अध्याय 12 : परमाणु (Atoms)

★ महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

1. परमाणु (Atom)

किसी तत्व की वह सबसे छोटी विद्युत उदासीन इकाई, जो उस तत्व के रासायनिक गुणों को बनाए रखती है, परमाणु कहलाती है।

2. इलेक्ट्रॉन (Electron)

परमाणु का ऋणावेशित मूल कण इलेक्ट्रॉन कहलाता है। इसका आवेश −e तथा द्रव्यमान लगभग 9.1 × 10⁻³¹ kg होता है।

3. प्रोटॉन (Proton)

परमाणु के नाभिक में पाया जाने वाला धनावेशित मूल कण प्रोटॉन कहलाता है। इसका आवेश +e होता है।

4. नाभिक (Nucleus)

परमाणु के केंद्र में स्थित अत्यंत छोटा, सघन तथा धनावेशित भाग नाभिक कहलाता है। परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित रहता है।

5. परमाणु क्रमांक (Atomic Number)

किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को उसका परमाणु क्रमांक कहते हैं।

इसे Z से दर्शाते हैं।

6. द्रव्यमान संख्या (Mass Number)

परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या को द्रव्यमान संख्या कहते हैं।

A = Z + N

7. समस्थानिक (Isotopes)

एक ही तत्व के वे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग होती है, समस्थानिक कहलाते हैं।

8. समभारिक (Isobars)

वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान लेकिन परमाणु क्रमांक अलग होते हैं, समभारिक कहलाते हैं।

9. परमाणु स्पेक्ट्रम (Atomic Spectrum)

किसी परमाणु द्वारा उत्सर्जित या अवशोषित विद्युतचुम्बकीय विकिरण की विभिन्न तरंगदैर्ध्यों का क्रमबद्ध वितरण परमाणु स्पेक्ट्रम कहलाता है।

10. रेखीय स्पेक्ट्रम (Line Spectrum)

जब किसी परमाणु का स्पेक्ट्रम अलग-अलग निश्चित तरंगदैर्ध्य की चमकीली या अंधेरी रेखाओं के रूप में प्राप्त होता है, तो उसे रेखीय स्पेक्ट्रम कहते हैं।

11. उत्तेजित अवस्था (Excited State)

जब परमाणु का इलेक्ट्रॉन सामान्य ऊर्जा अवस्था से अधिक ऊर्जा वाली अवस्था में पहुँच जाता है, तो परमाणु उत्तेजित अवस्था में कहलाता है।

12. मूल अवस्था (Ground State)

परमाणु की वह अवस्था जिसमें इलेक्ट्रॉन सबसे कम संभव ऊर्जा वाली अवस्था में रहता है, मूल अवस्था कहलाती है।

13. स्थिर कक्षा (Stationary Orbit)

बोर के अनुसार परमाणु में इलेक्ट्रॉन कुछ निश्चित कक्षाओं में बिना ऊर्जा विकिरित किए घूम सकता है। इन कक्षाओं को स्थिर कक्षा कहते हैं।

14. ऊर्जा स्तर (Energy Level)

परमाणु में इलेक्ट्रॉन जिन निश्चित ऊर्जा अवस्थाओं में रह सकता है, उन्हें ऊर्जा स्तर कहते हैं।

15. क्वांटीकरण (Quantisation)

किसी भौतिक राशि का केवल कुछ निश्चित मान ग्रहण करना, न कि सभी संभव मान, क्वांटीकरण कहलाता है।

16. फोटॉन (Photon)

विद्युतचुम्बकीय विकिरण की ऊर्जा का एक निश्चित पैकेट फोटॉन कहलाता है।

E = hν

17. आयनीकरण ऊर्जा (Ionisation Energy)

परमाणु की मूल अवस्था से उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन को पूर्णतः बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा आयनीकरण ऊर्जा कहलाती है।

18. आयनीकरण विभव (Ionisation Potential)

एक इलेक्ट्रॉन को परमाणु से पूर्णतः बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम विभवांतर को आयनीकरण विभव कहते हैं।

19. बोर त्रिज्या (Bohr Radius)

हाइड्रोजन परमाणु की पहली स्थिर कक्षा की त्रिज्या को बोर त्रिज्या कहते हैं।

a₀ ≈ 0.529 Å

20. ऊर्जा अवस्था का संक्रमण (Transition)

