अध्याय 10 : तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics)
★ महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
1. तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics)
प्रकाश के उन गुणों और घटनाओं का अध्ययन जिसमें प्रकाश के तरंग स्वरूप को आधार बनाया जाता है, तरंग प्रकाशिकी कहलाता है। इसमें व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण जैसी घटनाओं को समझाया जाता है।
2. तरंगाग्र (Wavefront)
किसी प्रकाश-तरंग के ऐसे सभी बिंदुओं का काल्पनिक पृष्ठ, जो एक ही कला (Phase) में कंपन कर रहे हों, तरंगाग्र कहलाता है।
3. किरण (Ray)
तरंगाग्र पर खींची गई अभिलंब रेखा, जो प्रकाश के संचरण की दिशा बताती है, किरण कहलाती है।
4. हाइगेन्स का सिद्धान्त (Huygens’ Principle)
तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु द्वितीयक छोटी तरंगिकाओं का स्रोत माना जाता है और किसी बाद के क्षण का नया तरंगाग्र इन द्वितीयक तरंगिकाओं का स्पर्शी पृष्ठ होता है।
5. द्वितीयक तरंगिकाएँ (Secondary Wavelets)
किसी तरंगाग्र के प्रत्येक बिंदु से निकलने वाली छोटी-छोटी गोलाकार या तरंगाकार तरंगें द्वितीयक तरंगिकाएँ कहलाती हैं।
6. कला (Phase)
किसी तरंग के दोलन की उस अवस्था को, जो उसके समय और स्थिति से संबंधित होती है, कला कहते हैं।
7. कला-अंतर (Phase Difference)
दो तरंगों के दोलनों की अवस्थाओं के बीच के अंतर को कला-अंतर कहते हैं।
8. सुसंगत स्रोत (Coherent Sources)
वे दो प्रकाश स्रोत, जिनकी आवृत्ति समान हो तथा उनके बीच कला-अंतर समय के साथ स्थिर रहे, सुसंगत स्रोत कहलाते हैं।
9. व्यतिकरण (Interference)
दो या अधिक सुसंगत प्रकाश तरंगों के अध्यारोपण से कुछ स्थानों पर तीव्रता बढ़ने और कुछ स्थानों पर घटने की घटना व्यतिकरण कहलाती है।
10. रचनात्मक व्यतिकरण (Constructive Interference)
जब दो प्रकाश तरंगें समान कला में मिलती हैं और परिणामी तीव्रता अधिकतम हो जाती है, तो इसे रचनात्मक व्यतिकरण कहते हैं।
11. विनाशी व्यतिकरण (Destructive Interference)
जब दो प्रकाश तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं और परिणामी तीव्रता न्यूनतम हो जाती है, तो इसे विनाशी व्यतिकरण कहते हैं।
12. पथांतर (Path Difference)
दो तरंगों द्वारा किसी बिंदु तक पहुँचने में तय किए गए मार्गों की लंबाइयों के अंतर को पथांतर कहते हैं।
13. फ्रिंज (Fringe)
व्यतिकरण के कारण पर्दे पर बनने वाली क्रमिक चमकीली और अंधेरी पट्टियों को फ्रिंज कहते हैं।
14. फ्रिंज चौड़ाई (Fringe Width)
दो क्रमागत समान प्रकार की फ्रिंजों के बीच की दूरी को फ्रिंज चौड़ाई कहते हैं।
15. विवर्तन (Diffraction)
जब प्रकाश बहुत छोटे छिद्र या संकीर्ण झिरी से गुजरते समय अपने सीधी रेखा वाले पथ से मुड़कर छाया वाले क्षेत्र में भी फैलता है, तो इस घटना को विवर्तन कहते हैं।
16. केंद्रीय उच्चिष्ठ (Central Maximum)
एकल-झिरी विवर्तन में बीच में बनने वाली सबसे चौड़ी और सबसे अधिक तीव्र चमकीली पट्टी को केंद्रीय उच्चिष्ठ कहते हैं।
17. ध्रुवण (Polarisation)
प्रकाश के कंपन को सभी दिशाओं से सीमित करके केवल एक निश्चित दिशा में कंपन कराने की घटना ध्रुवण कहलाती है।
18. अध्रुवित प्रकाश (Unpolarised Light)
जिस प्रकाश में विद्युत क्षेत्र के कंपन की दिशा संचरण दिशा के लंबवत् अनेक दिशाओं में हो सकती है, वह अध्रुवित प्रकाश कहलाता है।
