी पदार्थ की चुम्बकीय प्रवणता 0.5 है। उसकी सापेक्ष चुम्बकीय पारगम्यता ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
 μᵣ = 1 + χ

 μᵣ = 1 + 0.5

 μᵣ = 1.5

26. अध्याय समाप्त करने के बाद खुद से ये 10 सवाल पूछें और खुद ही उनके जवाब दें।

1. चुम्बकीय द्विध्रुव क्या है?

2. m = p × 2l में प्रत्येक राशि क्या बताती है?

3. τ = mB sin θ कब अधिकतम होता है?

4. U = −mB cos θ में ऋण चिह्न क्यों है?

5. अक्षीय और विषुवतीय क्षेत्र में कौन दोगुना है?

6. चुम्बकीय गाउस नियम क्या कहता है?

7. B, H और M में क्या संबंध है?

8. χ धनात्मक और ऋणात्मक होने का क्या अर्थ है?

9. तीनों चुम्बकीय पदार्थों की पहचान कैसे करेंगे?

10. हिस्टेरिसिस लूप से पदार्थ के कौन-कौन से गुण समझे जाते हैं?

एक लाइन में पूरा अध्याय

चुम्बक → द्विध्रुव → द्विध्रुव आघूर्ण → क्षेत्र → बलाघूर्ण → स्थितिज ऊर्जा → अक्षीय/विषुवतीय क्षेत्र → गाउस नियम → पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र → B, H और M → χ → μᵣ → प्रतिचुम्बकीय → अनुचुम्बकीय → लौहचुम्बकीय → हिस्टेरिसिस

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