जब परमाणु का इलेक्ट्रॉन एक ऊर्जा स्तर से दूसरे ऊर्जा स्तर में जाता है, तो इस प्रक्रिया को ऊर्जा अवस्था का संक्रमण कहते हैं।

21. उत्सर्जन स्पेक्ट्रम (Emission Spectrum)

जब उत्तेजित परमाणु निम्न ऊर्जा अवस्था में लौटते समय विकिरण उत्सर्जित करता है, तो प्राप्त स्पेक्ट्रम उत्सर्जन स्पेक्ट्रम कहलाता है।

22. अवशोषण स्पेक्ट्रम (Absorption Spectrum)

जब परमाणु कुछ निश्चित तरंगदैर्ध्य की ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है, तो प्राप्त स्पेक्ट्रम अवशोषण स्पेक्ट्रम कहलाता है।

23. रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford Atomic Model)

रदरफोर्ड के अनुसार परमाणु का लगभग पूरा धनावेश और द्रव्यमान एक छोटे नाभिक में केंद्रित होता है तथा इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमते हैं।

24. बोर का परमाणु मॉडल (Bohr Atomic Model)

बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित स्थिर कक्षाओं में ही रह सकते हैं और इन कक्षाओं में रहते समय ऊर्जा का विकिरण नहीं करते।

★ 1. परमाणु की संरचना का प्रारंभिक विचार (Early Idea of Atom)

परिभाषा

परमाणु पदार्थ की सूक्ष्म संरचना की मूल इकाई है। इसके अंदर इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और नाभिक जैसे घटक पाए जाते हैं।

परमाणु सामान्य अवस्था में विद्युत उदासीन होता है।

मुख्य बातें

– इलेक्ट्रॉन पर ऋणात्मक आवेश होता है।
– प्रोटॉन पर धनात्मक आवेश होता है।
– नाभिक परमाणु के केंद्र में होता है।
– परमाणु का अधिकांश भाग खाली स्थान होता है।
– परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान नाभिक में रहता है।

तीन उदाहरण

i. हाइड्रोजन परमाणु में एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन होता है।
ii. हीलियम परमाणु में दो प्रोटॉन और सामान्यतः दो न्यूट्रॉन होते हैं।
iii. कार्बन-12 में 6 प्रोटॉन और 6 न्यूट्रॉन होते हैं।

★ 2. थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson’s Atomic Model)

परिभाषा

थॉमसन ने परमाणु को धनावेशित गोले के रूप में माना, जिसमें ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन इस प्रकार उपस्थित होते हैं कि पूरे परमाणु का कुल आवेश शून्य रहता है।

इसे सामान्यतः प्लम-पुडिंग मॉडल कहा जाता है।

मॉडल की मुख्य बातें

– धनावेश पूरे परमाणु में फैला हुआ माना गया।
– इलेक्ट्रॉन इसके अंदर उपस्थित माने गए।
– परमाणु कुल मिलाकर उदासीन माना गया।

सीमा

यह मॉडल बाद में रदरफोर्ड के α-कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामों को समझाने में असफल रहा।

उदाहरण

i. धनावेशित गोले में इलेक्ट्रॉनों की कल्पना।
ii. कुल धनावेश = कुल ऋणावेश।
iii. परमाणु की विद्युत उदासीनता।

★ 3. रदरफोर्ड का α-कण प्रकीर्णन प्रयोग (Rutherford’s Alpha Scattering Experiment)

प्रयोग

रदरफोर्ड ने बहुत पतली सोने की पन्नी पर तेज α-कणों की बौछार की और उनके प्रकीर्णन का अध्ययन किया।

मुख्य प्रेक्षण

1. अधिकांश α-कण सीधे निकल गए।
2. कुछ α-कण थोड़े कोण से विचलित हुए।
3. बहुत कम α-कण बड़े कोण से विचलित हुए।
4. बहुत ही कम α-कण लगभग वापस लौटे।

निष्कर्ष

इन परिणामों से पता चला कि:

– परमाणु का अधिकांश भाग खाली है।
– धनावेश एक बहुत छोटे क्षेत्र में केंद्रित है।
– परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान छोटे नाभिक में केंद्रित है।
– इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर उपस्थित होते हैं।

तीन महत्वपूर्ण उदाहरण

i. अधिकांश α-कण सीधे निकलना → परमाणु का अधिकांश भाग खाली।
ii. थोड़ा विचलन → नाभिक का विद्युत क्षेत्र।
iii. बड़े कोण का विचलन → बहुत छोटा और सघन नाभिक।