19. समतल ध्रुवित प्रकाश (Plane Polarised Light)
जिस प्रकाश में विद्युत क्षेत्र के कंपन केवल एक निश्चित दिशा में होते हैं, वह समतल ध्रुवित प्रकाश कहलाता है।
20. ध्रुवक (Polaroid)
ऐसा पदार्थ जो अध्रुवित प्रकाश में से केवल एक निश्चित दिशा के कंपन को गुजरने देता है, ध्रुवक (Polaroid) कहलाता है।
21. विश्लेषक (Analyzer)
किसी प्रकाश की ध्रुवण अवस्था या ध्रुवण दिशा की जाँच करने के लिए प्रयुक्त ध्रुवक को विश्लेषक कहते हैं।
22. ब्रूस्टर कोण (Brewster Angle)
आपतन का वह कोण जिस पर परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित हो जाता है, ब्रूस्टर कोण कहलाता है।
23. मालुस का नियम (Malus’ Law)
समतल ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता, विश्लेषक की धुरी और ध्रुवक की धुरी के बीच के कोण θ के लिए cos²θ के समानुपाती होती है।
24. प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (Wavelength)
तरंग के दो क्रमागत समान कला वाले बिंदुओं के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं।
25. आवृत्ति (Frequency)
एक सेकंड में होने वाले पूर्ण दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
26. तरंग वेग (Wave Velocity)
तरंग द्वारा एक सेकंड में तय की गई दूरी को तरंग वेग कहते हैं।
27. अपवर्तनांक (Refractive Index)
किसी माध्यम में प्रकाश की चाल और निर्वात में प्रकाश की चाल के अनुपात को उस माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।
सूत्र :
μ = c/v
★ 1. तरंग प्रकाशिकी का परिचय (Introduction to Wave Optics)
परिभाषा
प्रकाश के उन प्रभावों का अध्ययन जिसमें प्रकाश के तरंग रूप को आधार मानकर घटनाओं की व्याख्या की जाती है, तरंग प्रकाशिकी कहलाती है।
प्रकाश के तरंग स्वरूप को समझने के लिए मुख्य रूप से व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य बातें
– प्रकाश ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाता है।
– प्रकाश की कुछ घटनाओं को किरण मॉडल से समझाया जा सकता है।
– व्यतिकरण और विवर्तन प्रकाश के तरंग स्वरूप को स्पष्ट करते हैं।
– ध्रुवण यह बताता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है।
तीन छोटे उदाहरण
i. साबुन की पतली परत पर रंग दिखाई देना।
ii. सीडी की सतह पर रंगों का दिखाई देना।
iii. छोटे छिद्र से प्रकाश का फैलना।
★ 2. तरंगाग्र (Wavefront)
परिभाषा
किसी तरंग के वे सभी बिंदु जो एक ही समय पर समान कला में कंपन कर रहे हों, उन बिंदुओं से बने पृष्ठ को तरंगाग्र कहते हैं।
तरंगाग्र के प्रकार
(i) गोलाकार तरंगाग्र
बिंदु स्रोत से निकलने वाले प्रकाश का तरंगाग्र सामान्यतः गोलाकार होता है।
(ii) बेलनाकार तरंगाग्र
रेखीय स्रोत से निकलने वाले प्रकाश के लिए बेलनाकार तरंगाग्र प्राप्त हो सकता है।
(iii) समतल तरंगाग्र
जब स्रोत बहुत दूर हो या गोलाकार तरंगाग्र का बहुत छोटा भाग लिया जाए, तो वह लगभग समतल माना जा सकता है।
मुख्य बिंदु
– किरण तरंगाग्र पर सदैव लंबवत् होती है।
– समान माध्यम में समतल तरंगाग्र समान गति से आगे बढ़ता है।
– तरंगाग्र प्रकाश के प्रसार की ज्यामितीय कल्पना है।
उदाहरण
i. बल्ब से निकलता प्रकाश → लगभग गोलाकार तरंगाग्र।
ii. बहुत दूर का प्रकाश स्रोत → लगभग समतल तरंगाग्र।
iii. लंबी संकीर्ण स्रोत व्यवस्था → बेलनाकार रूप का तरंगाग्र।
★ 3. हाइगेन्स का सिद्धान्त (Huygens’ Principle)
परिभाषा
हाइगेन्स के अनुसार किसी तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं का स्रोत होता है। किसी बाद के समय में इन तरंगिकाओं को स्पर्श करने वाला पृष्ठ नया तरंगाग्र बनाता है।
मुख्य बिंदु
– प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं का स्रोत माना जाता है।
– द्वितीयक तरंगिकाएँ सभी दिशाओं में फैलती हैं।
– नया तरंगाग्र इन तरंगिकाओं का स्पर्शी पृष्ठ होता है।
– इससे प्रकाश के परावर्तन और अपवर्तन को समझाया जा सकता है।
उदाहरण
i. पानी की सतह पर गोलाकार तरंगों का फैलना।
ii. तरंगाग्र का आगे बढ़ना।
iii. परावर्तन में नया तरंगाग्र बनना।
★ 4. हाइगेन्स सिद्धान्त से परावर्तन (Reflection by Huygens Principle)
परिभाषा
जब प्रकाश तरंग किसी परावर्तक पृष्ठ से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
परावर्तन के नियम
1. आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
2. आपतन कोण = परावर्तन कोण।
i = r
मुख्य निष्कर्ष
हाइगेन्स सिद्धान्त से भी प्राप्त होता है:
i = r
मुख्य बातें
– परावर्तन में प्रकाश की चाल उसी माध्यम में बनी रहती है।
– आवृत्ति नहीं बदलती।
– तरंगदैर्ध्य भी उसी माध्यम में अपरिवर्तित रहती है।
– दिशा बदल जाती है।
उदाहरण
i. दर्पण में चेहरा दिखाई देना।
ii. पानी की सतह से प्रकाश का लौटना।
iii. चमकीली धातु से प्रकाश का परावर्तन।
★ 5. हाइगेन्स सिद्धान्त से अपवर्तन (Refraction by Huygens Principle)
परिभाषा
जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करता है और उसकी चाल बदलने के कारण उसकी दिशा भी बदल जाती है, तो इस घटना को अपवर्तन कहते हैं।
अपवर्तन का नियम
μ₁ sin i = μ₂ sin r
यदि प्रकाश वायु से माध्यम में जाए:
μ = sin i / sin r
चाल और तरंगदैर्ध्य
माध्यम बदलने पर:
v = fλ
आवृत्ति f नहीं बदलती, लेकिन चाल v और तरंगदैर्ध्य λ बदलते हैं।
मुख्य बातें
– विरल से सघन माध्यम → किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है।
– सघन से विरल माध्यम → किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है।
– आवृत्ति नहीं बदलती।
– माध्यम बदलने पर तरंगदैर्ध्य बदलती है।
उदाहरण
i. पानी में रखा सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखाई देना।
ii. काँच में प्रवेश करते समय प्रकाश का मुड़ना।
iii. पानी में पेंसिल टेढ़ी दिखाई देना।
★ 6. प्रकाश का अध्यारोपण सिद्धान्त (Principle of Superposition)
परिभाषा
जब एक ही स्थान पर दो या अधिक तरंगें एक साथ पहुँचती हैं, तो परिणामी विस्थापन प्रत्येक तरंग द्वारा उत्पन्न विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।
यदि दो तरंगों के विस्थापन y₁ और y₂ हैं:
y = y₁ + y₂
मुख्य बातें
– यही सिद्धान्त व्यतिकरण का आधार है।
– तरंगें एक-दूसरे को स्थायी रूप से नष्ट नहीं करतीं।
– मिलने के बाद प्रत्येक तरंग आगे भी चल सकती है।
उदाहरण
i. पानी की दो तरंगों का मिलना।
ii. ध्वनि तरंगों का अध्यारोपण।
iii. प्रकाश की दो सुसंगत तरंगों का मिलना।
★ 7. व्यतिकरण (Interference)
परिभाषा
दो सुसंगत प्रकाश तरंगों के अध्यारोपण के कारण पर्दे पर प्रकाश की तीव्रता का कुछ स्थानों पर अधिक और कुछ स्थानों पर कम होना व्यतिकरण कहलाता है।
व्यतिकरण की शर्तें
– स्रोत सुसंगत होने चाहिए।
– आवृत्ति समान होनी चाहिए।
– कला-अंतर स्थिर होना चाहिए।
– तरंगों की ध्रुवण अवस्थाएँ उपयुक्त होनी चाहिए।
रचनात्मक व्यतिकरण