★ 4. रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford Model)

मुख्य विचार

रदरफोर्ड के मॉडल में परमाणु के केंद्र में छोटा धनावेशित नाभिक होता है और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमते हैं।

मुख्य बातें

– नाभिक बहुत छोटा होता है।
– नाभिक में धनावेश और लगभग पूरा द्रव्यमान होता है।
– इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हैं।
– परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है।

मॉडल की मुख्य कमी

यदि इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार कक्षा में घूम रहा है, तो वह त्वरित आवेशित कण होगा। शास्त्रीय विद्युतचुम्बकीय सिद्धान्त के अनुसार त्वरित आवेशित कण ऊर्जा विकिरित करता है।

इससे इलेक्ट्रॉन धीरे-धीरे ऊर्जा खोकर नाभिक में गिर जाना चाहिए।

लेकिन वास्तविक परमाणु स्थिर होते हैं।

इस समस्या को बोर मॉडल ने समझाने का प्रयास किया।

★ 5. परमाणु स्पेक्ट्रम (Atomic Spectrum)

परिभाषा

परमाणु द्वारा उत्सर्जित या अवशोषित प्रकाश की विभिन्न निश्चित तरंगदैर्ध्यों का क्रमबद्ध वितरण परमाणु स्पेक्ट्रम कहलाता है।

मुख्य बातें

– परमाणुओं का स्पेक्ट्रम सामान्यतः रेखीय होता है।
– अलग-अलग तत्वों का स्पेक्ट्रम अलग होता है।
– हाइड्रोजन का स्पेक्ट्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
– स्पेक्ट्रम की रेखाएँ निश्चित ऊर्जा संक्रमण से उत्पन्न होती हैं।

तीन उदाहरण

i. हाइड्रोजन का रेखीय स्पेक्ट्रम।
ii. सोडियम की विशिष्ट पीली रेखाएँ।
iii. गैसों के डिस्चार्ज ट्यूब में रेखीय स्पेक्ट्रम।

★ 6. हाइड्रोजन का रेखीय स्पेक्ट्रम (Hydrogen Line Spectrum)

हाइड्रोजन परमाणु से प्राप्त स्पेक्ट्रम में कई निश्चित रेखाएँ होती हैं।

इन रेखाओं को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा गया है।

प्रमुख श्रेणियाँ

लाइमन श्रेणी (Lyman Series)
→ पराबैंगनी क्षेत्र

बाल्मर श्रेणी (Balmer Series)
→ मुख्यतः दृश्य क्षेत्र

पास्चेन श्रेणी (Paschen Series)
→ अवरक्त क्षेत्र

ब्रैकेट श्रेणी (Brackett Series)
→ अवरक्त क्षेत्र

फुंड श्रेणी (Pfund Series)
→ अवरक्त क्षेत्र

याद रखने की बात

बाल्मर श्रेणी का अंतिम ऊर्जा स्तर:

n₁ = 2

लाइमन:

n₁ = 1

पास्चेन:

n₁ = 3

ब्रैकेट:

n₁ = 4

फुंड:

n₁ = 5

★ 7. राइडबर्ग समीकरण (Rydberg Equation)

हाइड्रोजन की स्पेक्ट्रम रेखाओं के लिए:

1/λ = R(1/n₁² − 1/n₂²)

जहाँ:

n₂ > n₁

और R = राइडबर्ग नियतांक।

R ≈ 1.097 × 10⁷ m⁻¹

अलग-अलग श्रेणियों के लिए

लाइमन:

n₁ = 1

बाल्मर:

n₁ = 2

पास्चेन:

n₁ = 3

ब्रैकेट:

n₁ = 4

फुंड:

n₁ = 5

चार Numerical

प्रश्न 1: बाल्मर श्रेणी में n₁ = 2 और n₂ = 3 हो। तरंगदैर्ध्य का संबंध लिखिए।

1/λ = R(1/2² − 1/3²)

= R(1/4 − 1/9)

= 5R/36

—

प्रश्न 2: लाइमन श्रेणी में n₁ = 1 और n₂ = 2।

1/λ = R(1 − 1/4)

1/λ = 3R/4

—

प्रश्न 3: पास्चेन श्रेणी में n₁ = 3 और n₂ = 4।

1/λ = R(1/9 − 1/16)