पथांतर:
Δx = nλ
जहाँ n = 0, 1, 2, 3, …
अधिकतम तीव्रता:
Imax = (√I₁ + √I₂)²
समान तीव्रता की दो तरंगों के लिए:
Imax = 4I₀
विनाशी व्यतिकरण
पथांतर:
Δx = (2n + 1)λ/2
समान तीव्रता की दो तरंगों के लिए:
Imin = 0
तीन उदाहरण
i. यंग का द्वि-झिरी प्रयोग।
ii. साबुन की पतली फिल्म में रंग।
iii. तेल की पतली परत पर रंग दिखाई देना।
★ 8. सुसंगत स्रोत (Coherent Sources)
परिभाषा
ऐसे दो स्रोत जिनकी आवृत्ति समान हो और जिनके बीच कला-अंतर स्थिर बना रहे, सुसंगत स्रोत कहलाते हैं।
मुख्य बिंदु
– केवल समान आवृत्ति पर्याप्त नहीं है।
– स्थिर कला-अंतर भी आवश्यक है।
– दो स्वतंत्र बल्ब सामान्यतः सुसंगत स्रोत नहीं होते।
– एक ही स्रोत से दो स्रोत प्राप्त करना अधिक उपयोगी होता है।
उदाहरण
i. YDSE में S₁ और S₂।
ii. एक ही स्रोत से प्राप्त दो प्रकाश स्रोत।
iii. विभाजित प्रकाश तरंगों से बने स्रोत।
★ 9. यंग का द्वि-झिरी प्रयोग (Young’s Double Slit Experiment)
परिभाषा
प्रकाश के व्यतिकरण को प्रदर्शित करने के लिए यंग ने दो संकीर्ण सुसंगत झिरियों का प्रयोग किया। दोनों झिरियों से निकली तरंगें पर्दे पर मिलकर चमकीली और अंधेरी फ्रिंज बनाती हैं।
आवश्यक राशियाँ
– झिरियों के बीच दूरी = d
– झिरी और पर्दे के बीच दूरी = D
– किसी बिंदु की केंद्रीय रेखा से दूरी = y
– प्रकाश की तरंगदैर्ध्य = λ
यदि D बहुत अधिक हो:
पथांतर Δx = yd/D
उजली फ्रिंज की स्थिति
yd/D = nλ
अतः,
yₙ = nλD/d
अंधेरी फ्रिंज की स्थिति
yd/D = (2n + 1)λ/2
अतः,
yₙ = (2n + 1)λD/2d
★ 10. फ्रिंज चौड़ाई (Fringe Width)
परिभाषा
दो क्रमागत उजली या दो क्रमागत अंधेरी फ्रिंजों के बीच की दूरी को फ्रिंज चौड़ाई कहते हैं।
सूत्र
β = λD/d
जहाँ,
β = फ्रिंज चौड़ाई
λ = तरंगदैर्ध्य
D = पर्दे की दूरी
d = दोनों झिरियों के बीच दूरी
सूत्र से निष्कर्ष
– λ बढ़े → β बढ़ेगी।
– D बढ़े → β बढ़ेगी।
– d बढ़े → β घटेगी।
चार हल किए हुए संख्यात्मक
प्रश्न 1: λ = 600 nm, D = 2 m और d = 0.5 mm हो तो β ज्ञात करें।
हल:
λ = 600 × 10⁻⁹ m
D = 2 m
d = 0.5 × 10⁻³ m
β = λD/d
β = (600 × 10⁻⁹ × 2)/(0.5 × 10⁻³)
β = 2.4 × 10⁻³ m = 2.4 mm
—
प्रश्न 2: λ = 500 nm, D = 1.5 m और d = 0.75 mm।
β = λD/d
β = (500 × 10⁻⁹ × 1.5)/(0.75 × 10⁻³)
β = 1 × 10⁻³ m = 1 mm
—
प्रश्न 3: β = 3 mm, D = 1.5 m और d = 0.5 mm। λ ज्ञात करें।
λ = βd/D
λ = (3 × 10⁻³ × 0.5 × 10⁻³)/1.5
λ = 1 × 10⁻⁶ m
अर्थात् λ = 1000 nm
—
प्रश्न 4: β = 2 mm, λ = 500 nm और D = 2 m। d ज्ञात करें।
d = λD/β
d = (500 × 10⁻⁹ × 2)/(2 × 10⁻³)
d = 5 × 10⁻⁴ m = 0.5 mm
तीन उदाहरण
i. दो झिरियों के बीच दूरी घटाने पर फ्रिंज चौड़ी होना।
ii. लाल प्रकाश से फ्रिंज अपेक्षाकृत चौड़ी होना।
iii. पर्दे को दूर करने पर फ्रिंज चौड़ाई बढ़ना।
★ 11. व्यतिकरण में तीव्रता (Intensity in Interference)
यदि दो तरंगों की तीव्रताएँ I₁ और I₂ हैं, तो परिणामी तीव्रता:
I = I₁ + I₂ + 2√(I₁I₂) cosφ
जहाँ φ = कला-अंतर।
समान तीव्रता के लिए
यदि I₁ = I₂ = I₀,
I = 2I₀(1 + cosφ)
अधिकतम:
Imax = 4I₀
न्यूनतम:
Imin = 0
चार छोटे अभ्यास
1. I₀ = 4 W/m² हो और रचनात्मक व्यतिकरण हो।
Imax = 4I₀ = 16 W/m²
2. I₀ = 9 W/m² हो।
Imax = 4 × 9 = 36 W/m²
3. समान तीव्रता की तरंगों में विनाशी व्यतिकरण हो।
Imin = 0
4. I₁ = 4 और I₂ = 9 W/m² तथा φ = 0°।
I = (√4 + √9)²
I = (2 + 3)²
I = 25 W/m²