1/λ = 7R/144

—

प्रश्न 4: बाल्मर श्रेणी के लिए n₁ = 2 और n₂ = 4।

1/λ = R(1/4 − 1/16)

1/λ = 3R/16

★ 8. बोर का परमाणु मॉडल (Bohr’s Atomic Model)

परिभाषा

बोर ने परमाणु की स्थिरता और हाइड्रोजन के रेखीय स्पेक्ट्रम को समझाने के लिए एक मॉडल प्रस्तुत किया जिसमें इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं में रह सकते हैं।

बोर की मुख्य अभिधारणाएँ

★ पहली अभिधारणा — स्थिर कक्षाएँ

इलेक्ट्रॉन कुछ निश्चित कक्षाओं में घूम सकते हैं। इन कक्षाओं में रहते समय वे ऊर्जा का विकिरण नहीं करते।

★ दूसरी अभिधारणा — कोणीय संवेग का क्वांटीकरण

इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग:

mvr = nh/2π

जहाँ:

n = 1, 2, 3, …

★ तीसरी अभिधारणा — ऊर्जा का उत्सर्जन/अवशोषण

जब इलेक्ट्रॉन एक ऊर्जा स्तर से दूसरे ऊर्जा स्तर में जाता है, तभी ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण होता है।

hν = E₂ − E₁

उत्सर्जन के लिए उच्च से निम्न स्तर:

hν = E₂ − E₁

जहाँ E₂ > E₁।

मुख्य बातें

– n = 1 → पहली कक्षा।
– n = 2 → दूसरी कक्षा।
– n = 3 → तीसरी कक्षा।
– ऊर्जा स्तर बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा बढ़ती है।
– इलेक्ट्रॉन का संक्रमण ही स्पेक्ट्रम रेखा उत्पन्न करता है।

★ 9. बोर की कक्षा की त्रिज्या (Radius of Bohr Orbit)

इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का विद्युत आकर्षण बल:

F = 1/(4πε₀) × Ze²/r²

वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल:

F = mv²/r

अतः,

mv²/r = 1/(4πε₀) × Ze²/r²

और बोर की शर्त:

mvr = nh/2π

इन दोनों से:

rₙ = n²h²ε₀/(πmZe²)

हाइड्रोजन के लिए Z = 1:

rₙ = n²a₀

जहाँ:

a₀ = 0.529 Å

अतः:

rₙ = 0.529 n² Å

निष्कर्ष

rₙ ∝ n²

अर्थात् कक्षा संख्या बढ़ने पर कक्षा की त्रिज्या तेजी से बढ़ती है।

चार Numerical

प्रश्न 1: हाइड्रोजन की पहली कक्षा की त्रिज्या ज्ञात है 0.529 Å। दूसरी कक्षा की त्रिज्या?

r₂ = 0.529 × 2²

r₂ = 2.116 Å

—

प्रश्न 2: तीसरी कक्षा की त्रिज्या:

r₃ = 0.529 × 9

r₃ = 4.761 Å

—

प्रश्न 3: यदि r₁ = 0.529 Å, तो r₄?

r₄ = 0.529 × 16

r₄ = 8.464 Å

—

प्रश्न 4: यदि किसी कक्षा की त्रिज्या 4.761 Å है, तो n ज्ञात करें।

rₙ = 0.529n²

4.761 = 0.529n²

n² = 9

n = 3

★ 10. इलेक्ट्रॉन का वेग (Velocity of Electron)

बोर मॉडल से हाइड्रोजन जैसे परमाणु के लिए:

vₙ = Ze²/(2ε₀hn)

इससे:

vₙ ∝ Z/n

हाइड्रोजन के लिए:

vₙ = 2.18 × 10⁶/n m/s

मुख्य बातें

– n बढ़ने पर वेग घटता है।
– Z बढ़ने पर वेग बढ़ता है।
– पहली कक्षा में इलेक्ट्रॉन का वेग अधिकतम होता है।

उदाहरण

i. n = 1 → अधिकतम वेग।
ii. n = 2 → वेग आधा।
iii. n = 3 → वेग पहली कक्षा के लगभग एक-तिहाई।

★ 11. इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा (Energy of Electron)

हाइड्रोजन जैसे परमाणु के nवें ऊर्जा स्तर की ऊर्जा:

Eₙ = −13.6 Z²/n² eV

हाइड्रोजन के लिए:

Eₙ = −13.6/n² eV

पहली कक्षा

n = 1

E₁ = −13.6 eV

दूसरी कक्षा

n = 2

E₂ = −13.6/4

E₂ = −3.4 eV

तीसरी कक्षा

n = 3

E₃ = −13.6/9

E₃ ≈ −1.51 eV

ऋणात्मक चिन्ह का अर्थ

ऊर्जा का ऋणात्मक होना बताता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से बंधी हुई अवस्था में है।

चार Numerical

प्रश्न 1: n = 2 के लिए ऊर्जा।

E₂ = −13.6/4

E₂ = −3.4 eV

—

प्रश्न 2: n = 4 के लिए:

E₄ = −13.6/16

E₄ = −0.85 eV

—

प्रश्न 3: n = 3 के लिए:

E₃ = −13.6/9

E₃ ≈ −1.51 eV

—

प्रश्न 4: हाइड्रोजन की मूल अवस्था से इलेक्ट्रॉन को अनन्त तक ले जाने के लिए कितनी ऊर्जा चाहिए?

E₁ = −13.6 eV

E∞ = 0

ΔE = 0 − (−13.6)

ΔE = 13.6 eV

★ 12. ऊर्जा स्तर का संक्रमण (Energy Transition)

परिभाषा

जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर पर आता है, तो ऊर्जा फोटॉन के रूप में उत्सर्जित होती है।

यदि इलेक्ट्रॉन E₂ से E₁ पर आए:

hν = E₂ − E₁

और:

ν = (E₂ − E₁)/h

यदि तरंगदैर्ध्य चाहिए

hc/λ = E₂ − E₁

अतः:

1/λ = (E₂ − E₁)/hc

मुख्य बातें

– उच्च से निम्न स्तर → ऊर्जा का उत्सर्जन।
– निम्न से उच्च स्तर → ऊर्जा का अवशोषण।
– अलग-अलग संक्रमण → अलग-अलग स्पेक्ट्रम रेखाएँ।

उदाहरण

i. n = 3 → n = 2 → बाल्मर श्रेणी।
ii. n = 2 → n = 1 → लाइमन श्रेणी।
iii. n = 4 → n = 3 → पास्चेन श्रेणी।

★ 13. हाइड्रोजन परमाणु में ऊर्जा परिवर्तन

यदि इलेक्ट्रॉन n₂ से n₁ पर आता है:

ΔE = E₂ − E₁

हाइड्रोजन के लिए:

ΔE = 13.6(1/n₁² − 1/n₂²) eV

जहाँ:

n₂ > n₁

और:

hν = ΔE

मुख्य बात

जितना बड़ा ऊर्जा अंतर होगा, उतनी अधिक आवृत्ति का फोटॉन निकलेगा।

क्योंकि:

E = hν

★ 14. आयनीकरण ऊर्जा (Ionisation Energy)

परिभाषा

परमाणु की मूल अवस्था में उपस्थित इलेक्ट्रॉन को परमाणु से पूर्णतः बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा आयनीकरण ऊर्जा कहलाती है।

हाइड्रोजन के लिए:

E₁ = −13.6 eV

अनन्त पर:

E∞ = 0

अतः:

Ionisation Energy = 13.6 eV

जूल में:

13.6 × 1.6 × 10⁻¹⁹

= 2.176 × 10⁻¹⁸ J

मुख्य बातें

– आयनीकरण में इलेक्ट्रॉन को अनन्त दूरी तक ले जाया जाता है।
– अंतिम अवस्था की ऊर्जा शून्य मानी जाती है।
– हाइड्रोजन की मूल अवस्था से आयनीकरण ऊर्जा 13.6 eV है।

★ 15. बोर मॉडल की सफलताएँ (Successes)

मुख्य सफलताएँ

1. हाइड्रोजन परमाणु की स्थिरता समझाई।
2. हाइड्रोजन के रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या की।
3. ऊर्जा स्तरों की निश्चितता बताई।
4. परमाणु की कक्षाओं के लिए निश्चित त्रिज्या प्राप्त हुई।
5. हाइड्रोजन की आयनीकरण ऊर्जा का उचित मान प्राप्त होता है।

तीन महत्वपूर्ण बातें

i. स्थिर कक्षाएँ → परमाणु की स्थिरता।
ii. ऊर्जा स्तर → स्पेक्ट्रम रेखाएँ।
iii. क्वांटीकृत कोणीय संवेग → निश्चित कक्षाएँ।

★ 16. बोर मॉडल की सीमाएँ (Limitations)