★ 12. एकल-झिरी विवर्तन (Single Slit Diffraction)
परिभाषा
जब प्रकाश बहुत संकीर्ण झिरी से होकर गुजरता है और झिरी के बाद फैलकर ज्यामितीय छाया वाले क्षेत्र में भी पहुँचता है, तो इस घटना को विवर्तन कहते हैं।
महत्वपूर्ण बात
विवर्तन स्पष्ट रूप से तब दिखाई देता है जब झिरी की चौड़ाई प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के तुलनीय हो।
न्यूनतम की शर्त
a sinθ = nλ
जहाँ,
a = झिरी की चौड़ाई
θ = विवर्तन कोण
n = 1, 2, 3, …
पहले न्यूनतम के लिए:
a sinθ = λ
छोटे कोण के लिए:
sinθ ≈ θ
अतः,
θ ≈ λ/a
केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई
यदि पर्दे की दूरी D है:
एक ओर की दूरी:
y = Dλ/a
दोनों ओर की कुल चौड़ाई:
W = 2Dλ/a
मुख्य बिंदु
– केंद्रीय उच्चिष्ठ सबसे अधिक चौड़ा होता है।
– केंद्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता अधिक होती है।
– झिरी की चौड़ाई घटाने पर विवर्तन अधिक स्पष्ट होता है।
– यह प्रकाश के तरंग स्वरूप का प्रमाण है।
चार संख्यात्मक
प्रश्न 1: D = 2 m, λ = 600 nm और a = 0.5 mm।
W = 2Dλ/a
W = (2 × 2 × 600 × 10⁻⁹)/(0.5 × 10⁻³)
W = 4.8 × 10⁻³ m = 4.8 mm
प्रश्न 2: D = 1 m, λ = 500 nm, a = 0.25 mm।
W = (2 × 1 × 500 × 10⁻⁹)/(0.25 × 10⁻³)
W = 4 × 10⁻³ m = 4 mm
प्रश्न 3: W = 2 mm, D = 1 m, λ = 500 nm।
a = 2Dλ/W
a = (2 × 1 × 500 × 10⁻⁹)/(2 × 10⁻³)
a = 5 × 10⁻⁴ m = 0.5 mm
प्रश्न 4: a = 0.4 mm, D = 2 m, λ = 400 nm।
W = 2Dλ/a
W = (2 × 2 × 400 × 10⁻⁹)/(0.4 × 10⁻³)
W = 4 × 10⁻³ m = 4 mm
तीन उदाहरण
i. बहुत छोटे छिद्र से प्रकाश का फैलना।
ii. सूक्ष्म वस्तुओं के किनारों पर प्रकाश का मुड़ना।
iii. संकीर्ण झिरी से निकलने पर चौड़ी प्रकाश पट्टी बनना।
★ 13. ध्रुवण (Polarisation)
परिभाषा
प्रकाश के विद्युत क्षेत्र के कंपन को अनेक दिशाओं से सीमित करके केवल एक निश्चित दिशा में कर देने की घटना ध्रुवण कहलाती है।
मुख्य निष्कर्ष
ध्रुवण यह सिद्ध करता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है।
मुख्य बिंदु
– केवल अनुप्रस्थ तरंगों का ध्रुवण किया जा सकता है।
– ध्रुवण से प्रकाश के तरंग स्वरूप की पुष्टि होती है।
– अध्रुवित प्रकाश में कंपन अनेक दिशाओं में होते हैं।
– समतल ध्रुवित प्रकाश में कंपन एक निश्चित दिशा में होते हैं।
उदाहरण
i. पोलरॉइड चश्मे।
ii. चमक कम करने वाले ध्रुवक।
iii. फोटोग्राफी में पोलराइजिंग फिल्टर।
—
★ 14. ब्रूस्टर का नियम (Brewster’s Law)
परिभाषा
जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम की सतह पर ऐसे कोण पर आपतित होता है कि परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित हो जाए, तो उस कोण को ब्रूस्टर कोण कहते हैं।
ब्रूस्टर के नियम के अनुसार:
μ = tan iₚ
जहाँ iₚ = ब्रूस्टर कोण।
विशेष स्थिति
ब्रूस्टर कोण पर:
iₚ + r = 90°
अर्थात् परावर्तित किरण और अपवर्तित किरण परस्पर लंबवत् होती हैं।
चार संख्यात्मक
प्रश्न 1: किसी माध्यम का μ = 1.5 है। ब्रूस्टर कोण ज्ञात करें।
μ = tan iₚ
tan iₚ = 1.5
अतः,
iₚ ≈ 56.3°
प्रश्न 2: μ = √3 हो।
tan iₚ = √3
अतः,
iₚ = 60°
प्रश्न 3: ब्रूस्टर कोण 45° है। μ ज्ञात करें।
μ = tan45°
μ = 1
प्रश्न 4: किसी माध्यम के लिए μ = 1.73।
tan iₚ = 1.73
अतः,
iₚ ≈ 60°
तीन उदाहरण
i. पानी की चमक कम करने के लिए पोलरॉइड का प्रयोग।
ii. सड़क पर परावर्तित तेज प्रकाश को कम करना।