बोर मॉडल हाइड्रोजन जैसे एक-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए उपयोगी है, लेकिन सभी परमाणुओं की पूरी व्याख्या नहीं कर पाता।

मुख्य सीमाएँ

1. बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की पूरी व्याख्या नहीं करता।
2. स्पेक्ट्रम की सूक्ष्म संरचना को पूरी तरह नहीं समझाता।
3. बाहरी विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों में स्पेक्ट्रम के जटिल परिवर्तन की पूरी व्याख्या नहीं करता।
4. आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी के अनुसार इलेक्ट्रॉन को निश्चित वृत्ताकार कक्षा में घूमते हुए मानना पर्याप्त नहीं है।

★ 17. परमाणु के ऊर्जा स्तरों की समझ

मुख्य विचार

परमाणु में ऊर्जा लगातार किसी भी मान में नहीं मिलती। इलेक्ट्रॉन कुछ निश्चित ऊर्जा अवस्थाओं में रह सकता है।

हाइड्रोजन के लिए:

Eₙ = −13.6/n² eV

जैसे:

E₁ = −13.6 eV

E₂ = −3.4 eV

E₃ ≈ −1.51 eV

जैसे-जैसे n बढ़ता है, ऊर्जा का मान शून्य के करीब पहुँचता है।

n → ∞ ⇒ E → 0

★ 18. स्पेक्ट्रम श्रेणियों का पूरा सार

श्रेणी                         | अंतिम स्तर    | क्षेत्र
लाइमन (Lyman)    | n = 1              | पराबैंगनी
बाल्मर (Balmer)     | n = 2              | दृश्य
पास्चेन (Paschen)  | n = 3              | अवरक्त
ब्रैकेट (Brackett)    | n = 4               | अवरक्त
फुंड (Pfund)           | n = 5                | अवरक्त

याद रखने की ट्रिक

1 → लाइमन
2 → बाल्मर
3 → पास्चेन
4 → ब्रैकेट
5 → फुंड

★ 19. परमाणु अध्याय के महत्वपूर्ण संबंध

A = Z + N

mvr = nh/2π

rₙ = n²a₀/Z

rₙ = 0.529 n²/Z Å

vₙ ∝ Z/n

Eₙ = −13.6 Z²/n² eV

हाइड्रोजन के लिए:

Eₙ = −13.6/n² eV

hν = E₂ − E₁

1/λ = R(1/n₁² − 1/n₂²)

R = 1.097 × 10⁷ m⁻¹

Ionisation Energy of H = 13.6 eV

★ 20. महत्वपूर्ण Numerical — मिश्रित अभ्यास

प्रश्न 1

हाइड्रोजन परमाणु में n = 2 की ऊर्जा ज्ञात करें।

E₂ = −13.6/2²

E₂ = −3.4 eV

—

प्रश्न 2

n = 3 से n = 2 संक्रमण में ऊर्जा परिवर्तन:

E₃ = −1.51 eV

E₂ = −3.4 eV

ऊर्जा का उत्सर्जन:

ΔE = E₃ − E₂

= −1.51 − (−3.4)

ΔE = 1.89 eV

—

प्रश्न 3

हाइड्रोजन की पहली कक्षा की त्रिज्या 0.529 Å है। तीसरी कक्षा की त्रिज्या ज्ञात करें।

rₙ = n²a₀

r₃ = 9 × 0.529

r₃ = 4.761 Å

—

प्रश्न 4

हाइड्रोजन की आयनीकरण ऊर्जा 13.6 eV है। इसे जूल में बदलें।

E = 13.6 × 1.6 × 10⁻¹⁹

E = 2.176 × 10⁻¹⁸ J

★ 21. बोर्ड परीक्षा में सबसे महत्वपूर्ण व्युत्पत्तियाँ

इन व्युत्पत्तियों को विशेष रूप से तैयार रखें:

★ 1. बोर कक्षा की त्रिज्या

rₙ = n²a₀/Z

★ 2. इलेक्ट्रॉन का वेग

vₙ ∝ Z/n

★ 3. इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा

Eₙ = −13.6 Z²/n² eV

★ 4. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम का राइडबर्ग सूत्र

1/λ = R(1/n₁² − 1/n₂²)