iii. ध्रुवित प्रकाश उत्पन्न करने की व्यवस्था।
★ 15. मालुस का नियम (Malus’ Law)
परिभाषा
यदि समतल ध्रुवित प्रकाश किसी विश्लेषक से होकर गुजरता है और ध्रुवक तथा विश्लेषक की संचरण-अक्षों के बीच कोण θ हो, तो निकलने वाले प्रकाश की तीव्रता cos²θ के समानुपाती होती है।
सूत्र
I = I₀ cos²θ
जहाँ I₀ = विश्लेषक पर आपतित ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता।
विशेष स्थितियाँ
θ = 0°:
I = I₀
θ = 90°:
I = 0
θ = 60°:
I = I₀/4
चार संख्यात्मक
प्रश्न 1: I₀ = 100 W/m² और θ = 60°।
I = I₀ cos²60°
I = 100 × (1/2)²
I = 25 W/m²
प्रश्न 2: I₀ = 80 W/m² और θ = 0°।
I = 80 × 1
I = 80 W/m²
प्रश्न 3: I₀ = 60 W/m² और θ = 90°।
I = 60 × 0
I = 0
प्रश्न 4: I₀ = 120 W/m² और θ = 45°।
I = 120 × (1/√2)²
I = 60 W/m²
तीन उदाहरण
i. पोलरॉइड चश्मे से चमक कम होना।
ii. कैमरा फिल्टर।
iii. ध्रुवक और विश्लेषक की स्थिति बदलने पर प्रकाश की तीव्रता बदलना।
★ 16. प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति और वेग
परिभाषा
किसी तरंग के एक सेकंड में होने वाले दोलनों की संख्या उसकी आवृत्ति कहलाती है तथा तरंग द्वारा एक सेकंड में तय की गई दूरी उसका वेग कहलाती है।
सूत्र
v = fλ
निर्वात में:
c = fλ
और,
c ≈ 3 × 10⁸ m/s
माध्यम में
v = c/μ
आवृत्ति माध्यम बदलने पर नहीं बदलती।
चार संख्यात्मक
1. f = 6 × 10¹⁴ Hz, λ = 500 nm।
v = fλ
v = 6 × 10¹⁴ × 500 × 10⁻⁹
v = 3 × 10⁸ m/s
2. λ = 600 nm, c = 3 × 10⁸ m/s।
f = c/λ
f = 3 × 10⁸/(600 × 10⁻⁹)
f = 5 × 10¹⁴ Hz
3. μ = 1.5, c = 3 × 10⁸ m/s।
v = c/μ
v = 2 × 10⁸ m/s
4. v = 2 × 10⁸ m/s, f = 5 × 10¹⁴ Hz।
λ = v/f
λ = 4 × 10⁻⁷ m = 400 nm
★ 17. तरंग प्रकाशिकी के प्रमुख सूत्र — एक साथ
★ तरंग का वेग
v = fλ
★ अपवर्तनांक
μ = c/v
★ अपवर्तन का नियम
μ₁ sin i = μ₂ sin r
★ व्यतिकरण में रचनात्मक स्थिति
Δx = nλ
★ व्यतिकरण में विनाशी स्थिति
Δx = (2n + 1)λ/2
★ YDSE में पथांतर
Δx = yd/D
★ उजली फ्रिंज
yₙ = nλD/d
★ अंधेरी फ्रिंज
yₙ = (2n + 1)λD/2d
★ फ्रिंज चौड़ाई
β = λD/d
★ व्यतिकरण की तीव्रता
I = I₁ + I₂ + 2√(I₁I₂) cosφ
★ समान तीव्रता के लिए अधिकतम तीव्रता
Imax = 4I₀
★ एकल-झिरी विवर्तन का न्यूनतम
a sinθ = nλ
★ केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई
W = 2Dλ/a
★ ब्रूस्टर का नियम
μ = tan iₚ
★ ब्रूस्टर कोण पर
iₚ + r = 90°
★ मालुस का नियम
I = I₀ cos²θ
★ महत्वपूर्ण तुलना व्यतिकरण और विवर्तन में अंतर
व्यतिकरण | विवर्तन
सामान्यतः दो सुसंगत स्रोतों की तरंगों से | एक ही झिरी के अलग-अलग भागों से आने वाली तरंगों के अध्यारोपण से
क्रमिक फ्रिंज सामान्यतः लगभग समान चौड़ाई की | केंद्रीय उच्चिष्ठ अधिक चौड़ा होता है
उजली फ्रिंजों की तीव्रता आदर्श स्थिति में समान हो सकती है | उच्चिष्ठों की तीव्रता समान नहीं होती
YDSE इसका प्रमुख उदाहरण है | एकल झिरी इसका प्रमुख उदाहरण है
★ परीक्षा में विशेष रूप से याद रखें
1. प्रकाश की आवृत्ति माध्यम बदलने पर नहीं बदलती।
2. माध्यम बदलने पर प्रकाश की चाल बदलती है।
3. चाल बदलने के कारण तरंगदैर्ध्य बदलती है।
4. सुसंगत स्रोतों के बीच कला-अंतर स्थिर होना चाहिए।
5. रचनात्मक व्यतिकरण के लिए पथांतर nλ होता है।
6. विनाशी व्यतिकरण के लिए पथांतर (2n + 1)λ/2 होता है।
7. YDSE में फ्रिंज चौड़ाई β = λD/d
8. झिरी की दूरी d घटाने पर फ्रिंज चौड़ाई बढ़ती है।
9. एकल-झिरी विवर्तन में केंद्रीय उच्चिष्ठ सबसे चौड़ा होता है।
10. ध्रुवण प्रकाश के अनुप्रस्थ होने का प्रमाण है।
11. ब्रूस्टर नियम μ = tan iₚ है।
12. ब्रूस्टर कोण पर परावर्तित और अपवर्तित किरणें 90° पर होती हैं।
13. मालुस नियम I = I₀ cos²θ है।
★ बोर्ड परीक्षा में होने वाली सामान्य गलतियाँ
★ 1. β = λD/d में D और d को उल्टा मत लिखना।
★ 2. nm को सीधे m की तरह इस्तेमाल मत करना।
1 nm = 10⁻⁹ m
★ 3. mm को भी SI में बदलना न भूलें।
1 mm = 10⁻³ m
★ 4. ब्रूस्टर नियम में:
μ = tan iₚ
को μ = sin iₚ मत लिखना।
★ 5. मालुस नियम में cos θ नहीं बल्कि:
cos²θ
होता है।
★ 6. ध्रुवण को केवल “प्रकाश की दिशा बदलना” मत लिखना।
★ 7. व्यतिकरण और विवर्तन को एक ही घटना मत लिखना।
★ 8. अपवर्तन में आवृत्ति बदलती है—यह गलत है।
★ 9. YDSE में झिरियों की दूरी बढ़ाने पर फ्रिंज चौड़ाई घटती है।
★ 10. उत्तर में सूत्र लिखकर इकाई छोड़ना नहीं है।
★ 11. Numerical में पहले दिया गया, फिर सूत्र, फिर मान रखने की प्रक्रिया और अंत में इकाई लिखना बेहतर है।
★ 12. ब्रूस्टर कोण और सामान्य आपतन कोण को आपस में न मिलाएँ।
★ महत्वपूर्ण बोर्ड प्रश्न
1. तरंगाग्र की परिभाषा दीजिए तथा इसके प्रकार समझाइए।
2. हाइगेन्स का सिद्धान्त लिखिए।
3. हाइगेन्स सिद्धान्त की सहायता से परावर्तन के नियम को समझाइए।
4. हाइगेन्स सिद्धान्त से अपवर्तन के नियम की व्याख्या कीजिए।
5. व्यतिकरण क्या है? रचनात्मक और विनाशी व्यतिकरण की शर्तें लिखिए।
6. सुसंगत स्रोत क्या हैं?
7. यंग का द्वि-झिरी प्रयोग समझाइए।
8. फ्रिंज चौड़ाई का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
9. फ्रिंज चौड़ाई किन-किन राशियों पर निर्भर करती है?
10. एकल-झिरी विवर्तन समझाइए।
11. केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई का व्यंजक लिखिए।
12. ध्रुवण क्या है? इससे प्रकाश के अनुप्रस्थ होने का प्रमाण कैसे मिलता है?
13. ब्रूस्टर का नियम लिखिए।
14. ब्रूस्टर कोण पर परावर्तित और अपवर्तित किरणों के बीच कितना कोण होता है?
15. मालुस का नियम लिखिए।
16. व्यतिकरण और विवर्तन में अंतर लिखिए।
17. माध्यम बदलने पर प्रकाश की आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
18. YDSE में D को दोगुना करने पर फ्रिंज चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
19. YDSE में d को आधा करने पर फ्रिंज चौड़ाई कितनी होगी?
20. ध्रुवक और विश्लेषक में अंतर बताइए।
★ खुद से पूछो — Self Questions
1. तरंगाग्र और किरण में क्या संबंध है?
2. हाइगेन्स सिद्धान्त में प्रत्येक बिंदु को क्या माना गया है?
3. सुसंगत स्रोत बनाने के लिए कौन-सी दो बातें जरूरी हैं?
4. रचनात्मक व्यतिकरण में पथांतर कितना होता है?
5. विनाशी व्यतिकरण में पथांतर कितना होता है?
6. YDSE में फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र क्या है?
7. यदि λ बढ़ जाए तो β पर क्या प्रभाव होगा?
8. यदि d बढ़ जाए तो β पर क्या प्रभाव होगा?
9. विवर्तन कब अधिक स्पष्ट दिखाई देता है?
10. केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई किस सूत्र से मिलती है?
11. ध्रुवण किस प्रकार की तरंग का गुण है?
12. ब्रूस्टर नियम क्या है?
13. ब्रूस्टर कोण पर iₚ और r में क्या संबंध है?
14. मालुस के नियम में θ = 90° पर तीव्रता कितनी होगी?
15. प्रकाश की आवृत्ति माध्यम बदलने पर क्यों नहीं बदलती?