★ 5. ऊर्जा संक्रमण

hν = E₂ − E₁

★ 22. परमाणु अध्याय के जरूरी तथ्य

★ परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है।

★ नाभिक बहुत छोटा और अत्यधिक सघन होता है।

★ परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित रहता है।

★ इलेक्ट्रॉन का आवेश ऋणात्मक होता है।

★ प्रोटॉन का आवेश धनात्मक होता है।

★ न्यूट्रॉन विद्युत उदासीन होता है।

★ हाइड्रोजन में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है।

★ बोर मॉडल में n = 1 सबसे कम ऊर्जा वाली अवस्था है।

★ n बढ़ने पर ऊर्जा शून्य की ओर बढ़ती है।

★ उच्च स्तर से निम्न स्तर पर आने पर फोटॉन उत्सर्जित होता है।

★ निम्न स्तर से उच्च स्तर पर जाने के लिए ऊर्जा अवशोषित होती है।

★ पूरा Formula Sheet — एक ही जगह

परमाणु क्रमांक:

Z = प्रोटॉनों की संख्या

द्रव्यमान संख्या:

A = Z + N

बोर का कोणीय संवेग:

mvr = nh/2π

कक्षा की त्रिज्या:

rₙ = n²a₀/Z

बोर त्रिज्या:

a₀ = 0.529 Å

हाइड्रोजन में:

rₙ = 0.529n² Å

इलेक्ट्रॉन का वेग:

vₙ = 2.18 × 10⁶/n m/s

ऊर्जा:

Eₙ = −13.6Z²/n² eV

हाइड्रोजन के लिए:

Eₙ = −13.6/n² eV

फोटॉन ऊर्जा:

E = hν

ऊर्जा संक्रमण:

hν = E₂ − E₁

राइडबर्ग समीकरण:

1/λ = R(1/n₁² − 1/n₂²)

राइडबर्ग नियतांक:

R = 1.097 × 10⁷ m⁻¹

हाइड्रोजन आयनीकरण ऊर्जा:

13.6 eV

★ खुद से पूछो

1. परमाणु का अधिकांश भाग खाली क्यों माना जाता है?

2. रदरफोर्ड प्रयोग से नाभिक के बारे में क्या पता चला?

3. थॉमसन मॉडल क्यों असफल हुआ?

4. रदरफोर्ड मॉडल की मुख्य कमी क्या थी?

5. बोर की स्थिर कक्षा से क्या समझते हैं?

6. बोर के कोणीय संवेग का क्वांटीकरण क्या है?

7. इलेक्ट्रॉन स्थिर कक्षा में ऊर्जा का विकिरण क्यों नहीं करता?

8. हाइड्रोजन का रेखीय स्पेक्ट्रम क्यों बनता है?

9. बाल्मर श्रेणी किस क्षेत्र में मिलती है?

10. n बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा कैसे बदलती है?

11. हाइड्रोजन की मूल अवस्था की ऊर्जा कितनी है?

12. आयनीकरण ऊर्जा का अर्थ क्या है?

13. राइडबर्ग समीकरण में n₁ और n₂ क्या दर्शाते हैं?

14. बोर मॉडल की दो सफलताएँ लिखिए।

15. बोर मॉडल की दो सीमाएँ लिखिए।

★ SELF TEST

1. रदरफोर्ड के प्रयोग से पता चला कि परमाणु का अधिकांश भाग—

(A) धनावेशित है
(B) ऋणावेशित है
(C) खाली है 
(D) न्यूट्रॉन से भरा है

2. परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान कहाँ केंद्रित होता है?

(A) इलेक्ट्रॉन में
(B) नाभिक में 
(C) बाहरी कक्षा में
(D) पूरे परमाणु में समान रूप से

3. बोर के अनुसार कोणीय संवेग है—

(A) mvr = nh
(B) mvr = nh/2π ✓
(C) mvr = 2πnh
(D) mvr = h/n

4. हाइड्रोजन की मूल अवस्था की ऊर्जा है—

(A) +13.6 eV
(B) −13.6 eV 
(C) 0 eV
(D) −3.4 eV

5. बाल्मर श्रेणी में अंतिम ऊर्जा स्तर है—

(A) n = 1
(B) n = 2 
(C) n = 3
(D) n = 4

6. लाइमन श्रेणी किस क्षेत्र में होती है?