★ SELF TEST
1. YDSE में फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र है—
(A) λd/D
(B) λD/d
(C) Dd/λ
(D) λ/Dd
2. रचनात्मक व्यतिकरण के लिए पथांतर है—
(A) λ/2
(B) (2n + 1)λ/2
(C) nλ
(D) λ/4
3. विनाशी व्यतिकरण की शर्त है—
(A) nλ
(B) 2nλ
(C) (2n + 1)λ/2
(D) λ
4. ब्रूस्टर का नियम है—
(A) μ = sin iₚ
(B) μ = cos iₚ
(C) μ = tan iₚ
(D) μ = cot iₚ
5. मालुस का नियम है—
(A) I = I₀ sinθ
(B) I = I₀ cosθ
(C) I = I₀ cos²θ
(D) I = I₀ tanθ
6. ध्रुवण किसका प्रमाण है?
(A) प्रकाश के अनुदैर्ध्य होने का
(B) प्रकाश के अनुप्रस्थ होने का
(C) प्रकाश के स्थिर होने का
(D) प्रकाश के कणात्मक न होने का
7. माध्यम बदलने पर प्रकाश की कौन-सी राशि अपरिवर्तित रहती है?
(A) चाल
(B) तरंगदैर्ध्य
(C) आवृत्ति
(D) अपवर्तनांक
8. एकल-झिरी विवर्तन में सबसे चौड़ा उच्चिष्ठ कौन-सा है?
(A) प्रथम
(B) द्वितीय
(C) केंद्रीय
(D) अंतिम
9. YDSE में D बढ़ाने पर फ्रिंज चौड़ाई—
(A) घटती है
(B) बढ़ती है
(C) शून्य हो जाती है
(D) अपरिवर्तित रहती है
10. ब्रूस्टर कोण पर परावर्तित और अपवर्तित किरणों के बीच कोण होता है—
(A) 0°
(B) 45°
(C) 90°
(D) 180°
—
★ SELF TEST के उत्तर
1. (B) ✓
2. (C) ✓
3. (C) ✓
4. (C) ✓
5. (C) ✓
6. (B) ✓
7. (C) ✓
8. (C) ✓
9. (B) ✓
10. (C) ✓
★ चार सबसे जरूरी Numerical Tricks
Trick 1
यदि β = λD/d है, तो याद रखें:
λ और D बढ़ेंगे → β बढ़ेगी
d बढ़ेगा → β घटेगी
Trick 2
यदि nm दिया है:
nm × 10⁻⁹ = m
Trick 3
यदि mm दिया है:
mm × 10⁻³ = m
Trick 4
Numerical में यह क्रम रखें:
दिया है → सूत्र → मान रखना → गणना → उत्तर + इकाई
★ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
तरंग प्रकाशिकी में प्रकाश को तरंग के रूप में समझा जाता है। तरंगाग्र के प्रत्येक बिंदु से द्वितीयक तरंगिकाएँ निकलती हैं, यही हाइगेन्स सिद्धान्त का आधार है।
दो सुसंगत प्रकाश तरंगों के मिलने से व्यतिकरण होता है। रचनात्मक व्यतिकरण में पथांतर nλ तथा विनाशी व्यतिकरण में (2n + 1)λ/2 होता है।
यंग के द्वि-झिरी प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई:
β = λD/d
एकल झिरी से प्रकाश के फैलने को विवर्तन कहते हैं और केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई:
W = 2Dλ/a
ध्रुवण प्रकाश के अनुप्रस्थ तरंग होने का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
ब्रूस्टर का नियम:
μ = tan iₚ
और मालुस का नियम:
I = I₀ cos²θ
★ अध्याय समाप्त करने से पहले — सबसे जरूरी बातें
★ 1. YDSE का सूत्र और उससे जुड़े Numerical पक्के करें।
★ 2. रचनात्मक और विनाशी व्यतिकरण की शर्तों को उल्टा न करें।
★ 3. हाइगेन्स सिद्धान्त से परावर्तन और अपवर्तन की व्याख्या परीक्षा के लिए तैयार रखें।
★ 4. विवर्तन में केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई को याद रखें।
★ 5. ध्रुवण से प्रकाश के अनुप्रस्थ होने का निष्कर्ष जरूर याद रखें।
★ 6. ब्रूस्टर नियम और मालुस नियम से Numerical की तैयारी करें।
★ 7. nm, μm और mm को metre में बदलने की आदत डालें।
★ 8. Formula याद करने से ज्यादा जरूरी है कि उसमें कौन-सी राशि कहाँ आती है, यह समझें।
★ 9. किसी व्युत्पत्ति में अंतिम परिणाम को बॉक्स/रेखांकित करके स्पष्ट लिखें।
★ 10. बोर्ड परीक्षा में केवल अंतिम उत्तर न लिखें; Numerical में सूत्र और मान रखने के चरण भी दिखाएँ।
★ अंतिम एक-पंक्ति याद रखने वाला सार
हाइगेन्स → तरंगाग्र → परावर्तन/अपवर्तन → अध्यारोपण → व्यतिकरण → YDSE → फ्रिंज चौड़ाई → विवर्तन → ध्रुवण → ब्रूस्टर नियम → मालुस नियम