(A) दृश्य
(B) अवरक्त
(C) पराबैंगनी 
(D) माइक्रोवेव

7. हाइड्रोजन परमाणु की दूसरी कक्षा की ऊर्जा है—

(A) −13.6 eV
(B) −6.8 eV
(C) −3.4 eV 
(D) +3.4 eV

8. उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर पर इलेक्ट्रॉन आने पर—

(A) ऊर्जा अवशोषित होती है
(B) ऊर्जा उत्सर्जित होती है 
(C) द्रव्यमान समाप्त होता है
(D) आवेश बदलता है

9. राइडबर्ग नियतांक की इकाई है—

(A) m
(B) m²
(C) m⁻¹ 
(D) s⁻¹

10. हाइड्रोजन की आयनीकरण ऊर्जा है—

(A) 1.36 eV
(B) 13.6 eV 
(C) 136 eV
(D) 0 eV

—

★ SELF TEST के उत्तर

1. (C) ✓
2. (B) ✓
3. (B) ✓
4. (B) ✓
5. (B) ✓
6. (C) ✓
7. (C) ✓
8. (B) ✓
9. (C) ✓
10. (B) ✓

★ बोर्ड परीक्षा में ये गलतियाँ न करें

★ 1. रदरफोर्ड मॉडल और बोर मॉडल को एक जैसा मत लिखना।

★ 2. बोर की कोणीय संवेग शर्त में 2π छोड़ना नहीं है।

mvr = nh/2π

★ 3. हाइड्रोजन की मूल अवस्था की ऊर्जा −13.6 eV है, +13.6 eV नहीं।

★ 4. आयनीकरण ऊर्जा का मान 13.6 eV है।

★ 5. बाल्मर श्रेणी का अंतिम स्तर n = 2 है।

★ 6. लाइमन = पराबैंगनी, बाल्मर = दृश्य, पास्चेन = अवरक्त।

★ 7. राइडबर्ग नियतांक की इकाई m⁻¹ है।

★ 8. उच्च स्तर से निम्न स्तर → ऊर्जा उत्सर्जन।

★ 9. निम्न स्तर से उच्च स्तर → ऊर्जा अवशोषण।

★ 10. Numerical में Å को m में बदलने की जरूरत पड़ सकती है:

1 Å = 10⁻¹⁰ m

★ त्वरित पुनरावृत्ति

थॉमसन → धनावेशित गोला + इलेक्ट्रॉन

↓

रदरफोर्ड → छोटा सघन नाभिक

↓

समस्या → परमाणु की स्थिरता

↓

बोर → निश्चित स्थिर कक्षाएँ

↓

ऊर्जा का क्वांटीकरण

↓

ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण

↓

हाइड्रोजन का रेखीय स्पेक्ट्रम

★ अध्याय 12 का सबसे जरूरी सार

परमाणु के अध्ययन में रदरफोर्ड ने छोटे और सघन नाभिक की जानकारी दी, लेकिन उनके मॉडल से परमाणु की स्थिरता की पूरी व्याख्या नहीं हो सकी।

बोर ने बताया कि इलेक्ट्रॉन कुछ निश्चित स्थिर कक्षाओं में रह सकते हैं। इन कक्षाओं की ऊर्जा निश्चित होती है। जब इलेक्ट्रॉन एक ऊर्जा स्तर से दूसरे ऊर्जा स्तर में जाता है, तो ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण होता है।

इस ऊर्जा परिवर्तन से:

hν = E₂ − E₁

और हाइड्रोजन के लिए विभिन्न संक्रमणों से रेखीय स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।

★ पूरे अध्याय की सबसे जरूरी लाइन

“परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा निरंतर नहीं, बल्कि निश्चित ऊर्जा स्तरों में क्वांटीकृत होती है।”

★ अंतिम बोर्ड रिवीजन — परीक्षा से पहले

इन चीजों को जरूर पक्का करें:

★ रदरफोर्ड α-कण प्रकीर्णन प्रयोग
★ रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ
★ बोर की तीन मुख्य अभिधारणाएँ
★ mvr = nh/2π
★ कक्षा की त्रिज्या
★ इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा
★ हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम
★ राइडबर्ग समीकरण
★ लाइमन, बाल्मर, पास्चेन, ब्रैकेट, फुंड श्रेणियाँ
★ ऊर्जा संक्रमण
★ आयनीकरण ऊर्जा
★ बोर मॉडल की सफलताएँ और सीमाएँ
★ Numerical में eV, Å और m की इकाइयों का रूपांतरण

★ अंतिम याद रखने वाला क्रम

रदरफोर्ड → नाभिक → बोर → स्थिर कक्षा → ऊर्जा स्तर → संक्रमण → फोटॉन → हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम

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